मुख्य सुर्खियां

राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा कि आईपीसी 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच में भेजा जाए या नहीं
राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा कि आईपीसी 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच में भेजा जाए या नहीं

भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं में, जो राजद्रोह को अपराध बनाती है, सुप्रीम कोर्ट के 3-जजों ने गुरुवार को प्रारंभिक मुद्दे पर विचार करने का फैसला किया कि क्या 1962 के केदारनाथ फैसले को एक बड़ी बेंच के संदर्भ की आवश्यकता है जिसमें 5-न्यायाधीशों की बेंच ने खंड को बरकरार रखा था।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने संदर्भ के मुद्दे पर प्रारंभिक बहस सुनने के लिए 10 मई को दोपहर 2 बजे मामले की सुनवाई सूचीबद्ध की है।पीठ ने सभी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
थाना प्रभारी की अनुमति के बिना किसी को मौखिक रूप से थाने नहीं बुलाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश राज्य और पुलिस समेत अन्य शासन तंत्रों को जारी एक महत्वपूर्ण निर्देश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को, जिसमें एक आरोपी भी शामिल है, थाना प्रभारी की सहमति/अनुमोदन के बिना अधीनस्थ पुलिस अधिकारी मौखिक रूप से पुलिस थाने में समन नहीं कर सकते।जस्टिस अरविंद कुमार मिश्रा- I और जस्टिस मनीष माथुर की खंडपीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया,"यदि किसी पुलिस स्टेशन में कोई आवेदन या शिकायत दी जाती है, जिसमें जांच और आरोपी की उपस्थिति की आवश्यकता होती है तो...

केवल कुछ महीनों तक साथ रहने और बच्चा होने से विवाह की धारणा नहीं बनती, पार्टियों का आचरण प्रासंगिक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
केवल कुछ महीनों तक साथ रहने और बच्चा होने से विवाह की धारणा नहीं बनती, पार्टियों का आचरण प्रासंगिक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक घोषणात्मक मुकदमे में आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर कहा कि विवाह की धारणा आचरण, जीवन के ढंग और अन्य व्यक्तियों के झुकाव से निर्धारित होती है।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा,"कानून का अनुमान विवाह के पक्ष में और अवैध रिश्ते (concubinage)के खिलाफ है। जब एक पुरुष और एक महिला को कई वर्षों तक लगातार साथ रहे, लेकिन सबूत यह है कि अपीलकर्ता नंबर एक श्रीमती जानकी यादव केवल कुछ महीनों के लिए ही रहीं, इसलिए उक्त विवाह का अनुमान भी नहीं लगाया...

उम्रकैद यानी आखिरी सांस तक कैद, अदालत आजीवन कारावास की अवधि तय नहीं कर सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट
उम्रकैद यानी आखिरी सांस तक कैद, अदालत आजीवन कारावास की अवधि तय नहीं कर सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आजीवन कारावास (Life Sentence) की सजा अभियुक्त के प्राकृतिक जीवन तक है जिसे हाईकोर्ट द्वारा वर्षों की संख्या में तय नहीं किया जा सकता। जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने वर्ष 1997 के एक मामले में निचली अदालत द्वारा हत्या के पांच दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए कहा।अदालत के समक्ष जब यह तर्क दिया गया कि दोषियों में से एक, कल्लू, जो पहले ही लगभग 20-21 साल जेल में काट चुका है, उसकी सज़ा की अवधि को देखते हुए क्या उसकी...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी परीक्षा में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की राज्य नीति पर रोक लगाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी परीक्षा में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की राज्य नीति पर रोक लगाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की राज्य सरकार की नीति पर रोक लगाई है।स्टे को न्यायालय द्वारा समान मामलों में दी गई समान अंतरिम राहत के परिणामस्वरुप प्रदान किया गया है, जिसमें ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की उक्त नीति को चुनौती दी जा रही थी।अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस शील नागू और जस्टिस एम.एस. भट्टी ने देखा,"वह मुद्दा जो ओबीसी श्रेणी को 27% तक आरक्षण का लाभ प्रदान करने के संबंध में सभी...

