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CSR Funds Scam मामले में पूर्व हाईकोर्ट जज को राहत, FIR से बाहर करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने CSR Funds Scam मामले में केरल हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस सीएन रामचंद्रन नायर का नाम आरोपियों की सूची से बाहर करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ जॉइंट वॉलंटरी एक्शन फॉर लीगल अल्टरनेटिव्स (JVALA) नामक संगठन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केरल हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें संबंधित जांच अधिकारी को जस्टिस नायर का नाम आरोपियों की सूची से बाहर करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया था।संक्षेप में...
अपराध के कारण नुकसान उठाने वाली कंपनी CrPC की धारा 372 के तहत बरी किए जाने के खिलाफ 'पीड़ित' के रूप में अपील दायर कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
यह दोहराते हुए कि CrPC की धारा 372 के प्रावधान के तहत अपील दायर करने के लिए पीड़ित का शिकायतकर्ता/सूचनाकर्ता होना आवश्यक नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अभियुक्तों के कृत्यों के कारण नुकसान/क्षति झेलने वाली कंपनी CrPC की धारा 372 के प्रावधान के तहत 'पीड़ित' के रूप में बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर कर सकती है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें अपीलकर्ता-एशियन पेंट्स लिमिटेड को अभियुक्तों द्वारा नकली पेंट बेचने के...
मॉब लिंचिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट का ज़मानत देने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सलमान वोहरा हत्याकांड के आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज की। गुजरात में एक क्रिकेट मैच के दौरान भीड़ ने कथित तौर पर सलमान वोहरा की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। यह देखते हुए कि सह-आरोपी की ज़मानत याचिका पहले ही खारिज कर दी गई थी, खंडपीठ ने इस समय याचिकाकर्ता की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।जून, 2024 में 23 वर्षीय मुस्लिम युवक सलमान वोहरा अपने दो दोस्तों के साथ गुजरात के आणंद जिले के चिखोदरा गाँव में...
सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक का पद राज्य सरकार के अधीन पद के समान, ग्रेच्युटी राज्य के नियमों द्वारा नियंत्रित: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में कार्यरत शिक्षक राज्य सरकार के अधीन पद के समान पद पर है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक की ग्रेच्युटी ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 (1972 अधिनियम) द्वारा नियंत्रित नहीं होगी, बल्कि वेतन और भत्तों से संबंधित राज्य सेवा नियमों द्वारा नियंत्रित होगी।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें अपीलकर्ता की माँ (अब दिवंगत) महाराष्ट्र सरकार के सहायता प्राप्त स्कूल में शिक्षिका थीं। उनकी...
सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी वाले लोन लेनदेन की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, कहा- RBI जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें धोखाधड़ी वाले लोन ट्रांसफर्स की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी के गठन और लोन लेनदेन को विनियमित करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचे के निर्देश देने की मांग की गई थी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समक्ष अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता मांगने के बाद मामले को वापस लेते हुए खारिज कर दिया।सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी,"लोगों को पर्सनल लोन दिए जाते हैं, जो...
क्या पूर्वगामी अपराध में बरी होने से PMLA की कार्यवाही स्वतः अमान्य हो जाती है? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर विचार करने वाला है कि क्या पूर्वगामी/अनुसूचित अपराध में बरी होने से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत शुरू की गई कार्यवाही स्वतः अमान्य हो जाएगी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रही है, जिसमें कहा गया था कि पूर्वगामी अपराध में बरी होने से PMLA की कार्यवाही स्वतः अमान्य नहीं हो जाती।जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने अंतिम कार्यदिवसों में याचिका पर नोटिस...
Hindu Marriage Act में मैरिज के लिए पूर्व पति या पत्नी का जीवित नहीं होना और पक्षकारों की मानसिक स्थिति का ठीक होना
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 के अंतर्गत यह महत्वपूर्ण शर्त अधिरोपित की गई है कि हिंदू विवाह तभी संपन्न होगा जब विवाह के समय दोनों पक्षकारों में से न तो वर कि कोई पत्नी जीवित होगी और न ही वधू का कोई पति जीवित होगा। प्राचीन शास्त्रीय हिंदू विवाह बहुपत्नी को मान्यता देता था परंतु आधुनिक हिंदू विवाह अधिनियम 1955 बहुपत्नी का उन्मूलन करता है।लीला गुप्ता बनाम लक्ष्मी नारायण 1978 (3) सुप्रीम कोर्ट 558 के मामले में कहा गया है कि दांपत्य युगल शब्द से आशय पूर्व दांपत्य युगल से नहीं है यदि वर या वधू...
