मुख्य सुर्खियां

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने योग्य कैदियों को आपातकालीन पैरोल से इनकार करने पर जेल अधीक्षक को 7 दिन की जेल का आदेश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागपुर के केंद्रीय कारागार के अधीक्षक अनूपकुमार एम कुमरे को अवमानना ​​का दोषी ठहराया है। उन्हें COVID महामारी के दौरान चुनिंदा रूप से कैदियों को आपातकालीन पैरोल से वंचित करने के लिए सात दिनों के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।कोर्ट ने कहा, "यदि न्यायालय को पता चलता है कि सरकार (अधिकारियों) द्वारा किसी कैदी को पैरोल देने को अस्वीकार करने की कार्रवाई से भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का दम घुटता है, तो उस स्थिति में न्यायालय को कानून के शासन को बहाल करने के लिए कार्य...

लोकसभा ने कैदियों के बायोमेट्रिक्स नमूने के संग्रह की अनुमति देने वाला आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक पारित किया
लोकसभा ने कैदियों के बायोमेट्रिक्स नमूने के संग्रह की अनुमति देने वाला आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक पारित किया

लोकसभा ने सोमवार को आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 पारित किया। विधेयक जांच अधिकारियों को कैदियों के बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने में सक्षम बनाता है।विधेयक में पुलिस को उंगलियों के निशान, हथेली के निशान, पैरों के निशान, फोटोग्राफ, आईरिस और रेटिना स्कैन, फिज़िकल और बायोमेट्रिक नमूने एकत्र करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। यह सीआरपीसी की धारा 53 या धारा 53 ए के तहत संदर्भित हस्ताक्षर, लिखावट या किसी अन्य व्यवहार संबंधी विशेषताओं के संग्रह का भी प्रस्ताव करता है।वर्तमान कानून के तहत पुलिस...

धारा 91 सीआरपीसी के तहत आवेदन का निस्तारण करने का आदेश अनंतिम प्रकृति का, इसके खिलाफ कोई संशोधन नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
धारा 91 सीआरपीसी के तहत आवेदन का निस्तारण करने का आदेश अनंतिम प्रकृति का, इसके खिलाफ कोई संशोधन नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीआरपीसी की धारा 91 के तहत आवेदन की अस्वीकृति के खिलाफ पुनरीक्षण की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने दोहराया कि आक्षेपित आदेश अनंतिम प्रकृति (interlocutory in nature) का है, इसलिए इसके खिलाफ कोई पुनरीक्षण नहीं होगा।जस्टिस अतुल श्रीधरन सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक आवेदन पर विचार कर रहे थे। आवेदक ने जिसे निचली अदालत के उस आदेश से व्यथित होकर दायर किया था, जिसमें उनकी पत्नी की ओर से सीआरपीसी की धारा 91 के तहत दायर एक आवेदन...

अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण का दावा करने के लिए दूसरी जाति के व्यक्ति से विवाह प्रासंगिक नहीं: केरल हाईकोर्ट ने दोहराया
अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण का दावा करने के लिए दूसरी जाति के व्यक्ति से विवाह प्रासंगिक नहीं: केरल हाईकोर्ट ने दोहराया

केरल हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में दोहराया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण के लाभ का दावा करने के उद्देश्य से कानून द्वारा अनुमत एक जाति से दूसरी जाति के व्यक्ति के साथ विवाह की कोई प्रासंगिकता नहीं है।न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने एक महिला द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसने जाति प्रमाण पत्र के लिए उसके आवेदन को खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी। आदेश में कहा गया था कि उसने दूसरी जाति के व्यक्ति से शादी की है और इस तरह वह इसके लिए पात्र नहीं...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
जमानत याचिका पर विचार करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए गए गवाह के बयान की सत्यता का अनुमान लगाया जाना चाहिए: जेकेएल हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने माना है कि जमानत आवेदन पर विचार करते समय, अदालत को मामले की जांच के दरमियान दर्ज किए गए गवाह के बयान की सत्यता का अनुमान लगाना होता है, खासकर जब उक्त बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया हो।जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने यह टिप्‍पणी एक फैसले में की, जिसमें उन्होंने एक बलात्कार आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने फैसले में नोट किया आरोपी अपनी गिरफ्तारी से बच रहा था, जांच एजेंसी को चकमा दे रहा था और जांच के लिए खुद को जांच एजेंसी के समक्ष पेश...

मृत व्यक्ति के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता, आईपीसी की धारा 306 के तहत एफआईआर को समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता: पंजाब और हरियाणा ‌हाईकोर्ट
"मृत व्यक्ति के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता, आईपीसी की धारा 306 के तहत एफआईआर को समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता": पंजाब और हरियाणा ‌हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अप्रैल, 2022 को एक समझौते के आधार पर आईपीसी की धारा 306 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल की पीठ ने याचिकाकर्ताओं द्वारा सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने की एफआईआर रद्द करने की मांग दावा इस आधार पर किया गया था कि मृतक के परिवार और आरोपी के बीच समझौता हो गया है।मृतक के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के बाद मामला सामने आया था। मृतक की शादी...

[वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में शामिल करना] हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर उचित समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा: केंद्र ने लोकसभा को बताया
[वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में शामिल करना] 'हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर उचित समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा': केंद्र ने लोकसभा को बताया

महिला और बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) ने भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) को अपराध के रूप में शामिल करने के संबंध में सवाल का जवाब देते हुए लोकसभा को सूचित किया कि हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर सरकार द्वारा उचित समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय स्मृति जुबिन ईरानी ने यहा भी कहा कि विभाग से संबंधित गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 146 वीं रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि देश की आपराधिक न्याय...

राजस्थान हाईकोर्ट ने साइकोट्रोपिक ड्रग्स मामले के मास्टरमाइंड आनंद सिंह की जमानत रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने साइकोट्रोपिक ड्रग्स मामले के मास्टरमाइंड आनंद सिंह की जमानत रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में साइकोट्रोपिक ड्रग्स मामले के मास्टरमाइंड आनंद सिंह को दी गई जमानत रद्द कर दी। अदालत ने अन्य तीन आरोपियों अनिल चौकड़ीवाल, दीपक चौकड़ीवाल और भगवान सेन की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी।जस्टिस पंकज भंडारी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जमानत रद्द करने की अर्जी मंजूर करते हुए कहा,"आरोपी प्रतिवादी की संलिप्तता इस तथ्य से बहुत बड़ी है कि आरोपी आनंद सिंह के मोबाइल फोन में प्रासंगिक तस्वीरें और व्हाट्सएप चैट पाए गए, जो स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वह इन साइकोट्रोपिक पदार्थों...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
"दिल्ली जाओ, अदालत को इस तरह शर्मिंदा मत करो": बॉम्बे हाईकोर्ट ने न्यायिक रिक्तियों को भरने के लिए जनहित याचिका की तत्काल सुनवाई से इनकार किया

चीफ जस्टिस की बेंच ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की रिक्तियों को भरने के लिए एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और अदालत को शर्मिंदा न करने के लिए कहा।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की पीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई पर सवाल उठाया और मामले को गर्मी की छुट्टी के बाद आठ सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से एडवोकेट एकनाथ ढोकाले ने मामले का जिक्र करते...

राजस्थान हाईकोर्ट ने लोक अभियोजक से नाबालिग रेप केस में सजा निलंबित करने की मांग वाली आसाराम बापू की तीसरी अर्जी पर दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने लोक अभियोजक से नाबालिग रेप केस में सजा निलंबित करने की मांग वाली आसाराम बापू की तीसरी अर्जी पर दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा

राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की खंडपीठ ने नाबालिग रेप मामले में सजा निलंबित करने की मांग वाली आसाराम की तीसरी अर्जी पर लोक अभियोजक को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर ने आदेश दिया,"लोक अभियोजक को सजा के निलंबन के लिए इस तीसरे आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाता है।"इससे पहले, 21 मई 2021 को, राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति देवेंद्र कछवाहा की खंडपीठ ने जिला और जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का...

एससी कॉलेजियम ने पिछले साल हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए 39 महिलाओं के नाम प्रस्तावित किए, अब तक 27 सिफारिशें स्वीकृत: कानून मंत्रालय
एससी कॉलेजियम ने पिछले साल हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए 39 महिलाओं के नाम प्रस्तावित किए, अब तक 27 सिफारिशें स्वीकृत: कानून मंत्रालय

कानून और न्याय मंत्रालय ने लोकसभा को सूचित किया कि एक जनवरी, 2021 से 30 मार्च, 2022 तक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 39 महिलाओं को हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए सिफारिश की है। इनमें से 27 महिलाओं की नियुक्ति की गई और शेष 12 नाम विभिन्न चरणों में विचाराधीन हैं।कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सांसद वी.के. श्रीकंदन द्वारा हाईकोर्ट बेंचों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर पूछे गए सवालों के जवाब में उक्त जानकारी:"(क) क्या हाईकोर्ट कॉलेजियम ने अधिक महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश...

