मुख्य सुर्खियां
"आदेश पारित करने का क्या मतलब? इसे लागू करने के लिए मंत्री होना चाहिए": बॉम्बे हाईकोर्ट जज ने महाराष्ट्र में कैबिनेट की कमी पर कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट की जज जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्रियों की नियुक्ति में देरी पर टिप्पणी की।शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता देवेंद्र फडणवीस के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लिए हुए एक महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार में कैबिनेट विस्तार की घोषणा नहीं की गई।पीठ शुक्रवार को एडवोकेट अमृत पाल खालसा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में गृह मंत्री को दो सप्ताह के भीतर गन लाइसेंस के...
"कोर्ट को बिना आवाज वालों की आवाज बनना है": दिल्ली हाईकोर्ट ने उस बच्चे के स्कूल में एडमिशन की सुविधा के लिए स्वत: संज्ञान लिया जिसके माता-पिता हिरासत में हैं
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक 8 वर्षीय बच्चे को स्कूल में एडमिशन की सुविधा के लिए स्वत: संज्ञान लिया, जिसके माता-पिता जुलाई 2021 से मर्डर केस में न्यायिक हिरासत में हैं।यह देखते हुए कि कोर्ट को "आवाज़हीनों की आवाज़" बनना है, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,"इस अदालत की राय है कि बच्चे को जल्द से जल्द एक स्कूल में दाखिला मिल जाना चाहिए ताकि किसी भी अप्रिय घटना की छाया उसके भविष्य को अंधकारमय करने के लिए बच्चे के जीवन पर न पड़े।"कोर्ट ने कहा कि बच्चा, एक व्यक्तिगत भारतीय नागरिक होने के...
अग्निपथ योजना: एएफटी द्वारा चुनौती सुनने से इनकार करने के बाद केरल हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को याचिका स्वीकार करने का निर्देश दिया
केरल हाईकोर्ट (Kerala high Court) ने शुक्रवार को अपनी रजिस्ट्री को सशस्त्र बलों के लिए केंद्र की अग्निपथ भर्ती (Agnipath Scheme) योजना को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को स्वीकार करने का निर्देश दिया, जिन्हें सुनवाई योग्य बिंदु पर "दोषपूर्ण" के रूप में चिह्नित किया गया था।यह सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की कोच्चि पीठ द्वारा चुनौती पर सुनवाई से इनकार करने के बाद कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई का निर्देश दिया।जस्टिस अनु शिवरामन ने एडवोकेट सिजी एंटनी, जॉन वर्गीज और पी एम जोसेफ की दलीलें सुनने के बाद रजिस्ट्री...
बेटी के यौन उत्पीड़न के लिए अपने ही पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली महिला की दुर्दशा के प्रति अदालतों को संवेदनशील होना चाहिएः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालतों को उस स्थिति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, जहां एक नाबालिग पीड़िता की मां (वह भी घर में उसकी मौजूदगी में) अपने ही पति के खिलाफ बेटी के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप लगाती है। जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ ने एक पति को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की है, जिसकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसने उसकी पांच साल की बेटी का यौन उत्पीड़न किया है। याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और लैंगिक अपराधों से बालकों का...
हाथरस रेप-मर्डर केस - अधिकारियों को शवों के सम्मानजनक दाह संस्कार के लिए एसओपी का पालन करने के लिए संवेदनशील बनाएं : इलाहाबाद एचसी ने यूपी सरकार को निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य को पूरे राज्य में शवों के दाह संस्कार के लिए अपनी योजना / एसओपी ( मानक संचालन प्रक्रिया) अधिसूचित करने और लागू करने का निर्देश दिया है और कहा कि इसका व्यापक प्रचार पुलिस स्टेशनों, अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला मुख्यालयों, तहसीलों जैसे कार्यालयों में किया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को शवों के सम्मानजनक दाह संस्कार के संबंध में यूपी सरकार की ताजा योजना / एसओपी का पालन करने के लिए शवों के...
