बॉम्बे हाईकोर्ट

[Companies Act] कर्जदार कंपनी समापन कार्यवाही में पहली बार अपनी देनदारी का विरोध नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
[Companies Act] कर्जदार कंपनी समापन कार्यवाही में पहली बार अपनी देनदारी का विरोध नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसी कंपनी के समापन के खिलाफ अपील खारिज की, जिसने सरकारी उद्यम को देय राशि का भुगतान नहीं किया था और जिसकी कोई व्यावसायिक गतिविधि या संपत्ति नहीं चल रही थी। न्यायालय ने कंपनी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि लोन को लेकर "वास्तविक विवाद" था। साथ ही कहा कि कंपनी की आपत्तियां बाद में उठाई गईं और भुगतान करने में उसकी असमर्थता पूरी तरह से स्थापित थी।जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ मेसर्स बेसीन मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। लिमिटेड ने...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन फिल्म टिकटों पर सर्विस चार्ज लगाने से रोकने वाला आदेश किया रद्द
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन फिल्म टिकटों पर सर्विस चार्ज लगाने से रोकने वाला आदेश किया रद्द

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार को 4 अप्रैल, 2013 और 18 मार्च, 2014 को जारी दो सरकारी आदेशों (GO) को रद्द कर दिया, जिनके तहत महाराष्ट्र सरकार ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन टिकटों पर सेवा शुल्क या सुविधा शुल्क लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था।जस्टिस महेश सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि उक्त GO किसी भी पेशे को अपनाने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।खंडपीठ ने आदेश में कहा,"हमारा मानना ​​है कि विवादित GO ने थिएटर मालिकों और अन्य लोगों को अपने ग्राहकों से सुविधा शुल्क...

भूमि अधिग्रहण में प्रतिनिधित्व न होने पर भी मुआवज़ा देय: बॉम्बे हाईकोर्ट अनुच्छेद 300-A के तहत निगम की जिम्मेदारी को बताया बाध्यकारी
भूमि अधिग्रहण में प्रतिनिधित्व न होने पर भी मुआवज़ा देय: बॉम्बे हाईकोर्ट अनुच्छेद 300-A के तहत निगम की जिम्मेदारी को बताया बाध्यकारी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि यदि किसी नगर निगम ने सार्वजनिक परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के बदले ज़मीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) देने का आश्वासन दिया है तो वह संविधान और क़ानून के तहत उस वादे को निभाने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने नागपुर नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में TDR देने से इनकार करने का फैसला रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि 2001 में दिए गए आश्वासन के अनुसार TDR जारी किया जाए।जस्टिस नितिन डब्ल्यू. सांबरे और जस्टिस सचिन एस. देशमुख की खंडपीठ उस याचिका पर...

क्या संसद द्वारा पारित कानून महाराष्ट्र पुलिस पर बाध्यकारी हैं? बॉम्बे हाईकोर्ट ने घटिया जांच के बाद डीजीपी से पूछा
'क्या संसद द्वारा पारित कानून महाराष्ट्र पुलिस पर बाध्यकारी हैं?' बॉम्बे हाईकोर्ट ने घटिया जांच के बाद डीजीपी से पूछा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक को शपथ पत्र पर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि क्या संसद द्वारा पारित कानून के प्रावधान राज्य पुलिस बल पर बाध्यकारी हैं या उन्हें केवल कानून की किताबों तक ही सीमित रखा जा सकता है।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस राजेश पाटिल की खंडपीठ ने डीजीपी से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा।खंडपीठ ने 7 जुलाई को पारित आदेश में कहा,"इसलिए हम पुलिस महानिदेशक को शपथ पर यह स्पष्ट करने का निर्देश देते हैं कि क्या भारत की संसद द्वारा पारित...

