मुख्य सुर्खियां

दिवालिया क़ानून के तहत रोक आईटीएटी आदेशों पर भी लागू होगा : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दिवालिया क़ानून के तहत रोक आईटीएटी आदेशों पर भी लागू होगा : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), 2016 की धारा 238 के अनुसार, यह स्पष्ट है कि आयकर अधिनियम सहित किसी भी अन्य तरह के क़ानून में अगर कोई कमी है तो यह कोड उसको नजरअंदाज करेगा।”दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आईबीसी आयकर अधिनियम सहित अन्य किसी भी क़ानून में अगर कोई कमी है तो वह उसे नजरअंदाज (override) कर सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी अधिनियम के तहत रोक आयकर अपीली अधिकरण के आदेश पर भी लागू होगा।दिल्ली हाईकोर्ट...

सभी राज्यों के विधिक अथॉरिटीज हर आपराधिक मामले में वकील और जेल में बंद आरोपी के बीच वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा उपलब्ध कराएं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सभी राज्यों के विधिक अथॉरिटीज हर आपराधिक मामले में वकील और जेल में बंद आरोपी के बीच वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा उपलब्ध कराएं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘इस तरह के प्रयासों से वकील और उसके मुवक्किल के बीच संवाद होने से न्याय दिलाने में मदद मिलेगी और यह क़ानूनी सलाह को सार्थक बनाएगा।’ सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के क़ानूनी सेवाएं देने वाले प्राधिकरणों/समितियों से कहा है कि वे जेल में बंद आरोपी और उसके वकील के बीच या उस किसी भी व्यक्ति के बीच वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा दिलाएं जो कि उस  आपराधिक मामले के बारे में जानकारी रखता है और उस मामले में आरोपी जेल में है। न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने दो विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज...

सिर्फ इसलिए कि ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी है, बीमाकर्ता अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सिर्फ इसलिए कि ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी है, बीमाकर्ता अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘...यह पूरी तरह स्थापित है कि अगर मालिक को यह पता है कि ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी है और इसके बाद भी अगर वह ड्राईवर को वाहन को चलाने देता है, तब तो बीमाकर्ता छूट सकता है। पर जब सिर्फ इस वजह से कि ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी है, बीमाकर्ता अपने दायित्व से बच नहीं सकता।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इस वजह से कि ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी है, बीमाकर्ता अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता। वह उसी स्थिति में अपनी दायित्व से मुक्त हो सकता है अगर यह पाया जाता है कि वाहन के मालिक ने यह जानते हुए भी कि...

गायों और अन्य आवारा पशुओं की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विशेष दल का गठन करने, 24 घंटे पुलिस गश्त के निर्देश दिए [निर्णय पढ़ें]
गायों और अन्य आवारा पशुओं की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विशेष दल का गठन करने, 24 घंटे पुलिस गश्त के निर्देश दिए [निर्णय पढ़ें]

उतराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कुछ निर्देश जारी किए जो गायों और अन्य आवारा पशुओं की सुरक्षा से संबंधित हैं। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने अलीम नामक एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किये। इस व्यक्ति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उसके क्षेत्र में गायों और अन्य पशुओं की हत्या की जा रही है। उसने दावा किया कि राज्य उत्तराखंड गाय संतति अधिनियम, 2007 के प्रावधानों, नगर निगम के क़ानून और पशु अत्याचार निवारण अधिनियम, 1960 के प्रावधानों  को लागू...

सुप्रीम कोर्ट ने उस महिला की सजा को सही ठहराया जिसके “वेश्या” कहने पर एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने उस महिला की सजा को सही ठहराया जिसके “वेश्या” कहने पर एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी [आर्डर पढ़े]

“मृत युवती की उम्र 26 साल थी और अविवाहित होने के कारण वह इस तरह के ताने से दुखी थी जिसके बाद उसने शरीर को आग लगाकर आत्महत्या कर ली।”शब्दों का प्रयोग बहुत ही सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए नहीं तो यह घातक बन सकता है और किसी की जान तक ले सकता है। यह मामला (रानी @सहयारनी बनाम तमिलनाडु राज्य ) ऐसा ही था जिसमें एक युवती को किसी का ताना इतना बुरा लगा कि उसने ग्लानि के मारे खुदकुशी कर ली।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उस महिला को दोषी ठहराए जाने के फैसले को सही बताया जिसके वेश्या कहने पर इस युवती ने...

