मुख्य सुर्खियां

जिस अपराध में हो उम्रकैद तक की सज़ा ,उस अपराध के आरोपी को नहीं दिया जा सकता है नेकचलनी या प्रोबेशन का लाभ-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
जिस अपराध में हो उम्रकैद तक की सज़ा ,उस अपराध के आरोपी को नहीं दिया जा सकता है नेकचलनी या प्रोबेशन का लाभ-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नेकचलनी या प्रोबेशन का लाभ उस आरोपी को नहीं दिया जा सकता है,जो ऐसे अपराध में दोषी पाया गया हो,जिसमें उम्रकैद तक की सजा हो। जस्टिस एल.नागेश्वर राॅव व जस्टिस एम.आर शाह की खंडपीठ इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील में प्रोबेशन आॅफ आफेंडर एक्ट के सेक्शन 4 का लाभ देने की मांग करते हुए कहा गया था कि मामले में घटना लगभग साढ़े 23 साल पुरानी है। ऐसे में इस स्टेज पर आरोपी को जेल भेजने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। पूर्व में...

राजनीतिक विज्ञापन-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने ईसीआई को दिया निर्देश,चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फलैगड सामग्री को हटाने के लिए तीन घंटे की समय अवधि में ले निर्णय [आर्डर पढ़े]
राजनीतिक विज्ञापन-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने ईसीआई को दिया निर्देश,चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फलैगड सामग्री को हटाने के लिए तीन घंटे की समय अवधि में ले निर्णय [आर्डर पढ़े]

बाॅम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आईएएमएआई द्वारा बनाए स्वेच्छिक कोड आॅफ एथिक्स,जिनको ईसीआई ने कोर्ट के समक्ष पेश किया था,स्वीकार कर लिया है। इन एथिक्स का आगामी आम चुनाव में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पालन किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश एन.एच पाटिल व जस्टिस एन.एम जामदर की खंडपीठ इस मामले में एक वकील सागर सूर्यवंशी की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापनों के रेगुलेशन की मांग की थी,विशेषतौर पर मतदान से 48 घंटे पहले वाले समय में अपलोड किए जाने वाले...

रामाकृष्णा मिशन नहीं है कोई पब्लिक अॅथारिटी या राज्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
रामाकृष्णा मिशन नहीं है कोई पब्लिक अॅथारिटी या राज्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि एक प्राइवेट बाॅडी या संगठन पर किसी प्रतिमा या स्मारक द्वारा नियंत्रण करने के आधार पर यह निर्णय नहीं लिया जा सकता है कि वह सार्वजनिक काम भी करती है। जस्टिस डी.वाई चंद्राचूड़ व जस्टिस हेंमत गुप्ता की खंडपीठ ने अपने पिछले महीने दिए अपने एक फैसले में कहा कि रामाकृष्णा मिशन व उसके अस्पताल कोई अॅथारिटी नहीं है और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अॅथारिटी की परिभाषा में नहीं आते हैं। रामाकृष्णा मिशन बनाम कागो कुनया नामक केस में अपना फैसला देते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा...

किसी कीट द्वारा प्राकृतिक तौर पर काटने से हुई बीमारी नहीं आती है एक्सीडेंट इंश्योरेंस के तहत-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी कीट द्वारा प्राकृतिक तौर पर काटने से हुई बीमारी नहीं आती है 'एक्सीडेंट' इंश्योरेंस के तहत-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

-मलेरिया से हुई मौत नहीं है कोई एक्सीडेंट-कोर्ट -बीमाकृत को जो पैसा दे दिया गया है,वह वापिस न ले बीमा कंपनीइंश्योरेंस पाॅलिसी के तहत एक्सीडेंट से हुई मौत शामिल है। इसमें वह घटना शामिल है,जिसका अंदाजा मानवीय जीवन में नहीं है कि वह कब और कैसे हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब एक बीमारी किसी कीट के काटने या वायरस के कारण आई है तो यह एक्सीडेंट की परिभाषा में शामिल नहीं है। परंतु इस मामले के तथ्यों के आधार पर कष्टदायी स्थिति को एक्सीडेंट माना जा सकता है,अगर ऐसा अनपेक्षित व आकस्मिक स्थिति...

