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'सोनम वांगचुक की सेहत ठीक नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मेडिकल आधार पर उनकी हिरासत पर फिर से विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से केंद्र सरकार से लद्दाखी सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनकी हिरासत जारी रखने पर फिर से विचार करने को कहा।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 1980 के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उनकी हिरासत को अवैध बताया गया। वांगचुक को 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया और लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों...
'धोखे वाले मैसेज, फ्रॉड लिंक डिजिटल सुरक्षा के लिए खतरा': दिल्ली हाईकोर्ट ने बल्क सिम फ्रॉड मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट कंपनी के दो डायरेक्टर्स को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिन पर साइबर क्राइम से जुड़ी गतिविधियों के लिए धोखे से बल्क मोबाइल सिम कनेक्शन लेने और उनका गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि धोखे वाले मैसेज और फ्रॉड लिंक फैलाने जैसे अपराध पब्लिक के भरोसे और डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।बेंच ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज मामले में अग्रिम जमानत की अर्जियों को खारिज कर दिया, जो टेलीकॉम और KYC नियमों के...
बुढ़ापे में न्याय: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1982 के मर्डर केस में 100 साल के आरोपी को क्यों बरी किया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1982 के मर्डर केस में 100 साल के एक व्यक्ति को बरी किया। यह बरी केस की खूबियों के आधार पर किया गया, खासकर अभियोजन पक्ष के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहने के कारण।अपने 23 पन्नों के फैसले में जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने आरोपी की उम्र के बारे में कुछ ज़रूरी बातें कहीं।कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कोई व्यक्ति जीवन के आखिरी पड़ाव पर कोर्ट के सामने खड़ा होता है तो दशकों की प्रक्रियात्मक देरी के बाद दंडात्मक परिणामों पर ज़ोर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'गांजा' को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से इनकार किया, केंद्र से NDPS Act की समीक्षा करने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) और NDPS नियमों में गांजे के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों में ढील देने की ज़रूरत है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच गांजे सहित भांग पर लगे प्रतिबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने या उनमें ढील देने की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, ताकि इसके औषधीय, औद्योगिक, आर्थिक, पारिस्थितिक और अन्य लाभ मिल सकें।याचिकाकर्ता- ग्रेट लेजिस्लेशन मूवमेंट इंडिया ट्रस्ट ने...
मुंबई में वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए रिटायर्ड जस्टिस अमजद सैयद, अनुजा प्रभुदेसाई को नियुक्त
यह देखते हुए कि साफ आदेशों के बावजूद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में विफल रहे हैं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में रिटायर्ड जस्टिस अमजद सैयद और रिटायर्ड जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की एक हाई पावर कमेटी (HPC) का गठन किया।जस्टिस सैयद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस हैं, जबकि जस्टिस प्रभुदेसाई बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज हैं।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की डिवीजन बेंच ने इस मामले...
छुट्टी को सही ठहराने के लिए झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट देना गंभीर दुराचार, जिसके लिए नौकरी से निकाला जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जो सरकारी कर्मचारी बिना इजाज़त छुट्टी को सही ठहराने के लिए झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट देता है, वह गंभीर दुराचार करता है, जिसके लिए उसे नौकरी से निकाला जा सकता है।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच CAG ऑफिस द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के आदेश को चुनौती दी गई। CAT ने एक सरकारी कर्मचारी को जाली मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने के लिए दी गई नौकरी से निकालने की सज़ा में दखल दिया था।जवाब देने वाले...