मद्रास हाईकोर्ट
श्रीलंकाई नागरिकों के पास मिले नकली भारतीय पासपोर्ट: मद्रास हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को 35 आधार कार्डों का विवरण 'क्यू' शाखा-सीआईडी के साथ साझा करने का निर्देश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में उप निदेशक, यूआईडीएआई को पुलिस उपाधीक्षक, "क्यू" शाखा सीआईडी, चेन्नई शहर द्वारा मांगे गए 35 आधार कार्डों का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।जस्टिस जी जयचंद्रन ने यूआईडीएआई द्वारा उनके अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद उपाधीक्षक की याचिका पर उपरोक्त आदेश दिया, जिसमें संबंधित आधार कार्ड के आवेदकों द्वारा जमा किए गए केवाईसी दस्तावेजों के साथ आधार कार्ड नंबरों के बारे में जानकारी मांगी गई थी।याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत प्रतिवादी को आधार कार्ड की वास्तविकता सहित...

शुतुरमुर्ग मानसिकता वाले लोगों द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र से महिला के चरित्र का फैसला नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
शुतुरमुर्ग मानसिकता वाले लोगों द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र से महिला के चरित्र का फैसला नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा है कि यदि पत्नी पति की इच्छा के अनुसार सांचे में नहीं ढलती है तो यह बच्चे की कस्टडी को खोने का निर्णायक कारक नहीं होगा।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि समाज के कुछ सदस्यों द्वारा दिया गया चरित्र प्रमाण पत्र, जो शुतुरमुर्ग मानसिकता वाले हो सकते हैं, एक महिला के चरित्र को तय करने का आधार नहीं हो सकते।इसके साथ, कोर्ट ने फैमिली कोर्ट, महासमुंद के एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादी/पिता के पक्ष में 14 साल के...

शिक्षित होने के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
शिक्षित होने के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को अच्छी तरह से शिक्षित होने के आधार पर भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी और बच्चों की देखभाल के लिए कानूनी और नैतिक रूप से जिम्मेदार है।जस्टिस राजेश भारद्वाज की खंडपीठ ने प्रिंसिपल जज (फैमिली कोर्ट) के आदेश को चुनौती देने वाली पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की। फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में पति को अपनी पत्नी को 2,500 रुपये का मासिक भरण-पोषण (सीआरपीसी की धारा 125 के तहत आवेदन दाखिल करने की तारीख...

गुजरात हाईकोर्ट
'बच्‍चों का कल्याण सर्वोपरि': गुजरात हाईकोर्ट ने 5 साल के अनाथ की कस्टडी दादा-दादी के बजाय मौसी को सौंपी

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में पांच साल के बच्चे की कस्टडी उसकी मौसी को दी है। बच्‍चे के माता-पिता का COVID-19 महामारी के दरमियान निधन हो गया था।जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस मौना भट्ट की खंडपीठ ने कहा,"बच्चे की कस्टडी के मामलों का फैसला करते समय अदालत केवल माता-पिता या अभिभावक के कानूनी अधिकार से बाध्य नहीं है। हालांकि विशेष कानूनों के प्रावधान माता-पिता या अभिभावकों के अधिकारों को नियंत्रित करते हैं, लेकिन नाबालिग बच्चे की कस्टडी से संबंधित मामले में नाबालिग का कल्याण सबसे ऊपर है। अदालत के लिए...

[कैदियों के लिए वीडियो कॉल की सुविधा] जब इसकी अनुमति दी गई थी तो क्या कोई सुरक्षा उल्लंघन हुआ था? बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य से पूछा
[कैदियों के लिए वीडियो कॉल की सुविधा] जब इसकी अनुमति दी गई थी तो क्या कोई सुरक्षा उल्लंघन हुआ था? बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य से पूछा

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने बुधवार को पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) द्वारा वीडियो कॉलिंग को फिर से शुरू करने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या महामारी के दौरान जेल के कैदियों के लिए वीडियो कॉल की अनुमति दी गई थी, तो क्या कोई सुरक्षा उल्लंघन हुआ था।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस वीजी बिष्ट की पीठ ने राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, जिसमें जेल के कैदियों और उनके वकीलों और परिवार के तत्काल सदस्यों के...