वकील ने वकालतनामा दाखिल करते समय अपने हमनाम वकील का नामांकन आईडी का उपयोग किया: झारखंड एचसी ने बीसीआई, स्टेट बार काउंसिल को मामला भेजा
झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को एक वकील के मामले को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ-साथ झारखंड स्टेट बार काउंसिल को भेजा। हाईकोर्ट ने देखा कि इस वकील ने वकालतनामा दाखिल करते समय अपने नाम के समान नाम वाले एक अन्य वकील का नामांकन आईडी का इस्तेमाल किया था। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और झारखंड स्टेट बार काउंसिल को इस मामले को देखने और चार सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद अदालत राजीव लोचन नाम के आरोपी वकील पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज...
करीना कपूर पर उनकी किताब में कथित तौर पर ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका दायर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है जिसमें अभिनेत्री करीना कपूर (Kareena Kapoor) के खिलाफ कथित तौर पर ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के का आरोप कराया गया है।याचिका में करीना की किताब 'करीना कपूर खान प्रेग्नेंसी बाइबिल: द अल्टीमेट मैनुअल फॉर मॉम्स-टू-' को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।एक वकील क्रिस्टोफर एंथोनी ने यह याचिका दायर की है कि कपूर ने अपनी किताब के टाइटल में 'बाइबल' शब्द का इस्तेमाल किया है, जिससे ईसाई समुदाय के लोगों की भावनाओं को ठेस...
दोषियों को भी पढ़ाई करने, जेल से ही परीक्षा देने का अधिकार": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्काषित लॉ स्टूडेंट की पढ़ाई पूरी होने पर जोर दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, "भारतीय कानूनी प्रणाली के तहत दोषी व्यक्ति को भी अपने अध्ययन को आगे बढ़ाने और जेल से परीक्षा में शामिल होने का अधिकार है, ताकि वह सामाजिक जीवन की मुख्यधारा में शामिल हो सके।"उक्त लॉ स्टूडेंट को यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने बीए, एलएलबी कोर्स पूरा करने की अनुमति नहीं थी।जस्टिस नीरज तिवारी की पीठ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्र आदिल खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आदिल खान ने सेवेंथ (7) सेमेस्टर की परीक्षा...
यदि साक्ष्य अन्यथा अभियोजन का मामला स्थापित करते हों तो महत्वपूर्ण गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में विफलता आरोपी को बरी करने का आधार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि महत्वपूर्ण गवाहों या जांच अधिकारी से पूछताछ न करना अभियोजन मामले पर पूरी तरह से अविश्वास करने और आरोपी को बरी करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं है, अगर सबूतों ने अन्यथा जोरदार ढंग से अभियोजन मामले को स्थापित किया हो।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने कहा कि हालांकि अभियोजन पक्ष अपने मामले को साबित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण गवाहों की जांच करने के लिए बाध्य है, अगर वैध कारणों से उनकी उपस्थिति सुरक्षित नहीं की जा सकती है तो उनकी पूछताछ करने से को छूट दी जा सकती है।अभियोजन पक्ष...