अंतर-अदालतीय अपील में एकल जज किसी खंडपीठ से नीचे नहीं होता, दोनों के क्षेत्राधिकार एक ही हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अंतर-अदालतीय अपील में एकल जज किसी खंडपीठ से नीचे नहीं होता, दोनों के क्षेत्राधिकार एक ही हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘सिर्फ मुकदमादारों को असुविधा से बचाने के लिए, जहाँ तक हाईकोर्ट की शक्तियों की बात है, खंडपीठ स्क्रीनिंग का एक और स्तर उपलब्ध कराता है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि एकल जज खंडपीठ के नीचे होता है।’हाईकोर्ट द्वारा एक खंडपीठ का एकल जज को किसी राहत में संशोधन के लिए मामला सौंपने पर गंभीरता बरतते हुए  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एकल जज खंडपीठ के नीचे नहीं है।किसी सर्विस मामले में एकल जज की पीठ ने आवेदनकर्ता को नियुक्ति और वरिष्ठता में जो राहत दी थी,  उसी से जुड़ी यह रिट याचिका थी जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट...

एचआईवी ग्रस्त सब इंस्पेक्टर अगर मेडिकल फिटनेस की अर्हता पूरा नहीं कर पाने के कारण प्रोन्नति नहीं पाता है तो यह भेदभाव नहीं : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एचआईवी ग्रस्त सब इंस्पेक्टर अगर मेडिकल फिटनेस की अर्हता पूरा नहीं कर पाने के कारण प्रोन्नति नहीं पाता है तो यह भेदभाव नहीं : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एचआईवी पॉजिटिव सहायक सब इंस्पेक्टर की प्रोन्नति के मामले में यह कहते हुए मदद करने से मना कर दिया कि अगर फिटनेस की अर्हता पूरा नहीं करने के कारण उसको पदोन्नति नहीं दी गई है तो यह भेदभाव नहीं है। न्यायमूर्ति आलोक सिंह ने सशस्त्र सीमा बल में एएसआई की याचिका पर सुनवाई करे हुए यह फैसला दिया। याचिकाकर्ता ने कोम्बेटाइज्ड सब इंस्पेक्टर के पद (सामान्य ड्यूटी) के लिए प्रशिक्षण पूरा कर लिया था पर उसको पदोन्नति नहीं दी गई क्योंकि उसका मेडिकल फिटनेस स्टेटस P2(P) यानी शेप-2 है...

सैनिकों को भी अपनी प्रतिष्ठा, आजीविका और उत्पीड़न से बचाव का अधिकार है : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सैनिकों को भी अपनी प्रतिष्ठा, आजीविका और उत्पीड़न से बचाव का अधिकार है : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

गुजरात हाईकोर्ट ने एक तटरक्षक की जेल की सजा और नौकरी से बर्खास्त करने के निर्णय को निरस्त करते हुए कहा कि उन्हें भी अन्य लोगों की तरह अपनी प्रतिष्ठा, आजीविका और उत्पीड़न से सुरक्षा का अधिकार है।न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला ने उसके खिलाफ आदेश को निरस्त करते हुए भारतीय तटरक्षक के महानिदेशक को सूझबूझ दिखाते हुए इस बारे में दुबारा निर्णय लेने को कहा कि उसके खिलाफ संक्षिप्त सुनवाई की जाए या तटरक्षक अदालत का गठन कर उस पर मुकदमा चलाया जाए।कोर्ट ने कहा, “प्रश्न यह है कि संविधान की उदार भावना से नागरिकों के...

