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बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी गढ़चिरौली में आदिवासी ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया

पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी गढ़चिरौली में आदिवासी ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के कुछ गांवों के आदिवासियों के लिए पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के आभाव होने पर स्वत: संज्ञान लिया है।ग्रामीणों के एक पत्र के आधार पर यह नोट किया गया कि सरकार मानसून के पांच महीनों के दौरान आदिवासियों के लिए एक नाव और नाविक भी उपलब्ध कराने में विफल रही, जबकि उनके आसपास पूरी तरह से जलभराव हो...

दिल्ली हाईकोर्ट
बाल भिक्षावृत्ति : हाईकोर्ट ने प्रभावित बच्चों के पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों पर केंद्र, दिल्ली सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र, दिल्ली सरकार के साथ-साथ दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) से भीख मांगने वाले बच्चों के पुनर्वास के उद्देश्य से उठाए गए कदमों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि स्टेटस रिपोर्ट में पूरे एनसीटी क्षेत्र में अधिकारियों द्वारा उठाए गए क्षेत्रवार कदम शामिल होने चाहिए।यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजधानी में और उसके आसपास बाल भिक्षावृत्ति और संबंधित समस्याओं की समस्या को दूर...

बिलकिस बानो केस : ऐसे बर्बर अपराध के दोषियों को हम कैसे खड़ा कर सकते हैं? -जस्टिस अभय थिप्से
बिलकिस बानो केस : ऐसे बर्बर अपराध के दोषियों को हम कैसे खड़ा कर सकते हैं? -जस्टिस अभय थिप्से

बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय थिप्से ने मंगलवार को सज़ा से छूट की अवधारणा (concept of remission) पर चर्चा की और 2002 में गुजरात के दाहोद जिले में बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार और सात लोगों की हत्या के दोषी 11 लोगों को रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले की आलोचना की।जस्टिस थिप्से ने बानो के समर्थन में यूनाइटेड अगेंस्ट इनजस्टिस एंड डिस्क्रिमिनेशन द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,"छोटे अपराध भी अपराधियों के लिए बड़ा कलंक है। हम एक व्यक्ति को कैसे खड़ा कर सकते हैं जब उसे इस...

दिल्ली हाईकोर्ट
अनुच्छेद 227 दया क्षेत्राधिकार नहीं, निचली अदालतों के समक्ष लापरवाही से मुकदमा चलाने वाले वादी हाईकोर्ट से शरण की उम्मीद नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि वादी निचली अदालत के समक्ष कार्यवाही चलाने के बारे में आकस्मिक नहीं हो सकते हैं और अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट से शरण की उम्मीद कर सकते हैं।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि अनुच्छेद 227 द्वारा उच्च न्यायालय में निहित क्षेत्राधिकार का उपयोग किसी पार्टी के लिए "निचली अदालत के समक्ष उसके द्वारा प्रदर्शित लापरवाही से निपटने के लिए" अवसर के रूप में किए जाने की उम्मीद नहीं है।अदालत ने कहा,"न ही अनुच्छेद 227 दया क्षेत्राधिकार की प्रकृति का है।"अदालत ने एक सिविल...

[समलैंगिक विवाह] तर्कों में अधिक वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लाइव स्ट्रीमिंग संभावित रूप से अप्रिय घटनाओं को भड़काने का कारण बन सकता है: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
[समलैंगिक विवाह] 'तर्कों में अधिक वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लाइव स्ट्रीमिंग संभावित रूप से अप्रिय घटनाओं को भड़काने का कारण बन सकता है': केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

