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पुलिस द्वारा समन की तामील करने और न्यायिक निर्देशों का पालन करने में विफलता कानूनी प्रणाली के सुचारू संचालन में बाधा डालती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि पुलिस अधिकारियों द्वारा समन की तामील और न्यायिक आदेशों के निष्पादन में देरी कानूनी प्रणाली के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न करती है।न्यायालय ने कहा,“उनकी उदासीनता और अकुशलता अनुचित देरी में योगदान करती है, जिससे पहले से ही लंबित मामलों की संख्या और बढ़ जाती है और न्याय के शीघ्र वितरण में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है। कर्तव्य की यह उपेक्षा न केवल कानूनी कार्यवाही को लम्बा खींचती है, जिससे वादियों को अनावश्यक कठिनाई और वित्तीय तनाव का...
शरीर के किसी अन्य अंग में आंशिक विकलांगता के कारण मेधावी विकलांग उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी देने से मना करना कानूनन गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने ऐसे नर्सिंग उम्मीदवारों के पक्ष में दिए गए आदेश के खिलाफ राज्य की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया, जिन्हें “एक पैर में 40% या उससे अधिक विकलांगता” की आरक्षित श्रेणी में योग्य होने लेकिन अन्य पैर/शरीर के अंग में किसी अन्य विकृति से पीड़ित होने के कारण रिजेक्ट कर दिया गया था। ऐसा करते हुए न्यायालय ने कहा कि इस आधार पर नियुक्ति से इनकार करने का राज्य का कार्य कानून की दृष्टि से गलत है। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016, राजस्थान दिव्यांग व्यक्तियों...
BREAKING| गिरफ्तार व्यक्तियों के अधिकारों पर BNSS/CrPC प्रावधान GST & Customs Acts पर भी लागू: सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने GST & Customs Acts के तहत गिरफ्तारी की शक्तियों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।कोर्ट ने माना कि अभियुक्त व्यक्तियों के अधिकारों पर दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)) के प्रावधान GST & Customs Acts दोनों के तहत की गई गिरफ्तारियों पर समान रूप से लागू होते हैं।अरविंद केजरीवाल मामले में यह कथन कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब "विश्वास करने के लिए कारण" हों, GST & Customs गिरफ्तारियों के संदर्भ में भी...
पेपर लीक से हजारों ईमानदार परीक्षार्थियों का भविष्य खतरे में, आरोपियों को नहीं मिल सकता जमानत का लाभ: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षक ग्रेड-द्वितीय भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक मामले में संलिप्त अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने आदेश में कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा के प्रश्न-पत्र के लीक मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध है, जिससे हजारों ईमानदार परीक्षार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।एक बस में 39 अभ्यर्थियों के पास मिला था प्रश्न-पत्र24 दिसम्बर 2022 को राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित शिक्षक ग्रेड-द्वितीय भर्ती परीक्षा के दौरान एक बड़ा पेपर...
क्या DGP पर 'प्रकाश सिंह' का फैसला दिल्ली पुलिस आयुक्त की नियुक्ति पर लागू होगा? सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खुला छोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पूर्व दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की नियुक्ति को लेकर उठाई गई चुनौती का निपटारा किया, जबकि कानूनी सवाल खुला छोड़ दिया कि क्या प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में 2006 का फैसला दिल्ली पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति पर लागू होगा।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा,"विचाराधीन एकमात्र कानूनी मुद्दा यह है कि क्या प्रकाश सिंह (I), प्रकाश सिंह (II) और प्रकाश सिंह (III) में इस न्यायालय द्वारा बताए गए सिद्धांत दिल्ली के पुलिस...
अभियुक्त के खुलासे के आधार पर बरामदगी साबित नहीं होती तो साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 अभियोजन पक्ष की सहायता नहीं कर सकती : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के अपराध में दोषी ठहराए गए दो व्यक्तियों को बरी करते हुए कहा कि मृतक के शव की खोज के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां अपीलकर्ता के विरुद्ध सभी उचित संदेह से परे साबित नहीं हुई थीं। यह अवलोकन साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के संबंध में किया गया था, जो अभियुक्त से प्राप्त जानकारी के बारे में बात करती है जिसे साबित किया जा सकता है।यदि खोज को इकबालिया बयान के आगे साबित नहीं किया गया था, तो इकबालिया बयान को साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के अनुसार स्वीकार नहीं किया जा सकता है।जस्टिस अभय एस...
अनुपस्थिति को असाधारण अवकाश के रूप में नियमित किया गया तो कर्मचारी को 'सेवा में व्यवधान' का हवाला देकर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिटायर सरकारी कर्मचारी को पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, जिसकी ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति को असाधारण अवकाश माना गया, जिससे उसकी सेवा नियमित हो गई।कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी के सेवा से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बावजूद, उसकी अनुपस्थिति को असाधारण अवकाश मानकर उसकी सेवा को नियमित किया जाता है तो पेंशन लाभ से वंचित करने के लिए अनुपस्थिति को 'सेवा में व्यवधान' नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने कहा,"हमारे विचार से असाधारण अवकाश देकर अनुपस्थिति की अवधि के दौरान एक बार...