Hindu Marriage Act में मैरिज की शर्तों में पक्षकारों का हिन्दू होना और प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप का महत्त्व
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अधीन जो शर्त दी गई है उनमें सबसे पहली शर्त दो हिंदू पक्षकारों का होना अति आवश्यक है। कोई भी विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अधीन तब ही संपन्न होगा जब दोनों पक्षकार हिंदू होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भीमराव लोखंडे बनाम महाराष्ट्र राज्य एआईआर 1985 सुप्रीम कोर्ट 1564 के मामले में कहा है कि जब विवाह के दोनों पक्षकार हिंदू हो तो ही हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कोई हिंदू विवाह संपन्न माना जाएगा।यदि विवाह का कोई एक पक्षकार हिंदू है तथा दूसरा पक्षकार गैरहिंदू है तो विवाह इस...
अगर कमियां ठीक कर दी जाएं तो तेल कंपनियों को डीलरों से जमीन लेने में नरम रवैया अपनाना चाहिए: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि तेल कंपनियों को तब लचीला रुख अपनाना चाहिए जब वितरक के लिए प्रस्तावित भूमि के साथ मामूली तकनीकी मुद्दे उत्पन्न होते हैं, खासकर जब आवेदक समय पर दोष को दूर कर लेता है।जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस रंजन शर्मा ने कहा, "अपीलकर्ता ने भूमि पर बिजली के तारों जैसी कमियों को भी दूर किया था, जो भूमि का एक बहुत बड़ा हिस्सा है और अगर निगम ने इस पहलू को ध्यान में रखा होता, तो उक्त भूमि का हिस्सा गोदाम के निर्माण के लिए उपयोग किया जा सकता था। मामले की पृष्ठभूमि: 13...
झारखंड हाईकोर्ट में फैसले में देरी को लेकर 10 दोषियों, जिनमें 6 को मौत की सज़ा, ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
सुप्रीम कोर्ट ने दस दोषियों की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि झारखंड उच् च न् यायालय ने दो-तीन साल बीत जाने के बावजूद उनकी आपराधिक अपीलों पर फैसला सुरक्षित रखते हुए नहीं सुनाया है।विशेष रूप से, दोषियों को मौत की सजा या आजीवन कठोर कारावास का सामना करना पड़ रहा है। 10 में से छह को मौत की सजा सुनाई गई थी और उनकी अपील 2018-19 से उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं। एक दोषी 16 साल से अधिक समय से जेल में है, जबकि अन्य 6 से 16+ साल की वास्तविक हिरासत अवधि भी बिता चुके हैं। ...
नार्को-आतंकवाद से जुड़े मामलों में सिर्फ ट्रायल में देरी के कारण नहीं मिल सकती जमानत: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने पुष्टि की है कि UAPA Act और NDPS Act के तहत मामलों में जमानत सख्त कानूनी शर्तों के अधीन है क्योंकि ये कानून विशेष रूप से तब लागू होते हैं जब अपराध में आतंकवाद या नार्को-आतंकवाद शामिल हो।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुकदमे में देरी या लंबे समय तक कैद में रहना ही इन प्रतिबंधों में ढील देने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसमें जोर देकर कहा गया कि यदि प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता के सबूत हैं, तो जमानत के कड़े प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। दोनों कानूनों के तहत...
मोटर दुर्घटना दावों में भविष्य की संभावनाओं पर ब्याज देना कोई अवैधता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवज़ा दावों के मामलों में भविष्य की संभावनाओं पर ब्याज देना कोई अवैधता नहीं है।न्यायालय ने बीमा कंपनियों को सलाह दी कि वे दुर्घटना की सूचना मिलने पर कम से कम अस्थायी रूप से सक्रिय रूप से गणना के आधार पर दावे का निपटान करें, जिससे भविष्य की संभावनाओं पर ब्याज लगने और लंबी मुकदमेबाजी में फंसने से बचा जा सके।अदालत ने कहा,"जब मामला न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित हो या उच्च मंचों में अपील चल रही हो तो दावेदार भविष्य की संभावनाओं के लिए मुआवज़े से वंचित रह जाते हैं।...
क्या इरादे की कमी आचरण को मिटा सकती है?: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बीयर मग के साथ दिखे सीनियर एडवोकेट से हाईकोर्ट का सवाल
सीनियर एडवोकेट भास्कर तन्ना के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार (14 जुलाई) को गुजरात हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि उसे पता है कि सीनियर एडवोकेट का ऐसा आचरण करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन उसे आश्चर्य है कि क्या इरादे की कमी अवमाननापूर्ण आचरण को मिटा सकती है।बता दें, यह घटना 26 जून को जस्टिस संदीप भट्ट की पीठ के समक्ष हुई थी। उसके बाद इसका एक वीडियो क्लिप व्यापक रूप से प्रसारित किया गया था।जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस आर.टी. वच्चानी की खंडपीठ ने अपने...