चेक बाउंस मामलों में एक्टर राजपाल यादव को सरेंडर करने की समय-सीमा बढ़ाने से हाईकोर्ट का इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्टर राजपाल नौरंग यादव को चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने के संबंध में संबंधित जेल सुपरिटेंडेंट के सामने सरेंडर करने के लिए दी गई समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यादव की सरेंडर करने के लिए समय बढ़ाने की अर्जी खारिज की और कहा कि एक्टर को आज शाम 4 बजे तक सरेंडर करना होगा।जज ने कहा,“मैंने उसी दिन इन दलीलों को खारिज कर दिया था और आपको सरेंडर करने के लिए दो और दिन दिए। मुझे नहीं लगता कि कोई आधार है। आपको एक खास दिन सरेंडर करना था, लेकिन आपको...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'विश्वसनीय जानकारी' के बिना पुलिस द्वारा गलत तरीके से गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को ₹1 लाख का मुआवजा दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ऐसे व्यक्ति को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया, जिसे 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिना किसी उचित जांच या उसके खिलाफ विश्वसनीय सबूत के गलत तरीके से गिरफ्तार और हिरासत में लिया था।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने कहा कि गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों की मनमानी और लापरवाही वाली कार्रवाई से याचिकाकर्ता के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है और वह उस कृत्य का एक असहाय शिकार था।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (सुनील कंडू @ सुनील कुमार...
बच्चे पर हमले की अकेली घटना गोवा बाल अधिनियम के तहत 'बाल शोषण' नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी) को अपने रिश्तेदार के बच्चे के सिर पर लोहे की रॉड से मारकर खून निकलने वाली चोट पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराई गई दो महिलाओं को बरी करते हुए कहा कि गोवा बाल अधिनियम, 2003 के तहत बच्चे पर हमले की सिर्फ एक अकेली घटना 'बाल शोषण' का अपराध नहीं हो सकती।गोवा बेंच में बैठे सिंगल-जज जस्टिस श्रीराम शिरसाट ने अनीता और कुंडा नाइक (दोनों सगी बहनें) द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने पणजी की एक चिल्ड्रन स्पेशल कोर्ट के 30 जून, 2016 के फैसले को चुनौती दी, जिसमें...
झारखंड हाईकोर्ट ने 25 साल पुरानी लेक्चरर नियुक्तियों में दखल देने से इनकार किया, लंबे समय से सेवा और समानता का हवाला दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने दो दशक से भी पहले हुई तीन लेक्चरर की नियुक्तियों में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि लगभग 25 सालों से चली आ रही नियुक्तियों को बदलना अन्याय होगा, खासकर तब जब सक्षम अधिकारियों ने पहले ही एक संभावित और तर्कसंगत दृष्टिकोण पर कार्रवाई कर ली थी।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच तीन लोगों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली और बिहार कॉलेज सर्विस कमीशन, पटना की 14 फरवरी 2000 के पत्र द्वारा जारी सिफारिश को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, इस आधार पर...
समान काम के लिए समान वेतन अपने आप नहीं मिलता: हाईकोर्ट ने MCD लैब टेक्नीशियन की केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतन की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि "समान काम के लिए समान वेतन" का सिद्धांत अपने आप लागू नहीं होता। इसे सिर्फ़ नौकरी के पद या काम में समानता के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता, खासकर जब शैक्षिक योग्यता और भर्ती के नियम अलग-अलग हों।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने इस तरह दिल्ली नगर निगम (MCD) में काम करने वाले लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें केंद्र सरकार के तहत काम करने वाले लैब टेक्नीशियन के बराबर वेतन की मांग की गई थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि...
पूर्व आदेश की अवहेलना कर TET शर्त दोबारा लगाने पर सीनियर अधिकारी अवमानना का दोषी: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के सीनियर अधिकारी को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया है।अदालत ने पाया कि अधिकारी ने महिला कर्मचारी की अनुकंपा नियुक्ति के मामले में पहले से स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद, शिक्षक पात्रता परीक्षा (PET) की शर्त दोबारा लागू कर जानबूझकर अवहेलना की।जस्टिस प्रणय वर्मा ने अवमानना याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी ने 11 अगस्त, 2023 को पारित हाईकोर्ट के आदेश का गंभीर और जानबूझकर उल्लंघन किया।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता महिला को उसके...
यौन उत्पीड़न पीड़िता का नाम और पता अदालत में दायर रिपोर्टों में न लिखें: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता का नाम, पिता का नाम या पता किसी भी स्थिति रिपोर्ट या अदालत में दाखिल दस्तावेज़ में प्रकट न किया जाए।जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से कहा कि वे सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों को इस संबंध में कानून के सख्त पालन हेतु आवश्यक निर्देश पुनः जारी करें।यह निर्देश एक POCSO Act से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें जांच अधिकारी द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट में पीड़िता का नाम उल्लेखित किया गया...
