जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

न्यायपालिका पर आपत्तिजनक टिप्पणी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने श्रीनगर SSP को लगाई फटकार
न्यायपालिका पर आपत्तिजनक टिप्पणी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने श्रीनगर SSP को लगाई फटकार

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाईकोर्ट ने निरोधात्मक हिरासत आदेश रद्द करते हुए श्रीनगर के तत्कालीन SSP इम्तियाज़ हुसैन की कड़ी निंदा की। अदालत ने कहा कि SSP द्वारा तैयार किए गए डोज़ियर में न्यायपालिका के खिलाफ़ की गई टिप्पणियां अवमाननापूर्ण और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली हैं।जस्टिस मोक्ष खजूरिया काज़मी की सिंगल बेंच ने पाया कि SSP ने अपने डोज़ियर में लिखा था,"जब भी विषय (हिरासत में लिए गए व्यक्ति) को गिरफ़्तार किया गया, उसने अदालत से जमानत ले ली या हिरासत आदेश को चुनौती दी, क्योंकि वह प्रभाव...

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने AAP MLA मेहराज दीन मलिक की PSA के तहत गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने AAP MLA मेहराज दीन मलिक की PSA के तहत गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज दीन मलिक की हिरासत को चुनौती देने वाली हेबियस कॉर्पस याचिका को स्वीकार कर सरकार को नोटिस जारी किया। यह गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (PSA), 1978 के तहत की गई है।जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया है।सीनियर एडीशनल एडवोकेट जनरल मोनिका कोहली ने प्रतिवादी नंबर 1, 2, 4 और 5 की ओर से नोटिस स्वीकार किया, जबकि प्रतिवादी नंबर 3 को दस्ती नोटिस देने की...

UAPA मामलों में सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकते, NIA Act का इस्तेमाल कर वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
UAPA मामलों में सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकते, NIA Act का इस्तेमाल कर वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कोई वैधानिक मंच उपलब्ध है तो कोई भी अपीलकर्ता राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (NIA Act) की धारा 21 का हवाला देकर सीधे हाई कोर्ट में अपील नहीं कर सकता। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि UAPA में संपत्ति की जब्ती से लेकर संबंधित प्राधिकरण द्वारा निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया प्रदान की गई है।जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की खंडपीठ ने आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में इस्तेमाल...

अवमानना कार्यवाही में अदालत आदेश की सीमाओं से आगे नहीं जा सकती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
अवमानना कार्यवाही में अदालत आदेश की सीमाओं से आगे नहीं जा सकती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवमानना कार्यवाही में अदालत उस आदेश की सीमाओं से बाहर नहीं जा सकती, जिसकी अवहेलना का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि केवल वही निर्देश जिनका उल्लेख आदेश या निर्णय में स्पष्ट रूप से किया गया हो, या जो स्वयं स्पष्ट हों, उन्हीं को ध्यान में रखा जा सकता है।जस्टिस शहजाद अज़ीम और जस्टिस सिंदु शर्मा की खंडपीठ ने कहा,“अवमानना कानून के क्षेत्राधिकार में काम करते समय अदालत को पहले से व्यक्त की गई बातों से आगे बढ़कर कोई पूरक आदेश या निर्देश जारी नहीं करना चाहिए।...

नाम बदलने का अधिकार मौलिक अधिकार, बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों को अनदेखा कर अनुरोध खारिज नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
नाम बदलने का अधिकार मौलिक अधिकार, बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों को अनदेखा कर अनुरोध खारिज नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को अपना नाम बदलने या अपनाने का अधिकार संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों पर विचार किए बिना मनमाने ढंग से ऐसे अनुरोधों को खारिज नहीं कर सकता।जस्टिस संजय धर की पीठ मोहम्मद हसन (पहले राज वली) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने बोर्ड द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसके हाई स्कूल और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों में नाम...

