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मृतक की ओर से नामित व्यक्ति संपत्ति पर अधिकार का दावा नहीं कर सकता, यह उत्तराधिकार कानून को विफल करता है, जबकि अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों का दावा हो: कर्नाटक हाईकोर्ट
मृतक की ओर से नामित व्यक्ति संपत्ति पर अधिकार का दावा नहीं कर सकता, यह उत्तराधिकार कानून को विफल करता है, जबकि अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों का दावा हो: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि अगर मृतक के जीवनकाल में नामांकन किया जाता है तो यह उसकी मृत्यु के बाद, कानूनी उत्तराधिकारियों के बावजूद, स्वामित्व से वंचित होने के बराबर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मृत्यु के बाद, जो भी संपत्ति/राशि हो, वह विरासत के शासकीय कानून के अनुसार मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित की जाती है। सिंगल जज जस्टिस हंचते संजीवकुमार ने अन्नपूर्णा नामक एक महिला की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया, जिन्होंने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 372 के तहत...

यह नहीं मान सकते कि भारतीय निर्माता अक्षम हैं: सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी कंपनियों को निविदा देने पर ग्वालियर नगर निगम की आलोचना की
'यह नहीं मान सकते कि भारतीय निर्माता अक्षम हैं': सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी कंपनियों को निविदा देने पर ग्वालियर नगर निगम की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ग्वालियर नगर निगम (GMC) की मनमानी निविदा प्रक्रिया के लिए आलोचना की, जिसमें केवल बहुराष्ट्रीय ब्रांडों को ही बोलियां प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करना था।न्यायालय ने कहा कि निविदा प्रक्रिया से भारतीय फर्मों को बाहर रखने की GMC की कार्रवाई से यह धारणा बनती है कि वे बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ प्रतिस्पर्धा करने या तुलनीय सेवाएं प्रदान करने में स्वाभाविक रूप से अक्षम हैं।न्यायालय ने कहा,“बेशक, NIT में पात्र के रूप में GMC द्वारा...

राजस्थान हाईकोर्ट ने CAT को उस चपरासी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया, जिसने शौचालय साफ करने से इनकार करते हुए दावा किया था कि यह उसका कर्तव्य नहीं है
राजस्थान हाईकोर्ट ने CAT को उस चपरासी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया, जिसने शौचालय साफ करने से इनकार करते हुए दावा किया था कि यह उसका कर्तव्य नहीं है

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने अंतरिम आदेश में केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को एक महिला के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोक दिया है। महिला प्यून-मल्टी टास्किंग स्टाफ के रूप में कार्यरत है। महिला के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही तब शुरू की गई थी, जब उसने महिला शौचालय साफ करने से इनकार कर दिया था। महिला ने दावा किया था कि यह उसके कर्तव्यों का हिस्सा नहीं है। महिला की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा, "रिट याचिका के साथ-साथ स्थगन आवेदन पर भी नोटिस जारी...

हमें उम्मीद है कि भविष्य में हाईकोर्ट अधिक जिम्मेदारी से काम करेगा: एससी में मामला होने पर आदेश पारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की आलोचना की
'हमें उम्मीद है कि भविष्य में हाईकोर्ट अधिक जिम्मेदारी से काम करेगा': एससी में मामला होने पर आदेश पारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने आंगनवाड़ी केन्द्रों में स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को भोजन की आपूर्ति के संबंध में अंतरिम आदेश पारित कर दिया, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में था।यह टिप्पणी करते हुए कि हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का प्रयास है, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज की और हाईकोर्ट को भविष्य में अधिक जिम्मेदारी से काम करने की सलाह दी।सुप्रीम...

स्टेनोग्राफरों की कमी के कारण याचिका खारिज करना अनुचित, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि डीआरटी पीठासीन अधिकारी को अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाना चाहिए था
स्टेनोग्राफरों की कमी के कारण याचिका खारिज करना अनुचित, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि डीआरटी पीठासीन अधिकारी को अधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठाना चाहिए था

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आज कहा कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) इस आधार पर आवेदन खारिज नहीं कर सकता कि स्टेनोग्राफर या टाइपिस्ट की कमी है। ज‌स्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और ज‌स्टिस सुमीत गोयल ने कहा, "स्टेनोग्राफर और टाइपिस्ट की कमी के कारण आवेदन खारिज करना अनुचित है और आवेदनों पर सुनवाई की जानी चाहिए थी तथा गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए था।"न्यायालय ने कहा कि बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की कमी की स्थिति में, पीठासीन अधिकारी को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष मुद्दा उठाना...

