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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने घृणायुक्त पोस्ट लिखने वाले वकील को एक महीने की कैद की सजा सुनाई, उसका फेसबुक खाता हटाया [निर्णय पढ़ें]
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने घृणायुक्त पोस्ट लिखने वाले वकील को एक महीने की कैद की सजा सुनाई, उसका फेसबुक खाता हटाया [निर्णय पढ़ें]

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जजों के खिलाफ फेसबुक पर घृणात्मक पोस्ट लिखने वाले वकील को दंड के रूप में एक महीने के लिए जेल भेज दिया है और उसके फेसबुक खाते को बंद करने का आदेश दिया है।न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति चंदर भूषण बरोवालिया ने विकास सनोरिया के फेसबुक खाते को डिलीट करने का आदेश दिया और कहा कि जजों को भला बुरा कहने की इस बढ़ती धारणा से कठोरता से निपटने की जरूरत है।हाईकोर्ट ने इस बारे में स्वतः संज्ञान लेते हुए विकास सनोरिया के खिलाफ आपराधिक अपमान का मामला दर्ज किया था क्योंकि...

गवाह का बयान और बरामदगी दर्ज करते समय पुलिस पहने जा सकने वाला कैमरा रख सकती है : दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया सुझाव; केंद्र और दिल्ली सरकार को जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]
गवाह का बयान और बरामदगी दर्ज करते समय पुलिस पहने जा सकने वाला कैमरा रख सकती है : दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया सुझाव; केंद्र और दिल्ली सरकार को जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सुझाव दिया कि दिल्ली पुलिस गवाहों के बयानों और बरामदगी की डिजिटल रिकॉर्डिंग कर सकती है और इस बारे में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। यह सुझाव न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आईएस मेहता की पीठ ने दिल्ली पुलिस द्वारा दायर कार्रवाई रिपोर्ट पर गौर करते हुए दी। इस रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच कुल 2,38,070 मामले दर्ज किये गए और लगभग 10 लाख गवाहियों के बयान इस दौरान दर्ज किये गए।दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उपलब्ध तकनीक और इन सूचनाओं को...

न्यायिक सेवा में जाने वाले उम्मीदवारों से मराठी समझने की अपेक्षा अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
न्यायिक सेवा में जाने वाले उम्मीदवारों से मराठी समझने की अपेक्षा अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जज बनने की इच्छा रखने वाले लोगों में मराठी का पर्याप्त ज्ञान होने की उम्मीद करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है। न्यायमूर्ति आरएम सावंत और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की पीठ ने महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008 के नियम 5(3) को सही बताया जिसमें कहा गया है कि उम्मीदवार के पास “मराठी की इतनी अच्छी जानकारी होनी चाहिए कि वह मराठी बोल, लिख और पढ़ सके और मराठी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से मराठी में आसानी से अनुवाद कर सके।” कोर्ट ने यह फैसला देते हुए...

क़ानून के एक छात्र ने दिखाया रास्ता, एक बुजर्गवार से एक रुपया फीस लेकर की उनकी पैरवी [आर्डर पढ़े]
क़ानून के एक छात्र ने दिखाया रास्ता, एक बुजर्गवार से एक रुपया फीस लेकर की उनकी पैरवी [आर्डर पढ़े]

छात्र ने 2014 के उपभोक्ता संरक्षण विनियमन के उस दिशानिर्देश का लाभ उठाया जिसमें कहा गया है कि गैर-अधिवक्ता भी उपभोक्ता अदालत में पेश हो सकते हैं सभी को न्याय सुनिश्चित करने में क़ानूनी मदद की ताकत का उदाहरण पेश करते हुए लखनऊ में क़ानून के पांचवें वर्ष के एक छात्र ने एक बुजर्गवार की क़ानूनी मदद के बदले उनसे फीस के रूप में सिर्फ एक रुपया लेकर रास्ता दिखाया है। इस बुजुर्ग व्यक्ति की उसने जयपुर, राजस्थान के उपभोक्ता अदालत में पैरवी की। यह मामला दो साल से चल रहा था और वह इस व्यक्ति को अदालत से मुआवजा...