SARFAESI एक्ट की धारा 14 के तहत दूसरी याचिका पर विचार करने के डीएम के अधिकार पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के विचार का समर्थन किया
SARFAESI एक्ट की धारा 14 के तहत दूसरी याचिका पर विचार करने के डीएम के अधिकार पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के विचार का समर्थन किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण से सहमति व्यक्त की कि ऐसे मामलों में जहां उधारकर्ता SARFAESI अधिनियम की धारा 14 के तहत बैंक को कब्ज़ा सौंपे जाने के बाद भी सुरक्षित संपत्ति में अवैध रूप से पुनः प्रवेश करता है, उक्त प्रावधान के तहत एक नया आवेदन विचारणीय है। नासिक मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक (मल्टी स्टेट शेड्यूल्ड बैंक) बनाम जिला कलेक्टर, जालना एवं अन्य में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय के बाद, जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने अतिरिक्त जिला...

DNA टेस्ट का आदेश देने से पहले बच्चे के अधिकारों की रक्षा जरूरी, सिर्फ मां की सहमति ही पर्याप्त नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
DNA टेस्ट का आदेश देने से पहले बच्चे के अधिकारों की रक्षा जरूरी, सिर्फ मां की सहमति ही पर्याप्त नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी बच्चे की मां उसके पितृत्व की जांच के लिए DNA टेस्ट कराने के लिए सहमत भी हो तब भी कोर्ट को बच्चे के अधिकारों का संरक्षक (Custodian) बनकर उसके हितों पर विचार करना आवश्यक है। कोर्ट को टेस्ट के पक्ष और विपक्ष दोनों पहलुओं का मूल्यांकन करना चाहिए, न कि केवल माता-पिता के विवाद को हल करने के उद्देश्य से DNA टेस्ट का आदेश दे देना चाहिए।जस्टिस आर.एम. जोशी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें महिला ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसके बच्चे का DNA टेस्ट कराने के आदेश...

आयात/निर्यात चूक में कोई नरमी नहीं; बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना अनुमति के आयात क्लियर करने वाली कूरियर एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा
आयात/निर्यात चूक में कोई नरमी नहीं; बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना अनुमति के आयात क्लियर करने वाली कूरियर एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना अनुमति के आयातों को मंजूरी देने के लिए एक कूरियर एजेंसी के लाइसेंस को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की उदारता दिखाने से लोगों को कूरियर एजेंसियों की सेवाओं का सहारा लेकर अपराध करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस जितेन्द्र जैन की पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता ने 1998 के विनियमों के तहत अपने दायित्व को पूरा करने में लापरवाही बरती है। ये दायित्व अधिकृत कूरियर पर डाले गए हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता आयात और निर्यात की मंजूरी...

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति से निर्माणाधीन फ्लैट के लिए किश्तें भरने को नहीं कहा जा सकता, न ही इसे साझा घर कहा जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति से निर्माणाधीन फ्लैट के लिए किश्तें भरने को नहीं कहा जा सकता, न ही इसे 'साझा घर' कहा जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बंबई हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निर्माणाधीन फ्लैट, भले ही पति-पत्नी के नाम पर संयुक्त रूप से रजिस्टर्ड हो, उसे घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम (PwDV) 2005 के तहत 'साझा घर' नहीं कहा जा सकता। इसलिए पति को ऐसे फ्लैट की किश्तें भरने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।जस्टिस मंजूषा देशपांडे ने कहा कि विचाराधीन फ्लैट अभी भी निर्माणाधीन है और दंपति अभी तक उसमें नहीं रह रहे हैं।हाईकोर्ट ने 4 जुलाई के अपने आदेश में कहा,"वर्तमान मामले में कथित 'साझा घर' का कब्ज़ा अभी तक नहीं सौंपा गया, किश्तों का...

