सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत खारिज, पांच अन्य की जमानत मंजूर

Praveen Mishra

5 Jan 2026 9:00 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत खारिज, पांच अन्य की जमानत मंजूर

    सुप्रीम कोर्ट ने आज (5 जनवरी) दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से उनके खिलाफ यूएपीए, 1967 के तहत प्रथमदृष्टया मामला बनता है। साथ ही, कोर्ट ने मामले के अन्य पाँच आरोपियों — गुलफिशा फ़ातिमा, मीरा हैदर, शिफ़ा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को जमानत दे दी है।

    कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम एक वर्ष बाद या संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अपनी जमानत याचिका दोबारा दायर कर सकते हैं। अदालत ने पाया कि अभियोजन की सामग्री में उनके “केंद्रीय और निर्णायक भूमिका” तथा “योजनाबद्ध और संगठित स्तर पर भागीदारी” का संकेत मिलता है।

    कोर्ट ने कहा कि यूएपीए की धारा 43D(5) का प्रावधान इस मामले में लागू होता है और अब तक की हिरासत संवैधानिक सीमा का उल्लंघन नहीं करती। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर आरोपी की भूमिका का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया गया है और सामूहिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया गया। ट्रायल कोर्ट को सुनवाई तेज़ करने का निर्देश भी दिया गया।

    जिन आरोपियों को जमानत मिली है, उन पर 12 शर्तें लगाई गई हैं और किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द की जा सकेगी।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजनिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने यह भी कहा कि यूएपीए मामलों में ट्रायल में देरी अपने-आप जमानत का आधार नहीं बनती, हालांकि अदालत यह देख सकती है कि प्रथमदृष्टया मामला बनता है या नहीं — और यह आकलन आरोपी-विशेष होता है।

    यह मामला फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए साम्प्रदायिक दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश से संबंधित है, जिसमें कई अभियुक्तों के नाम शामिल हैं; इनमें से कुछ को पहले ही जमानत मिल चुकी है या मानवीय आधार पर राहत दी गई थी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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