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भीमा कोरेगांव : बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को जमानत देने से इनकार करने वाला विशेष अदालत का "गूढ़" आदेश खारिज किया, नए सिरे से फैसला करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को विशेष एनआईए अदालत को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और फैसला करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह देखा कि निचली अदालत ने भीमा कोरेगांव के आरोपी गौतम नवलखा की जमानत याचिका को खारिज करते हुए अप्रकट तर्क (Cryptic Order) दिया था। इसके मद्देनज़र हाईकोर्ट ने एनआईए अदालत को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और फैसला करने का निर्देश दिया।जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस पीडी नाइक की खंडपीठ ने नवलखा की जमानत याचिका खारिज करने वाले विशेष एनआईए अदालत का आदेश खारिज कर दिया।खंडपीठ ने...
मोहम्मद जुबैर के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले शख्स के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? हाईकोर्ट ने 2020 POCSO एफआईआर मामले में दिल्ली पुलिस से पूछा
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से पूछा कि अगस्त 2020 में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, जिसके बाद जुबैर के खिलाफ POCSO अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने दिल्ली पुलिस के वकील से पूछा,“मेरा सवाल यह है कि आपने इस आदमी (जुबैर) के खिलाफ कुछ नहीं पाया और उसका नाम चार्जशीट में नहीं डाला। उस व्यक्ति का क्या हुआ जिसने आपत्तिजनक ट्वीट किये? आपने इस सज्जन जगदीश सिंह का क्या किया?”यह...
पूंजीगत संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण पर धारा 50सी लागू नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि कैपिटल एसेट (भूमि या बिल्डिंग, या दोनों) के अनिवार्य अधिग्रहण के मामलों में, आयकर अधिनियम की धारा 50सी के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा सकता है, क्योंकि हस्तांतरण को प्रभावित करने के लिए स्टांप ड्यूटी के पेमेंट का प्रश्न पैदा नहीं होता।जस्टिस टीएस शिवगणनम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य ने देखा कि संपत्ति को राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के प्रावधानों के तहत अधिग्रहित किया गया था। उक्त कानून के संचालन से संपत्ति निहित होती है, और संपत्ति के निहित होने पर स्टांप शुल्क...
यदि आरोप पत्र दोषपूर्ण पाया जाता है और दोषों को दूर करने के लिए वैधानिक अवधि के बाद लौटाया जाता है तो क्या अभियुक्त डिफ़ॉल्ट बेल का हकदार है? केरल हाईकोर्ट ने जवाब दिया
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में विचार किया कि उन मामलों में, जहां जांच की वैधानिक समय सीमा के भीतर अंतिम रिपोर्ट दायर की गई हो, लेकिन आरोप-पत्र दोषपूर्ण पाया गया हो और वैधानिक समय सीमा समाप्त होने के बाद दोष को ठीक करने के लिए वापस भेजा गया हो, सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत जमानत के लिए आरोपी व्यक्ति की पात्रता बनी रहेगी?जस्टिस वीजी अरुण ने कहा,"जब लोक अभियोजक की ओर से विस्तार की मांग की गई हो, या आरोपी ने वैधानिक जमानत की मांग की हो, तब अदालत को विचार करना चाहिए कि क्या जांच पूरी करने के बाद...
धारा 147, एनआई एक्टः हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा, चेक बाउंस मामले में सजा के बाद अपराध को कम्पाउंड किया जा सकता है
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि नेगोशिएबल इंट्रयूमेंट्स एक्ट की धारा 147 (कम्पाउंडेबल होने के लिए अपराध) के तहत अदालतों को अपराध को कम्पाउंड करने के लिए पर्याप्त शक्तियां दी गई हैं, यहां तक कि उन मामलों में भी, जहां आरोपी को दोषी ठहराया जाता है।जस्टिस संदीप शर्मा ने एक याचिका की सुनवाई के दरमियान उक्त टिप्पणियां की। याचिकाकर्ता/अभियुक्त ने याचिका में इस आधार पर एनआई एक्ट की धारा 147 के तहत अपराध को कंपाउंड करने के लिए प्रार्थना की थी कि याचिकाकर्ता/अभियुक्त ने मामले से समझौता कर लिया...
