Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने घृणायुक्त पोस्ट लिखने वाले वकील को एक महीने की कैद की सजा सुनाई, उसका फेसबुक खाता हटाया [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
28 Aug 2018 6:54 AM GMT
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने घृणायुक्त पोस्ट लिखने वाले वकील को एक महीने की कैद की सजा सुनाई, उसका फेसबुक खाता हटाया [निर्णय पढ़ें]
x

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जजों के खिलाफ फेसबुक पर घृणात्मक पोस्ट लिखने वाले वकील को दंड के रूप में एक महीने के लिए जेल भेज दिया है और उसके फेसबुक खाते को बंद करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति चंदर भूषण बरोवालिया ने विकास सनोरिया के फेसबुक खाते को डिलीट करने का आदेश दिया और कहा कि जजों को भला बुरा कहने की इस बढ़ती धारणा से कठोरता से निपटने की जरूरत है।

हाईकोर्ट ने इस बारे में स्वतः संज्ञान लेते हुए विकास सनोरिया के खिलाफ आपराधिक अपमान का मामला दर्ज किया था क्योंकि उसने एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ कुछ अभद्र टिप्पणी की थी। इसके बाद भी यह वकील टिप्पणियाँ लिखता रहा जिसमें कुछ तो गाली गलौज से भरे थे और हाईकोर्ट के जजों को निशाना बनाया गया था। यह सब उसने तब करना शुरू किया जब मजिस्ट्रेट ने उसकी एक अर्जी खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा कि विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता को लाइसेंस समझकर मनमाने ढंग से निष्पक्ष रूप से फैसला देने वाले जजों के खिलाफ इसका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जजों की आलोचना मर्यादापूर्ण होनी चाहिए और इसमें कहीं से भी द्वेष नहीं होना चाहिए।

“किसी भी वकील को अदालत को धमकाने या पीठासीन अधिकारी पर कीचड़ उछालने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अगर इस तरह के मामलों को बर्दाश्त कर लिया गया तो जज अपना कर्त्तव्य स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर पूरा नहीं कर सकते और इसका सर्वाधिक असर क़ानून के शासन पर पड़ेगा...वकीलों को जजों को आतंकित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती...यह आधारभूत और मौलिक है और कोई भी सभ्य प्रशासनिक व्यवस्था इसकी इजाजत नहीं दे सकती है,” पीठ ने कहा।

पीठ ने इस बारे में किसी भी तरह की क्षमा याचना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा : क्षमा याचना पश्चाताप है। जब तक क्षमा विनीत भाव से नहीं माँगा जाए तब तक यह पछतावे से रहित होता है और यह अस्वीकार्य है। यह क्षमा याचना तब की जा रही है जब अपमानकर्ता को लगा है कि कोर्ट अब उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी...क्षमा याचना कोई बचाव का हथियार तो नहीं है...न ही यह सार्वभौमिक उपचार है, पर उम्मीद की जाती है कि यह वास्तविक पश्चाताप का साक्ष्य हो।”

कोर्ट ने इस वकील को एक महीने की जेल की सजा देने के साथ ही उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया और रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि इस व्यक्ति का फेसबुक खाता डिलीट कर दिया जाए।


 
Next Story