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आपराधिक अपील के लंबित रहने के दरमियान कैदी को साधारण/आपातकालीन छुट्टी दी जा सकती है बशर्ते वह किसी अन्य मामले में मुकदमे का सामना न कर रहा हो: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि किसी कैदी को सामान्य या आपातकालीन छुट्टी तब भी दी जा सकती है, जब हाईकोर्ट में अपील लंबित हो या सुप्रीम कोर्ट में विशेष छुट्टी याचिका लंबित हो। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम, जस्टिस टीवी तमिलसेल्वी और जस्टिस सुंदर मोहन की पूर्ण पीठ ने कहा कि तमिलनाडु सजा निलंबन नियम 1982 के नियम 35 के अनुसार, जेल प्राधिकरण को सामान्य छुट्टी देने का अधिकार है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कैदी किसी अन्य मामले में मुकदमे का सामना कर रहा है, तो जेल अधिकारी समय...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिक्षकों को वेतन न देने पर जिला परिषद के सीईओ का वेतन रोका, कहा- उन्हें भी समझ आए कि वेतन न मिलने पर क्या-क्या सहना पड़ता है
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में महाराष्ट्र सरकार को सोलापुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का एक महीने का वेतन रोकने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह आदेश ये देखने के बाद दिया कि स्पष्ट आदेशों के बावजूद कुछ शिक्षकों को वेतन नहीं दिया गया।जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अश्विन भोबे की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि सीईओ को भी वेतन न मिलने जैसे हालात से गुजरना चाहिए।न्यायाधीशों ने 28 जनवरी के आदेश में उल्लेख किया कि 26 नवंबर, 2024 को पारित एक आदेश के जरिए सोलापुर जिला परिषद के...
लॉटरी वितरक सर्विस टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन की अपील खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सिक्किम उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों को बरकरार रखा, जिसमें वित्त अधिनियम, 1994 की धारा 65(105) के खंड (zzzzn) को असंवैधानिक घोषित किया गया, जिसे वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा सम्मिलित किया गया।उक्त खंड ने "लॉटरी सहित जुए के खेल को बढ़ावा देने, विपणन करने, आयोजन करने या किसी अन्य तरीके से आयोजन में सहायता करने" की गतिविधि को कर योग्य सेवा की नई श्रेणी के रूप में पेश किया।याचिकाकर्ता सिक्किम सरकार द्वारा आयोजित क्रमशः कागज और ऑनलाइन लॉटरी टिकटों की बिक्री के व्यवसाय में लगी निजी...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में लाउडस्पीकरों के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में लाउडस्पीकर लगाने के खिलाफ जनहित याचिका इस आधार पर खारिज की कि सार्वजनिक संबोधन प्रणाली अनुमेय सीमा से अधिक शोर पैदा कर रही है।याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया कि जब वे महाकुंभ के सेक्टर 18 में प्रचार कर रहे थे तो उनके आसपास के शिविरों में लाउडस्पीकर (सार्वजनिक संबोधन प्रणाली) और एलसीडी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस तरह के ध्वनि प्रदूषण से उनके ध्यान आदि में बाधा उत्पन्न हो रही...
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SSC नियुक्तियां रद्द करने के आदेश के खिलाफ अपील पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (10 फरवरी) को पश्चिम बंगाल स्कूल चयन आयोग द्वारा 2016 में सरकारी स्कूलों में 25,000 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर नियुक्तियों को रद्द करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कुख्यात कैश-फॉर-जॉब भर्ती घोटाले के कारण एसएससी नियुक्तियां जांच के दायरे में आ गई थीं।सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इस बात...
नियुक्ति विज्ञापन निरस्त हो जाए तो नियुक्त उम्मीदवारों की सुनवाई के बिना पूरी प्रक्रिया निरस्त की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा आयोजित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की 2010 की भर्ती प्रक्रिया को अवैध और असंवैधानिक घोषित किया, जिससे पूरी प्रक्रिया निरस्त हो गई। कोर्ट ने राज्य सरकार को छह महीने की अवधि के भीतर उक्त पदों के लिए नए विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया।पदों की संख्या का उल्लेख न करने, लागू आरक्षण को निर्दिष्ट न करने और इंटरव्यू राउंड (मूल रूप से विज्ञापन में उल्लेख नहीं) को शामिल करने के बीच में खेल के नियम को बदलने जैसे कारकों का हवाला देते हुए कोर्ट ने पाया कि पूरी भर्ती...