हाथरस गैंग रेप और मर्डर केस: यूपी कोर्ट ने तीन आरोपियों को बरी किया, एक को दोषी ठहराया
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की एक अदालत ने सितंबर 2020 के सामूहिक बलात्कार और 19 वर्षीय दलित लड़की की हत्या के मामले में 4 आरोपियों में से 3 को आज बरी कर दिया। स्पेशल जज त्रिलोक पाल सिंह की अदालत, हाथरस (SC/ST, Pev. of Atroci Act) ने फैसला सुनाया।मुख्य आरोपी संदीप को अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या के अपराधों और एससी-एसटी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया है। कोर्ट जल्द ही सजा सुनाने वाली है।अन्य चार अभियुक्तों - संदीप (20), रवि (35), लव कुश (23), और...
क्या विबंधन का नियम उस व्यक्ति के पक्ष में लागू होगा जो यह जाने बिना कि वह उच्च माध्यमिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गया है, उच्च शिक्षा प्राप्त करता है और सेवा में शामिल होता है ? उड़ीसा हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ तय करेगी
मुख्य न्यायाधीश डॉ एस मुरलीधर, डॉ जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही और जस्टिस मुरहरी श्री रमन की उड़ीसा हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने बुधवार को उस संदर्भ में फैसला सुरक्षित रख लिया, जो एक खंडपीठ द्वारा दिए गए फैसले की शुद्धता तय करने के लिए किया गया था।एक और खंडपीठ जिसमें यह कहा गया था कि विबंधन का नियम उस व्यक्ति के पक्ष में लागू होगा जो यह जाने बिना कि वह उच्च माध्यमिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गया है, उच्च शिक्षा प्राप्त करता है और सेवा में शामिल होता है।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता, वर्तमान मामले में,...
अगर सरकारी कर्मचारियों को पूरी तरह से टीवी केबल कनेक्शन देने से मना कर दिया जाए तो उन्हें और अधिक शांति की संभावना होगी: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए केबल टीवी ऑपरेटर को गौंडमपल्लयम में सरकारी अधिकारियों की आवास इकाई को टेलीविजन केबल कनेक्शन देने की अनुमति देते हुए कहा कि कर्मचारियों को केबल कनेक्शन देने से इनकार करना बेहतर होगा, क्योंकि वे इन चैनलों को देखे बिना अधिक शांति से रहेंगे।जस्टिस सीवी कार्तिकेयन केबल ऑपरेटर स्टार चैनल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें इस आधार पर आदेश को चुनौती दी गई कि उन्हें पक्षपातपूर्ण तरीके से कनेक्शन देने का...
वादी ने तारीखों का उचित ब्योरा दिए बिना विलंब की माफी के लिए "रहस्यमयी" आवेदन किया हो तो उसका बचाव नहीं कर सकतेः जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में तारीखों का उचित ब्योरा नहीं देने के कारण एक 'रहस्यमयी' विलंब क्षमा आवेदन को खारिज कर दिया।जस्टिस एमए चौधरी की पीठ ने कहा,"जहां क्षमा के लिए दिया गया आवेदन पर्याप्त कारण और याचिकाकर्ताओं के दृष्टिकोण को स्पष्ट नहीं करता है, अदालतें इस प्रकार के आवेदन को लापरवाही से और रहस्यमयी ढंग से करने के कारण वादियों की सहायता और बचाव के लिए आगे नहीं आ सकती"।कोर्ट ने यह टिप्पणी एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता ने मोटर दुर्घटना दावा...
