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टेरर फंडिंग केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 के आधार पर जमानत से इनकार के खिलाफ जहूर वटाली की अपील खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कश्मीरी व्यवसायी जहूर अहमद शाह वटाली द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। इसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। उक्त आदेश में वटाली को पिछले साल COVID-19 के आधार पर टेरर फंडिंग मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।वटाली ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 15 मई, 2021 को पारित आदेश को चुनौती दी। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि केवल COVID-19 महामारी के प्रसार के आधार पर उसे जमानत देने का कोई सवाल ही नहीं है। ट्रायल कोर्ट ने वटाली की मेडिकल कंडिशन पर भी ध्यान दिया,...
सीआरपीसी धारा 311 के तहत गवाह को वापस बुलाने का कोई आधार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सीआरपीसी की धारा 311 के तहत वकील को बदलना गवाह को वापस बुलाने का कोई आधार नहीं।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की खंडपीठ ने रणधीर सिंह बनाम हरियाणा राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया और कहा कि न्यायालय के पास असीमित शक्तियां हैं, जिन्हें न्याय को सुरक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें समन और जांच या व्यक्ति को वापस बुलाना और फिर से जांच करना शामिल है। लेकिन ऐसी शक्ति का प्रयोग तभी किया जाता है जब मामले के न्यायसंगत निर्णय के लिए...
NHAI को आबादी वाले इलाकों में राजमार्ग बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत की जनहित याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका खारिज कर दी, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India) को राजमार्गों पर बाईपास का निर्माण नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।एनएच 325 के पास स्थित गांव की ग्राम पंचायत द्वारा दायर जनहित याचिका में एनएचएआई को गांव के आबादी वाले इलाके से होकर हाईवे बनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी ताकि गांव का भी विकास हो सके।अदालत ने कहा कि पूर्व दृष्टया रिट याचिका परोक्ष और दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए दायर की गई...
मुस्लिम कानून के तहत प्यूबर्टी की उम्र प्राप्त कर चुकी नाबालिग लड़की माता-पिता की सहमति के बिना शादी कर सकती है, 18 साल से कम उम्र में भी पति के साथ रहने का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि मुस्लिम कानून (Muslim Law) के तहत प्यूबर्टी की उम्र प्राप्त कर चुकी नाबालिग लड़की माता-पिता की सहमति के बिना शादी कर सकती है और उसे अपने पति के साथ रहने का अधिकार है, भले ही उसकी उम्र 18 वर्ष से कम हो।जस्टिस जसमीत सिंह ने इस साल मार्च में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करने वाले एक मुस्लिम जोड़े को सुरक्षा प्रदान करते हुए यह टिप्पणी की। दंपति ने याचिका दायर कर यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की थी कि कोई उन्हें अलग न करें।लड़की के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजभर समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का निर्णय करने में विफल रहने पर राज्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजभर जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर निर्णय लेने में विफल रहने पर समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया।हाईकोर्ट के 11 मार्च, 2022 के आदेश के संबंध में नोटिस जारी किया गया। इसमें विभाग को राज्य के राजभर समुदाय को अनुसूचित जनजाती की सूची में शामिल करने के लिए केंद्र द्वारा भेजे गए अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ...
निजी ठेकेदारों के माध्यम से मैला ढोने वालों को नियुक्त नहीं कर सकते, इसके लिए नगरपालिकाओं के आयुक्तों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने मैला ढोने (Manual Scavenging) की प्रथा को समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को कहा कि यदि किसी नगरपालिका को निजी ठेकेदारों के माध्यम से भी हाथ से मैला ढोने की प्रथा में लिप्त देखा जाता है तो उक्त नगरपालिका के आयुक्त को उसी के लिए उत्तरदायी बनाया जाए।चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस एन माला की पीठ सफाई कर्मचारी आंदोलन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने हाथ से मैला ढोने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और दोषी अधिकारियों के...
केरल हाईकोर्ट ने लक्षद्वीप के भाजपा महासचिव को 'भगवा झंडे' के साथ राष्ट्रीय ध्वज लगाने के आरोप में अग्रिम जमानत दी
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को लक्षद्वीप के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य महासचिव को राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में अग्रिम जमानत दे दी।मोहम्मद कासिम एचके पर राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत मामला दर्ज किया गया है।जस्टिस विजू अब्राहम ने आरोपों की प्रकृति को देखते हुए याचिकाकर्ता की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं होने पर ध्यान देते हुए अग्रिम जमानत दी।अभियोजन पक्ष ने व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर की जा रही तस्वीर पर भरोसा किया, जिसमें कासिम भारतीय...