नागरिकों में भाईचारा होगा तो नफरत कम होगी, सोशल मीडिया भड़काऊ पोस्ट्स पर रोक जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (14 जुलाई) को कहा कि अगर लोगों के बीच भाईचारा बढ़ेगा तो नफरत अपने आप कम हो जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि खासकर सोशल मीडिया पर बोलने की आज़ादी के साथ-साथ लोगों को खुद पर नियंत्रण भी रखना चाहिए।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ कोलकाता निवासी वजाहत खान की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपने आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों को समेकन करने की मांग की थी। सोशल मीडिया पोस्ट के कारण वैमनस्य पैदा करने की...
NEET-UG 2025: हाईकोर्ट ने बिजली कटौती के कारण दोबारा परीक्षा कराने का निर्देश किया खारिज, NTA से भविष्य में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (14 जुलाई) को इंदौर और उज्जैन के केंद्रों पर बिजली कटौती से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए NEET-UG 2025 परीक्षा की दोबारा परीक्षा कराने के एकल न्यायाधीश के निर्देश के खिलाफ राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा दायर रिट अपील स्वीकार की।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने NTA और स्थानीय अधिकारियों को भविष्य में परीक्षा आयोजित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।खंडपीठ ने कहा,"भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए...
Indian Partnership Act, 1932, की धारा 48-50 : फर्म के विघटन के बाद खातों का निपटान और देनदारियों का भुगतान
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (Indian Partnership Act, 1932) का यह खंड फर्म के विघटन (Dissolution of a Firm) के बाद के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक पर केंद्रित है: खातों का निपटान (Settlement of Accounts) और देनदारियों का भुगतान (Payment of Liabilities). यह सुनिश्चित करता है कि व्यवसाय के समापन पर वित्तीय मामलों को एक व्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके से संभाला जाए।भागीदारों के बीच खातों के निपटान का तरीका (Mode of Settlement of Accounts Between Partners) धारा 48 (Section 48) यह बताती है कि फर्म...
सुप्रीम कोर्ट ने SIMI पर प्रतिबंध बढ़ाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 3 (1) के तहत 'गैरकानूनी संगठन' घोषित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को बढ़ाने को चुनौती देने वाली याचिका आज खारिज कर दी।सिमी पर प्रतिबंध सितंबर, 2001 से जारी है। 2024 में, संगठन पर प्रतिबंध का विस्तार करते हुए, गृह मंत्रालय द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, सिमी लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देने, देश में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने में शामिल है, जो भारत की...
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13: तलाक के आधार
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी (Revolutionary) प्रावधानों में से एक तलाक (Divorce) का परिचय है। पारंपरिक हिंदू कानून में, विवाह को एक अटूट संस्कार (Indissoluble Sacrament) माना जाता था, और तलाक लगभग अज्ञात (Almost Unknown) था, सिवाय कुछ समुदायों में प्रचलित रीति-रिवाजों (Customs) के।धारा 13 (Section 13) इस दृष्टिकोण को बदलती है, जिससे पति या पत्नी दोनों को विशिष्ट आधारों (Specific Grounds) पर विवाह को भंग (Dissolve) करने की अनुमति मिलती है।...
Sales of Goods Act, 1930 की धारा 62-64: नीलामी बिक्री
माल विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act), 1930 का अध्याय VII विविध प्रावधानों (Miscellaneous Provisions) से संबंधित है जो अधिनियम के पिछले अध्यायों को पूरक बनाते हैं। ये धाराएँ कुछ सामान्य सिद्धांतों, 'उचित समय' के निर्धारण, और नीलामी बिक्री (Auction Sale) के विशिष्ट नियमों पर प्रकाश डालती हैं।निहित शर्तों और निबंधनों का अपवर्जन (Exclusion of Implied Terms and Conditions) धारा 62 पार्टियों को निहित शर्तों और निबंधनों को बदलने की अनुमति देती है: जहाँ बिक्री अनुबंध के तहत कानून के निहितार्थ...
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 51-52: फर्म के विघटन पर प्रीमियम की वापसी और धोखाधड़ी/गलत बयानी के मामले में अधिकार
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (Indian Partnership Act, 1932) के ये खंड उन विशिष्ट परिस्थितियों को संबोधित करते हैं जो फर्म के समय से पहले विघटन (Premature Dissolution) या धोखाधड़ी (Fraud) और गलत बयानी (Misrepresentation) के आधार पर भागीदारी अनुबंध को रद्द (Rescinded) करने पर उत्पन्न होती हैं।समय से पहले विघटन पर प्रीमियम की वापसी (Return of Premium on Premature Dissolution) धारा 51 (Section 51) उस स्थिति से संबंधित है जब एक भागीदार ने एक निश्चित अवधि (Fixed Term) के लिए भागीदारी में प्रवेश करते...




















