मुख्य सुर्खियां
एनसीटीई एक्ट। कारण बताओ नोटिस की तामील एक संस्थान के लिए महत्वपूर्ण; यह उन्हें कथित कमियों के लिए अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कारण बताओ नोटिस की तामील एक संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण संचार है क्योंकि यह उन्हें कथित कमियों के लिए अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है, जिसके विफल होने पर प्रतिकूल परिणाम का पालन करना होगा।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा, "यह अवसर उन संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी मान्यता और संचालन दांव पर है।"न्यायालय 23 से 24 नवंबर, 2020 तक आयोजित 322 वीं बैठक में लिए गए पश्चिमी क्षेत्रीय समिति के निर्णय को चुनौती देने वाली एक याचिका पर विचार कर रहा था, जिसके तहत याचिकाकर्ता...
जेजे एक्ट-कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे के खिलाफ कार्यवाही वयस्क आरोपी के साथ नहीं चलाई जा सकतीः पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में माना है कि 'कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे (child in conflict with law)' के खिलाफ उस व्यक्ति के साथ कोई संयुक्त कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती है,जो वयस्क है।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की पीठ ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 (वर्तमान याचिकाकर्ता-आरोपी पर लागू) के संदर्भ में, कोई भी आदेश मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा नहीं बल्कि केवल किशोर न्याय बोर्ड द्वारा पारित किया जा सकता है।अदालत सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर एक आवेदन पर...
इंस्पेक्शन रिपोर्ट उचित कारण बताओ नोटिस की सामग्री को पूरा नहीं करती: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि इंस्पेक्शन रिपोर्ट उचित कारण बताओ नोटिस की सामग्री को पूरा नहीं करती है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कहा कि यदि उचित कारण बताओ नोटिस जारी किए आदेश बिना पारित किया जाता है तो न्यायनिर्णयन आदेश कानून की नजर में शून्य है।संयुक्त राज्य कर आयुक्त के आदेश से दिनांक 11.1.2020 को जांच ब्यूरो के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा याचिकाकर्ता/निर्धारिती के परिसर में इंस्पेक्शन किया गया और प्रतिवेदन तैयार...
अभियोजन को सभी उचित संदेहों से परे 'लास्ट सीन थ्योरी' साबित करनी चाहिए, जो आरोपी को अपराध से जोड़ती होः त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने माना है कि अभियोजन पक्ष को अन्य संबद्ध परिस्थितियों के साथ "अंतिम बार देखे गए सिद्धांत" को साबित करना होता है, ताकि यह दिखाया जा सके कि आरोपी को छोड़कर, कोई अन्य व्यक्ति कथित अपराध नहीं कर सकता था।जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ और जस्टिस अरिंदम लोध की खंडपीठ ने कहा,"यह अभियोजन पक्ष है, जिसे अन्य कनेक्टिंग परिस्थितियों के साथ अंतिम बार देखा गया साबित करना है कि आरोपी व्यक्तियों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति अपराध नहीं कर सकता है। मौजूदा मामले में, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि...
आरटीआई अधिनियम की धारा 11 | सार्वजनिक रोजगार में प्राथमिकता चाहने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत अंतर-जातीय विवाह प्रमाण पत्र में व्यक्तिगत जानकारी होती है, नोटिस अनिवार्य: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल में दोहराया कि तीसरे पक्षकार के निजता के अधिकार के तहत ली जाने वाली जानकारी आरटीआई आवेदनों के माध्यम से उन्हें नोटिस दिए बिना नहीं मांगी जा सकती।जस्टिस आनंद वेंकटेश उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें तमिलनाडु सूचना आयोग को उन व्यक्तियों के संबंध में विवरण प्रदान करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है जिन्होंने अंतरजातीय विवाह की विशेष श्रेणी के तहत जिला रोजगार कार्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है और ऐसे व्यक्तियों द्वारा प्रदान किए गए प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के...
एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए दो मनोनीत अदालतें हैं, सुनवाई सिर्फ एक में ही हो रही है: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी
दिल्ली हाईकोर्ट को हाल ही में सूचित किया गया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम के तहत विशेष मामलों से निपटने के लिए दो नामित अदालतें हैं, सुनवाई केवल एक अदालत द्वारा की जा रही है।जस्टिस जसमीत सिंह ने यह जानने के बाद चार सप्ताह के भीतर इन मामलों की प्रगति का संकेत देते हुए अधिकारियों से आगे की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी। जस्टिस सिंह एनआईए अधिनियम के तहत लंबे समय से लंबित मामलों के मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।एनआईए के मामले के सिलसिले में पिछले आठ साल से हिरासत में...