विध्वंस के लिए याचिका पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता जब तक कि यह अतिक्रमण के विशेष क्षेत्र को निर्दिष्ट न करे: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह कथित रूप से अतिक्रमण के अधीन क्षेत्र विशेष का वर्णन किए बिना केवल विध्वंस की याचिका पर निर्देश जारी नहीं कर सकता।जस्टिस निर्जर एस. देसाई की एकल पीठ ने अहमदाबाद के चंदखेला इलाके में गुजरात हाउसिंग बोर्ड में कथित अवैध अतिक्रमण को गिराने की मांग वाली रिट याचिका खारिज कर दी।कोर्ट ने कहा,"जब तक याचिका विशेष अवैध अतिक्रमण को निर्दिष्ट नहीं करती है, तब तक न्यायालय गुजरात हाउसिंग बोर्ड या अहमदाबाद नगर निगम को कोई निर्देश जारी करने की स्थिति में नहीं होगा।"कोर्ट...
जांच अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते समय न्यायाधीशों को नियंत्रण और सावधानी बरतनी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों को जांच अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की पेशेवर क्षमताओं पर आक्षेप करते समय अधिक नियंत्रण और सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इससे किसी व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो सकता है और काम और प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जांच अधिकारियों पर खामियों को इंगित करने के लिए न्यायिक स्वतंत्रता के बीच महीन दीवार मौजूद है और न्यायिक संयम प्रदर्शित करने की बाध्यता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।अदालत ने कहा,"हालांकि न्यायिक सख्ती और...
केवल इसलिए कि पीड़िता एसटी समुदाय से संबंधित है, यह नहीं माना जा सकत कि आरोपी ने उसका यौन शोषण करने के लिए उसकी इच्छा पर हावी होने की कोशिश की: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि केवल इसलिए कि पीड़िता अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से संबंधित है, यह नहीं माना जा सकत कि आरोपी ने उसका यौन शोषण करने के लिए उसकी इच्छा पर हावी होने की कोशिश की, जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम ['अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम'] के 2016 की धारा 3(1)(xii) के तहत दंडनीय है।जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने पूर्वोक्त प्रावधान के तहत दर्ज दोषसिद्धि के आदेश को रद्द करते हुए कहा,"हमारी सुविचारित राय...
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएम अहमदी का निधन
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएम अहमदी का आज सुबह 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जस्टिस अहमदी का जन्म गुजरात के सूरत शहर में हुआ। उन्होंने 1954 में बॉम्बे में इनरोल करवा कर कानूनी पेशे में प्रवेश किया। दस साल बाद उन्हें अहमदाबाद में सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किया गया। 1976 में उन्हें गुजरात हाईकोर्ट में पदोन्नत किया गया।उन्होंने 1989 में सुप्रीम कोर्ट कानूनी सहायता समिति के अध्यक्ष के रूप में और 1990 और 1994 के बीच भारत में कानूनी सहायता योजनाओं को...
मद्रास हाईकोर्ट ने कपल को विशेष विवाह अधिनियम के तहत वर्चुअल विवाह करने की अनुमति देने वाले एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई
मद्रास हाईकोर्ट ने संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे दूल्हे को भारत में रह रही दुल्हन के साथ वर्चुअल मोड के माध्यम से विवाह करने की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। अदालत ने कहा था कि दुल्हन प्रमाणपत्र में अपने और दूल्हे दोनों के लिए हस्ताक्षर कर सकती है क्योंकि उसके पास इस आशय का पावर ऑफ अटॉर्नी है। जस्टिस डी कृष्णकुमार और जस्टिस विक्टोरिया गौरी की खंडपीठ जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के आदेश के खिलाफ सब रजिस्ट्रार मनावलकुरिची द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही...
केवल इसलिए रिश्ते में "धार्मिक कोण" नहीं माना जा सकता, क्योंकि लड़का और लड़की अलग-अलग धर्मों से हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने हाल ही में आयोजित किया गया कि केवल इसलिए किसी रिश्ते में 'धार्मिक कोण' नहीं देखा जा सकता, क्योंकि रिश्ते में लड़का और लड़की अलग-अलग धर्मों से हैं।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस अभय वाघवासे की खंडपीठ ने मुस्लिम महिला और उसके परिवार को हिंदू पुरुष को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप में अग्रिम जमानत देते हुए कहा,“ऐसा लगता है कि अब लव-जिहाद का रंग देने की कोशिश की गई है, लेकिन जब लव को स्वीकार कर लिया जाता है तो व्यक्ति को दूसरे के धर्म में परिवर्तित करने...