[UAPA] आतंकवादियों को पनाह देना उन्हें गोपनीयता का पर्दा प्रदान करता है, नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सुरक्षित पनाहगाह बनाता है: दिल्ली हाईकोर्ट
[UAPA] आतंकवादियों को पनाह देना उन्हें गोपनीयता का पर्दा प्रदान करता है, नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सुरक्षित पनाहगाह बनाता है: दिल्ली हाईकोर्ट

इस बात पर जोर देते हुए कि आतंकवादियों को पनाह देना UAPA के तहत गंभीर अपराध है, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह का कृत्य आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनाता है और उन्हें गोपनीयता का पर्दा प्रदान करता है, जो नागरिकों के जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालता है।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि आतंकवादियों को पनाह देने से आम तौर पर समाज में अशांति फैलती है। अगर इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो इस तरह की गैरकानूनी गतिविधि को वैधता मिल जाती है।न्यायालय ने कहा कि आतंकवादी...

HAMA | विधवा बहू को भरण-पोषण देने का ससुर का दायित्व सह-दायिक संपत्ति से होने वाली आय पर निर्भर: पटना हाईकोर्ट
HAMA | विधवा बहू को भरण-पोषण देने का ससुर का दायित्व सह-दायिक संपत्ति से होने वाली आय पर निर्भर: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने माना कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) के तहत ससुर को अपनी विधवा बहू को भरण-पोषण देने का स्वतः दायित्व नहीं है, जब तक कि उसके पास सह-दायिक संपत्ति से पर्याप्त आय न हो।मामले की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस जितेंद्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया,“धारा 19 स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि ससुर का अपनी बहू को भरण-पोषण देने का दायित्व सह-दायिक संपत्ति से होने वाली आय पर निर्भर है, यदि कोई हो। लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकील ने प्रस्तुत किया कि ऐसी कोई सह-दायिक संपत्ति नहीं है। संयुक्त...

Senior Citizens Act | भरण-पोषण ट्रिब्यूनल के पास भरण-पोषण या संपत्ति ट्रांसफर की मांग न करने वाली शिकायतों पर कोई अधिकार नहीं: पटना हाईकोर्ट
Senior Citizens Act | भरण-पोषण ट्रिब्यूनल के पास भरण-पोषण या संपत्ति ट्रांसफर की मांग न करने वाली शिकायतों पर कोई अधिकार नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 भरण-पोषण ट्रिब्यूनल को ऐसी शिकायतों पर विचार करने का अधिकार नहीं देता है, जिनमें भरण-पोषण की मांग नहीं की गई है या संपत्ति हस्तांतरण को चुनौती नहीं दी गई।इस मामले की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस जितेंद्र कुमार ने कहा,"माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के वैधानिक प्रावधानों के अनुसार यह स्पष्ट रूप से पता चलता है कि यह अधिनियम संविधान के तहत दिए गए और मान्यता प्राप्त माता-पिता और...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज के मौखिक निर्देशों के तहत वकील की नजरबंदी पर रिपोर्ट मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज के 'मौखिक निर्देशों' के तहत वकील की नजरबंदी पर रिपोर्ट मांगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को आगरा के 70 वर्षीय अधिवक्ता की कथित हिरासत पर चिंता जताई। उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के 'मौखिक' निर्देश पर नवंबर 2024 में पुलिस कर्मियों ने कथित तौर पर घर में नजरबंद रखा था। याचिकाकर्ता (वकील महताब सिंह) ने दावा किया कि उन्हें धारा 168 बीएनएसएस (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए पुलिस) का नोटिस देने के बाद 2 घंटे के लिए उनके घर में हिरासत में रखा गया था, ताकि उन्हें प्रशासनिक (उच्च न्यायालय) न्यायाधीश से मिलने से रोका जा सके, जब तक कि वे न्यायाधीश के पद पर...

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसके तहत भारत के चीफ जस्टिस को चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति करने वाले चयन पैनल से हटा दिया गया।यह मामला जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ के समक्ष क्रमांक 41 पर सूचीबद्ध था। सुबह खंडपीठ के इकट्ठा होने पर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने इसका उल्लेख किया और अनुरोध किया कि इसे प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।उस समय जस्टिस कांत ने किसी अन्य मामले के...

