मुख्य सुर्खियां

झारखंड हाईकोर्ट
गिरफ्तारी प्रक्रिया का पालन करने में विफलता: झारखंड हाईकोर्ट ने न्यूज 11 भारत के पत्रकार को अंतरिम जमानत दी, पुलिस के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर विचार किया जाएगा

झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने न्यूज 11 भारत के पत्रकार अरूप चटर्जी को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि उन्हें सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत प्रक्रिया का पालन किए बिना और सीआरपीसी की धारा 80 और 81 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपी को पेश करने से संबंधित प्रक्रिया का पालन किए बिना गिरफ्तार किया गया था।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने राज्य से अपने अधिकारियों के कृत्यों की व्याख्या करने वाला हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा और फिर अवमानना कार्यवाही शुरू करने की संभावना और...

मद्रास हाईकोर्ट
माता-पिता का अलगाव अपने आप में बाल शोषण का एक रूप: मद्रास हाईकोर्ट ने बच्चे से मुलाकात के लिए आए पति से पत्नी को अतिथि की तरह व्यवहार करने का निर्देश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी रखने वाले माता या पिता, उनसे मुलाकात के लिए आने वाले माता या पिता के प्रति व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, प्रत्येक बच्चे को माता-पिता दोनों के साथ एक सुरक्षित और प्रेमपूर्ण संबंध का अधिकार और आवश्यकता है।अदालत एक पिता द्वारा अपनी मां के साथ रहने वाले बच्चे से मिलने के अधिकार के संबंध में दायर एक आवेदन पर फैसला कर रही थी। उन्होंने तर्क दिया था कि हालांकि हर दूसरे दिन शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच उनकी मुलाकात होती थी, लेकिन मां अब बच्चे को दिल्ली ले जाने और...

धारा 84 आईपीसी | अभियुक्त को चिकित्सकीय विक्षिप्तता नहीं, बल्‍कि कानूनी विक्षिप्तता साबित करनी होगी : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
धारा 84 आईपीसी | अभियुक्त को चिकित्सकीय विक्षिप्तता नहीं, बल्‍कि "कानूनी विक्षिप्तता" साबित करनी होगी : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में आईपीसी की धारा 84 के संदर्भ में 'कानूनी विक्षिप्तता' और 'चिकित्सा विक्षिप्तता' के बीच के अंतर स्पष्ट किया है। न्यायालय ने कहा कि मामले को आईपीसी की धारा 84 के दायरे में लाने के लिए अभियुक्तों को यह साबित करना होगा कि वे कानूनी वि‌‌क्षिप्तता से पीड़ित थे।जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस आरके श्रीवास्तव ने कहा, यहां तक ​​कि वि‌‌क्षिप्तता को भी आईपीसी की धारा 84 के तहत छूट नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति जो मानसिक रूप से बीमार है, वास्तव में...

केरल हाईकोर्ट
धारा 138 एनआई एक्ट | पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के साक्ष्य तब तक विश्वसनीय नहीं होते जब तक कि उनके पास लेन-देन का उचित ज्ञान न हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि धारा 138 के तहत अपराध का आरोप लगाने वाले शिकायतकर्ता को ऐसे लेनदेन में अटॉर्नी होल्डर की शक्ति के ज्ञान के बारे में एक विशिष्ट दावा करना चाहिए।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने कहा कि एक मुख्तारनामा धारक जिसे लेनदेन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उसे मामले में गवाह के रूप में पेश नहीं किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"कानून इस बिंदु पर तय है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध करने का आरोप लगाने वाली शिकायत को पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के माध्यम से प्रस्तुत...

अतिथि देवो भवा- मद्रास हाईकोर्ट ने पत्नी से मुलाकात के दौरान अलग हुए पति के साथ अतिथि की तरह व्यवहार करने को कहा
"अतिथि देवो भवा"- मद्रास हाईकोर्ट ने पत्नी से मुलाकात के दौरान अलग हुए पति के साथ अतिथि की तरह व्यवहार करने को कहा

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि प्रत्येक बच्चे को माता-पिता दोनों के साथ सुरक्षित और प्रेमपूर्ण संबंध में रहने का अधिकार और आवश्यकता है।अदालत पिता द्वारा अपनी मां के साथ रहने वाले बच्चे से मिलने के अधिकार के संबंध में दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। उसने दलील दी कि हालांकि हर दूसरे दिन शाम छह से आठ बजे के बीच उनकी मुलाकात होती थी, लेकिन मां अब बच्चे को दिल्ली ले जाने और वहां बसने की योजना बना रही है। इस पर बच्चे की मां ने कहा कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है। इसके साथ ही उसने पूर्व के आदेश में...