पुनर्मूल्यांकन केवल अधिकारी या उसके उत्तराधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए, न कि समान रैंक के किसी अधिकारी द्वारा: गुजरात हाईकोर्ट
पुनर्मूल्यांकन केवल अधिकारी या उसके उत्तराधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए, न कि समान रैंक के किसी अधिकारी द्वारा: गुजरात हाईकोर्ट

जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस राजेंद्र एम. सरैन की गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ ने डीआरआई (Directorate of Revenue Intelligence) द्वारा शुरू किए गए पुनर्मूल्यांकन को अमान्य करते हुए कहा कि मूल्यांकन करने वाला अधिकारी ही पुनर्मूल्यांकन कर सकता है।याचिकाकर्ता/निर्धारिती (Assessee) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और इंकजेट प्रिंटर, लेजर प्रिंटर, और प्रिंटर के लिए पुर्जों के साथ-साथ सामान जैसे सामानों के व्यापार और निर्माण के व्यवसाय में है। याचिकाकर्ता कंटीन्यूअस इंकजेट प्रिंटर्स (सीआईजे प्रिंटर्स), लेजर...

जब कोई व्यक्ति पुलिस/न्यायिक हिरासत में होता है, तब भी निवारक निरोध आदेश पारित किए जा सकते हैं: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जब कोई व्यक्ति पुलिस/न्यायिक हिरासत में होता है, तब भी निवारक निरोध आदेश पारित किए जा सकते हैं: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि निवारक निरोध के आदेश (Preventive Detention Orders) तब भी पारित किए जा सकते हैं, जब कोई व्यक्ति पुलिस/न्यायिक हिरासत में हो या किसी आपराधिक मामले में शामिल हो, लेकिन ऐसा करने के लिए बाध्यकारी कारणों को दर्ज किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय धर ने कहा:"यह कानून है कि निवारक निरोध आदेश तब भी पारित किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति पुलिस/न्यायिक हिरासत में हो या किसी आपराधिक मामले में शामिल हो, लेकिन ऐसा करने के लिए बाध्यकारी कारणों को दर्ज किया जाना चाहिए। हिरासत...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"पीड़िता ने अपनी आपबीती शब्दों और संकेतों में सुनाई": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन साल की लड़की के साथ बलात्कार के आरोपी 62 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार (Rape) के आरोपी 62 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया क्योंकि उसने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आरोपी ने 3 साल की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का अमानवीय कृत्य किया है।न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने यह भी कहा कि 3 वर्षीय पीड़ित लड़की ने शब्दों के साथ-साथ संकेतों में भी अपनी आपबीती सुनाई और कथित रूप से आरोपी द्वारा की गई बलात्कार की पूरी घटना को समझाया।कोर्ट ने टिप्पणी की,"प्रथम...

मद्रास हाईकोर्ट
जिस आर्बिट्रल अवार्ड में एनएचए के तहत अधिग्रहित भूमि पर वैधानिक मुआवजा नहीं दिया गया, वह विकृत: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने माना है कि एक मध्यस्थ निर्णय जो राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत अधिग्रहित भूमि के संबंध में अनिवार्य वैधानिक मुआवजे के भुगतान का प्रावधान नहीं करता है, विकृत है।जस्टिस पीटी आशा ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने वाले मध्यस्थ को यह सुनिश्चित करने में अधिक सतर्क रहना होगा कि मध्यस्थ निर्णय उचित हो और भूमि मालिक को उसके कानूनी अधिकार के अनुसार पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।न्यायालय ने जिला जज के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसने मध्यस्थ निर्णय...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2011 बैच के 362 केपीएससी गैजेटेड प्रोबेशनर्स की भर्ती को वैध करने वाले कानून को दी गई चुनौती खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कर्नाटक सिविल सेवा (2011 बैच गैजेटेड प्रोबेशनर्स के चयन और नियुक्ति का वेरीफिकेशन) अधिनियम 2022 को असंवैधानिक, अवैध और शून्य घोषित करने की मांग वाली याचिका कर दी।उक्त अधिनियम के माध्यम से सरकार ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित 2011 बैच के 362 गैजेटेड प्रोबेशनर्स की भर्ती को मान्य किया है।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस एस आर कृष्ण कुमार की खंडपीठ ने मोहम्मद आरिफ जमील द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा,"हमारा विचार है कि पूरा अधिनियम कानून के अंतर्गत...