केंद्र सरकार ने एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के समक्ष देश में समलैंगिक विवाहों (Same Sex marriage) की मान्यता और पंजीकरण से संबंधित मामले में कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विरोध किया है।दूसरा हलफनामा कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा दायर किया गया है जब उच्च न्यायालय ने अपने पिछले हलफनामे में की गई "आपत्तिजनक टिप्पणियों" पर नाराजगी व्यक्त की थी।मंत्रालय ने तर्क दिया है कि वर्तमान जैसे मामलों में "अधिक वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, इसलिए कार्यवाही का सीधा प्रसारण उचित नहीं हो सकता...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस साजिश मामले में सिद्दीकी कप्पन के सह-आरोपी को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस षडयंत्र मामले में सिद्दीकी कप्पन के सह-आरोपी कैब ड्राइवर मोहम्मद आलम को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि उसके कब्जे से कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई थी।यूएपीए के आरोपी आलम, जिसे 5 अक्टूबर, 2020 को हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था, उन्हें जस्टिस रमेश सिन्हा और ज‌स्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने जमानत दे दी क्योंकि कोर्ट ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में अपीलकर्ता की संलिप्तता नहीं पाई गई।महत्वपूर्ण रूप से कोर्ट ने उनके मामले को सिद्धिक कप्पन (मामले में एक सह-आरोपी और...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
भविष्य निधि और मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा प्राप्त अन्य आर्थिक लाभ का मोटर दुर्घटना दावे के साथ कोई संबंध नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भविष्य निधि, पेंशन, बीमा, बैंक बैलेंस, शेयर, सावधि जमा आदि किसी की मृत्यु के बाद वारिसों को मिलने वाले आर्थिक लाभ हैं, लेकिन इन सभी का मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे के रूप में प्राप्य राशि के साथ कोई संबंध नहीं है। यह कानून केवल दुर्घटना में मृत्यु के कारण लागू होता है।जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने कहा,"मुख्य कारण यह है कि ये सभी राशियां मृतक दूसरों के साथ किए गए संविदात्मक संबंधों के कारण अर्जित करता है। यह नहीं कहा जा सकता...

पैगंबर पर टिप्पणी मामला  : तेलंगाना कोर्ट ने निलंबित भाजपा विधायक टी राजा सिंह की रिहाई का आदेश दिया, पुलिस रिमांड आवेदन वापस किया
पैगंबर पर टिप्पणी मामला : तेलंगाना कोर्ट ने निलंबित भाजपा विधायक टी राजा सिंह की रिहाई का आदेश दिया, पुलिस रिमांड आवेदन वापस किया

हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत ने मंगलवार को हैदराबाद पुलिस द्वारा भाजपा विधायक राजा सिंह के खिलाफ पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी के मामले में दर्ज एक मामले के संबंध में दायर रिमांड रिपोर्ट खारिज कर दी। राजा के वकील करुणा सागर ने लाइव लॉ से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि पुलिस सीआरपीसी की धारा 41 ए के प्रावधानों का पालन करने में विफल रही है जैसा कि अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने यह भी कहा कि...

गुजरात हाईकोर्ट
बदनीयत से पुनरीक्षण शक्ति का उपयोग नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट ने बिजली चोरी के मामले में जाति दुर्व्यवहार की शिकायत को खारिज किया

गुजरात हाईकोर्ट ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत शिकायत को इस आधार पर खारिज करने कि याचिकाकर्ता ने 'साफ नीयत' से अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया था और उस पर बिजली चोरी का आरोप लगाया गया था, सत्र न्यायलय के फैसले को बरकरार रखा है।जस्टिस समीर दवे ने कहा,"यह तय कानून है कि हाईकोर्ट की पुनरीक्षण शक्तियों का प्रयोग केवल कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने और न्याय के लक्ष्य को सुरक्षित करने के लिए किया जा सकता है। कानून की प्रक्रिया को एक सैद्धांतिक और वास्तव में पीड़ित व्यक्ति द्वारा...