[हाईकोर्ट्स की नई पीठें] किसी भी हाईकोर्ट में नई पीठों की स्थापना के लिए सरकार के पास कोई पूर्ण प्रस्ताव लंबित नहीं: कानून एंव न्याय मंत्री ने लोकसभा को बताया
[हाईकोर्ट्स की नई पीठें] 'किसी भी हाईकोर्ट में नई पीठों की स्थापना के लिए सरकार के पास कोई पूर्ण प्रस्ताव लंबित नहीं': कानून एंव न्याय मंत्री ने लोकसभा को बताया

कानून एंव न्याय मंत्री (Law Ministry) ने लोकसभा (Lok Sabha) को सूचित किया कि वर्तमान में किसी भी हाईकोर्ट में नई पीठों की स्थापना के लिए सरकार के पास कोई पूर्ण प्रस्ताव लंबित नहीं है।कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया कि हाईकोर्ट की खंडपीठों की स्थापना जसवंत सिंह आयोग द्वारा की गई सिफारिशों और कर्नाटक में बार एसोसिएशनों के संघ में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार की जाती है और राज्य सरकार से एक पूर्ण प्रस्ताव पर विचार करने के बाद जिसमें आवश्यक व्यय और आधारभूत सुविधाएं प्रदान करना है और...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
बहुत खेदजनक स्थिति: उत्तर प्रदेश में निष्पादन न्यायालयों में 20 से अधिक वर्षों से मध्यस्थता मामलों में निष्पादन कार्यवाही लंबित होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राज्य में अधीनस्थ न्यायालयों/कार्यकारी अदालतों के समक्ष पंचाट मामलों में अवॉर्ड निष्पादित करने के लिए निष्पादन कार्यवाही की लंबितता पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि अगर आर्बिट्रेशन एक्ट के तहत अवार्ड को जल्द से जल्द निष्पादित नहीं किया जाता है, तो यह आर्बिट्रेशन एक्ट के साथ-साथ कमर्शियल कोर्ट एक्ट के उद्देश्य और लक्ष्य को विफल कर देगा।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने देखा,"यह एक बहुत ही खेदजनक स्थिति है कि मध्यस्थता अधिनियम के तहत...

विवादित दस्तावेज़ पर लिखावट की तुलना वकालत और लिखित बयान पर हस्ताक्षर से नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
विवादित दस्तावेज़ पर लिखावट की तुलना वकालत और लिखित बयान पर हस्ताक्षर से नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

हाल के एक मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि हैंड राइटिंग एक्सपर्ट को विवादित राइटिंग्स भेजने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 के तहत कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है और यह ट्रायल के किसी भी चरण में किया जा सकता है। इसके अलावा, किसी विवादित दस्तावेज पर लिखावट की तुलना वकालत और लिखित बयान पर हस्ताक्षर के साथ नहीं की जा सकती क्योंकि ये सुनिश्चित मानक दस्तावेज नहीं हैं।मामले के तथ्ययाचिकाकर्ता वाद में प्रतिवादी था। प्रतिवादी/वादी ने 1,71,600 रुपये राशि की वसूली के लिए उक्त वाद...

अभियुक्तों की आवाज का नमूना लेने का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
अभियुक्तों की आवाज का नमूना लेने का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी की आवाज का नमूना लेने का निर्देश संविधान के अनुच्छेद 20 (3) के तहत उसके अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है।जस्टिस अवनीश झिंगन की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें याचिकाकर्ता-आरोपी को अपनी आवाज का नमूना देने का निर्देश दिया गया था। यह कहा गया कि निजता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन को जांच को धीमा करने के लिए नहीं उठाया जा सकता है।निजता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन को केवल इस बात से इनकार करके जांच को विफल करने के...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एसबीआई को डब्ल्यूबी छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लॉ स्टूडेंट के एजुकेशन लॉन एप्लिकेशन पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एसबीआई को 'डब्ल्यूबी छात्र क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत लॉ स्टूडेंट के एजुकेशन लॉन एप्लिकेशन पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को थर्ड ईयर के लॉ स्टूडेंट की लोन एप्लिकेशन पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस स्टूडेंट ने 30 जून, 2021 में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित 'पश्चिम बंगाल छात्र क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत एजुकेशन लॉन के लिए आवेदन किया था।उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को क्रेडिट कार्ड प्रदान करने के लिए राज्य उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पश्चिम बंगाल छात्र क्रेडिट कार्ड योजना तैयार की गई।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य थर्ड ईयर की लॉ स्टूडेंट इरिना मलिक की...

ये आरोपी अधिक हिंसक कृत्य में शामिल नहीं थे : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर मोब लिंचिंग केस में 10 आरोपियों को जमानत दी, आठ अन्य की अर्जी खारिज
"ये आरोपी अधिक हिंसक कृत्य में शामिल नहीं थे" : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर मोब लिंचिंग केस में 10 आरोपियों को जमानत दी, आठ अन्य की अर्जी खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2020 के पालघर मॉब लिंचिंग मामले में 10 आदिवासियों को जमानत दे दी। इस मामले में दो साधुओं सहित तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इसके साथ ही अदालत ने आठ अन्य को जमानत देने से इनकार कर दिया।इससे पहले जनवरी, 2021 में विशेष अदालत ने मामले के 89 आरोपियों को जमानत दे दी थी।जस्टिस भारती डांगरे ने शुक्रवार के आदेश में घटनास्थल पर मौजूद लोगों और वीडियो फुटेज में मृतक के साथ मारपीट करने वालों से हमलावरों को उकसाने में शामिल लोगों के बीच अंतर किया।उन्होंने देखा कि...