'अविश्वसनीय है कि 4 सगे भाई, उनके पिता 2 बच्चों की मां का रेप करेंगे': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप केस रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने चार सगे भाइयों और उनके पिता, जिनकी उम्र लगभग 81 वर्ष है, के खिलाफ एक आपराधिक मामला (Criminal Case) खारिज कर दिया, जिन पर दो बड़े बच्चों वाली एक विवाहित महिला के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) करने का मामला दर्ज किया गया था।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने कहा कि यह विश्वास नहीं होता कि चार सगे भाई और उनके पिता दो बड़े बच्चों वाली महिला का बलात्कार करेंगे।कोर्ट आरोपी व्यक्तियों द्वारा उनके खिलाफ वर्तमान मामले में वर्ष 2014 में शुरू की गई आपराधिक...
एनटीपीसी लॉ ऑफिसर का चयन करने के लिए CLAT PG टेस्ट रैंकिंग का उपयोग किया जा सकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को माना कि नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी) में असिस्टेंट लॉ ऑफिसर के पद पर आवेदन करने के लिए आवेदकों को CLAT PG टेस्ट पास करने की लिए अनिवार्य शर्त वैध है।जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सी.पी. की खंडपीठ ने इस प्रकार एकल न्यायाधीश के निर्णय के खिलाफ एनटीपीसी द्वारा दायर अपील की अनुमति दी। खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है। तदनुसार, एकल न्यायाधीश के निर्णय को रद्द किया गया।रिट याचिकाकर्ता ने दलील दी...
गुजरात हाईकोर्ट ने 'मिड डे मील' योजना के आउटसोर्सिंग कार्य और प्रशासन के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना (मिड डे मील) के कार्य और प्रशासन को निजी संगठनों को आउटसोर्स करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।जस्टिस बीरेन वैष्णव की एकल पीठ ने पाया कि 09.11.1984 के संकल्प का उद्देश्य, जिसने पहली बार राज्य के प्राथमिक विद्यालयों के तहत संचालित स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजनाओं की अवधारणा पेश की थी, गांवों और नगर निगमों के क्षेत्रों में प्राथमिक स्तर के छात्रों को पोषण सहायता प्रदान करना है। इस समय सरकार पायलट आधार पर योजना के कार्यान्वयन को गैर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कैदियों के बीच अनुशासन बनाए रखने और हिंसा की घटनाओं को रोकने के उपायों पर जेल डीजी से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में जेल डायरेक्टर जनरल (डीजी) से उन उपायों और परिवर्तनों पर जवाब मांगा, जिनसे जेलों के कामकाज में कैदियों के बीच अनुशासन बनाए रखने और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए अधिक अनुकूल बनाया जा सके।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे. भंभानी की खंडपीठ जेल अधिकारियों द्वारा कैदियों पर की गई हिंसा के मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।पीठ इस मुद्दे पर विचार कर रही थी कि जेलों में बंद अपराधियों को अनुशासित करने के लिए 'अत्यधिक बल' क्या जरूरी है?जेल के कैदी समीर...
अनुच्छेद 19(1)(e) विदेशी नागरिकों के लिए नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक के निर्वासन के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में पाकिस्तानी नागरिक की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पुलिस अधीक्षक के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले में उसे नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस एएस सुपेहिया ने दोहराया:"वर्तमान मामले में निस्संदेह याचिकाकर्ता पाकिस्तानी नागरिक है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित कानून के अनुसार, उस पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 को लागू नहीं होते, इसलिए उसे भारत क्षेत्र में प्रवेश करने और रहने का कोई अधिकार नहीं है। वह...
जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने लखनऊ में जेंडर जस्टिस पर जिला न्यायालय के जजों के संवेदीकरण पर सम्मेलन का उद्घाटन किया
न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा "जेंडर जस्टिस और अलग-अलग विकलांग पीड़ितों/यौन शोषण से बचे लोगों पर जिला न्यायालय के जजों के संवेदीकरण" पर 2 दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।23 और 24 जुलाई, 2022 को लखनऊ में विभिन्न जिलों के जिला न्यायाधीशों सहित लगभग 225 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।सम्मेलन का उद्घाटन जज जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जज, इलाहाबाद हाईकोर्ट और अध्यक्ष, फैमिली कोर्ट के...
'नेता पूछताछ से बचने के लिए अस्पताल की शरण लेते हैं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंत्री पार्थ चटर्जी को सरकारी अस्पताल से भुवनेश्वर के AIIMS में शिफ्ट करने का आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने रविवार को हुई एक विशेष सुनवाई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पश्चिम बंगाल के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) को कल सुबह कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल से भुवनेश्वर के एम्स में ट्रांसफर करने का आदेश दिया।पश्चिम बंगाल के मंत्री को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की सिफारिशों पर सरकारी प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति में कथित अवैधताओं की जांच के...
