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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन फिल्म टिकटों पर सर्विस चार्ज लगाने से रोकने वाला आदेश किया रद्द
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार को 4 अप्रैल, 2013 और 18 मार्च, 2014 को जारी दो सरकारी आदेशों (GO) को रद्द कर दिया, जिनके तहत महाराष्ट्र सरकार ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन टिकटों पर सेवा शुल्क या सुविधा शुल्क लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था।जस्टिस महेश सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि उक्त GO किसी भी पेशे को अपनाने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।खंडपीठ ने आदेश में कहा,"हमारा मानना है कि विवादित GO ने थिएटर मालिकों और अन्य लोगों को अपने ग्राहकों से सुविधा शुल्क...
सद्भावना के आधार पर बेदखली के लिए लगातार याचिकाएं वर्जित नहीं, भले ही इसी आधार पर पहले दायर किया गया मुकदमा खारिज कर दिया गया हो: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि बेदखली के लिए दायर याचिका वर्जित नहीं मानी जा सकती, भले ही आवश्यकता के प्रश्न पर मकान मालिक के विरुद्ध पहले भी निर्णय हो चुका हो, इस आधार पर कि मकान मालिक को भविष्य में कभी भी सद्भावना और वास्तविक आवश्यकता नहीं होगी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ बेदखली के लगातार मुकदमे के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पहले भी एक बार मकान मालिक ने साड़ी की दुकान चलाने की आवश्यकता के आधार पर बेदखली का मुकदमा दायर किया, जिसे खारिज कर दिया गया। अब फिर से टूर...
नई आबकारी नीति के प्रावधान केवल नए आवेदनों पर लागू होंगे, पहले से मौजूद गोदामों पर नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने शराब लाइसेंस धारक द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में उसने आशंका जताई थी कि राजस्थान आबकारी एवं विधिक संयम नीति 2024-25 में संशोधन के कारण उसका लाइसेंस नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि याचिका समय से पहले ही दायर की जा चुकी है और नई नीति के तहत नवीनीकरण न मिलने की आशंका मात्र याचिका को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि यह सर्वमान्य है कि नई नीति भविष्य में भी लागू रहेगी और पुरानी नीति के तहत वैध तरीके...
यौन उत्पीड़न के आरोपों में दर्ज FIR के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे क्रिकेटर यश दयाल
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए खेलने वाले क्रिकेटर यश दयाल ने महिला के कथित यौन शोषण के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते एक खंडपीठ द्वारा की जा सकती है।27 वर्षीय दयाल के खिलाफ 6 जुलाई को गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (छल-कपट आदि का इस्तेमाल करके यौन संबंध बनाना) के तहत FIR दर्ज की गई।दयाल पर शादी का झांसा देकर एक महिला का यौन शोषण करने का आरोप है। शिकायतकर्ता के...
ससुराल वालों को सौंपे गए सोने को वापस पाने के लिए विवाहित महिला को देना होगा सबूत? हाईकोर्ट ने किया फैसला
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालतें शादी के समय अपने ससुराल वालों को सौंपे गए सोने के आभूषणों का दावा करने वाली महिला से सख्त सबूत की मांग नहीं कर सकतीं।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने कहा,“ज़्यादातर भारतीय घरों में, दुल्हन द्वारा अपने ससुराल वालों को सोने के आभूषण सौंपना वैवाहिक घर की चारदीवारी के भीतर होता है। नवविवाहित महिला अपने पति या ससुराल वालों को आभूषण सौंपते समय रसीद या स्वतंत्र गवाहों की मांग करने की स्थिति में नहीं होगी। ऐसे लेन-देन की घरेलू और...
क्या BNS की धारा 111 में 'संगठित अपराध' शामिल होने के कारण गैंगस्टर एक्ट निरर्थक नहीं हो गया? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111, जो 'संगठित अपराध' के अपराध को परिभाषित और दंडित करती है, उसके लागू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के प्रावधान 'अनावश्यक' हो गए।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब भी मांगा।खंडपीठ ने टिप्पणी की,"इस न्यायालय का मानना है कि BNS की धारा 111 का प्रावधान, उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों...
बिहार SIR पर सुनवाई- नागरिकता निर्धारण चुनाव आयोग का काम नहीं, गृह मंत्रालय का काम: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) से आगामी विधानसभा चुनावों से महीनों पहले बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने के उसके फैसले पर सवाल उठाया।खंडपीठ ने मतदाताओं से अल्प सूचना पर दस्तावेज़ मांगे जाने और नागरिकता का प्रमाण मांगने के ECI के कानूनी अधिकार पर चिंता जताई।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत SIR शुरू करने के ECI के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही...
