हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा 24 घंटे निगरानी की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा 24 घंटे निगरानी की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 24 घंटे निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे कदम उठाने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर पंजाब सरकार, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से जवाब मांगा।एक्टिंग चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस लपिता बनर्जी की खंडपीठ ने भारत संघ, पंजाब, हरियाणा की राज्य सरकारों और अन्य प्राधिकारियों को नोटिस जारी किया।पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के वकील कंवर पाहुल सिंह ने याचिका दायर कर कहा कि हाल ही में प्रकाश नामक चाय विक्रेता अपनी...

भारतीय वन अधिनियम के तहत भूमि को आरक्षित वन घोषित करने वाली अधिसूचनाओं के खिलाफ निषेधाज्ञा का कोई मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भारतीय वन अधिनियम के तहत भूमि को आरक्षित वन घोषित करने वाली अधिसूचनाओं के खिलाफ निषेधाज्ञा का कोई मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 4 और धारा 20 के तहत एक भूमि को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना के खिलाफ उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 229बी के तहत स्थायी निषेधाज्ञा का मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। जस्टिस रजनीश कुमार ने माना कि ऐसी अधिसूचनाओं को 1927 के अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार केवल वन बंदोबस्त अधिकारी के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। मामले में न्यायालय ने पाया कि प्रतिवादी द्वारा भरोसा किए गए समान आदेशों...

केवल सेल्स डीड की फोटोकॉपी के आधार पर की गई वृद्धि पूरी तरह से अनुचित: दिल्ली हाइकोर्ट
केवल सेल्स डीड की फोटोकॉपी के आधार पर की गई वृद्धि पूरी तरह से अनुचित: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने माना कि केवल सेल्स डीड की फोटोकॉपी के आधार पर की गई वृद्धि पूरी तरह से अनुचित है।जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की खंडपीठ ने कहा कि वृद्धि की पूरी नींव कथित सेल्स डीड की फोटोकॉपी के आधार पर रखी गई। दस्तावेज़ की ओरिजिनल कॉपी अभी तक सामने नहीं आई।कथित समझौते में किए गए कथनों की सत्यता का समर्थन करने के लिए कोई अन्य सबूत नहीं है। इसलिए इसे करदाता की आय में वृद्धि के लिए स्थायी आधार के रूप में नहीं माना जा सकता।AO को यह सूचना 5 मार्च 2010 को कथित सेल्स डीड की...

झगड़ा क्षणिक आवेश में हुआ, कोई पूर्व-योजना नहीं थी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या की सजा को गैर-इरादतन हत्या में बदला
झगड़ा क्षणिक आवेश में हुआ, कोई पूर्व-योजना नहीं थी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या की सजा को गैर-इरादतन हत्या में बदला

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या के मामले में दोषसिद्धि को आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या में बदला है, यह देखते हुए कि दोषी और मृतक के बीच जो झगड़ा हुआ था वह पूर्व-योजनाबद्ध नहीं था।जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने कहा,"यह न्यायालय इस तथ्य से अवगत है कि यह घटना वर्ष 2006 में हुई, जब अभियुक्त और मृतक के बीच अचानक झगड़ा हुआ। यह कोई पूर्व-योजना नहीं थी और अपराध क्षण भर में किया गया। अपीलकर्ता निहत्था था और चोट ईंट के वार से लगी...

सार्वजनिक परीक्षाओं का उद्देश्य इतना प्रतिबंधात्मक नहीं माना जा सकता कि यह अभ्यर्थियों के प्रति क्रूर हो: कलकत्ता हाईकोर्ट
सार्वजनिक परीक्षाओं का उद्देश्य इतना प्रतिबंधात्मक नहीं माना जा सकता कि यह अभ्यर्थियों के प्रति क्रूर हो: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि सार्वजनिक परीक्षा के उद्देश्य को ऐसे प्रतिबंधात्मक तरीके से नहीं समझा जा सकता, जो इसे उम्मीदवारों के लिए क्रूर बना दे।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा:सार्वजनिक परीक्षा का उद्देश्य किसी भी तरह से इतना प्रतिबंधात्मक नहीं माना जा सकता है कि यह उम्मीदवारों पर क्रूर हो, खासकर याचिकाकर्ता जैसे प्रतिभाशाली लोगों के लिए, जो पहले ही संबंधित कठिन बैंकिंग परीक्षा में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। सरकार की कोशिश ऐसे लोगों को प्रोत्साहित...

