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आपराधिक मामलों दोषमुक्त होने के हर मामले को जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष को गंभीरता से लेना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
23 Aug 2018 1:01 PM GMT
आपराधिक मामलों दोषमुक्त होने के हर मामले को जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष को गंभीरता से लेना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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 ‘हम इस बात से अवगत हैं कि इस मामले में एक व्यक्ति की मौत हुई है और इस मामले में कुछ भी अंतिम रूप से सामने नहीं आया है और इसके बारे में बहुत सारे प्रश्न अनुत्तरित हैं जो इस बात की ओर इंगित करता है कि  मामले की अनुशासित जांच और अभियोजन नहीं हुआ

हर आपराधिक मामले में जब कोई बरी किया जाता है तो जांच एजेंसियों और अभियोजन अथॉरिटीज को इसे कुछ गंभीरता से लेना चाहिए, यह बात सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान कही।

यह मामला एक पंचायत चुनाव में प्रतिद्वंद्वी के साथ हुए अपराध का है। इसमें चुनाव हारने वाले उम्मीदवार ने अपने ही चुनाव एजेंट की हत्या कर दी ताकि वह विजयी उम्मीदवार के बेटे को इस मामले में फंसा सके। इन आरोपियों द्वारा जीतने वाले उम्मीदवार के बेटे के खिलाफ दायर एक और मामले में आरोपी को बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा पहले के मामले में दिए गए फैसले को सही ठहराया और बाद वाले मामले में की गई अपील को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति एनवी रमना और न्यायमूर्ति मोहन एम शंतानागौदर की पीठ ने कहा कि मामले में उद्देश्य की  महत्त्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।

इस मामले में चंदर भान (मृतक) को मारने के पीछे बेग राज के बेटे धरमपाल पर झूठा मामला दर्ज करना था। अगर उद्देश्य झूठे मामले में फंसाना था, तो यह मानना काफी अजीब है कि आरोपी ने अपने ही आदमी (महा सिंह के समर्थक) की हत्या कर दी ताकि वह चुनाव में हुई हार का बदला ले सके। अगर यह मान भी लिया जाए कि इस उद्देश्य को साबित कर दिया गया है, तो भी यह आरोपी का परिस्थितिजन्य दोष ही ठहरा पाता है,” कोर्ट ने कहा।

पीठ ने यह भी कहा कि मृतक की पत्नी पर भरोसा नहीं है क्योंकि वह आरोपी के साथ दुश्मनी होने के कारण वह एक हितैषी गवाह है। पीठ ने आगे कहा कि अभियोजन ने जिस परिकल्पना को आगे बढ़ाया है उसके बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि उसे वाजिब संदेह के परे साबित कर दिया गया है, क्योंकि अभियोजन पक्ष की दलील में काफी कुछ अनुत्तरित हैं जिन्हें अपूर्ण छोड़ दिया गया है या अपर्याप्त रूप से सिद्ध किया गया है।

इस मामले में पीठ ने आरोपी को बरी कर दिया और कहा, “।।।यद्यपि कोर्ट जांच के दौरान हुई छोटी गलतियों के लिए आरोपी को संदेह का लाभ नहीं दे सकता, पर हम जांच की कमियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते जो कि इस मामले की जड़ में है”।

जहां तक जीतने वाले उम्मीदवार के बेटे के खिलाफ दूसरे मामले की बात है जिसमें उसे बरी कर दिया गया था, कोर्ट ने अपील को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि गवाहों ने जो बयां दिए हैं उसन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।


 
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