आपराधिक न्यायालय को CrPC की धारा 299 लागू करने से पहले अभियुक्त की फरारी के बारे में पूरी तरह से संतुष्ट होना आवश्यक: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
आपराधिक न्यायालय को CrPC की धारा 299 लागू करने से पहले अभियुक्त की फरारी के बारे में पूरी तरह से संतुष्ट होना आवश्यक: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता अभियुक्त के विरुद्ध CrPC 1973 की धारा 299 (अब BNSS की धारा 335) लागू करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह प्रावधान केवल जांच अधिकारी के अनुरोध पर आकस्मिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता।अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केवल जांच अधिकारी और कांस्टेबल के बयानों के आधार पर कार्रवाई की, जबकि अभियुक्त के फरार होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं है और उसकी तत्काल गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं है।जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने ट्रायल...

बच्चों की कस्टडी पर जेंडर के आधार पर कोई वरीयता नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बच्चों की कस्टडी पर जेंडर के आधार पर कोई वरीयता नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि बच्चों की कस्टडी के मामलों में माता-पिता में से किसी को भी केवल उनके जेंडर के आधार पर वरीयता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में निहित समानता और गैर-भेदभाव के संवैधानिक सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल बच्चे का कल्याण ही सर्वोपरि विचार होना चाहिए।जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने एक मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी। इसमें नाबालिग बच्चों...

आतंकी खतरे का हवाला देकर ड्यूटी से गैरहाज़िर रहना सही नहीं: जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट
आतंकी खतरे का हवाला देकर ड्यूटी से गैरहाज़िर रहना सही नहीं: जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई पुलिसकर्मी केवल आतंकवादी खतरे का हवाला देकर 19 साल तक ड्यूटी से गायब रहने को सही नहीं ठहरा सकता। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक अनुपस्थिति, वह भी बिना किसी ठोस सबूत के, गंभीर कदाचार है और पुलिस बल के सदस्य के लिए अनुचित आचरण है।चीफ़ जस्टिस अरुण पाली और जस्टिस रजनेश ओसवाल की खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता आतंकी खतरे का दावा साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर सका। कई नोटिस और आदेश मिलने के बावजूद उसने ड्यूटी जॉइन नहीं की। कोर्ट ने सख्त...

अपीलीय न्यायालय दावेदारों द्वारा प्रति-अपील किए बिना भी Order 41 Rule 33 CPC के तहत दुर्घटना मुआवज़ा बढ़ा सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
अपीलीय न्यायालय दावेदारों द्वारा प्रति-अपील किए बिना भी Order 41 Rule 33 CPC के तहत दुर्घटना मुआवज़ा बढ़ा सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अपीलों में यदि दावा न्यायाधिकरण का निर्णय कमतर पाया जाता है तो हाईकोर्ट दावेदारों द्वारा प्रति-अपील या प्रति-आपत्ति के अभाव में भी मुआवज़े को संशोधित और बढ़ा सकता है।जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा कि दावा न्यायाधिकरण का कर्तव्य है कि वह निष्पक्षता, समता और सद्विवेक के सिद्धांतों के आधार पर "उचित और उचित" मुआवज़ा प्रदान करे।न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीपीसी के आदेश 41 नियम 33 (Order 41 Rule 33 CPC) के तहत अपीलीय शक्तियां व्यापक...

वॉलंटरी रिटायरमेंट के आवेदन पर निर्णय में देरी किसी कर्मचारी को पेंशन लाभों से वंचित नहीं कर सकती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
वॉलंटरी रिटायरमेंट के आवेदन पर निर्णय में देरी किसी कर्मचारी को पेंशन लाभों से वंचित नहीं कर सकती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि वॉलंटरी रिटायरमेंट के आवेदन पर निर्णय न होने से किसी कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद पेंशन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।पृष्ठभूमि तथ्यप्रतिवादी को 31.12.1983 को कृषि विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 17.04.2006 को अवकाश के लिए आवेदन किया, जो 15.06.2006 तक स्वीकृत था। हालांकि, अवकाश समाप्त होने के बाद उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उन्होंने 20.10.2008 को ही कार्यभार...

जम्मू-कश्मीर में कोई भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ प्रवेश न करे: हाईकोर्ट ने सड़े हुए मांस और मिलावटी उत्पादों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए
"जम्मू-कश्मीर में कोई भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ प्रवेश न करे": हाईकोर्ट ने सड़े हुए मांस और मिलावटी उत्पादों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर संभागों के पुलिस महानिरीक्षकों और खाद्य सुरक्षा आयुक्त तथा औषधि एवं खाद्य नियंत्रण संगठन, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि "खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अनुसार कोई भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में प्रवेश न करे।"चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस राजेश ओसवाल की खंडपीठ एडवोकेट मीर उमर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में सड़े और अस्वास्थ्यकर...