जमानत याचिकाओं पर फैसले में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, सभी हाईकोर्ट से लंबित मामलों का ब्योरा तलब
जमानत याचिकाओं के लंबे समय से लंबित रहने पर गंभीर चिंता जताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी उच्च न्यायालयों से रिपोर्ट तलब की है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने यह निर्देश उस याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक जमानत याचिका के लगातार स्थगन का मुद्दा उठाया गया था।सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे 1 जनवरी 2025 के बाद दायर सभी जमानत याचिकाओं—चाहे नियमित जमानत...
NEET-PG 2025: कट-ऑफ प्रतिशत घटाने के खिलाफ जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने आज NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ प्रतिशत घटाने के निर्णय को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस पी. श्री नरसिंहा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को करेगी।याचिका में 13 जनवरी को राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत क्वालिफाइंग कट-ऑफ को असामान्य रूप से कम—यहां तक कि शून्य और नकारात्मक प्रतिशताइल तक—घटा दिया गया।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल...
FIR में नाम न होना निर्णायक नहीं, यदि वित्तीय लेन-देन से संलिप्तता साबित हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि आरोपी का मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन रहा है, जिससे उसकी सक्रिय भूमिका और समन्वय सिद्ध होता है, तो केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि उसका नाम FIR में दर्ज नहीं था।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी गांजा की बड़ी मात्रा में कथित तस्करी से जुड़े एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की।आरोपी की दलीलेंआरोपी ने अदालत के समक्ष यह तर्क दिया कि उसका नाम FIR में नहीं है और उसके पास से किसी...
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A अवैध रिश्वत की मांग के मामलों पर लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-A का संरक्षण लोक सेवकों द्वारा अवैध रिश्वत की मांग के मामलों में लागू नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान केवल उन मामलों तक सीमित है, जहाँ अपराध सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान लिए गए निर्णय या दी गई सिफारिशों से संबंधित हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा—“धारा 17-A एक विशेष उद्देश्य से लाई गई है। यह उन अपराधों पर लागू होती है जो लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन...
नाबालिग से सहमति वाला प्रेम संबंध जमानत पर विचार का आधार हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO Act से जुड़े एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा है कि भले ही नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता, लेकिन यदि मामला सहमति वाले प्रेम संबंध का हो और पीड़िता की उम्र 18 वर्ष के क़रीब हो, तो जमानत पर विचार किया जा सकता है।जस्टिस विकास महाजन ने वरुण कुमार सिंह की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला किसी हिंसा, दबाव या क्रूरता का नहीं, बल्कि प्रेम संबंध से उत्पन्न हुआ प्रतीत होता है।मामले का संक्षेपवरुण कुमार सिंह को अगस्त 2023 में...
अवमानना की कार्रवाई न करना कमजोरी समझ लिया गया: रांची टर्मिनल मार्केट यार्ड के चुनावी उपयोग पर हाइकोर्ट की सख्त रोक
झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रांची के पंडरा स्थित टर्मिनल मार्केट यार्ड परिसर का किसी भी प्रकार के चुनावी कार्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा। अदालत ने चेतावनी दी कि उसके आदेशों का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनावी कार्यों के नाम पर बार-बार टर्मिनल मार्केट यार्ड का उपयोग किए जाने से वहां वर्षों से कारोबार कर रहे...
ADAG बैंक ऋण घोटाले की जांच में ED-CBI पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी; अनिल अंबानी ने देश न छोड़ने का आश्वासन दिया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों से जुड़े कथित ₹40,000 करोड़ से अधिक के बैंक ऋण घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की “अस्पष्ट और अनुचित देरी” पर कड़ी नाराज़गी जताई।अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न बैंकों की शिकायतों के बावजूद केवल एक ही एफआईआर दर्ज करना प्रक्रियात्मक कानून के अनुरूप नहीं है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ, पूर्व केंद्रीय सचिव...



