Article 21A किसी भी बच्चे को विशेष पसंद के स्कूल में शिक्षा पाने का संवैधानिक अधिकार नहीं देता: दिल्ली हाईकोर्ट
Article 21A किसी भी बच्चे को विशेष पसंद के स्कूल में शिक्षा पाने का संवैधानिक अधिकार नहीं देता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21ए (Article 21A) केवल चौदह वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के लिए है। यह किसी भी बच्चे को अपनी पसंद के किसी विशेष स्कूल में शिक्षित होने का संवैधानिक अधिकार नहीं देता।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि ऐसा अधिकार तभी उत्पन्न होगा, जब बच्चा उस वर्ष एडमिशन स्तर की कक्षा में प्रवेश के लिए ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के स्टूडेंट के रूप में शिक्षा निदेशालय (DoE) में आवेदन करता है और कम्प्यूटरीकृत ड्रा में शॉर्टलिस्ट किया जाता है।अदालत...

S.148 NI Act | अपीलीय अदालत को न्यूनतम 20% जुर्माना माफ करने या जमा करने का आदेश देने का अधिकार, लेकिन उसे कारण बताना होगा: केरल हाईकोर्ट
S.148 NI Act | अपीलीय अदालत को न्यूनतम 20% जुर्माना माफ करने या जमा करने का आदेश देने का अधिकार, लेकिन उसे कारण बताना होगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना कि अपीलीय न्यायालय के पास परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 148 के तहत जुर्माना या मुआवजा राशि जमा करने का आदेश देने या माफ करने का वैधानिक अधिकार है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चूंकि अपीलीय न्यायालय वैधानिक विवेक का प्रयोग करेगा, इसलिए वह जमा करने का आदेश देने या जुर्माना या मुआवजा राशि जमा करने से छूट देने के लिए कारण बताने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा।एक्ट की धारा 138 के तहत चेक अनादर के लिए सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते समय अपीलीय अदालत एक्ट की धारा 148 के...

अनुच्छेद 311(1) सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा की गारंटी देता है, जिसमें किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच का अधिकार भी शामिल: कर्नाटक हाईकोर्ट
अनुच्छेद 311(1) सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा की गारंटी देता है, जिसमें किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच का अधिकार भी शामिल: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद द्वारा एक सहायक प्रोफेसर पर लगाए गए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दंड को रद्द कर दिया है। ज‌स्टिस सचिन शंकर मगदुम की सिंगल जज बेंच ने डॉ योगानंद ए द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और कहा, “अनुलग्नक-ए के अनुसार प्रतिवादी नंबर 2 द्वारा पारित अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड रद्द किया जाता है। प्रतिवादी संख्या 3-अनुशासनात्मक प्राधिकारी को उपरोक्त निर्णय में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने और भारत के संविधान के...