'आरएसएस की सिफारिशों के आधार पर नियुक्ति': इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्टेट लॉ ऑफिसर की हालिया नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका दायर
स्टेट लॉ ऑफिसर्स की हालिया नियुक्तियों को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के समक्ष जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सिफारिशों के आधार पर नियुक्त किया गया था।एडवोकेट आलोक कीर्ति मिश्रा और एडवोकेट डी.के. त्रिपाठी के माध्यम से एडवोकेट रमा शंकर तिवारी, एडवोकेट शशांक कुमार शुक्ला और एडवोकेट अरविंद कुमार ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि हाल ही में नियुक्त 220 अधिकारियों में से कई राज्य के प्रमुख...
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सार्वजनिक रूप से न्यायाधीशों को निशाना बनाने के हालिया ट्रेंड की निंदा की
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में चुने गए श्री जगदीप धनखड़ के सम्मान में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। भारत के उपराष्ट्रपति ने न्यायाधीशों की गरिमा कानून के शासन और संवैधानिकता की कुंजी होने की बात करते हुए सार्वजनिक डोमेन में न्यायाधीशों को निशाना बनाने की प्रथा की निंदा की।श्री धनखड़ ने बार के सदस्य और फिर बाद में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपना अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र न्यायपालिका देश में लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास को...
केरल सरकार ने 'यौन उत्तेजक कपड़े' टिप्पणी के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया
केरल सरकार (Kerala Government) ने यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) के एक मामले में लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सिविक चंद्रन (Civic Chandran) को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) का रुख किया है।12 अगस्त को पारित कोझीकोड सत्र न्यायालय के आदेश ने बड़े पैमाने पर सामाजिक आक्रोश पैदा किया क्योंकि इसमें टिप्पणी की गई थी कि अगर महिला ने 'यौन उत्तेजक कपड़े (Sexually Provocative Dress)' पहन रखी है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए के तहत अपराध प्रथम दृष्टया आकर्षित...
धारा 190 सीआरपीसी | मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने, प्रक्रिया जारी करने के बाद किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने पर कोई रोक नहीं: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि धारा 190 सीआरपीसी के तहत कोई रोक नहीं है कि एक बार किसी आरोपी के खिलाफ प्रक्रिया जारी हो जाने के बाद, अगली तारीख को मजिस्ट्रेट किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ प्रक्रिया जारी नहीं कर सकता जिसके खिलाफ रिकॉर्ड पर कुछ सामग्री है, जबकि उसका नाम आरोप पत्र में आरोपी के रूप में शामिल नहीं है।जस्टिस रजनीश ओसवाल की पीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जम्मू द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ सुनवाई करते हुए इन टिप्पणियों को दर्ज किया, जिसके आधार पर सिटी जज को...
एलपीजी सिलेंडरों का परिवहन पब्लिक यूटिलिटी सर्विस: केरल हाईकोर्ट ने हड़ताल पर रोक लगाई
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एलपीजी सिलेंडरों के परिवहन को 'सार्वजनिक उपयोगिता सेवा' घोषित करते हुए, जैसा कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2 (एन) में परिभाषित किया गया है, कन्नूर जिला ईंधन कर्मचारी संघ के सदस्यों द्वारा प्रस्तावित हड़ताल पर रोक लगा दी।यह माना गया कि ऐसी जनोपयोगी सेवा में कार्यरत कोई भी व्यक्ति सुलह अधिकारी के समक्ष सुलह की कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान और ऐसी कार्यवाही के समापन के सात दिन बाद हड़ताल पर नहीं जा सकता है।जस्टिस मुरली पुरुषोत्तमन ने यह देखते हुए कि चूंकि...
हनुमान चालीसा विवाद: राणा दंपति की जमानत रद्द करने के लिए दायर मुंबई पुलिस की याचिका विशेष अदालत ने ठुकराई
मुंबई की विशेष अदालत ने सोमवार को हनुमान चालीसा मामले में सांसद नवनीत राणा और विधायक रवि राणा के खिलाफ जमानत की शर्तों के कथित उल्लंघन के संबंध में गैर-जमानती वारंट जारी करने की मुंबई पुलिस की याचिका खारिज कर दी।विशेष जज आरएस रोकाडे ने आरोपी के वकील रिजवान मर्चेंट और राज्य के विशेष लोक अभियोजक प्रदीप घाटर को सुनने के बाद आदेश पारित किया।उल्लेखनीय है कि राणा दंपति ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की मांग की थी, जिसके बाद 23 अप्रैल को उन पर...
गाय की खाल के चमड़े का परिवहन उत्तर प्रदेश गौ हत्या अधिनियम के उल्लंघन के दायरे में नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गाय के चमड़े का परिवहन उत्तर प्रदेश गौ हत्या रोकथाम अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के किसी भी उल्लंघन के दायरे में नहीं है और इसलिए, मजिस्ट्रेट के पास सीआरपीसी की धारा 451 या धारा 457 के तहत उस वाहन को छोड़ने की शक्ति है, जिस वाहन के द्वारा कथित रूप से गाय या गौवंश का चमड़ा ले जाया जा रहा था। जस्टिस मो. असलम ने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आगरा का एक आदेश रद्द कर दिया, जिसमें याचिकार्ता द्वारा दायर आवेदन को खारिज कर दिया गया था। इस आवेदन में कथित तौर पर गाय के चमड़े...