केरल हाईकोर्ट
चाइल्ड प्रेग्नेंसी और पोर्न तक आसान पहुंच से चिंतित, केरल हाईकोर्ट ने उचित यौन शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को चाइल्ड प्रेग्नेंसी की बढ़ती संख्या के बीच स्कूलों में पर्याप्त यौन शिक्षा की स्पष्ट अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की, जो दुर्भाग्य से, अक्सर करीबी रिश्तेदारों द्वारा किए गए यौन शोषण का परिणाम होती है।जस्टिस वी.जी. अरुण ने अधिकारियों से राज्य के स्कूलों में दी जा रही यौन शिक्षा और इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर पुनर्विचार करने को कहा है। बेंच ने कहा, ''मैं चाइल्ड प्रेग्नेंसी की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करने के लिए मजबूर हूं, जिसमें कम से कम कुछ...

दिल्ली हाईकोर्ट
दावों के निर्णय के बिना मध्यस्थ निर्दिष्ट दावों के खिलाफ एकमुश्त राशि नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि एक अवॉर्ड, जिसमें दावों के निर्णय के बिना निर्दिष्ट दावों के खिलाफ एकमुश्त राशि प्रदान की जाती है, वह टिकाऊ नहीं है। जस्टिस विभु बाखरू की खंडपीठ ने कहा कि एक मध्यस्थ न्यायाधिकरण केवल न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किसी पार्टी के निर्दिष्ट दावों के खिलाफ एकमुश्त राशि नहीं दे सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ए एंड सी एक्ट की धारा 34 (4) के तहत एक आवेदन को नुकसान की राशि को स्पष्ट करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब यह किसी गणना पर आधारित नहीं है।कोर्ट ने आगे कहा कि...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 2018 की बैठक के ब्यौरे के खुलासे की याचिका खारिज करने की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 2018 की बैठक के ब्यौरे के खुलासे की याचिका खारिज करने की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अपील पर आदेश सुरक्षित रख लिया जिसने 12 दिसंबर, 2018 को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा लिए गए निर्णयों के संबंध में मांगी गई जानकारी से इनकार करने के खिलाफ एक याचिका को खारिज कर दिया था।अपीलकर्ता, एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, "हम उचित आदेश पारित करेंगे।"गौरतलब है कि जस्टिस यशवंत वर्मा ने 30...

गुजरात हाईकोर्ट
इससे पहले कि अदालत पक्षकार की सहमति पर कार्य करे, सीपीसी की धारा 89 के तहत मध्यस्थता के संदर्भ में पक्षकार अपनी सहमति वापस ले सकता है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकार अदालत द्वारा इस तरह के संदर्भ पर कार्यवाही करने से पहले किसी भी समय सीपीसी की धारा 89 के तहत मध्यस्थता के संदर्भ के लिए अपनी सहमति वापस ले सकता है।जस्टिस उमेश ए. त्रिवेदी की खंडपीठ सिविल जज के उस आदेश के खिलाफ अनुच्छेद 227 के तहत एक विशेष दीवानी आवेदन पर विचार कर रही थी, जिसके तहत पक्षकारों द्वारा संयुक्त रूप से याचिका को नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 (बाद में 'कोड' के रूप में संदर्भित) धारा 89(2)(ए) के तहत मध्यस्थ को विवाद को संदर्भित करने के लिए दिया गया था।...

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को केंद्र सरकार के अनुदान को केवल नेशनलाइज्ड बैंकों में जमा करने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को केंद्र सरकार के अनुदान को केवल नेशनलाइज्ड बैंकों में जमा करने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने हाल ही में राज्य सरकार को केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदान और सहायता को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के बजाय किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक (Nationalized) में जमा करने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया।एडवोकेट सुशील कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह आश्चर्य की बात है कि राज्य को राष्ट्रीयकृत बैंकों पर भरोसा क्यों नहीं है और निजी बैंक में बड़ी राशि जमा है।आगे कहा गया कि अगर इन बैंकों को नुकसान होता है, तो केंद्र...