अन्य त्योहारों के लिए भी ऐसे ही मांगें उठेंगी: बंबई हाईकोर्ट ने पर्युषण पर्व पर पशु वध रोकने के BMC के फैसले पर पुनर्विचार को कहा
अन्य त्योहारों के लिए भी ऐसे ही मांगें उठेंगी: बंबई हाईकोर्ट ने पर्युषण पर्व पर पशु वध रोकने के BMC के फैसले पर पुनर्विचार को कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में पशुओं के वध पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी की, 'मुंबई जैसे शहर में अगर पर्यूषण पर्व के नौ दिन के लिए बूचड़खाने बंद हैं तो गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा या नवरात्रि आदि जैसे अन्य त्योहार मनाने वाले सभी लोग अदालत आएंगे और इसी तरह की प्रार्थना करेंगे। 'पर्यूषण पर्व' के मद्देनजर 9 दिनों की अवधि के लिए पुणे और नाशिक।चीफ़ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस संदीप मार्ने की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे मुंबई, पुणे और नासिक में नगर...

केंद्र के प्रस्ताव लंबित रखने पर एडवोकेट राजेश दातार ने वापस ली जजशिप के लिए दी गई सहमति
केंद्र के प्रस्ताव लंबित रखने पर एडवोकेट राजेश दातार ने वापस ली जजशिप के लिए दी गई सहमति

बॉम्बे हाईकोर्ट के एडवोकेट राजेश दातार ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट के जज बनने के लिए अपना सहमति फॉर्म वापस ले लिया, जिसे उन्होंने अप्रैल 2024 में भरा था।दातार को 24 सितंबर, 2024 को भारत के तत्कालीन चीफ़ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के तहत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई थी। विशेष रूप से, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित चार अधिवक्ताओं में से दातार का नाम सूची में सबसे ऊपर दिखाई दिया। इसका अर्थ यह है कि यदि उक्त...

Railway Act | आश्रित के कानून उत्तराधिकारी मुआवजे के हकदार, भले ही मृतक के आश्रित की अपील के लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो जाए: बॉम्बे हाईकोर्ट
Railway Act | आश्रित के कानून उत्तराधिकारी मुआवजे के हकदार, भले ही मृतक के आश्रित की अपील के लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो जाए: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि मृतक यात्री के आश्रित का कानूनी प्रतिनिधि रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत मुआवजा पाने का हकदार है, भले ही कार्यवाही के दौरान आश्रित की मृत्यु हो जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा मुआवजा मृतक आश्रित की संपत्ति का हिस्सा होता है और उनकी मृत्यु के साथ खत्म नहीं होता। जस्टिस एनजे जमादार श्रीमती सोनल वैभव सावंत द्वारा दायर अपील पर फैसला कर रहे थे, जिनके पिता महादेव तांबे (अब मृत) ने मूल रूप से रेलवे दावा न्यायाधिकरण से रेलवे अधिनियम की धारा 124-ए के तहत मुआवजे की मांग की थी, जो 2011 में...

बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: मात्र पिछड़ी जाति की मां से पालन-पोषण होने पर भी जातीय उत्पीड़न न झेलने पर आरक्षण का लाभ नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: मात्र पिछड़ी जाति की मां से पालन-पोषण होने पर भी जातीय उत्पीड़न न झेलने पर आरक्षण का लाभ नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक स्टूडेंट की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी अंतरजातीय विवाह से जन्मे बच्चे ने अपनी पिछड़ी जाति के माता-पिता के साथ रहते हुए भी कोई सामाजिक भेदभाव या अपमान का सामना नहीं किया है तो उसे उस जाति के तहत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने सुजल मंगल बिरवडकर की याचिका खारिज की। याचिका में जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति के 15 अप्रैल 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता को चांभार (अनुसूचित जाति)...

POCSO Act के तहत गंभीर अपराधों में जमानत देना कानून की मंशा को कमजोर करता है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग बालक के साथ कुकर्म के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार
POCSO Act के तहत गंभीर अपराधों में जमानत देना कानून की मंशा को कमजोर करता है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग बालक के साथ कुकर्म के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाले विशेष कानून (POCSO Act) के तहत गंभीर मामलों में अदालतों को जमानत देने में उदार दृष्टिकोण नहीं अपनाना चाहिए।एकल जज जस्टिस अमित बोरकर ने अपने आदेश में कहा कि हर आरोपी को स्वतंत्रता का मूल अधिकार होता है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है।जज ने कहा,"यह अदालत यह स्पष्ट करती है कि प्रत्येक आरोपी को स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार है लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। इसे न्याय, सार्वजनिक व्यवस्था और विशेष रूप से नाबालिग पीड़ितों की...