गड्ढे में गिरकर 11 साल के लड़के की मौत का मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी से बच्चे की माँ को 10 लाख का मुआवजा देने को कहा [निर्णय पढ़ें]
गड्ढे में गिरकर 11 साल के लड़के की मौत का मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी से बच्चे की माँ को 10 लाख का मुआवजा देने को कहा [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने गत सप्ताह पीडब्ल्यूडी को आदेश दिया कि वह 11 साल के एक बच्चे की बिना ढके हुए गड्ढे में गिरकर मौत होने के मामले में इस बच्चे की माँ को 10 लाख रुपए का मुआवजा दे। यह बच्चा स्कूल की ओर से दक्षिण दिल्ली के मिलेनियम पार्क में पिकनिक पर गया था जब वर्षा जल को जमा करने के लिए बने गड्ढे में वह गिर गया और उसकी मौत हो गई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरी शंकर की पीठ ने सार्वजनिक कार्य विभाग (पीडब्ल्यूडी) को कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को यह राशि चुकाने का आदेश दिया...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने झूठा हलफनामा दायर करनेवाले अधिवक्ता पर 2 लाख का जुर्माना लगाया [निर्णय पढ़ें]
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने झूठा हलफनामा दायर करनेवाले अधिवक्ता पर 2 लाख का जुर्माना लगाया [निर्णय पढ़ें]

इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह ने कहा कि झूठा हलफनामा दायर करना शपथ भंग करने जैसा है क्योंकि हलफनामा को आईपीसी की धारा 191 के तहत साक्ष्य माना गया है। जज ने हालांकि, इस मामले में संयम बरतते हुए आईपीसी की धारा 193 के तहत शपथ भंग करने के आरोप में कार्रवाई का आदेश नहीं दिया। कोर्ट चन्द्र शेखर करगेती की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जो उसने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर किया था जिसमें उसने अपने खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 31(p) और...

रेरा दीर्घ अवधि के उस लीज एग्रीमेंट पर भी लागू होगा जिसमें पट्टेदार ने काफी ज्यादा निवेश कर रखा है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
रेरा दीर्घ अवधि के उस लीज एग्रीमेंट पर भी लागू होगा जिसमें पट्टेदार ने काफी ज्यादा निवेश कर रखा है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अचल संपत्ति (विनियमन एवं विकास) अधिनियम उस करार पर भी लागू होगा जिस पर लिखा है कि यह “पट्टा का करार” (लीज एग्रीमेंट) है अगर पट्टे की अवधि लम्बी है (जैसे 999 वर्ष) और जब पट्टेदार ने इसको ध्यान में रखते हुए इसके बदल काफी बड़ी रकम दी है।न्यायमूर्ति शालिनी फान्सलकर जोशी ने महाराष्ट्र रियल एस्टेट अपीली अधिकरण के फैसले के खिलाफ दूसरी अपील को खारिज करते हुए कहा कि यद्यपि पक्षकारों के बीच जो करार हुआ है उसको “लीज एग्रीमेंट” बताया गया है, प्रभावी रूप से यह करार विशुद्ध रूप से...

भारतीय परिस्थितियों में कोई माँ अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न के बारे में झूठा मामला दायर नहीं कर सकती : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
भारतीय परिस्थितियों में कोई माँ अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न के बारे में झूठा मामला दायर नहीं कर सकती : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय परिस्थितियों में कोई माँ अपनी बेटी के यौन उत्पीडन के बारे में कोई झूठा मुकदमा नहीं दायर कर सकती है। कोर्ट ने पुणे की एक 10 वर्षीय लड़की के यौन उत्पीडन के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने को सही माना। न्यायमूर्ति एएम बदर ने राजेंद्र भीम असुदेओ नामक एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। इस व्यक्ति ने यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा संबंधी अधिनियम, 2012 (पोक्सो अधिनियम) की धारा 6 और आईपीसी की धारा...