डिग्री के बिना लोग कर रहे हैं सर्जरी; उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उन सभी अस्पतालों को सील करने को कहा जो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को नहीं मान रहे हैं [निर्णय पढ़ें]
डिग्री के बिना लोग कर रहे हैं सर्जरी; उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उन सभी अस्पतालों को सील करने को कहा जो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को नहीं मान रहे हैं [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य और उसके अस्पतालों/चिकित्सालयों को निर्देश जारी कर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 को कठोरता से लागू करने को कहा है।हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने अहमद नबी की याचिका पर गौर करते हुए कई निर्देश जारी किये। याचिका में इस बात का आरोप लगाया गया था कि राज्य के अस्पतालों और चिकित्सालयों में इस अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है बल्कि वे उसका उल्लंघन कर रहे हैं।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता ने दो अस्पतालों...

मिर्चपुर में दलितों की हत्या का मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 और लोगों को दोषी ठहराया; कहा, आजादी के 71 साल बाद भी अनुसूचित जातियों के खिलाफ हो रहा है अत्याचार [निर्णय पढ़ें]
मिर्चपुर में दलितों की हत्या का मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 और लोगों को दोषी ठहराया; कहा, आजादी के 71 साल बाद भी अनुसूचित जातियों के खिलाफ हो रहा है अत्याचार [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 20 और लोगों को हरियाणा के हिसार जिले के मिर्चपुर गाँव में एक दलित और उसकी दिव्यांग बेटी को जिंदा जलाने का दोषी पाया। कोर्ट ने इस मामले में पहले सजा पाए 15 अभियुक्तों की सजा के खिलाफ दायर याचिका भी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति आईएस मेहता की पीठ ने 21 आरोपियों कोई बरी किये जाने को सही ठहराया और कहा कि इनके दोष को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। मिर्चपुर में दलितों और जाटों के बीच हुई हिंसा के बाद दलित तारा चंद के घर को जाटों ने 21...

क़ानूनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ता के बिक्री करार को चुनौती देने का अधिकार सह-सहदायिक को नहीं;सुप्रीम कोर्ट ने पिता के खिलाफ दायर बेटे के मामले को खारिज किया [निर्णय पढ़ें]
क़ानूनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ता के बिक्री करार को चुनौती देने का अधिकार सह-सहदायिक को नहीं;सुप्रीम कोर्ट ने पिता के खिलाफ दायर बेटे के मामले को खारिज किया [निर्णय पढ़ें]

‘एक बार जब क़ानूनी जरूरतों के होने की बात साबित हो जाती है, तब हमारे विचार में किसी सह-सहदायिक (बेटे) को परिवार के कर्ता द्वारा किये गए बिक्री के कारार को चुनौती देने का अधिकार नहीं है”सुप्रीम कोर्ट ने 1964 में एक बेटे द्वारा अपने बाप के खिलाफ दायर मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक बार जब क़ानूनी जरूरत होने की बात की पुष्टि हो जाती है तो किसी भी सह-सहदायिक को परिवार के कर्ता द्वारा क़ानूनी जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई बिक्री के किसी करार को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।बेटे ने 1964 में...

राज्य और सुप्रीम कोर्ट की मदद से आरोपी एक दशक तक आपराधिक कार्यवाही को स्थगित करवाता रहा [निर्णय पढ़ें]
राज्य और सुप्रीम कोर्ट की मदद से आरोपी एक दशक तक आपराधिक कार्यवाही को स्थगित करवाता रहा [निर्णय पढ़ें]

 “यह सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मामले के स्थगित होते रहने की वजह से इसकी सुनवाई इन वर्षों में स्थगित रही। इससे जाहिराना तौर पर प्रतिवादी को लाभ हुआ जो हाईकोर्ट द्वारा अभियोगों में बदलाव पर आपत्ति नहीं करने के बावजूद परिवर्तित अभियोगों के लिए भी सुनवाई का सामना नहीं किया।”अमूमन आपराधिक कार्यवाही को आरोपी के आग्रह करने पर स्थगित किया जाता है। लेकिन यह अपील जिसको सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने निस्तारित किया गया, अस्वाभाविक है और इसीलिए दिलचस्प भी।इस मामले में हरियाणा राज्य अपीलकर्ता है। आरोपियों को...