सहकारी समिति के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु केवल वैधानिक संशोधन के माध्यम से बढ़ाई जा सकती है, विभागीय प्रस्तावों से नहीं: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
सहकारी समिति के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु केवल वैधानिक संशोधन के माध्यम से बढ़ाई जा सकती है, विभागीय प्रस्तावों से नहीं: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट की जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अज़ीम की खंडपीठ ने कहा कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 1988 के एसआरओ 233 के अनुसार 58 वर्ष ही रहेगी और इसे केवल वैधानिक नियमों में औपचारिक संशोधन के माध्यम से ही बदला जा सकता है, विभागीय सिफारिशों, प्रस्तावों या मसौदा संशोधनों द्वारा नहीं। तथ्यअपीलकर्ता जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की सहकारी समितियों के कर्मचारी थे। अपीलकर्ता सेवा में शामिल हुए और उन्हें सहायक प्रबंधक के पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि...

सरकारी नौकरी से पहले आवेदन किया तो वकील को पूरा प्रैक्टिस लाइसेंस मिलेगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
सरकारी नौकरी से पहले आवेदन किया तो वकील को पूरा प्रैक्टिस लाइसेंस मिलेगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने एक वकील के अस्थायी लाइसेंस को रद्द करने को रद्द कर दिया है, जिसे इस आधार पर पूर्ण लाइसेंस से वंचित कर दिया गया था कि वह बाद में अभियोजन अधिकारी के रूप में सरकारी सेवा में शामिल हो गया था।जस्टिस जावेद इकबाल वानी और जस्टिस मोक्ष खजूरिया काजमी की खंडपीठ ने कहा कि जब एक वकील ने पहले ही पूर्ण लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है, तो आवेदन को आगे बढ़ाने में बार काउंसिल की देरी को उसके खिलाफ केवल इसलिए नहीं पढ़ा जा सकता क्योंकि उसे बाद में सरकारी सेवा में नियुक्त किया गया था। ...

शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर नियुक्ति एक अलग वर्ग है, जो जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा अधिनियम के तहत नियमितीकरण के लिए पात्र नहीं है: J&K हाईकोर्ट
शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर नियुक्ति एक अलग वर्ग है, जो जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा अधिनियम के तहत नियमितीकरण के लिए पात्र नहीं है: J&K हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर नियुक्त व्याख्याता, स्पष्ट रिक्तियों के विरुद्ध तदर्थ, संविदात्मक या समेकित आधार पर नियुक्त व्याख्याताओं से अलग एक अलग वर्ग का गठन करते हैं, और इसलिए वे जम्मू और कश्मीर सिविल सेवा (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2010 के तहत नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने 2010 के अधिनियम की धारा 3(बी), धारा 10(2) और धारा 10(2ए) की वैधता को चुनौती देने वाली और ऐसे नियुक्त व्याख्याताओं के नियमितीकरण के...

दिव्यांगता पेंशन PCDA(P) मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों को रद्द नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
दिव्यांगता पेंशन PCDA(P) मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों को रद्द नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक PCDA (पेंशन) को विधिवत गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा निर्धारित दिव्यांगता प्रतिशत को बदलने या कम करने का कोई अधिकार नहीं है। केवल उच्च/समीक्षा मेडिकल बोर्ड ही इसका पुनर्मूल्यांकन कर सकता है। दिव्यांगता पेंशन को पूर्णांकित करने का लाभ सामान्य रिटायरमेंट के उन मामलों में भी लागू होता है, जहां दिव्यांगता सैन्य सेवा के कारण हुई हो या उसके कारण बढ़ी हो।पृष्ठभूमि तथ्यप्रतिवादी 18.02.1976 को...