लोक अदालतें ऐसे किसी भी आवेदन पर विचार नहीं कर सकती हैं जहां न्यायिक आदेश पारित किए जाने की आवश्यकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
लोक अदालतें ऐसे किसी भी आवेदन पर विचार नहीं कर सकती हैं जहां न्यायिक आदेश पारित किए जाने की आवश्यकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि लोक-अदालत द्वारा पारित एक आदेश समझौते को स्वीकार करने और वाद की डिक्री का निर्देश देने के लिए वैध नहीं है।जस्टिस वी श्रीशानंद की सिंगल जज बेंच ने पूजा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और तालुका कानूनी प्राधिकरण, सिंदगी (लोक अदालत) द्वारा पारित 27-10-2007 के समझौता डिक्री को रद्द कर दिया। इसमें कहा गया, "चूंकि सुलहकर्ताओं ने लोक-अदालत की अध्यक्षता करते हुए न्यायिक शक्तियों का प्रयोग किया है, इसलिए समझौते को स्वीकार करने और वाद की डिक्री का निर्देश देने में...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच को लोकपाल के निर्देशों की अवहेलना करके न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन करने वाले सदस्यों के लिए प्रशिक्षण का आदेश दिया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच को लोकपाल के निर्देशों की अवहेलना करके न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन करने वाले सदस्यों के लिए प्रशिक्षण का आदेश दिया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने विद्युत लोकपाल के निर्देशों की अवहेलना करने पर विद्युत अधिनियम 2003 के तहत गठित उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के सदस्यों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने न्यायिक अनुशासन में उनके प्रशिक्षण का आदेश दिया है इससे पहले कि वे मामलों का फैसला फिर से शुरू कर सकें।न्यायिक शिष्टाचार का उल्लंघन करने के लिए फोरम के सदस्यों को फटकार लगाते हुए जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने कहा, "स्पष्ट रूप से, ऐसी परिस्थितियों में, उपरोक्त दोनों सदस्यों को अधिनिर्णायक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने...

घरेलू हिंसा अधिनियम| बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस महिला के लिए 3 करोड़ रुपये का मुआवज़ा बरकरार रखा, जिसके पति ने उसे सेकंड-हैंड कहा था
घरेलू हिंसा अधिनियम| बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस महिला के लिए 3 करोड़ रुपये का मुआवज़ा बरकरार रखा, जिसके पति ने उसे "सेकंड-हैंड" कहा था

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति को घरेलू हिंसा के विभिन्न कृत्यों के लिए अपनी पूर्व पत्नी को 3 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। व्यक्ति का आरोप था कि उसने अपनी पत्नी को "सेकंड हैंड" कहा था, क्योंकि उसकी किसी अन्य व्यक्ति के साथ सगाई टूट गई थी। जस्टिस शर्मिला यू देशमुख ने आदेशों के खिलाफ व्यक्ति के पुनरीक्षण आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया -“यद्यपि दुर्व्यवहार का परिणाम आवश्यक रूप से पीड़ित व्यक्ति के लिए मानसिक यातना और...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बाहरी राज्य से शिक्षण अनुभव प्राप्त करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा अस्वीकृत शिक्षकों की नियुक्ति का निर्देश दिया, कहा कि कार्रवाई अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बाहरी राज्य से शिक्षण अनुभव प्राप्त करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा अस्वीकृत शिक्षकों की नियुक्ति का निर्देश दिया, कहा कि कार्रवाई अनुच्छेद 14 का उल्लंघन

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के एक शिक्षक की नियुक्ति का निर्देश दिया है, जिसकी नियुक्ति को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि आवश्यक अनुभव उसे राज्य के बाहर पढ़ाने से प्राप्त हुआ था। यह कहा गया था कि एक उम्मीदवार जो पंजाब में मुख्य शिक्षक के पद के लिए योग्य थी, उसे नियुक्ति से वंचित कर दिया गया क्योंकि उसने हरियाणा सरकार के स्कूल से इस पद के लिए आवश्यक आवश्यक अनुभव प्राप्त किया था। पंजाब सरकार ने दावा किया कि पंजाब सिविल सेवा नियमों के तहत "राज्य सरकारी स्कूल" का मतलब केवल पंजाब...

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम| लोक सेवक की परिभाषा दायरे में निजी बैंक के अध्यक्ष, एमडी और कार्यकारी निदेशक भी: तेलंगाना हाईकोर्ट
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम| "लोक सेवक" की परिभाषा दायरे में निजी बैंक के अध्यक्ष, एमडी और कार्यकारी निदेशक भी: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने माना कि एक निजी बैंक के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत परिभाषित 'लोक सेवक' की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं और निचली अदालत द्वारा अभियुक्त की स्वीकार की गई डिस्चार्ज याचिको रद्द करते हुए रिविजन का आदेश दिया। यह आदेश जस्टिस ईवी वेणुगोपाल ने सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर दिया, जिसने सीबीआई विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। सीबीआई विशेष जज की ओर से दिए गए आदेश के बाद उत्तरदाताओं/अभियुक्तों को भ्रष्टाचार निवारण...