शपथ भंग के मामले में कोर्ट अवमानना के अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है : दिल्ली हाईकोर्ट ने शपथ लेकर झूठ बोलने के लिए मुकदमादार को जेल भेजा [निर्णय पढ़ें]
शपथ भंग के मामले में कोर्ट अवमानना के अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है : दिल्ली हाईकोर्ट ने शपथ लेकर झूठ बोलने के लिए मुकदमादार को जेल भेजा [निर्णय पढ़ें]

दीवानी मामले से जुड़े सभी पक्ष के लोग कोर्ट के समक्ष शपथ लेते हैं कि वे सिर्फ सच बता रहे हैं और सच के सिवा और कुछ भी नहीं कहेंगे। पर अगर यह साबित हो गया कि उन्होंने झूठ बोला है तो क्या उन्हें अवमानना के आरोप में सजा दी जा सकती है? मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट को इसी तरह के प्रश्न से दो-चार होना पड़ा। कोर्ट के समक्ष दायर मामले में बचाव पक्ष ने कुछ ऐसे बयान दिए जिसे कोर्ट द्वारा नियुक्त आयुक्त ने झूठा पाया। वादी ने कोर्ट के समक्ष झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए अवमानना का मामला दर्ज कराया। बचाव पक्ष के...

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश नहीं मानने और माफी नहीं मांगने वाले व्यक्ति को तीन महीने के लिए अदालत से सीधे जेल भेजा [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश नहीं मानने और माफी नहीं मांगने वाले व्यक्ति को तीन महीने के लिए अदालत से सीधे जेल भेजा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को माफी नहीं मांगने वाले मुकदमादार को अदालत से तीन महीने के लिए सीधे जेल भेज दिया।कोर्ट द्वारा 2004 में आयोजित नीलामी में कोविलकर लक्ष्मोजी राव की संपत्ति वारा कुमारी ने खरीदी । इसके बाद राव ने दीवाल बनाकर इस परिसंपत्ति तक पहुँचने का रास्ता बंद कर दिया। इस संपत्ति को खरीदने वाली वारा कुमारी ने इसके बाद इस दीवाल को गिराए जाने की मांग की जिसकी अनुमति उसे दे दी गई।हाईकोर्ट में दायर एक पुनरीक्षण याचिका में हाईकोर्ट ने पूर्व में निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले को यह कहते हुए...

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आय के आधार पर पिछड़ा वर्ग कोटे के तहत उप-श्रेणी बनाने की अधिसूचना खारिज की [आर्डर पढ़े]
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आय के आधार पर पिछड़ा वर्ग कोटे के तहत उप-श्रेणी बनाने की अधिसूचना खारिज की [आर्डर पढ़े]

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को सरकार की उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया जिसमें पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत आय के आधार पर एक उप-श्रेणी बनाकर कोटे के सीट के आवंटन का प्रावधान किया गया था। यह आदेश 17 अगस्त 2016 को पिछड़ा वर्ग (आरक्षण और सेवा एवं शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश) अधिनियम, 2016 के तहत जारी किया गया था। इसमें प्रावधान किया गया था कि तीन लाख रुपए तक की सालाना सकल आय वाले व्यक्ति के बच्चों को पहले नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण मिलेगा। इसमें कहा गया कि इसका शेष...

जांच के दौरान धोखाधड़ी करने वाले मेडिकल कॉलेज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 2 करोड़ का जुर्माना;स्वस्थ व्यक्ति को बीमार बताकर पेश कर रहा था
जांच के दौरान धोखाधड़ी करने वाले मेडिकल कॉलेज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 2 करोड़ का जुर्माना;स्वस्थ व्यक्ति को बीमार बताकर पेश कर रहा था

“न्यूनतम मानदंड का पालन करने के तहत अपने अस्पताल में स्वस्थ व्यक्ति को बीमार बताकर पेश कर याचिकाकर्ता ने जो धोखाधड़ी की है उस पर हमने गौर किया है”सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मेडिकल कॉलेज पर 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया और उसकी याचिका भी खारिज कर दी। इस कॉलेज ने यह दिखाने के लिए कि वह न्यूनतम मानदंड का पालन कर रहा है, जांच के समय धोखाधड़ी की और स्वस्थ व्यक्ति को रोगी बताकर अपने अस्पताल में पेश किया।महावीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज ने केंद्र सरकार के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।...