मेडिकल शिक्षा को उच्च मानकों की जरूरत, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को प्रभावित करता है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने बीमारी या अन्य कारणों से निर्धारित संख्या में कक्षाओं में शामिल नहीं होने पर मेडिकल छात्रों को परीक्षाओं में बैठने से रोकने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में उपस्थिति अनिवार्य है और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता की भूमिका को ध्यान में रखते हुए शैक्षिक मानकों को कम नहीं किया जा सकता है।ऐसा करते हुए अदालत ने रेखांकित किया कि निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति को पूरा किए बिना, छात्रों को अगले वर्ष आगे बढ़ने की अनुमति देना हानिकारक था। अदालत ने यह...
लापता कर्मचारी के आश्रित, कर्मचारी के लापता होने के सात साल बाद अनुग्रह राशि के हकदार: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने माना कि लापता कर्मचारी के आश्रित, कर्मचारी के लापता होने के सात साल बाद अनुग्रह राशि के हकदार हैं।पृष्ठभूमि तथ्ययाचिकाकर्ता के पिता नगर समिति, अंबाला में चुंगी चपरासी के पद पर कार्यरत थे। वे 31.10.1990 को रिटायर होने वाले थे। लेकिन वे 01.05.1990 को लापता हो गए। उनके रिटायरमेंट की तिथि तक उनका पता नहीं लगाया जा सका। प्रतिवादी ने उन्हें 31.10.1990 से रिटायरमेंट माना। तदनुसार, उनकी विधवा को ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और भविष्य निधि का...
Skoda-Volkswagen Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीमा शुल्क विभाग से पूछा, कारण बताओ नोटिस समय-वर्जित क्यों नहीं
भारतीय सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा 1.4 बिलियन अमरीकी डालर की कर मांग को चुनौती देने वाली स्कोडा ऑटो वोक्सवैगन इंडिया की याचिका में , बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज सीमा शुल्क प्राधिकरण से एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा जिसमें बताया गया है कि कंपनी को जारी सितंबर 2024 का कारण बताओ नोटिस सीमा द्वारा वर्जित क्यों नहीं है।जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदोश पूनीवाला की खंडपीठ ने कहा, ''सीमा के मुद्दे पर, जो तथ्यात्मक है, कृपया एक संक्षिप्त हलफनामा दायर करें जिसमें बताया जाए कि सीमा का सवाल ही...
मानसिक रूप से अस्वस्थता के बाद ठीक हुए आरोपी की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 372
भारत की न्याय व्यवस्था (Justice System) यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि हर व्यक्ति को निष्पक्ष (Fair) और न्यायसंगत (Just) सुनवाई मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या नहीं।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में ऐसे मामलों के लिए विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं, जहां आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) होने के कारण मुकदमे की सुनवाई में असमर्थ हो। लेकिन जब वही व्यक्ति मानसिक रूप से ठीक हो जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया (Legal...
कलेक्टर द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने की शर्तें : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 32
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) के नियमों को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम की धारा 32 (Section 32) यह प्रावधान करती है कि जब कोई दस्तावेज स्टाम्प शुल्क की जाँच के लिए कलेक्टर (Collector) के पास लाया जाता है, तो वह यह प्रमाणित कर सकता है कि दस्तावेज़ पर पूरा शुल्क दिया गया है या यह शुल्क से मुक्त है। यह प्रमाण पत्र (Certificate) कानूनी रूप से बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि...
विशेष परिस्थितियों में किराए पर दिए गए मकान का तुरंत कब्जा पाने का अधिकार – धारा 15, हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) किराएदारों और मकान मालिकों (Landlords and Tenants) के अधिकारों को संतुलित करता है। इस अधिनियम की धारा 15 उन मकान मालिकों को एक विशेष अधिकार देती है, जो सरकारी आवास (Government Accommodation) में रह रहे हैं और जिन्हें सरकार के आदेश से इसे खाली करना पड़ रहा है।इसके अलावा, यह उन सरकारी कर्मचारियों को भी अधिकार देता है, जो सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके हैं या होने वाले हैं, ताकि वे अपनी किराए पर दी गई संपत्ति को फिर से प्राप्त...
किरायेदार मकान मालिक को दूसरी संपत्ति खाली कराने का आदेश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक या संपत्ति का मालिक सबसे अच्छा न्यायाधीश है कि किराए के परिसर के किस हिस्से को उनकी विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए खाली किया जाना चाहिए, और किरायेदार केवल इस आधार पर बेदखली का विरोध नहीं कर सकता है कि मकान मालिक अन्य संपत्तियों का मालिक है।अदालत ने कहा, मकान मालिक की वास्तविक जरूरत के आधार पर वाद परिसर से किरायेदार को बेदखल करने के संबंध में कानून अच्छी तरह से तय है। परिसर को खाली कराने की इच्छा के बजाय आवश्यकता वास्तविक होनी चाहिए। मकान मालिक यह तय करने...
