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दोषियों को भी पढ़ाई करने, जेल से ही परीक्षा देने का अधिकार": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्काषित लॉ स्टूडेंट की पढ़ाई पूरी होने पर जोर दिया

Shahadat
5 Aug 2022 10:51 AM GMT
दोषियों को भी पढ़ाई करने, जेल से ही परीक्षा देने का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्काषित लॉ स्टूडेंट की पढ़ाई पूरी होने पर जोर दिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, "भारतीय कानूनी प्रणाली के तहत दोषी व्यक्ति को भी अपने अध्ययन को आगे बढ़ाने और जेल से परीक्षा में शामिल होने का अधिकार है, ताकि वह सामाजिक जीवन की मुख्यधारा में शामिल हो सके।"

उक्त लॉ स्टूडेंट को यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने बीए, एलएलबी कोर्स पूरा करने की अनुमति नहीं थी।

जस्टिस नीरज तिवारी की पीठ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्र आदिल खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आदिल खान ने सेवेंथ (7) सेमेस्टर की परीक्षा दी था, लेकिन उक्त सेमेस्टर का परिणाम घोषित नहीं किया गया। इस बीच उसे अनुशासनहीनता के आरोप में यूनिवर्सिटी (सितंबर 2019) द्वारा पांच साल की अवधि के लिए बर्खास्त कर दिया गया।

इसके बाद आदिल ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करके अनुशासन और अच्छे आचरण को बनाए रखने के लिए हलफनामा दिया कि वह न केवल नियमों का पालन करेगा बल्कि यूनिवर्सिटी के परिसर के अंदर और बाहर शांति-सद्भाव और पूर्ण अनुशासन बनाए रखेगा।

हालांकि, उसके वचन के बावजूद, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने छात्र के 'पिछले आचरण' के कारण अपने निष्कासन आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। प्रतिवादी-यूनिवर्सिटी ने न्यायालय को सूचित किया कि दो मामलों को छोड़कर याचिकाकर्ता का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है।

इसे देखते हुए न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता-छात्र अभी तक दोषी साबित नहीं हुआ है, इसलिए उसे अपनी पढ़ाई पूरी करने का अधिकार है।

न्यायालय ने प्रतिवादी-यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि वह अदालत को इसके बारे में तय की गई अगली तारीख को सूचित करे। यूनिवर्सिटी के अनुशासन को भंग किए बिना बताए कि अपने शैक्षिक कैरियर को बचाने के लिए याचिकाकर्ता अपने बीए एलएलबी कोर्स को कैसे पूरा करेगा।

कोर्ट ने कहा,

"... यह निर्विवाद है कि भारतीय कानूनी प्रणाली में दोषी व्यक्ति को भी अपने अध्ययन को आगे बढ़ाने और सामाजिक जीवन की मुख्य धारा में प्रवेश करने के लिए जेल से परीक्षा में बैठने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को दी गई सजा सुधारात्मक होनी चाहिए है, पूर्वाग्रही नहीं। याचिकाकर्ता को अपने बीए एलएलबी कोर्स को पूरा करने से इनकार करने से उसका करियर बर्बाद हो सकता है। निश्चित रूप से याचिकाकर्ता युवा छात्र है और उसे खुद को सही करने और जीवन का सही रास्ता चुनने का मौका दिया जाना चाहिए।

मामले को अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त, 2022 के लिए पोस्ट कर दिया गया।

केस टाइटल - आदिल खान बनाम वाइस चांसलर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ और चार अन्य [WRIT - C No. - 3297 of 2020]

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