लाभकारी निजी प्रैक्टिस में बिताई गई निलंबन अवधि को अवकाश माना जाएगा; कर्मचारी वेतन पाने का हकदार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
लाभकारी निजी प्रैक्टिस में बिताई गई निलंबन अवधि को अवकाश माना जाएगा; कर्मचारी वेतन पाने का हकदार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि जिस निलंबन अवधि के दौरान कर्मचारी निजी प्रैक्टिस में लाभप्रद रूप से लगा हुआ था, उसे अवकाश माना जाना चाहिए और कर्मचारी ऐसी अवधि के लिए वेतन पाने का पात्र नहीं है। तथ्यप्रतिवादी अनंतनाग जिला अस्पताल में सर्जरी में बी-ग्रेड विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत था। 16.08.2006 को उसने एक महिला मरीज की पित्ताशय की थैली की सर्जरी की। दुर्भाग्य से उसी शाम उसकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने 19.08.2006 के आदेश द्वारा चिकित्सीय...

आपराधिक मामले में बरी होने पर विभिन्न आरोपों पर CrPF नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई पर रोक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
आपराधिक मामले में बरी होने पर विभिन्न आरोपों पर CrPF नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई पर रोक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने कहा कि सीआरपीएफ नियम, 1955 का नियम 27(गगग) लागू नहीं होता क्योंकि विभागीय जांच हथियारों के दुरुपयोग पर आधारित थी, जो हत्या के आपराधिक आरोप से अलग थी, और किसी आपराधिक मामले में बरी होना अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता। पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि नियम 27(ग) के तहत प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य नहीं है, और उसकी अनुपस्थिति जांच को तब तक निष्प्रभावी नहीं बनाती जब तक कि जांच अधिकारी अभियोजक के रूप...

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सहकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 58 से 60 वर्ष करने की याचिका खारिज की
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सहकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 58 से 60 वर्ष करने की याचिका खारिज की

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों की सेवा से निवृत्ति की आयु 58 वर्ष ही रहेगी, जैसा कि एसआरओ 233 ऑफ 1988 में निर्धारित है। अदालत ने कहा कि केवल विभागीय प्रस्तावों, ड्राफ्ट संशोधनों या सिफारिशों के आधार पर इस आयु को 60 वर्ष तक नहीं बढ़ाया जा सकता।जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहज़ाद अज़ीम की खंडपीठ ने दो सहकारी कर्मचारियों की अपीलों को खारिज करते हुए कहा,"जब तक एसआरओ 233 ऑफ 1988 प्रभावी है, सहकारी समितियों के कर्मचारियों की सेवा शर्तें किसी भी...

DV Act| S. 468, CrPC के तहत परिसीमा सुरक्षा आदेश की मांगने पर लागू नहीं होतीं, केवल धारा 31 के तहत दंडात्मक कार्यवाही पर लागू होती हैं: J&K हाईकोर्ट
DV Act| S. 468, CrPC के तहत परिसीमा सुरक्षा आदेश की मांगने पर लागू नहीं होतीं, केवल धारा 31 के तहत दंडात्मक कार्यवाही पर लागू होती हैं: J&K हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (अब BNSS, 2023 की धारा 514) की धारा 468 के तहत परिसीमा का प्रतिबंध, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (घरेलू हिंसा अधिनियम) की धारा 12 और 23 के तहत दायर आवेदनों पर लागू नहीं होता है। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत ये धाराएं पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा आदेश, निवास आदेश आदि या अंतरिम या एकपक्षीय राहत जैसी राहत का दावा करने का अधिकार देती हैं। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि परिसीमा प्रावधान केवल घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 31 के...

कंपनी डायरेक्टर के कानूनी उत्तराधिकारी कंपनी की संपत्ति पर मुकदमा नहीं कर सकते, केवल शेयरधारक या निदेशक ही कर सकते हैं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
कंपनी डायरेक्टर के कानूनी उत्तराधिकारी कंपनी की संपत्ति पर मुकदमा नहीं कर सकते, केवल शेयरधारक या निदेशक ही कर सकते हैं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया कि एक कंपनी एक अलग कानूनी इकाई होने के नाते केवल उसे ही अपनी संपत्ति के संबंध में मुकदमा करने का अधिकार है। ऐसी कार्रवाई केवल उसके शेयरधारकों या निदेशकों के माध्यम से ही शुरू की जा सकती है, न कि उसके संस्थापक के कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा अपनी व्यक्तिगत क्षमता में।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ मेसर्स हामिद ऑयल मिल्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक के उत्तराधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही थी, जिन्होंने औद्योगिक परिसर खोनमोह में पट्टे पर दी...