एनडीपीएस अधिनियम | प्रतिबंधित पदार्थों की सैंपलिंग के दौरान स्थायी आदेशों का उल्लंघन अभियोजन के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष पैदा करता है: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत नमूना चयन और जब्ती के संबंध में स्थायी आदेशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है और स्थायी आदेशों के पर्याप्त अनुपालन के अभाव में अभियोजन पक्ष के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना ही पड़ेगा। यह टिप्पणी दो वाहनों से 107 पैकेटों में 214 किलोग्राम गांजा बरामद किये जाने के मामले में आई है। जस्टिस के. सुरेंद्र ने कहा कि जब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थ से नमूने लेते समय, जांच अधिकारी यह निर्दिष्ट करने में...
अविश्वसनीय है कि एक विवाहित महिला से बलात्कार करने के लिए पिता खुद अपने 2 बेटों को उकसाएगाः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'सामूहिक-बलात्कार मामले के ट्रायल' पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने गुरुवार को दो सगे भाइयों के खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मुकदमे पर रोक लगा दी है, जिन पर 27 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया गया है। अदालत ने पिता (आरोपी के) के खिलाफ चल रहे मुकदमे पर भी रोक लगा दी है, जिस पर अपने दो बेटों को महिला से बलात्कार के लिए उकसाने करने का आरोप लगाया गया है। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने कहा कि यह अविश्वसनीय है कि एक पिता अपने दो बेटों को एक विवाहित महिला से बलात्कार करने के लिए उकसाने का काम करेगा और उसके बाद दो सगे...
ऑनलाइन फ्रॉड: हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फेमस ब्रांड से मिलते जुलते नामों की तरह रजिस्टर्ड फ्रॉड डोमेन नेम की जांच करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में शहर की पुलिस से उन मामलों की जांच के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिसमें जाने-माने और स्थापित व्यावसायिक घरानों और ब्रांडों के तहत धोखाधड़ी वाले डोमेन नाम (फ्रॉड डोमेन नेम) रजिस्टर्ड किए जा रहे हैं।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि उक्त डोमेन नामों का उपयोग धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों के लिए किया जा रहा है, जिसमें बैंक डिटेल के साथ साथ नौकरी, डीलरशिप, फ्रेंचाइजी, लकी ड्रॉ और कई अन्य अवैध गतिविधियों चल रही हैं।न्यायालय ने निर्देश दिया कि ग्राहकों से पैसे लेने के लिए...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (18 जुलाई, 2022 से 22 जुलाई, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।अदालतें संविदात्मक मामलों में न्यायिक पुनर्विचार तभी कर सकती हैं, जब दुर्भावनापूर्ण/मनमानापन दिखाया जाए: तेलंगाना हाईकोर्टतेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि संविदात्मक मामलों में न्यायालय द्वारा न्यायिक पुनर्विचार बहुत सीमित है और जब तक दुर्भावना और मनमानी नहीं दिखाई जाती, तब तक न्यायालय प्रशासनिक...
दिल्ली कोर्ट ने राजद्रोह मामले में शरजील इमाम को अंतरिम जमानत देने से इनकार किया
दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दिल्ली के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया इलाके में शरजील इमाम के द्वारा किए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित एफआईआर 22/2020 में शरजील इमाम को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अंतरिम जमानत याचिका शरजील इमाम के खिलाफ एक एफआईआर दायर की गई थी जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 124A के तहत राजद्रोह का अपराध शामिल था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर जिसमें केंद्र सरकार द्वारा प्रावधान पर पुनर्विचार करने तक राजद्रोह...
पति और पत्नी के रूप में एक साथ रहने वाले वयस्कों के जीवन में उनका परिवार और कोई तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकताः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि एक बार जब दो वयस्क पति और पत्नी के रूप में एक साथ रहने के लिए सहमत हो जाते हैं तो संभवतः उनके परिवार सहित तीसरे पक्ष द्वारा उनके जीवन में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।जस्टिस तुषार राव गेडेला ने आगे कहा कि राज्य अपने नागरिकों की रक्षा करने के लिए एक संवैधानिक दायित्व के तहत है, खासकर उन मामलों में जहां शादी दो वयस्कों के बीच जाति या समुदाय की परवाह किए बिना की जाती है। कोर्ट ने कहा, ''हमारे ढांचे के तहत संवैधानिक न्यायालयों को विशेष रूप से उस...
न्यायिक समीक्षा के अभाव में संविधान के प्रति लोगों का विश्वास कम हो चुका होता : चीफ जस्टिस एनवी रमना
भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, रांची द्वारा आयोजित जस्टिस एस.बी.सिन्हा स्मृति व्याख्यान, जिसका विषया था- "जज का जीवन" में उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि न्यायिक समीक्षा के अभाव में, भारत के संविधान के प्रति लोगों का विश्वास कम हो चुका होता।सीजेआई ने कहा,''यह सुनने को मिलता है कि अनिर्वाचित होने के कारण न्यायाधीशों को विधायी और कार्यकारी क्षेत्र में नहीं जाना चाहिए। लेकिन यह न्यायपालिका पर रखे गए संवैधानिक जिम्मेदारियों की...


