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7-8: विवाह समारोह और पंजीकरण
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) न केवल एक वैध हिंदू विवाह (Valid Hindu Marriage) की शर्तों (Conditions) को निर्धारित करता है, बल्कि यह विवाह के अनुष्ठान (Rituals) और उसके पंजीकरण (Registration) से संबंधित प्रक्रियाओं (Procedures) को भी स्पष्ट करता है।धारा 7 (Section 7) इस बात पर प्रकाश डालती है कि हिंदू विवाह कैसे संपन्न (Solemnized) किए जा सकते हैं, जबकि धारा 8 (Section 8) विवाह के पंजीकरण की प्रक्रिया और उसके महत्व का विवरण देती है, हालांकि यह इसकी वैधता (Validity) के लिए...
Sales of Goods Act, 1930 की धारा 53-54 : खरीदार और विक्रेता द्वारा अंतरण के अधिकार
माल विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act), 1930 का अध्याय V अदत्त विक्रेता (Unpaid Seller) के अधिकारों पर केंद्रित है, विशेष रूप से जब माल के साथ अतिरिक्त लेन-देन होते हैं। धारा 53 खरीदार द्वारा माल के आगे की बिक्री (Sub-sale) या गिरवी (Pledge) के प्रभावों को स्पष्ट करती है, जबकि धारा 54 बताती है कि कैसे ग्रहणाधिकार (Lien) या पारगमन में माल को रोकने का अधिकार (Stoppage in Transit) का प्रयोग बिक्री अनुबंध को रद्द करता है या नहीं, और पुनर्बिक्री (Re-sale) के अधिकार को विस्तृत करता है।खरीदार द्वारा...
क्या सरकार ने भारत से मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने के अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाया है?
डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ (2023) में सुप्रीम कोर्ट ने यह गंभीर प्रश्न उठाया कि क्या भारत सरकार और उसकी एजेंसियां मैला ढोने (Manual Scavenging) की अमानवीय प्रथा को खत्म करने और इससे जुड़े लोगों के पुनर्वास (Rehabilitation) की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी को सही तरीके से निभा रही हैं? कोर्ट ने इस केस में 2013 के कानून – Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 – के प्रभावी क्रियान्वयन और उससे जुड़े अधिकारों के उल्लंघन पर विस्तार से विचार किया।यह फैसला...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PIL याचिकाकर्ताओं को मिल रहीं धमकियों पर जताई चिंता, लिया स्वतः संज्ञान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिक्रमण की शिकायतें लेकर जनहित याचिका दायर करके अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले याचिकाकर्ताओं के सामने 'रोजमर्रा की बीमारी' का न्यायिक नोटिस लिया है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे याचिकाकर्ताओं को नियमित रूप से धमकाया जाता है, अक्सर शारीरिक हमले या धमकियों के माध्यम से, अतिक्रमणकारियों द्वारा स्वयं या कभी-कभी, सरकारी अधिकारियों द्वारा भी। जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने अतिक्रमण के आरोपों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया था...
"सिर्फ़ 'गलत आदेश' पारित होने के कारण जज के ख़िलाफ़ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती", गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी को बहाल किया
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (9 जुलाई) को कथित कदाचार, भ्रष्ट आचरण और कर्तव्यहीनता के लिए सेवा से बर्खास्त एक न्यायिक अधिकारी को बहाल कर दिया। इस मामले में, अधिकारी ने कथित तौर पर एक पक्ष को ज़ब्त किए गए तेल टैंकरों को उनके मालिकों को सौंपने के लिए मजबूर किया था, जिन पर हाई-स्पीड डीज़ल चोरी का मामला दर्ज किया गया था।न्यायालय ने इसे अनुचित और गैरकानूनी करार दिया। न्यायालय ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जब तक कदाचार के स्पष्ट आरोप न हों, न्यायिक अधिकारी द्वारा "केवल इस आधार पर" कि कोई गलत आदेश पारित...
Indian Partnership Act, 1932 की धारा 44: न्यायालय द्वारा फर्म का विघटन
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (Indian Partnership Act, 1932) की धारा 44 (Section 44) उन आधारों को निर्धारित करती है जिन पर एक भागीदार के मुकदमे (Suit of a Partner) पर न्यायालय (Court) एक फर्म को भंग (Dissolve) कर सकता है।जबकि धारा 40 (Section 40) समझौते द्वारा विघटन, धारा 41 (Section 41) अनिवार्य विघटन, और धारा 42 (Section 42) आकस्मिकताओं पर विघटन की बात करती है, धारा 44 न्यायालय के हस्तक्षेप (Intervention) की अनुमति देती है जब भागीदारों के बीच गंभीर मुद्दे उत्पन्न होते हैं। एक भागीदार के...