आपराधिक मामलों दोषमुक्त होने के हर मामले को जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष को गंभीरता से लेना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
आपराधिक मामलों दोषमुक्त होने के हर मामले को जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष को गंभीरता से लेना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

 ‘हम इस बात से अवगत हैं कि इस मामले में एक व्यक्ति की मौत हुई है और इस मामले में कुछ भी अंतिम रूप से सामने नहीं आया है और इसके बारे में बहुत सारे प्रश्न अनुत्तरित हैं जो इस बात की ओर इंगित करता है कि  मामले की अनुशासित जांच और अभियोजन नहीं हुआ’हर आपराधिक मामले में जब कोई बरी किया जाता है तो जांच एजेंसियों और अभियोजन अथॉरिटीज को इसे कुछ गंभीरता से लेना चाहिए, यह बात सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान कही।यह मामला एक पंचायत चुनाव में प्रतिद्वंद्वी के साथ हुए अपराध का है। इसमें...

अगर कोई व्यक्ति जो विषय नहीं पढ़ा है उसे वह विषय पढ़ाने के लिए नियुक्त नहीं किया जा सकता : राजस्थान हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
अगर कोई व्यक्ति जो विषय नहीं पढ़ा है उसे वह विषय पढ़ाने के लिए नियुक्त नहीं किया जा सकता : राजस्थान हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

स्नातक में अतिरिक्त विषय के रूप में अंग्रेजी पढ़नेवाले उम्मीदवार अंग्रेजी अध्यापक के पद के लिए योग्य नहीं’क्या ऐसे व्यक्ति को वह विषय पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जा सकता है जो उसने खुद स्नातक के तीन वर्ष के दौरान मुख्य विषय के रूप में नहीं बल्कि अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ा है? राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसा करना शिक्षा का जो भी स्तर बचा है उसको भी नीचे गिराने जैसा होगा। “… एक शिक्षक जिसने खुद ही जिस विषय को नहीं पढ़ा है वह उसको पढ़ाएगा; अगर उसकी नियुक्ति होती है तो शिक्षा की गुणवत्ता की...

सुप्रीम कोर्ट ने 10 में से 7 साल की सजा काट चुके बलात्कार के आरोपी को बरी किया;कहा – उसे अनुमान और संदेह के आधार पर सजा दी गई [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने 10 में से 7 साल की सजा काट चुके बलात्कार के आरोपी को बरी किया;कहा – उसे अनुमान और संदेह के आधार पर सजा दी गई [निर्णय पढ़ें]

“हमें लग रहा है कि इस मामले में इस बात की पूरी आशंका है कि आरोपी को मामले में झूठा फंसाया गया है ताकि आरोपी के परिवार से बदला लिया जा सके क्योंकि दोनों परिवारोंके बीच लम्बे समय से विवाद चला आ रहा है”सुपिर्म कोर्ट ने मंगलवार को उस व्यक्ति को बरी किये जाने का आदेश दिया जिस पर अपनी चचेरी बहन के साथ बलात्कार का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट ने उसे सिर्फ अनुमान और संदेह के आधार पर सजा दी है।आरोपी निचली अदालत से मिली कुल 10 साल की सजा में से 7 साल की सजा काट चुका है। एक अन्य...

‘राहत में बदलाव’ के सिद्धांत की मदद उस समय नहीं ली जा सकती जब मामला मध्यस्थता की स्थिति में है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
‘राहत में बदलाव’ के सिद्धांत की मदद उस समय नहीं ली जा सकती जब मामला मध्यस्थता की स्थिति में है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राहत में संशोधन के सिद्धांत की मदद उस समय ली जा सकती है जब मुख्य मामले के तहत अंतिम रूप से राहत के बारे में निर्णय लिया जा रहा है पर मध्यस्थता के दौरान ऐसा नहीं किया जा सकता।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने समीर नारायण भोजवानी बनाम अरोरा प्रॉपर्टीज एंड इन्वेस्टमेंट्स मामले में कहा कि जब मामले में मध्यस्थता चल रही हो तो आवश्यक आदेश सिर्फ वैसी यथास्थिति बनाए रखने के लिए दिया जा सकता जैसा...