क्या न्यायालय शव को कब्र से निकालने की अनुमति दे सकता है या यह केवल विशेष परिस्थितियों में संभव है?
सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद लतीफ मगरे बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (2022) मामले में यह तय किया कि क्या संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 - Right to Life) के तहत गरिमा का अधिकार (Right to Dignity) केवल जीवित व्यक्तियों तक सीमित है, या यह मृत्यु के बाद भी लागू होता है।यह मामला सरकारी अधिकारियों द्वारा मृतक के शव को परिवार को सौंपने से इनकार करने और उसे धार्मिक रीति-रिवाजों (Religious Rites) के अनुसार दफनाने के अधिकार से जुड़ा था। अदालत ने इस फैसले में दफनाए गए शव को बाहर निकालने...
Transfer Of Property में लीज की शर्त और रेस्ट्रिक्शन में अंतर
इस एक्ट के अंतर्गत लीज़ के संदर्भ में इन दोनों ही चीज़ों में अंतर माना गया है। इन दोनों ही परिस्थितियों में विभेद होता है। शर्त तब अतित्य में आती है जब Lessor एक निश्चित कालावधि के लिए लीज़ प्रदान करता है परन्तु इसमें एक उपबन्ध होता है जो लीज़ के पर्यवसान हेतु एक विशिष्ट घटना का उल्लेख करता है। इसके वि निबन्धन में उल्लिखित घटना प्राइमरी फार्मूला में परिवर्तित हो जाती है जो उस कालावधि का निर्धारण करती है जिसके लिए लीज़ अस्तित्व में रहेगा तथा घटना के घटित होने पर पट्टे का स्वमेव पर्यवसान हो जाएगा...
Transfer Of Property में समपहरण द्वारा कोई लीज खत्म होना
Transfer Of Property Act की धारा 111 के अंतर्गत उन आधारों का उल्लेख किया गया है जिन पर कोई लीज़ खत्म होती है। उन आधारों में से एक आधार समपहरण द्वारा संपत्ति के पट्टे का पर्यवसान भी है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 111 के खंड (छ) पर जो समपहरण द्वारा संपत्ति के पट्टे का पर्यवसान के संबंध में उल्लेख कर रहा है।धारा 111 के इस खंड के अनुसारउस दशा में जबकि Lessee किसी ऐसी अभिव्यक्त शर्त को भंग करता है जिससे यह उपबन्धित है कि उक्त शर्त के भंग होने पर Lessor पुनः लीज़ सम्पत्ति में प्रवेश कर सकेगा; याउस दशा में,...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों द्वारा निजी उपयोग के लिए अस्पताल की एम्बुलेंस के दुरुपयोग को उजागर करने वाले रिपोर्टर के खिलाफ मानहानि का मामला खारिज किया
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक अस्पताल की एम्बुलेंस के दुरुपयोग से संबंधित एक कहानी को कवर करने वाले एक रिपोर्टर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला खारिज किया।अदालत ने माना कि समाचार रिपोर्ट में प्रतिवादी का नाम नहीं था न ही उसे स्पष्ट रूप से उक्त दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।अदालत ने कहा कि यह अस्पताल की कुव्यवस्था से संबंधित सामान्य रिपोर्ट थी। इसने आगे कहा कि प्रतिवादी, जो एम्बुलेंस में से एक का चालक था, ने मान लिया कि कथित दुरुपयोग का श्रेय उसे दिया...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य नर्सिंग परिषद की गुम सीसीटीवी/फाइलों पर CFSL निदेशक की लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताई
नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में अनियमितताओं का दावा करने वाली जनहित याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने कॉलेजों में छात्रों के नामांकन की फाइलों और सीसीटीवी फुटेज के गायब होने पर रिपोर्ट पेश न करने के संबंध में केंद्रीय फोरेंसिक साइंस लैब के निदेशक की सुस्त और लापरवाहीपूर्ण प्रतिक्रिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।अदालत ने आगे कहा कि प्राधिकरण का दृष्टिकोण बेहद घृणित है और कहा कि यदि रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो CFSL निदेशक व्यक्तिगत रूप से सुस्ती को स्पष्ट करने के लिए...
केंद्र ने दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की सुप्रीम कोर्ट में याचिका का विरोध किया, कहा- मामला पूरी तरह से संसदीय क्षेत्राधिकार में
केंद्र सरकार ने आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने पर राजनेताओं को चुनाव लड़ने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने की याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दायर किया।सरकार ने कहा कि अयोग्यता की अवधि ऐसा मामला है, जो पूरी तरह से विधायी नीति के दायरे में आता है। हलफनामा 2016 में वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में दायर किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई।धारा 8 के अनुसार निर्दिष्ट अपराधों के लिए सजा...




















