हत्या के शिकार BSP नेता आर्मस्ट्रांग की पत्नी ने CBI जांच याचिका को मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की

Praveen Mishra

5 Jan 2026 5:40 PM IST

  • हत्या के शिकार BSP नेता आर्मस्ट्रांग की पत्नी ने CBI जांच याचिका को मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की

    बहुजन समाज पार्टी (BSP) नेता व प्रमुख दलित कार्यकर्ता के. आर्मस्ट्रांग की पत्नी पोरकोडी ने अपने पति की हत्या की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को हस्तांतरित कराने संबंधी अपनी याचिका को मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

    याचिका में कहा गया है कि इसी मामले से संबंधित एक समान मुद्दा — अर्थात जांच को CBI को सौंपने का प्रश्न — पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है, जहां राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश को चुनौती दी है। ऐसे में हाईकोर्ट पोरकोडी की याचिका में कोई स्वतंत्र आदेश पारित नहीं कर सकता।

    यह मामला सोमवार को जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, जिसने इसे राज्य की लंबित याचिका के साथ टैग कर दिया। मामलों की अगली सुनवाई 13 जनवरी को संभावित है।

    पृष्ठभूमि

    आर्मस्ट्रांग की 5 जुलाई 2024 को चेन्नई के पेरंबूर स्थित आवास के बाहर सशस्त्र हमलावरों ने हत्या कर दी थी।

    24 सितंबर 2025 को मद्रास हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट को खारिज करते हुए जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया था। यह आदेश आर्मस्ट्रांग के भाई के. इम्मानुएल की याचिका पर पारित हुआ था, जिसमें राज्य पुलिस की जांच में गंभीर कमियों का आरोप लगाया गया था। अदालत ने पाया था कि जांच में प्रक्रियागत चूक और चार्जशीट में महत्वपूर्ण विरोधाभास मौजूद हैं।

    इसी दौरान, आर्मस्ट्रांग की पत्नी पोरकोडी ने भी एक अलग याचिका दायर कर स्वतंत्र एजेंसी द्वारा दे-नोवो (नवीन) जांच, मामले की निगरानी और गवाह सुरक्षा की मांग की थी।

    सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही

    राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

    अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने चार्जशीट रद्द करने वाले हिस्से पर रोक लगाई, पर उस समय CBI जांच के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई।

    बाद में, नवंबर में शीर्ष न्यायालय ने आदेश संशोधित करते हुए CBI जांच पर भी रोक लगा दी।

    वर्तमान याचिका में पत्नी के आरोप

    पोरकोडी का कहना है कि जांच में उनके द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण इनपुट्स को उचित महत्व नहीं दिया गया।

    वे राज्य के इस दावे को चुनौती देती हैं कि आर्मस्ट्रांग के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सेल्वापेरुन्धगई के खिलाफ “एक भी साक्ष्य” नहीं मिला — जबकि, उनके अनुसार, राज्य ने उनके कॉल रिकॉर्ड, पृष्ठभूमि या गतिविधियों की जांच ही नहीं की।

    कथित जांच कमियाँ (जैसा कि याचिका में कहा गया)

    आर्मस्ट्रांग की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, विशेष रूप से सेल्वापेरुन्धगई के साथ, की जांच नहीं की गई

    आरोपियों के मोबाइल फोनों का फॉरेंसिक परीक्षण नहीं कराया गया

    आरोपी नं. 1 के साथ गए पुलिस अधिकारियों की जाँच नहीं की गई

    पहली गिरफ्तारी से पहले ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इंटरव्यू लिया गया

    आरोपी नं. 8 के एनकाउंटर के बाद नई जांच टीम गठित नहीं की गई

    फरार आरोपी नं. 2 (जिसके ruling party से संबंध बताए गए) को पकड़ने के प्रयास नहीं किए गए

    बरामद धनराशि की ट्रेसिंग नहीं की गई

    गोपनीय दस्तावेज आरोपियों के साथ साझा किए गए

    याचिका में कहा गया है कि इन परिस्थितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच आवश्यक है।

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