क्या आपराधिक अवमानना कार्यवाही के लंबित होने का हवाला देकर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार किया जा सकता है? गुजरात हाईकोर्ट करेगा पड़ताल
क्या आपराधिक अवमानना कार्यवाही के लंबित होने का हवाला देकर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार किया जा सकता है? गुजरात हाईकोर्ट करेगा पड़ताल

गुजरात हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति एएस सुपेहिया की पीठ ने एक आवेदक के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही के लंबित होने के कारण पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के आलोक में अहमदाबाद में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को नोटिस जारी किया है।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रतिवादी ने पासपोर्ट के नवीनीकरण को अस्वीकार करने के लिए पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6(2)(एफ) का उपयोग किया था, क्योंकि याचिकाकर्ता बॉम्बे हाईकोर्ट में आपराधिक अवमानना के आरोपों का सामना कर रहा था। इस...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लीज समाप्त होने के बाद विवादग्रस्त संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे के लिए बीएसएनएल को संपत्ति से प्राप्त लाभ का भुगतान करने का निर्देश बरकरार रखा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लीज समाप्त होने के बाद विवादग्रस्त संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे के लिए बीएसएनएल को संपत्ति से प्राप्त लाभ का भुगतान करने का निर्देश बरकरार रखा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के लीज समाप्त होने के बाद उक्त संपत्ति से प्राप्त लाभ वापस करने के निर्देश को बरकरार रखा, जिसमें बीएसएनएल को लीज डीड की समाप्ति के बाद विवादग्रस्त संपत्ति के अनधिकृत कब्जे से होने वाले लाभ में से 1,000 रुपये की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान की पीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में कोई महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं उठाया गया है। यह इस तथ्य का शुद्ध निष्कर्ष है कि अपीलकर्ता ने लीज डीड की समाप्ति के बाद भी परिसर खाली...

दिल्ली हाईकोर्ट
राष्ट्रपति चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर केवल सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि राष्ट्रपति चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर कहा कि इस तरह कि याचिका पर केवल सुप्रीम कोर्ट ही निर्णय ले सकता है।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में एकमात्र उपाय परिणाम की घोषणा के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से हो सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 की धारा 14 (2) ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार क्षेत्र प्रदान करती है।कोर्ट ने राष्ट्रपति चुनाव 2022 की पूर्व संध्या पर दायर याचिका...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
'जम्मू-कश्मीर प्रशासन धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए सभी प्रयास कर रहा है': हाईकोर्ट ने कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति की जनहित याचिका का निपटारा किया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट (Jammu-Kashmir & Haryana High Court) ने कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) द्वारा दायर जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि घाटी में धार्मिक अल्पसंख्यकों को आतंकवादियों से सीधे खतरा है और उन्हें बाहर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस जावेद इकबाल वानी की खंडपीठ ने कहा कि प्रशासन जम्मू-कश्मीर में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए सभी प्रयास कर रहा है और हत्याओं से बचने और...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
''पति से मिली धमकी का संरक्षण याचिका में उल्लेख नहीं'': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाहित महिला और उसके लिव-इन पार्टनर पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक विवाहित महिला और उसके लिव-इन पार्टनर की तरफ से दायर संरक्षण याचिका को खारिज करते हुए उन पर 5,000 रुपये जुर्माना लगाया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे हैं कि वे महिला के पति से किसी भी खतरे का सामना कर रहे हैं। जस्टिस डॉ कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस अजय त्यागी की खंडपीठ ने आगे कहा कि भारत का संविधान लिव-इन रिलेशन की अनुमति दे सकता है लेकिन याचिकाकर्ताओं (लिव-इन पार्टनर्स) द्वारा तत्काल रिट याचिका उनके अवैध संबंधों पर हाईकोर्ट की मुहर...

ब्रॉडकास्टर को कंटेंट प्रसारित करते समय न्यूनतम सावधानियां बरती जानी चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट
ब्रॉडकास्टर को कंटेंट प्रसारित करते समय न्यूनतम सावधानियां बरती जानी चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि ब्रॉडकास्टर से अपेक्षा की जाती है कि वह उन न्यूनतम सावधानियों को ध्यान में रखे जो सामग्री प्रसारित करते समय बरती जानी चाहिए जो विवेकपूर्ण दर्शकों की संवेदनाओं को परेशान कर सकता है।जस्टिस यशवंत वर्मा ने टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें इस साल मार्च में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत जुर्माना लगाया गया था।पिछले साल...

एनडीपीएस एक्ट-रिकवरी के 15 दिनों के भीतर एफएसएल रिपोर्ट दाखिल करने में विफलता जमानत का आधार नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
एनडीपीएस एक्ट-रिकवरी के 15 दिनों के भीतर एफएसएल रिपोर्ट दाखिल करने में विफलता जमानत का आधार नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) के प्रावधानों के तहत आरोपित एक आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज करते हुए दोहराया है कि केवल इसलिए कि जब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थ की रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्राप्त नहीं हुई है,यह एक आरोपी को जमानत पर रिहा करने का कोई आधार नहीं है। जस्टिस मोहम्मद नवाज़ की एकल पीठ ने एक जाकिर हुसैन द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा, ''केवल इसलिए कि 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है,...