जांच एजेंसी के तौर पर सजा निलंबन याचिका में हिरासत अवधि का ब्योरा उपलब्ध कराना ED की जिम्मेदारी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
जांच एजेंसी के तौर पर सजा निलंबन याचिका में हिरासत अवधि का ब्योरा उपलब्ध कराना ED की जिम्मेदारी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को, जहा भी वह जांच एजेंसी हो, सजा के निलंबन के लिए दायर याचिका में हिरासत का विवरण प्रदान करने की जिम्मेदारी है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि अब से सजा के निलंबन के लिए सभी आवेदनों में, प्रवर्तन निदेशालय की जिम्मेदारी होगी, जहां वह जांच एजेंसी हो, राज्य एजेंसी के साथ समन्वय करके दोषी अपीलकर्ता(ओं) की ओर से बिताई गई हिरासत अवधि के बारे में विवरण प्रदान किया जाए।"अदालत 2024 से लंबित मनी...

BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन प्रक्रिया पर चिंता जताई, मामला सीजेआई को भेजा
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन प्रक्रिया पर चिंता जताई, मामला सीजेआई को भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 फरवरी) को वरिष्ठ पदनाम प्रणाली पर कुछ चिंताएं व्यक्त कीं, जिसे 2017 और 2023 में इंदिरा जयसिंह मामले में शीर्ष न्यायालय द्वारा दिए गए दो निर्णयों के अनुसार निर्धारित किया गया है।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि वह दो बाध्यकारी निर्णयों का अनादर नहीं कर रही है, बल्कि केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक बड़ी पीठ के संदर्भ में उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए चिंताओं को दर्ज कर रही है।पीठ द्वारा व्यक्त की गई...

BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान से हाईकोर्ट जज के खिलाफ शिकायत पर विचार करने के लोकपाल के फैसले पर रोक लगाई
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान से हाईकोर्ट जज के खिलाफ शिकायत पर विचार करने के लोकपाल के फैसले पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 फरवरी) को केंद्र सरकार को लोकपाल के उस फैसले के खिलाफ स्वप्रेरणा से शुरू किए गए मामले में नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि वह हाईकोर्ट के जजों पर अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है।जस्टिस बीआर गवई, सूर्यकांत और अभय एस ओक की खंडपीठ ने लोकपाल के तर्क पर असहमति जताई और आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई। कोर्ट ने लोकपाल के रजिस्ट्रार जनरल और शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी किया। खंडपीठ ने शिकायतकर्ता को हाई कोर्ट के जज का नाम और शिकायत की विषय-वस्तु का खुलासा करने से मना...

ब्रीद एनालाइजर टेस्ट शराब पीने का निर्णायक सबूत नहीं, पटना हाईकोर्ट ने FIR खारिज की
ब्रीद एनालाइजर टेस्ट शराब पीने का निर्णायक सबूत नहीं, पटना हाईकोर्ट ने FIR खारिज की

पटना हाईकोर्ट ने दोहराया कि केवल ब्रीद एनलाइजर टेस्‍ट शराब के सेवन का निर्णायक सबूत नहीं है और यह बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के तहत आपराधिक अभियोजन का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है। इस मामले की सुनवाई कर कर रही पीठ की अध्यक्षता कर रहे ज‌स्टिस बिबेक चौधरी ने कहा, "इस न्यायालय के पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि अधिकारी माननीय सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन पर विचार करने में विफल रहे, और ब्रीद एनलाइजर टेस्ट के आधार पर, जिसे शराब के सेवन का निर्णायक सबूत नहीं कहा जा सकता है, एक...

मंदिर की दुकानों की नीलामी में गैर-हिंदू विक्रेताओं को शामिल न करने का आंध्र प्रदेश का आदेश हाईकोर्ट के फैसले पर रोक के कारण लागू नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
मंदिर की दुकानों की नीलामी में गैर-हिंदू विक्रेताओं को शामिल न करने का आंध्र प्रदेश का आदेश हाईकोर्ट के फैसले पर रोक के कारण लागू नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 9 नवंबर, 2015 को जारी आंध्र प्रदेश सरकार के आदेश (GO) पर कार्रवाई नहीं की जा सकती, जो गैर-हिंदू विक्रेताओं को मंदिर की दुकानों की नीलामी में भाग लेने से रोकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने GO को बरकरार रखने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने विवादित नियम को लागू करने वाली निविदा प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए यह स्पष्टीकरण दिया।इस न्यायालय ने 27 जनवरी 2020 के अंतरिम आदेश...