राजनीतिक प्रतिद्वंदी है,महज इस आधार पर नहीं दिया जा सकता है दुर्भावपूर्ण होने का तर्क-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
राजनीतिक प्रतिद्वंदी है,महज इस आधार पर नहीं दिया जा सकता है दुर्भावपूर्ण होने का तर्क-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इस आरोप पर राज्य द्वारा लिए गए किसी प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह राजनीतिक प्रतिद्वंदता के चलते दुर्भावपूर्ण भावना से लिया गया है। वर्ष 1980 में तमिलनाडू राज्य ने एग्रीकल्चर होर्टिकल्चर सोसायटी को कुछ जमीन अलाॅट की थी। वर्ष 1989 में राज्य ने इस जमीन को यह कहते हुए वापिस ले लिया कि इस पर स्पोटर्स की सुविधाएं विकसित की जाएगी और ऐसा करते समय होर्टिकल्चर के विकास व पर्यावरण और रिसर्च पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। राज्य के इस आदेश...

एनआई एक्ट 138 के दायर शिकायत का मामला-एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिया गया चेक अगर होता है बाउंस तो एनआई एक्ट के दायर शिकायत है सुनवाई योग्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
एनआई एक्ट 138 के दायर शिकायत का मामला-एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिया गया चेक अगर होता है बाउंस तो एनआई एक्ट के दायर शिकायत है सुनवाई योग्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

हालांकि यह सत्यापित है कि कुछ बेचने के लिए किए गए अनुबंध के तहत किसी अचल संपत्ति में कोई हित नहीं बनता है,न ही इससे दोनों पक्षों के बीच कोई कानूनी तौर पर लागू किए जाने वाला अनुबंध बनता है। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एनआई एक्ट के सेक्शन 138 के तहत दायर वह शिकायत सुनवाई योग्य है,जो एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिए गए चेक के बाउंस होने के बाद दायर की गई है। रिपुदमन सिंह बनाम बालकृष्णा मामले में एक दंपत्ति ने आरोपी के साथ कुछ बेचने का एग्रीमेंट किया। आरोपी ने उनको कुछ नकदी दे दी और बाकी पैसे के...

निर्णीत मामले का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़े]
"निर्णीत मामले" का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा है कि "निर्णीत मामले" का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है। पी बंदोपाध्याय बनाम भारत संघ मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। भारत सरकार की कंपनी ओवरसीज़ कम्यूनिकेशन सर्विसेज़ (ओसीएस) के एक पूर्व कर्मचारी ने यह रिट याचिका दायर की थी जिस पर कोर्ट ने फ़ैसला दिया। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दी कि उन्हें भारत सरकार की सेवा के तहत पेंशन पाने का हक़ नहीं है क्योंकि वीएसएनएल में उनको समाहित किए जाने के बाद से...

अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक सहवास के आरोपी पति का डीएनए टेस्ट कराने के आदेश के ख़िलाफ़ याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया [आर्डर पढ़े]
अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक सहवास के आरोपी पति का डीएनए टेस्ट कराने के आदेश के ख़िलाफ़ याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जाँच अधिकारी के उस आदेश को सही ठहराया है जिसमें एक आरोपी व्यक्ति के डीएनए टेस्ट का आदेश दिया गया है। इस व्यक्ति की पत्नी ने उस पर उसके साथ अप्राकृतिक सहवास का आरोप लगाया था। इस व्यक्ति ने अदालत में अग्रिम ज़मानत के लिए आवेदन दिया जिसे हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। इसके बाद यह व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुँचा जहाँ से वह गिरफ़्तारी नहीं होने का आदेश प्राप्त करने में सफल रहा पर इसके साथ शर्त यह थी कि वह मामले की जाँच में सहयोग करेगा। इस मामले की जाँच के तहत उसे जाँच अधिकारी...

सुप्रीम कोर्ट ने सरवन भवन के मालिक की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी, सात जुलाई तक सरेंडर करने को कहा [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने सरवन भवन के मालिक की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी, सात जुलाई तक सरेंडर करने को कहा [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सरवन भवन के भारत और विदेशों में होटलों की श्रृंखला के मालिक पी. राजगोपाल की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। राजगोपाल को अपने कर्मचारी संतकुमार की हत्या करने का दोषी ठहराया गया है क्योंकि वह संतकुमार की पत्नी जीवज्योति से शादी करना चाहता था। इस मामले में 7 अन्य की भी सजा की पुष्टि की गई है।जस्टिस एन. वी. रमना, जस्टिस एम. एम. शांतनागौदर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की 3 जजों की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है जिसने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को...

