HMA की धारा 13B | आपसी सहमति से तलाक में 6 माह की कूलिंग ऑफ अवधि अनिवार्य नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

Amir Ahmad

5 Jan 2026 3:37 PM IST

  • HMA की धारा 13B | आपसी सहमति से तलाक में 6 माह की कूलिंग ऑफ अवधि अनिवार्य नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें पति-पत्नी की आपसी सहमति से तलाक की याचिका को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 (HMA) की धारा 13बी के तहत छह माह की कूलिंग ऑफ अवधि का पालन किया जाना आवश्यक है।

    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि छह माह की यह अवधि अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (डायरेक्टरी) है। अदालत ने कहा कि जब दंपति के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं है तो केवल औपचारिकता के नाम पर तलाक से इनकार करना उनके मानसिक कष्ट को अनावश्यक रूप से बढ़ाएगा।

    जस्टिस संगीता के. विशेन और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक वर्ष से अधिक समय से अलग रह रहे हैं। अलग-अलग देशों में अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। ऐसे में उनके पुनर्मिलन की कोई वास्तविक संभावना नहीं है।

    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी(1) और 13बी(2) के तहत निर्धारित अवधि लगभग पूरी हो चुकी है और आपसी सहमति से तलाक देने से इनकार करना न्यायोचित नहीं होगा।

    अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों पक्ष युवा हैं और अपनी-अपनी इच्छानुसार जीवन एवं करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

    मामले के तथ्यों के अनुसार पति-पत्नी का विवाह 9 दिसंबर, 2023 को हुआ था और वे 17 जनवरी, 2024 से अलग रह रहे हैं। पति उच्च शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम चला गया और वहीं बसने का इच्छुक है, जबकि पत्नी अहमदाबाद में रहकर भारत में ही अपना करियर बनाना चाहती है।

    दोनों पक्षों ने हलफनामों के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया कि तलाक के लिए उनकी सहमति पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी प्रकार के दबाव या जबरदस्ती का मामला नहीं है।

    दंपति ने 1 अप्रैल, 2025 को आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की, जिसे फैमिली कोर्ट ने 8 अगस्त 2025 को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि छह माह की कूलिंग ऑफ अवधि पूरी नहीं हुई।

    हाईकोर्ट ने इस दृष्टिकोण को गलत मानते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर फैसले के अनुसार, उपयुक्त मामलों में छह माह की अवधि को माफ किया जा सकता है।

    अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि दंपति को कूलिंग ऑफ अवधि की छूट के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जाए और कानून के अनुसार उनकी याचिका पर पुनः निर्णय लिया जाए।

    साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि फैमिली कोर्ट छह माह के भीतर इस मामले का निस्तारण करे।

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