सुप्रीम कोर्ट ने PMLA मामले में ट्रायल में देरी और लंबी हिरासत का हवाला देते हुए जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने PMLA मामले में ट्रायल में देरी और लंबी हिरासत का हवाला देते हुए जमानत दी

लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल पूरा होने में देरी की संभावना का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपी को जमानत दी।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच उद्धव सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 14 महीने से हिरासत में था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच के लिए 225 गवाहों को सूचीबद्ध किया था, फिर भी अब तक केवल एक की ही जांच की गई।जस्टिस ओक द्वारा लिखित निर्णय भारत संघ बनाम के.ए. नजीब और वी. सेंथिल बालाजी बनाम उप निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय के...

क्या अपीलीय न्यायालय आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 34/37 के तहत आर्बिट्रल अवार्ड को संशोधित कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा
क्या अपीलीय न्यायालय आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 34/37 के तहत आर्बिट्रल अवार्ड को संशोधित कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली संविधान पीठ ने बुधवार (19 फरवरी) को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या न्यायालयों को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 और 37 के तहत मध्यस्थ अवार्ड को संशोधित करने का अधिकार है।धारा 34 मध्यस्थ अवार्ड को रद्द करने के लिए आवेदन करने की रूपरेखा प्रदान करती है। अधिनियम की धारा 37 में ऐसे उदाहरण दिए गए हैं, जहां मध्यस्थ विवादों से संबंधित आदेशों के खिलाफ अपील की जा सकती है।सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस संजय...

टाइटल डीड जमा करने से बनाया गया बंधक, बिक्री के लिए समझौते के जमा करने से बनाए गए समतामूलक बंधक पर हावी है : सुप्रीम कोर्ट
टाइटल डीड जमा करने से बनाया गया बंधक, बिक्री के लिए समझौते के जमा करने से बनाए गए समतामूलक बंधक पर हावी है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि बिक्री के लिए एक अपंजीकृत समझौते के जमा करने से बनाया गया बंधक, टाइटल डीड जमा करने से बनाए गए बंधक के अधीन होगा।ऐसा इसलिए है, क्योंकि बिक्री का समझौता अपने आप में संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 54 के अनुसार किसी संपत्ति पर कोई ब्याज या शुल्क नहीं बनाता है, जैसा कि सूरज लैंप और शकील अहमद बनाम सैयद अखलाक हुसैन के निर्णयों द्वारा स्पष्ट किया गया है।कोर्ट ने सहमति व्यक्त की कि एक अधूरे टाइटल डीड के जमा करने से एक बंधक बनाया जा सकता है, जो प्रकृति में 'समतामूलक'...

Maha Kumbh Stampede | क्या न्यायिक आयोग की भूमिका का विस्तार हताहतों की संख्या की पहचान करने के लिए किया जा सकता है?: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा
Maha Kumbh Stampede | क्या न्यायिक आयोग की भूमिका का विस्तार हताहतों की संख्या की पहचान करने के लिए किया जा सकता है?: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा

29 जनवरी को प्रयागराज में महाकुंभ में हुई भगदड़ के बाद लापता हुए लोगों का ब्यौरा मांगने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा कि क्या उसके द्वारा नियुक्त न्यायिक आयोग की जांच का दायरा बढ़ाकर इसमें हताहतों की संख्या की पहचान करना और भगदड़ से संबंधित अन्य शिकायतों की जांच करना शामिल किया जा सकता है।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि अभी तक आयोग के दायरे में भगदड़ से संबंधित अन्य प्रासंगिक विवरणों की जांच...

बोलना या न बोलना: बोलने की आजादी और अश्लीलता के बीच की महीन रेखा को समझिए
बोलना या न बोलना: बोलने की आजादी और अश्लीलता के बीच की महीन रेखा को समझिए

यूट्यूब शो, इंडियाज गॉट लेटेंट, एक बड़े विवाद में उलझ गया है क्योंकि इसके होस्ट समय रैना, पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया और अन्य साथी पैनलिस्टों पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कथित तौर पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। असम पुलिस द्वारा 10 फरवरी को दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के बाद, उनकी क्लिपिंग वायरल होने के बाद से उनके खिलाफ यह दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। इलाहाबादिया ने अब संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें अश्लीलता के कथित...