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बाल विवाह के आरोपी को 'फॉरेनर्स ट्रांसिट कैंप' में डालने पर असम सरकार की खिंचाई की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गोलपारा जिले में मटिया ट्रांजिट कैंप को जेल में बदलने के असम सरकार के फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की, जहां 'फॉरेनर्स' को रखा जाता है। यह कदम बाल विवाह पर राज्य की कार्रवाई के मद्देनजर आया है।चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस सुमित्रा सैकिया की खंडपीठ ने राज्य के फैसले को अजीब और प्रथम दृष्टया अस्वीकार्य पाते हुए टिप्पणी की,“यदि आप अपनी जेल क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो इसे उस स्थान पर करें जहां जेल का निर्माण किया गया है। आपको इस डिटेंशन सेंटर को जेल में बदलने की क्या जरूरत...
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने व्यक्तिगत रूप से 60 वर्षीय हाथी की स्वास्थ्य स्थिति का निरीक्षण किया, सुझाव दिये
मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने हाल ही में एक 60 वर्षीय हाथी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने के लिए मुथुमरीअम्मन मंदिर का दौरा किया। अदालत एक पशु अधिकार कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया था कि हाथी ललिता को मेडिकल सहायता की आवश्यकता है। जस्टिस स्वामीनाथन ने 2020 में हाथी की कस्टडी को वन विभाग को हस्तांतरित करने से इनकार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे किसी भी समय समय-समय पर उसका निरीक्षण करें और यदि परिस्थितियों की आवश्यकता हो...
दिल्ली वक्फ बोर्ड मामला : अदालत ने सीबीआई मामले में आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्ला खान और 10 अन्य को जमानत दी
दिल्ली वक्फ बोर्ड में कथित अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान और 10 अन्य को जमानत दे दी। खान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने कहा कि यह एक उपयुक्त मामला है, जहां आरोपी व्यक्तियों को मुकदमे के लिए जमानत दी जानी चाहिए और उनमें से किसी को हिरासत में लेने का कोई कारण या आधार नहीं है।सीबीआई ने आरोप लगाया कि सरकारी खजाने को...
कलेक्टर अन्य दावेदारों की अनुपस्थिति में भी अधिग्रहण के तहत भूमि में हिस्से की सीमा तक मुआवजा दे सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अधिग्रहण के तहत संपत्ति में हिस्सेदार व्यक्तियों के पक्ष में कलेक्टर उनके हिस्से की सीमा तक मुआवजा अवॉर्ड पारित कर सकता है, भले ही हिस्से के दावेदार अन्य इच्छुक व्यक्ति कलेक्टर के सामने पेश ना हों।जस्टिस आरडी धानुका और जस्टिस एमएम साथाये की खंडपीठ ने उचित मुआवजा अधिनियम के तहत बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए कुछ भूमि के अधिग्रहण के मुआवजे के फैसले को बरकरार रखा। अवॉर्ड को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह याचिकाकर्ताओं की सहमति के बिना पारित किया गया था।कोर्ट ने...
एक सिटिंग जज के समक्ष प्रतिदिन सूचीबद्ध मामलों की सीमित संख्या को चुनौती देते हुए एडवोकेट ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया
बार काउंसिल ऑफ केरल में इनरोल एक एडवोकेट ने केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी है कि केरल हाईकोर्ट के एक सिटिंग जज के समक्ष एक दिन में केवल 20 मामलों की सूचीबद्ध होते हैं, जबकि अन्य न्यायाधीशों के पास प्रतिदिन 100 या अधिक मामले सूचीबद्ध होते हैं। एडवोकेट यशवंत शेनॉय ने एक रिट याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि 'चीफ जस्टिस, मास्टर ऑफ रोस्टर होने के नाते मामलों की लिस्टिंग पर रजिस्ट्री को निर्देश देने की शक्ति रखते हैं और कोई भी जज इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता और रजिस्ट्री को उस सूची में कटौती करने...



