टेंडर अथॉरिटी टेंडर क्लॉज के लिए वैकल्पिक व्याख्या नहीं दे सकता, जो स्पष्ट है: बॉम्बे हाईकोर्ट
टेंडर अथॉरिटी टेंडर क्लॉज के लिए वैकल्पिक व्याख्या नहीं दे सकता, जो स्पष्ट है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि अधिक संख्या में गोदामों के लिए आवेदन करने वाले बोलीदाताओं को वरीयता देने वाले टेंडर क्लॉज को केंद्रीय भंडार कार्यालय तक नहीं बढ़ाया जा सकता, यदि टेंडर दस्तावेज में दो श्रेणियों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया। न्यायालय ने एक बोलीदाता को दिए गए पट्टे को रद्द कर दिया और टेंडर प्रक्रिया को बहाल कर दिया।चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस संदीप वी. मार्ने की खंडपीठ वास्ट मीडिया नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पट्टे के लिए टेंडर प्रक्रिया...

बालासाहेब ठाकरे स्मारक स्थल पर बंबई हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी याचिकाएं खारिज
बालासाहेब ठाकरे स्मारक स्थल पर बंबई हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी याचिकाएं खारिज

बंबई हाईकोर्ट ने शिवाजी पार्क, दादर स्थित मेयर बंगले पर बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक बनाने के लिए राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि स्मारक स्थल का चयन, ट्रस्ट का गठन और अन्य संबंधित निर्णय राज्य की नीतिगत सीमा में आते हैं। इन पर न्यायिक समीक्षा का अधिकार नहीं बनता।चीफ जस्टिस आलोक आराधे और जस्टिस संदीप वी. मर्ने की खंडपीठ ने चार जनहित याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मेयर बंगले का उपयोग बदलने में MRTP एक्ट के...

अज़ान लाउडस्पीकर हटाने के मुंबई पुलिस के नोटिस को मस्जिदों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दी चुनौती
अज़ान लाउडस्पीकर हटाने के मुंबई पुलिस के नोटिस को मस्जिदों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दी चुनौती

मुंबई के पूर्वी उपनगरों की पांच मस्जिदों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें पुलिस पर ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आधार पर दैनिक अजान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लाउडस्पीकरों को हटाने के लिए ऐसी कई मस्जिदों को कथित रूप से 'निराधार' नोटिस जारी करके मुस्लिम समुदाय को 'निशाना' बनाने का आरोप लगाया गया है।जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस मिलिंद सथाये की खंडपीठ ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार, मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया...

बलात्कार के मामलों में समझौते के आधार पर केस रद्द नहीं हो सकते, आरोपों से मुकरने पर महिला पर झूठी गवाही का मामला बन सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बलात्कार के मामलों में समझौते के आधार पर केस रद्द नहीं हो सकते, आरोपों से मुकरने पर महिला पर झूठी गवाही का मामला बन सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने हाल ही में दो लोगों के खिलाफ दर्ज बलात्कार के एक मामले को खारिज करने से इनकार करते हुए कहा कि बलात्कार के मामले में 'समझौता' समाज के हित के खिलाफ है और इसलिए आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करना स्वीकार नहीं किया जा सकता है। जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस संजय देशमुख की खंडपीठ ने शिकायतकर्ता महिला की इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि वह और आरोपी 'करीबी दोस्त' हैं और उसने कुछ गलतफहमी के कारण प्राथमिकी दर्ज कराई है। कोर्ट ने 30 जून को पारित आदेश में...