मोटर दुर्घटना दावों में संभावना की प्रबलता लागू होगी, न कि आपराधिक मामलों की तरह सबूत के कठोर सिद्धांत की : जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
मोटर दुर्घटना दावों में संभावना की प्रबलता लागू होगी, न कि आपराधिक मामलों की तरह सबूत के कठोर सिद्धांत की : जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि मोटर वीहिकल एक्ट के तहत मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजे के दावों के लिए आवश्यक मानक संभाव्यता की प्रबलता है, बजाय कि आपराधिक मामले में लागू सबूत के कठोर सिद्धांत।जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, पुलवामा की ओर से एक दावा याचिका पर दिए फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। फैसले के तहत ट्रिब्यूनल ने अपीलकर्ताओं को 6% ब्याज के साथ 4,91,000 की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था।अपीलकर्ताओं ने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी को धोखाधड़ी मामले में अग्रिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी को धोखाधड़ी मामले में अग्रिम जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे (बीकरू, कानपुर) की पत्नी को उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 419 और धारा 420 के तहत उसके नौकर की इच्छा के बिना उसके सिम कार्ड का कथित रूप से उपयोग करने के मामले में अग्रिम जमानत दे दी । जस्टिस सुरेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार एक निजी मुचलके और समान राशि के दो-दो जमानतदार पेश करने पर मुकदमे के समापन तक आवेदक को अग्रिम जमानत दी।अदालत के समक्ष आवेदक की ओर से वकील प्रभा शंकर मिश्रा ने प्रस्तुत किया कि आवेदक निर्दोष...

पटना हाईकोर्ट
सिविल जज भर्ती | आरक्षण का लाभ पाने के लिए इंटरव्यू में 'नॉन-क्रीमी लेयर का ओरिजनल सर्टिफिकेट' पेश करना आवश्यक: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने आरक्षित श्रेणी के एक उम्‍मीदवार पर विचार नहीं करने के बिहार लोक सेवा आयोग (न्यायिक शाखा) के निर्णय को बरकरार रखा है। उम्‍मीदवार इंटरव्यू लेटर की शर्त के अनुसार इंटरव्यू के समय ओरिजनल नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर पाया था।जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की खंडपीठ ने कहा,"यह अच्छी तरह से तय है कि निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार चयर प्रक्रिया का आयोजन सख्ती से किया जाना चाहिए...और विज्ञापन के नियमों और शर्तों में कोई छूट नहीं दी जा सकती है, जब तक...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
भुगतान रोकने, खाता बंद होने और हस्ताक्षर बेमेल होने के कारण अस्वीकृत चेक के मामले भी धारा 138 एनआई एक्ट के दायरे में आते हैं: जे एंड के एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि एनआई एक्ट की धारा 138 में निहित प्रावधानों की उदार व्याख्या की जानी चाहिए ताकि उस उद्देश्य को पाया जा सके जिसके लिए यह प्रावधान अधिनियमित किया गया है।पीठ ने कहा,न केवल धन की कमी या व्यवस्था की अधिकता के कारण बल्‍कि चेक के अनादर के ऐसे मामले, जिनमें "भुगतान रोको", "खाता बंद" और "हस्ताक्षर बेमेल" जैसे मामले शामिल हो, वह भी उक्त प्रावधान के तहत अपराध के दायरे में आते हैं।जस्टिस संजय धर की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत...

किशोर को वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन पर दिशानिर्देश: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमीनी हकीकत जानने के लिए एनजीओ की रिपोर्ट मांगी
किशोर को वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन पर दिशानिर्देश: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमीनी हकीकत जानने के लिए एनजीओ की रिपोर्ट मांगी

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक गैर सरकारी संगठन को "एचक्यू सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स" नामक एक आपराधिक संदर्भ में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी, जो कि किशोर न्याय बोर्डों (जेजेबी) द्वारा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (अधिनियम) की धारा 15(1) के तहत एक किशोर को वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने से संबंधित है।इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि प्रारंभिक मूल्यांकन के तरीके के संबंध में मामले में एक बड़ा मुद्दा...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और पत्नी लीना पॉलोज को तिहाड़ जेल से दिल्ली की मंडोली जेल ट्रांसफर करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और पत्नी लीना पॉलोज को एक हफ्ते के भीतर तिहाड़ जेल से दिल्ली की मंडोली जेल ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस सुधांशु धूलिया ने यह निर्देश सुकेश चंद्रशेखर और उनकी पत्नी लीना पॉलोज द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार करते हुए पारित किया, जिसमें सुरक्षा कारणों से तिहाड़ जेल से दिल्ली के बाहर एक जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।"इन सामग्रियों को रिकॉर्ड पर रखने और 17 जून के आदेश के संबंध...