सेक्शन 138 एनआई एक्ट-अगर शिकायतकर्ता ने आईटी रिटर्न दायर नहीं की है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास नहीं है आय का कोई स्रोत्र-एमपी हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
सेक्शन 138 एनआई एक्ट-अगर शिकायतकर्ता ने आईटी रिटर्न दायर नहीं की है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास नहीं है आय का कोई स्रोत्र-एमपी हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में कहा है कि अगर शिकायतकर्ता ने इनकम टैक्स रिटर्न दायर नहीं की है,इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास आय का कोई स्रोत्र नहीं है। कोर्ट नेगोटिएबल इंस्टरूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के एक मामले की सुनवाई कर रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने उससे दस लाख रुपए का लोन लिया था और साथ ही कहा था कि वह इस राशि को छह महीने के अंदर लौटा देगी। इसके बदले आरोपी ने उसको एक चेक दिया था,जो बाउंस हो गया। आरोपी महिला को निचली अदालत ने दोषी करार दिया,बाद...

आरोपी अगर शराब पीकर अदालत में आता है तो इस वजह से उसकी ज़मानत रद्द नहीं की जा सकती : हिमाचल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
आरोपी अगर शराब पीकर अदालत में आता है तो इस वजह से उसकी ज़मानत रद्द नहीं की जा सकती : हिमाचल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उस सत्र अदालत की खिंचाई की है जिसने एक आरोपी की ज़मानत इसलिए ख़ारिज कर दी क्योंकि उसके मुँह से शराब की गंध आ रही थी। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने इस मामले में जज को कारण बताओ नोटिस जारी किया और कहा कि आरोपी शराब पीकर अदालत आया था यह अपने आप में उसकी ज़मानत को ख़ारिज करने का आधार नहीं हो सकता। सत्र अदालत ने अपने आदेश में ज़मानत ख़ारिज करते हुए कहा था :"इस समय, आरोपी के मुँह से शराब की बदबू आ रही है। आरोपी का सत्र अदालत के समक्ष इस स्थिति में पेश होना ठीक नहीं...

ओबीसी कोटा बढ़ाने के राज्य सरकार के ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]
ओबीसी कोटा बढ़ाने के राज्य सरकार के ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]

राज्य सरकार द्वारा ओबीसी कोटा को बढ़ाने के लिए लाए गए एक ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वास्तव में रोक लगा दी है। आशिता दूबे की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी व जस्टिस रवि शंकर झाॅ की बेंच ने अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार से कहा है कि कालेजों में दाखिले के लिए समय ओबीसी कैटेगरी के लिए 14 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण न दिया जाए। गवर्नर आनंदीबेन पटेल की तरफ से जारी ओर्डिनेंस में सरकारी नौकरी व यूनिवर्सिटी में दाखिलों के लिए ओबीसी कैटगेरी के तहत दिए गए 14 प्रतिशत...

सेक्शन 26 एवीडेंस एक्ट-कार्यकारी मैजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान है स्वीकार योग्य-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
सेक्शन 26 एवीडेंस एक्ट-कार्यकारी मैजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान है स्वीकार योग्य-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि एवीडेंस एक्ट के सेक्शन 26 के तहत प्रयोग किए एक्सप्रेशन मैजिस्ट्रेट शब्द में कार्यकारी मैजिस्ट्रेट भी शामिल है। यह मानते हुए जस्टिस ए.बी चैधरी व जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता की खंडपीठ ने गुवहाटी हाईकोर्ट के एक फुल बेंच के फैसले से असहमति जताई है। गुवहाटी हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक्सप्रेशन का मतलब सिर्फ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट से है। एवीडेंस एक्ट के सेक्शन 26 के तहत अगर किसी व्यक्ति ने पुलिस हिरासत के दौरान पुलिस के समक्ष कोई इकबालिया बयान दिया है...