सीआरपीसी की धारा 127 के तहत भरण पोषण रद्द करने का आदेश पूर्वव्यापी रूप से संचालित नहीं हो सकता : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 127 (2) के तहत भरण-पोषण रद्द करने का आदेश हमेशा संभावित रूप से संचालित होता है न कि पूर्वव्यापी रूप (Retrospectively) से।जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सोफी थॉमस की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के रद्द करने के आदेश आवेदन की तारीख से पहले की तारीख नहीं हो सकते हैं और केवल भरण-पोषण रद्द होने की तारीख से ही काम करेंगे।खंडपीठ ने कहा,"निरस्तीकरण का आदेश केवल आदेश की तारीख से प्रभावी होगा। यह आवेदन की तारीख से पहले की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने लीगल न्यूज पोर्टलों को यूट्यूबर गौरव तनेजा के मामले की रिपोर्टिंग करने से रोकने की मांग वाली याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार को लीगल न्यूज पोर्टलों को 'फ्लाइंग बीस्ट' के नाम से मशहूर यूट्यूबर गौरव तनेजा (Gaurav Taneja) द्वारा दायर किए गए मुकदमे पर मिंट न्यूजपेपर (Mint News Paper) उनके खिलाफ प्रकाशित आर्टिकल और इसके स्तंभकार शेफाली भट्ट के खिलाफ कथित रूप से मानहानि के मामले में रिपोर्टिंग करने से रोकने वाला एक 'गैग ऑर्डर' पारित करने से इनकार कर दिया।जस्टिस अमित बंसल भट्ट की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें तनेजा को उनके द्वारा टैग किए गए ट्वीट को हटाने का निर्देश...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत भवनों पर रोजाना राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने की जनहित याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें प्रार्थना की गई है कि ग्राम पंचायत भवनों पर रोजाना (365 दिन) राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ ने यह आदेश पिटीशनर इन पर्सन चंदर भूषण पांडेय द्वारा दायर जनहित याचिका पर जारी किया, जिसमें कहा गया था कि चूंकि प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन "महत्वपूर्ण सार्वजनिक भवन" के अर्थ में आता है, इसलिए साल के सभी 365 दिनों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति दी जानी...
नशे में धुत चालक के कारण दुर्घटना होने पर यात्री पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि नशे में धुत चालक के कारण हुई मोटर दुर्घटना में शामिल वाहन में सह-यात्री पर आईपीसी की धारा 304 (ii) के तहत उकसाने और गैर इरादतन हत्या के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने माना कि सह-यात्री केवल यह दावा करके दायित्व से बच नहीं सकते कि वे केवल यात्री सीट पर बैठे थे और पहियों के पीछे नहीं थे।अदालत ने ये कहते हुए एक डॉक्टर की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी, जिसमें उसे मामले से आरोपमुक्त...
मौखिक सुनवाई के अनुरोध को मध्यस्थ न्यायाधिकरण इस आधार पर अस्वीकार नहीं कर सकता कि इसमें शामिल दावे मामूली हैं: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जहां मध्यस्थ न्यायाधिकरण (Arbitral Tribunal) ने मौखिक सुनवाई के लिए पक्षकार के अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद विदेशी मध्यस्थ अवार्ड पारित किया है, उक्त मध्यस्थ निर्णय भारतीय कानून की मौलिक नीति के विपरीत है। यह निर्णय न्याय की मूल धारणाओं के विपरीत है। इसे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है।जस्टिस पी. नवीन राव और जस्टिस संबाशिवराव नायडू की खंडपीठ ने कहा कि व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। मौखिक सुनवाई के अनुरोध को मध्यस्थ न्यायाधिकरण द्वारा केवल इस...
केवल यह तथ्य कि ट्रायल के दौरान जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया गया था, धारा 389 सीआरपीसी के तहत सजा के निलंबन का आधार नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, "केवल यह तथ्य कि मुकदमे के दरयमियान जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया गया था, सजा के निलंबन की गारंटी नहीं हो सकता और जमानत नहीं दी जा सकती।"जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने कहा कि भले ही सजा के निलंबन के लिए मामले के गुण-दोष की विस्तृत जांच की आवश्यकता न हो, हालांकि अधिकार क्षेत्र का प्रयोग विवेकपूर्ण तरीके से किया जाएगा और प्रयोग के कारणों को लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा।"ट्रायल के दरमियान धारा 439 सीआरपीसी के तहत जमानत देने के साथ-साथ दोषसिद्दी के बाद (सजा का...