हत्या के आरोपी को अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों के आधार पर सीआरपीसी की धारा 319 के तहत समन किया गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी
हत्या के आरोपी को अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों के आधार पर सीआरपीसी की धारा 319 के तहत समन किया गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते हत्या के आरोपी को जमानत दे दी, जिसे अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों के आधार पर निचली अदालत द्वारा सीआरपीसी की धारा 319 के तहत 'सरसरी तौर पर' समन किया गया था।जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने कहा कि आवेदक का नाम एफआईआर में भी नहीं है और उसे सीआरपीसी की धारा 319 के तहत निचली अदालत में गवाहों के बयानों के आधार पर तलब किया गया था।उल्लेखनीय है कि सीआरपीसी की धारा 319 के तहत न्यायालय को किसी भी जांच या किसी अपराध के मुकदमे के दौरान अपराध के दोषी होने वाले अन्य व्यक्तियों के...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
"कानून महिलाओं को समाज का 'कमजोर वर्ग' मानता है, उन्हें अधिक सुरक्षा की आवश्यकता है": बॉम्बे हाईकोर्ट वैवाहिक मामले को स्थानांतरित करते हुए कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक वैवाहिक मामले को यह कहते हुए स्थानांतरित कर दिया कि कानून महिलाओं को समाज के कमजोर वर्ग से संबंधित मानता है और उनकी असुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।अदालत ने कहा,"यह कारण कुछ महत्व का हो सकता है, तथ्य यह है कि 2022 के विविध सिविल आवेदन संख्या 171 में आवेदक एक महिला है, उसकी असुविधा को अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता है क्योंकि कानून महिला को समाज के कमजोर वर्ग से संबंधित वर्ग के रूप में मानता है और अधिक सुरक्षा की आवश्यकता है।"जस्टिस एस एम मोदक एक...

पेंशन लाभ स्वीकार करने के बाद एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(p) को आर्म ट्विस्टिंग के उपकरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
पेंशन लाभ स्वीकार करने के बाद एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(p) को 'आर्म ट्विस्टिंग' के उपकरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य बैंक कर्मचारी के खिलाफ अनियमितताएं बरतने के आरोप पर शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को कर्मचारी द्वारा पेनल्टी स्वीकार कर पेंशन प्राप्त कर लेने के बाद एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(p) के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती।अधिनियम की धारा 3(1)(p) निर्देश देती है कि यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के खिलाफ झूठा, दुर्भावनापूर्ण या तंग करने वाला मुकदमा या आपराधिक या कानूनी कार्यवाही की जाती है तो वह अधिनियम के तहत अपराध होगा।अदालत...

सीआरपीसी की धारा 197 के तहत मंजूरी की आवश्यकता, भले ही पुलिस अधिकारी आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में अपने अधिकार से आगे बढ़े हों: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 197 के तहत मंजूरी की आवश्यकता, भले ही पुलिस अधिकारी आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में अपने अधिकार से आगे बढ़े हों: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी अपने आधिकारिक/सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन में कुछ हद तक अपने अधिकार से बढ़ते हैं तो भी उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत मंजूरी की आवश्यकता होगी।सीआरपीसी की धारा 197 न्यायाधीशों और लोक सेवकों के अभियोजन से संबंधित है। इसमें सरकार की मंजूरी ऐसे अपराध का संज्ञान लेने के लिए निर्धारित की गई है जो कथित तौर पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कार्य करने या कार्य करने के लिए कथित रूप से किए गए अपराध का संज्ञान लेने के लिए निर्धारित...