पश्चिम बंगाल में हीटवेव: स्कूल की गर्मी की छुट्टियों को बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
पश्चिम बंगाल में हीटवेव: स्कूल की गर्मी की छुट्टियों को बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के समक्ष जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें मौजूदा हीटवेव की स्थिति को देखते हुए 2 मई से 15 जून तक स्कूलों के लिए 45 दिनों की गर्मी की छुट्टी घोषित की गई है।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले महीने पूरे पश्चिम बंगाल के सभी शैक्षणिक संस्थानों को गर्मियों की शुरुआत में छुट्टी लेने की सिफारिश की थी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से स्कूलों को यह बताने के लिए कहा था कि वे 2 मई से गर्मी की छुट्टी शुरू कर...

एक दस्तावेज को वचनपत्र तभी माना जा सकता है, जब वह रूप और आशय दोनों में वचनपत्र हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
एक दस्तावेज को वचनपत्र तभी माना जा सकता है, जब वह रूप और आशय दोनों में वचनपत्र हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी दस्तावेज को वचनपत्र (promissory note) के रूप में तभी माना जा सकता है जब वह रूप और आशय दोनों में वचनपत्र हो।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने टिप्पणी की कि यदि दस्तावेज में ऋणग्रस्तता स्वीकार की जाती है कि कोई भी निर्धारित राशि मांग पर देय है, तभी दस्तावेज को एक वचन पत्र कहा जा सकता है।अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, धमतरी के फैसले से पैदा हुई सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96 के तहत पहली अपील दायर की गई थी, जिसमें प्रतिवादियों के खिलाफ 3,00,000 रुपये की...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरवर राव, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को डिफॉल्ट जमानत की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरवर राव, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को डिफॉल्ट जमानत की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद मामले में तीन आरोपियों द्वारा दायर पुनर्विचार आवेदन को खारिज कर दिया। इस आवेदन में उन्हें डिफ़ॉल्ट जमानत से इनकार करने के आदेश में जमानत और तथ्यात्मक सुधार की मांग की गई थी।अदालत ने तीनों द्वारा दायर पुनर्विचार आवेदन का निपटारा किया। इसमें उन्हें डिफ़ॉल्ट जमानत से इनकार करने और बाद में रिहा करने के आदेश में तथ्यात्मक सुधार की मांग की गई थी।जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की अगुवाई वाली खंडपीठ ने 22 मार्च, 2022 को आदेश के लिए याचिका को सुरक्षित...

केरल हाईकोर्ट
गणना किए जाने वाले दस्तावेज़ को रद्द करने की मांग वाले मुकदमे में दस्तावेज़ में दिखाए गए मूल्य के आधार पर कोर्ट फीस का भुगतान किया जाएगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने हाल ही में कहा कि जब किसी दस्तावेज़ को रद्द या शून्य घोषित करने की मांग की जाती है, तो कोर्ट फीस का भुगतान दस्तावेज़ में दिखाए गए मूल्य के आधार पर किया जाएगा, जब तक कि मूल्यांकन का विषय सक्षम हो।जस्टिस ए. बधारुद्दीन ने दोहराया कि विभाजन के एक मुकदमे में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि एक समझौता डीड अमान्य है या अवैध है, उक्त घोषणा के लिए एक अलग कोर्ट फीस आवश्यक नहीं है।यहां एक प्रतिवादी द्वारा एक मुंसिफ अदालत के समक्ष वाद-पत्र की अनुसूची संपत्तियों को मेट्स...