केवल तकनीकी के कारण अवैधता कायम नहीं रह सकती, सिविल कोर्ट में धोखाधड़ी से पाई गई डिक्री को रद्द करने के लिए रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग किया जा सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सरकारी भूमि के लिए निजी प्रतिवादियों के पक्ष में मालिकाना हक घोषित करने वाले दीवानी अदालत द्वारा पारित एक आदेश को रद्द कर दिया, यह देखते हुए कि अदालत में धोखाधड़ी करके आदेश प्राप्त किया गया था।जस्टिस आनंद वेंकटेश ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए, हाईकोर्ट एक सक्षम सिविल कोर्ट द्वारा पारित निर्णय और डिक्री को रद्द कर सकता है यदि यह न्यायालय पर धोखाधड़ी करके प्राप्त किया गया है और ऐसी डिक्री कानून की नजर में शून्य है।अदालत...
दवा निर्माता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 18 के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, अगर वह लाइसेंस प्राप्त निर्माता से दवा प्राप्त करता है: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट (Jammu-Kashmir & Ladakh High Court) ने गुरुवार को कहा कि किसी दवा के निर्माता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट (Drugs And Cosmetics Act) की धारा 18 के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, यदि वह एक विधिवत लाइसेंस प्राप्त निर्माता से दवा या कॉस्मेटिक प्राप्त किया है।जस्टिस संजय धर की एक पीठ सामूहिक रूप से उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें याचिकाकर्ताओं ने सरकारी प्राधिकरण लद्दाख द्वारा उनके खिलाफ दायर शिकायत को चुनौती दी...
शैक्षणिक नियुक्तियों में अपने विचारों को थोपने में अदालतों को "बेहद अनिच्छुक" होना चाहिए: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने दोहराया है कि शिक्षा के क्षेत्र में नियुक्ति को नियंत्रित करने वाले नियमों या कानूनों की उपेक्षा करते हुए न्यायालयों को अपने स्वयं के विचारों को थोपने में अत्यधिक अनिच्छुक होना चाहिए। एक याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए, जिसमें 'चांस सर्टिफिकेट' की कमी के कारण उम्मीदवारी से इनकार करने के खिलाफ अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई थी।जस्टिस डॉ संजीव कुमार पाणिग्रही की एकल पीठ ने कहा,"मौजूदा मामले में, मौका प्रमाण पत्र की आवश्यकता को नोटिस संख्या 225 / निदेशक, VIMSAR,...
सुपरवाइजर कैपेसिटी में काम करने वाला व्यक्ति "औद्योगिक विवाद" नहीं उठा सकता: गुजरात हाईकोर्ट ने बहाली आदेश रद्द किया
गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि "सुपरवाइजर कैपेसिटी" में काम करने वाला व्यक्ति औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (Industrial Disputes Act, 1947) के तहत औद्योगिक विवाद नहीं उठा सकता।जस्टिस एवाई कोगजे की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह तय करते समय कि ऐसा व्यक्ति कामगार है या नहीं, श्रम न्यायालय को रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों पर ध्यान से विचार करना चाहिए। इसके साथ ही काम करने वाले कर्मचारी और प्रबंधन के बीच अंतर करने के लिए काम की कोई विस्तृत सूची नहीं है।याचिकाकर्ता कंपनी ने कहा कि प्रतिवादी गैर-कर्मचारी श्रेणी...
नागरिकता केंद्र का विशेष अधिकार क्षेत्र, दीवानी अदालत के पास नागरिकता छोड़ने के प्रश्न का निर्णय करने का अधिकार नहीं है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता के बारे में प्रश्न पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए दीवानी अदालतों के पास कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और उक्त प्रश्न केंद्र सरकार के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है।जस्टिस निशा ठाकोर ने इस प्रकार नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9(2) के संदर्भ में कहा, जो यह प्रश्न प्रदान करती है कि क्या भारत के किसी नागरिक ने दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है, यह निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा।"दूसरा प्रश्न जिस पर गौर...

