कार चालक द्वारा ट्रक में पीछे से टक्कर मारने के पीछे कोई लापरवाही नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
कार चालक द्वारा ट्रक में पीछे से टक्कर मारने के पीछे कोई लापरवाही नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि अगर किसी ट्रक की ब्रेक लाइट या टेललाइट काम नहीं कर रही है और कोई कार पीछे से उसमें टक्कर मारती है तो कार चालक टक्कर में योगदान देने वाली किसी भी लापरवाही के लिए उत्तरदायी नहीं है।जस्टिस शिवकुमार डिगे ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें मृतक को दुर्घटना के लिए 50% जिम्मेदार ठहराया गया था। अदालत ने मृतक कार चालक को दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाकर लगभग दोगुना करके 29,40,000 रुपये कर दिया।कोर्ट ने कहा,“बिना किसी ब्रेक लाइट या टेल लैंप के 70 फीट...

तेलंगाना हाइकोर्ट ने न्यायालय की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए नियम अधिसूचित किए
तेलंगाना हाइकोर्ट ने न्यायालय की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए नियम अधिसूचित किए

तेलंगाना राजपत्र ने तेलंगाना हाइकोर्ट की ओर से न्यायिक अधिसूचना जारी की। इसके माध्यम से न्यायालय की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए नियम निर्धारित किए गए।वर्ष 2022 में जारी हाइकोर्ट ने अब वर्चुअल लाइव-स्ट्रीमिंग बोर्ड के ऊपर इन नियमों का लिंक जोड़ा, जिसे हाइकोर्ट की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।नियम 5 उन मामलों को निर्धारित करता है, जिन्हें लाइव-स्ट्रीमिंग से बाहर रखा जाएगा। इसमें वैवाहिक विवाद बच्चों से संबंधित मामले आदि शामिल हैं। इसमें एक फॉर्म भी निर्धारित किया गया, जिसके...

जिला न्यायालयों में सभी हितधारकों के लिए वाई-फाई एक्सेस की मांग करने वाली याचिका पर 8 सप्ताह के भीतर फैसला करें: दिल्ली सरकार से हाइकोर्ट
जिला न्यायालयों में सभी हितधारकों के लिए वाई-फाई एक्सेस की मांग करने वाली याचिका पर 8 सप्ताह के भीतर फैसला करें: दिल्ली सरकार से हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह न्यायाधीशों, वकीलों, मीडियाकर्मियों और वादियों सहित सभी हितधारकों के लाभ के लिए राष्ट्रीय राजधानी की सभी जिला अदालतों में निर्बाध वाई-फाई एक्सेस की मांग करने वाली जनहित याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में ले।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को कानून के अनुसार, स्पीकिंग ऑर्डर के माध्यम से आठ सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व पर फैसला करने का निर्देश दिया।अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता,...

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने तेलंगाना हाइकोर्ट के नए भवन की आधारशिला रखी, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए समावेशी बुनियादी ढांचे की वकालत की
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने तेलंगाना हाइकोर्ट के नए भवन की आधारशिला रखी, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए समावेशी बुनियादी ढांचे की वकालत की

चीफ जस्टिस डीवाई ऑफ इंडिया (सीजेआई) चंद्रचूड़ ने बुधवार को महिलाओं और दिव्यांगों सहित सभी के लिए अदालतों में अनुकूल बुनियादी ढांचे का आह्वान किया। तेलंगाना हाइकोर्ट के नए भवन की आधारशिला रखते हुए उन्होंने कहा,"बुनियादी ढांचे में खराब शौचालय, महिलाओं के लिए बार रूम की अनुपस्थिति, रैंप की कमी के रूप में बहिष्कार के संकेत नहीं होने चाहिए। उनकी अनुपस्थिति में स्पष्ट रूप से वे लोगों को बताते हैं कि न्यायालय उनके लिए नहीं हैं या उन्हें न्याय तक पहुँच पाने के लिए अतिरिक्त बाधाओं को पार करना होगा। खराब...