बच्चों के बयान से हुआ पिता पर माँ को जलाकर मारने के आरोप की पुष्टि; दिल्ली हाईकोर्ट ने मुआवजे के लिए मामले को डीएसएलएसए को भेजा [निर्णय पढ़ें]
बच्चों के बयान से हुआ पिता पर माँ को जलाकर मारने के आरोप की पुष्टि; दिल्ली हाईकोर्ट ने मुआवजे के लिए मामले को डीएसएलएसए को भेजा [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस आदमी की आजीवन कैद की सजा को बरकरार रखा है जिस पर अपनी पत्नी को जलाकर मारने का आरोप है। इस आदमी के तीनों बच्चों ने इस मामले में अपने पिता के खिलाफ बयान दिया।न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और विनोद गोएल की पीठ ने अभियुक्त वीरेंदर सिंह की अपील को खारिज कर दिया। वीरेंदर सिंह ने 21 जनवरी 2017 को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें उसे अपनी पत्नी को जलाकर मारने का दोषी पाया गया था।निचली अदालत ने उसको आजीवन कैद की सजा सुनाई गई और 25 हजार रुपए का...

पंचाट के फैसले को खारिज करने के लिए आवेदन में मौखिक साक्ष्य की इजाजत अगर बेहद जरूरी नहीं है तो नहीं देना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पंचाट के फैसले को खारिज करने के लिए आवेदन में मौखिक साक्ष्य की इजाजत अगर बेहद जरूरी नहीं है तो नहीं देना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“हालांकि, इस तरह के रिकॉर्ड में अगर ये बातें शामिल नहीं हैं और अगर वे धारा 34(2)(a) के तहत पैदा होने वाले मामलों के लिए प्रासंगिक हैं, तो हलफनामे के माध्यम से दोनों पक्षों को इसे कोर्ट की जानकारी में लाना चाहिए”सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी पंचाट के निर्णय को बदलवाने के लिए दिए गए आवेदन में पंचाट के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अलावा और किसी रिकॉर्ड की सामान्यतः जरूरत नहीं है।“हालांकि अगर इस तरह के रिकॉर्ड में कुछ जानकारी नहीं है पर अगर ये धारा 34(2)(a) के तहत पैदा होने वाले मामलों के लिए प्रासंगिक...

उत्तराखंड में नशीली दवाओं का कहर : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को स्वीकार करते हुए नारकोटिक्स स्क्वाड और एंटी-ड्रग क्लब को शैक्षणिक संस्थानों में जाने को कहा [निर्णय पढ़ें]
उत्तराखंड में नशीली दवाओं का कहर : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को स्वीकार करते हुए नारकोटिक्स स्क्वाड और एंटी-ड्रग क्लब को शैक्षणिक संस्थानों में जाने को कहा [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड में नशीली दवाओं के प्रसार से चिंतित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इस बारे में अपनाई गई बातों पर अमल करते हुए द्रव/थिनर और वल्केनाइज्ड घोलों/सुलोचनों को नशीले पदार्थों की श्रेणी में रखने की घोषणा की है और राज्य में इनकी बिक्री पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। कोर्ट ने राज्य के सभी जिलों में मादक द्रव्य विरोधी दल गठित करने को कहा है ताकि नशीली दवाओं की तस्करी पर नजर रखी जा सके। कोर्ट ने सभी शिक्षा संस्थानों में नशीली दवाओं के खिलाफ कल्ब बनाने को कभी कहा है।न्यायमूर्ति राजीव शर्मा...

एमबीबीएस/बीडीएस/आयुर्वेदिक कोर्स में राज्य कोटा के तहत प्रवेश के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता और निवासी होने की अर्हता निर्धारित करने की अनुमति है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एमबीबीएस/बीडीएस/आयुर्वेदिक कोर्स में राज्य कोटा के तहत प्रवेश के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता और निवासी होने की अर्हता निर्धारित करने की अनुमति है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

 सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस/बीडीएस के प्रवेश में शैक्षिक/रिहाइश संबंधी अर्हता को सही बताते हुए कहा कि किसी राज्य विशेष के लिए आवश्यक शैक्षिक/रिहाइश संबंधी अर्हता का निर्धारण नियमसम्मत है।एमबीबीएस/बीडीएस में प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवारों ने राजदीप घोष बनाम असम राज्य मामले में मेडिकल कॉलेज एंड डेंटल कॉलेज, असम में प्रवेश के नियम 3(1) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।उक्त नियम के तहत प्रावधान है कि राज्य कोटे के तहत प्रवेश के लिए उम्मीदवार कक्षा सात से 12 तक असम राज्य में ही शिक्षा प्राप्त किया हो।...

गोवारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने से मना नहीं किया जा सकता, उन्हें 100 वर्ष पहले ही आदिवासी का दर्जा दिया गया था : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
गोवारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने से मना नहीं किया जा सकता, उन्हें 100 वर्ष पहले ही आदिवासी का दर्जा दिया गया था : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

एक महत्त्वपूर्ण फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि गोवारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने से मना नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस समुदाय को स्वतंत्र स्टेटस प्रदान किया।न्यायमूर्ति आरके देशपांडे और न्यायमूर्ति एडी उपाध्ये की नागपुर पीठ ने गोवारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का फैसला सुनाया।पृष्ठभूमिराज्य सरकार की सूची के अनुसार, गोवारी समुदाय इस समय विशेष पिछड़ी जातियों की श्रेणी में आता है जबकि केंद्र सरकार के वर्गीकरण के अनुसार यह अन्य पिछड़ी जातियों की श्रेणी में आता है।...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एनडीपीएस मामलों में सूचना देने वाला और जांचकर्ता दोनों एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एनडीपीएस मामलों में सूचना देने वाला और जांचकर्ता दोनों एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता [निर्णय पढ़ें]

‘न्याय न केवल होना चाहिए बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। पक्षपात की किसी भी आशंका या पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष का निषेध किया जाना चाहिए।’एक महत्त्वपूर्ण फैसले में, तीन जजों की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया है कि एनडीपीएस मामलों में सूचना देने वाला और जांच करने वाला दोनों ही एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता है।मुद्दा  सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय  पीठ जिसमें न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर बनुमती और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा शामिल हैं, ने मोहनलाल बनाम पंजाब राज्य मामले में यह फैसला दिया ।परस्पर...

सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति की सजा को सही ठहराया जिसके विवाहेत्तर संबंध के कारण उसकी पत्नी ने आत्महत्या की [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति की सजा को सही ठहराया जिसके विवाहेत्तर संबंध के कारण उसकी पत्नी ने आत्महत्या की [निर्णय पढ़ें]

‘यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता का दूसरी महिला के साथ संबंध का कोई असर नहीं हुआ होगा कि आईपीसी की धारा 306 को नकारा जा सके।’सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को हत्या के लिए उकसाने का दोषी मानते हुए उसको मिली सजा को सही ठहराया है। इस व्यक्ति का किसी अन्य महिला के साथ विवाहेत्तर संबंध थे।कविता ने सिद्दालिंग के साथ शादी होने के चार महीने के अंदर ही आत्महत्या कर ली थी। अभियोजन के अनुसार इस आत्महत्या का कारण उसके पति की दहेज़ की मांग और किसी अन्य महिला के साथ उसके विवाहेत्तर संबंध को...

अगर पक्षकारों के बीच समझौता हो गया है तो बेदखली का आदेश नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर पक्षकारों के बीच समझौता हो गया है तो बेदखली का आदेश नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जहां किराया क़ानून के तहत संरक्षण उपलब्ध है, वहाँ जब तक बेदखली का पर्याप्त आधार नहीं है, तो बेदखली का आदेश नहीं दिया जा सकता भले ही पक्षकारों के बीच समझौता क्यों न हो गया हो। पृष्ठभूमि बेदखली के लिए आवेदन दिया गया था पर मकान मालिक और किरायेदार के बीच समझौते का करार किराया नियंत्रण अदालत के समक्ष दायर किया गया। अपीली अदालत के समक्ष किरायेदारों ने कहा कि उन पर इस समझौते के करार पर हस्ताक्षर के लिए दबाव डाला गया और कहा कि यह समझौता इसलिए किया गया क्योंकि पुलिस ने इसके लिए...