NEET-UG परीक्षा के दरमियान बिजली कटौतीः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने NTA की अपील पर आदेश सुरक्षित रखा, कहा- 'छात्रों के प्रति सहानुभूति, लेकिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं'
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर और उज्जैन केंद्रों पर बिजली गुल होने से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए NEET-UG 2025 परीक्षा की दोबारा परीक्षा आयोजित करने के सिंगल जज के निर्देश के खिलाफ NTA की अपील पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने पहले इस निर्देश पर रोक लगा दी थी। दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद, जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,"छात्रों को हुई परेशानी पर कोई विवाद नहीं है; हम ऐसी स्थिति में छात्रों के तनाव के मुद्दे को भी समझते...
यूट्यूबर मोहक मंगल की दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, ANI की ओर से दायर कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग
यूट्यूबर मोहक मंगल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, और एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) की ओर से अपने खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में दायर कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने गुरुवार को मामले की संक्षिप्त सुनवाई। उन्होंने सवाल किया कि क्या स्थानांतरण याचिका पर वह सुनवाई कर सकते हैं, क्योंकि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम के अनुसार, मामले की सुनवाई एक खंडपीठ द्वारा की जानी है।ANI की ओर से पेश हुए एडवोकेट सिद्धांत...
प्रतिष्ठा के लिए जांच नहीं बदली जा सकती: J&K हाईकोर्ट ने चोरी मामले में CBI जांच की याचिका खारिज की
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ मांग करने या किसी की प्रतिष्ठा और अहंकार को संतुष्ट करने के लिए जांच को दूसरी एजेंसी को नहीं सौंपा जा सकता। कोर्ट ने श्रीनगर में घर में चोरी के एक मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।जस्टिस वसीम सादिक नरगल की पीठ ने जोर देकर कहा कि हालांकि सीबीआई जैसी एक जांच एजेंसी से दूसरी जांच एजेंसी को स्थानांतरित करने की शक्ति केवल संवैधानिक अदालतों द्वारा ही की जा सकती है, लेकिन इस तरह के जांच संबंधी स्थानांतरण दुर्लभ और असाधारण मामलों में...
प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उपहासजनक पोस्ट और वीडियो डालने के मामले में कांग्रेस कार्यकर्ता पर दर्ज FIR रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में कांग्रेस कार्यकर्ता यादवेंद्र पांडेय के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। बता दें, पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित एक विवादास्पद वीडियो और उपहासजनक तस्वीर पोस्ट की थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि पांडेय ने भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाफ 'अपमानजनक भाषा' का इस्तेमाल किया।जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर मामले में तय दिशा-निर्देशों का हवाला देते...
बाइक टैक्सी चलाना व्यापार का मौलिक अधिकार, राज्य परमिट रद्द नहीं कर सकता: OLA ने कर्नाटक हाईकोर्ट से कहा
उबर इंडिया, रैपिडो और ओला जैसे विभिन्न बाइक टैक्सी कंपनी द्वारा अपील में, जिसने राज्य में बाइक टैक्सियों के चलने पर राज्य सरकार के प्रतिबंध को बरकरार रखा था, एएनआई टेक्नोलॉजीज (ola) ने कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया है कि राज्य द्वारा इस तरह का कदम संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (g) के तहत एग्रीगेटर्स के व्यापार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।एग्रीगेटर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अरुण कुमार ने प्रस्तुत किया कि जबकि सिंगल जज ने पाया कि यह सही है कि एक मोटर बाइक पंजीकृत की जा सकती है और कैरिज परमिट की...
भूमि अधिग्रहण में प्रतिनिधित्व न होने पर भी मुआवज़ा देय: बॉम्बे हाईकोर्ट अनुच्छेद 300-A के तहत निगम की जिम्मेदारी को बताया बाध्यकारी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि यदि किसी नगर निगम ने सार्वजनिक परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के बदले ज़मीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) देने का आश्वासन दिया है तो वह संविधान और क़ानून के तहत उस वादे को निभाने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने नागपुर नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में TDR देने से इनकार करने का फैसला रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि 2001 में दिए गए आश्वासन के अनुसार TDR जारी किया जाए।जस्टिस नितिन डब्ल्यू. सांबरे और जस्टिस सचिन एस. देशमुख की खंडपीठ उस याचिका पर...



