जिला अदालतें दे रही हैं आधिकारिक भाषा को बढ़ावा; अब नई दिल्ली जिला में काम करने वाले अदालती कर्मचारी दे सकते हैं हिंदी में छुट्टी का आवेदन
जिला अदालतें दे रही हैं आधिकारिक भाषा को बढ़ावा; अब नई दिल्ली जिला में काम करने वाले अदालती कर्मचारी दे सकते हैं हिंदी में छुट्टी का आवेदन

नई दिल्ली जिले की सत्र और जिला अदालतों ने एक सर्कुलर जारी कर सभी कर्मचारियों से कहा है कि वे अब से सिर्फ हिंदी में ही छुट्टियों की अर्जी दें।जिला और सत्र जज पूनम बम्बा ने यह सर्कुलर हिंदी में ही जारी किया है।सर्कुलर में सभी श्रेणियों के कर्मचारियों से कहा गया है कि वे छुट्टी के अपने आवेदन हिंदी में ही दें।सर्कुलर के अनुसार, ऐसा कोर्ट के दैनिक कार्यों में हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है और कोर्ट के काम काज में इस भाषा का प्रयोग कर इसके बारे में दिलचस्पी बढ़ाना है।यह सर्कुलर...

मुंबई नगर निगम अधनियम और एफएसएस अधिनियम के बीच कोई टकराव नहीं; कैटरिंग व्यवसाय के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मुंबई नगर निगम अधनियम और एफएसएस अधिनियम के बीच कोई टकराव नहीं; कैटरिंग व्यवसाय के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 की धारा 394 को सही ठहराया है और कहा है कि इसके प्रावधान के तहत कैटरिंग व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस आवश्यक है।न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की पीठ ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानकीकरण अधिनियम का उद्देश्य मानवीय उपभोग के लिए सुरक्षित खाद्य पदार्थ की उपलब्धता सुनिश्चित करना है जबकि आम लोगों के स्वास्थ्य,स्वच्छता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी है।पृष्ठभूमिकोर्ट मुंबई के एक 61 वर्षीय...

नसबंदी का ऑपरेशन सफल नहीं हुआ तो इसके लिए डॉक्टर को लापरवाह बताकर उसको जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
नसबंदी का ऑपरेशन सफल नहीं हुआ तो इसके लिए डॉक्टर को लापरवाह बताकर उसको जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला के नसबंदी के ऑपरेशन के असफल रहने के कारण एक अस्पताल और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों को लापरवाही का दोषी मानने से इनकार कर दिया।न्यायमूर्ति वाल्मीकि जे मेहता ने कहा, “चूंकि चिकित्सकीय रूप से नसबंदी के ऑपरेशन में 100 फीसदी सफलता की उम्मीद कभी नहीं होती है, सो सिर्फ इसलिए कि यह ऑपरेशन सफल नहीं हुआ, इस मामले में अपीलकर्ता/प्रतिवादी और इसके डॉक्टरों को लापरवाही का दोषी नहीं माना जा सकता।”कोर्ट लोक नायक अस्पताल द्वारा दायर एक अपील की सुनवाई कर रहा था। अस्पताल ने 2005...

एक ऐसा अधिवक्ता जो दुर्घटना के एक मामले में आरोपी और मुआवजा पाने वाले दोनों की पैरवी कर रहा था;इलाहाबाद हाईकोट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]
एक ऐसा अधिवक्ता जो दुर्घटना के एक मामले में आरोपी और मुआवजा पाने वाले दोनों की पैरवी कर रहा था;इलाहाबाद हाईकोट ने जारी किया नोटिस [आर्डर पढ़े]

वकीलों के गैर-पेशेवर व्यवहार के बहुतेरे उदाहरण हैं। पर इस तरह के मामले कम होंगें जब एक ही वकील मुद्दई के लिए काम करे और मुद्दालह के लिए भी। मोटर वाहन दुर्घटना के एक मामले में ऐसा ही हुआ। वकील आरोपी की पैरवी कर ही रहा था, वह इस मामले में मुआवजे की मांग कर रहे माँ-बाप का भी वकील था जिसके बेटे की दुर्घटना में मौत हो गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक कुमार टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की एक अपील पर सुनवाई कर रहे थे। कंपनी को एमएसीटी ने उस व्यक्ति के माँ-बाप को 6.60 लाख रुपए...