अनुच्छेद 25/26 संविधान के तहत "अज़ान" की सामग्री अन्य धर्मों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती : कर्नाटक हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को अज़ान से संबंधित एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 26 "धार्मिक सहिष्णुता" के सिद्धांत का प्रतीक है, जो भारतीय सभ्यता की एक विशेषता है। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 25/26 संविधान के तहत "अज़ान" की सामग्री अन्य धर्मों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती है। याचिका में आरोप लगाया था कि अज़ान की सामग्री (इस्लाम में प्रार्थना के लिए बुलाना) दूसरे धर्मों के मानने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे...
यूएपीए के तहत गिरफ्तार व्यक्ति के पास जमानत की संभावना कम, हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी को उसकी निवारक हिरासत के लिए बाध्यकारी कारण दिखाना चाहिए: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया कि निवारक निरोध आदेश तब भी पारित किए जा सकते हैं जब कोई व्यक्ति पुलिस हिरासत में हो। हालांकि, प्राधिकरण को ऐसा करने के लिए कारणों को दर्ज करना चाहिए।अवलोकन विशेष रूप से उस संदर्भ में प्रासंगिकता ग्रहण करता है जहां हिरासत में लिए जाने के लिए प्रस्तावित व्यक्ति को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोपी बनाया गया है और जमानत की संभावना कम है। इसलिए उसे विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने से रोका गया है।जस्टिस संजय धर ने उक्त टिप्पणी करते हुए...
अनुशासनात्मक प्राधिकारी आरोपी-कर्मचारी के खिलाफ समानांतर आपराधिक कार्यवाही में प्रस्तुत दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के उद्देश्य से अनुशासनात्मक प्राधिकारी (Disciplinary Authority) आरोपी-कर्मचारी के खिलाफ समानांतर आपराधिक कार्यवाही के दौरान बाहरी दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर सकता।जस्टिस पीबी बजंथरी ने कहा,"जांच प्राधिकरण या अनुशासनात्मक प्राधिकरण द्वारा बाहरी दस्तावेज़ पर विचार नहीं किया जा सकता है। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान पर भरोसा करने में अनुशासनात्मक प्राधिकरण का निर्णय बाहरी है और यह विनियम, 1976 के विनियम 7 के संदर्भ में नहीं है।"पीठ केनरा बैंक अधिकारी...
'लाल सिंह चड्ढा' फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर भाजपा नेता ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की
आमिर खान और करीना कपूर खान अभिनीत फिल्म लाल सिंह चड्ढा के राज्य में प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि इस फिल्म से शांति भंग हो सकती है।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और वकील नाजिया इलाही खान ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए कहा कि राज्य में किसी भी धार्मिक मुद्दे के संबंध में स्थिति बेहद अस्थिर है। इस संबंध में अपने तर्कों को पुष्ट करने के लिए याचिकाकर्ता ने हाल के कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया...
दिल्ली दंगे: अदालत ने "असंगत तहकीकात" पर सवाल उठाया, जिसमें घायल शिकायतकर्ता को ही आरोपी बना दिया गया
दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दंगों के मामले में इन्वेस्टिगेशन या तहकीकात पर सवाल उठाया है, जहां साजिद नाम के शिकायतकर्ता व्यक्ति को ही तहकीकात के बाद आरोपी के रूप में पेश किया गया।साजिद ने आरोप लगाया कि 25 फरवरी, 2020 को उसे गोली लगी थी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा,"उत्सुकतावश तहकीकात के दौरान साजिद को आरोपी बनाया गया। प्राथमिक कारणों में से एक यह है कि चूंकि उसे दंगों के दौरान गोली का सामना करना पड़ा, इसलिए उसे दंगाई भीड़ का हिस्सा माना जा सकता है। इस तर्क से हर घायल व्यक्ति...
आदेश XLI नियम 25 सीपीसी | अपीलीय न्यायालय द्वारा तय किए गए अतिरिक्त मुद्दों को निर्धारित करने के लिए पक्ष अदालत के सीमित क्षेत्राधिकार में वाद में संशोधन नहीं कर सकता: सिक्किम हाईकोर्ट
सिक्किम हाईकोर्ट ने हाल ही में संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रतिवादियों द्वारा दायर किए गए प्रति-दावे के लिए वाद में संशोधन और लिखित बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी, जबकि आदेश XLI नियम 25 सीपीसी के तहत सिविल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही लंबित थी।प्रावधान यह है कि एक अपीलीय न्यायालय कुछ अतिरिक्त मुद्दों को जांच के लिए तैयार कर सकता है और उन्हें ट्रायल कोर्ट में भेज सकता है जिसकी डिक्री की अपील की जाती है।जस्टिस भास्कर राज प्रधान की पीठ ने कहा कि दोनों...




