शिकायतकर्ता की मृत्यु स्वाभाविक रूप से हुई है तो FIR की विषय-वस्तु अस्वीकार्य, जांच अधिकारी के माध्यम से साबित नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मृत व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई FIR का कोई साक्ष्य मूल्य होने के लिए उसकी विषय-वस्तु की पुष्टि और उसे साबित किया जाना आवश्यक है। विस्तृत रूप से बताते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता की मृत्यु का दर्ज कराई गई शिकायत से कोई संबंध नहीं है तो FIR की विषय-वस्तु साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होगी। इस प्रकार, ऐसे मामलों में जांच अधिकारी के माध्यम से विषय-वस्तु को साबित नहीं किया जा सकता। दूसरे शब्दों में, जब तक FIR को मृत्युपूर्व कथन के रूप में नहीं माना...
'मौखिक वचनबद्धता आर्बिट्रेशन क्लॉज़ के दायरे में आती है': सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी के डीमैट अकाउंट में लेनदेन के लिए पति के खिलाफ फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संयुक्त और कई दायित्वों को पूरा करने वाला मौखिक अनुबंध आर्बिट्रेशन क्लॉज़ (Arbitration Clause) के दायरे में आता है।ऐसा मानते हुए कोर्ट ने पति के खिलाफ दिए गए आर्बिट्रेशन अवार्ड की पुष्टि की, जिसमें पाया गया कि उसकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड जॉइंट डीमैट अकाउंट में डेबिट बैलेंस के कारण वह अवार्ड के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी है।कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि पति का दायित्व मध्यस्थता के दायरे से बाहर एक "निजी लेनदेन" है। इसके बजाय, इसने माना कि गैर-हस्ताक्षरकर्ताओं...
1984 Anti-Sikh Riots Cases : अपील गंभीरता से दायर की जानी चाहिए, न कि केवल दिखावे के लिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों के संबंध में जस्टिस एसएन ढींगरा समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग वाली याचिका पर विस्तार से सुनवाई करने पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2018 में गठित जस्टिस ढींगरा समिति ने जनवरी 2020 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया कि दंगों के कई मामलों में जांच पटरी से उतर गई और अन्य बातों के अलावा, बरी किए गए लोगों के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की गई। हालांकि दिल्ली पुलिस ने बरी किए गए लोगों के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन दिल्ली...
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री की बार-बार की जाने वाली प्रक्रियागत खामियों पर फिर कड़ी नाराजगी जताई
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपनी रजिस्ट्री की बार-बार की जाने वाली प्रक्रियागत खामियों पर फिर से कड़ी नाराजगी जताई। इस बार कोर्ट ने रजिस्ट्री अधिकारियों की आलोचना की, क्योंकि उन्होंने ऐसे व्यक्ति से जवाबी हलफनामा स्वीकार किया, जिसे मामले में पक्षकार के रूप में शामिल ही नहीं किया गया।कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्री ऐसे लोगों से भी दस्तावेज स्वीकार कर रही है, जो मामले में पक्षकार भी नहीं हैं। अक्सर अस्पष्ट रूप में होते हैं। एसएलपी रजिस्ट्रेशन में सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन न करने पर प्रकाश डालने...
सरकारी नौकरी सपना, मात्र चिंता से बाधा नहीं: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने OMR में त्रुटि करने वाले उम्मीदवारों को दी राहत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने OMR SHEET में बुकलेट श्रृंखला दाखिल नहीं करने के कारण हरियाणा लोक सेवा आयोग में अपनी अयोग्यता को चुनौती देने वाले उम्मीदवारों की याचिका को स्वीकार कर लिया, यह देखते हुए कि "सार्वजनिक रोजगार हासिल करना एक आम व्यक्ति के लिए एक सपना है और केवल कुछ अनजाने चूक के कारण उसी में प्रतिस्पर्धा करने में विफलता एक उम्मीदवार के पूरे करियर की संभावनाओं को कुचल देगी, इसके अलावा, यह केवल कभी-कभी होता है कि इस तरह के सार्वजनिक रोजगार के लिए विज्ञापन जारी किए जाते हैं।जस्टिस विनोद...
कार्यस्थल पर निकटता से उत्पन्न संबंध बाद में अपराध के रूप में रिपोर्ट हो सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कार्यस्थल पर निकटता के कारण कई बार आपसी सहमति से बनाए गए यौन संबंध बनते हैं और बाद में खटास आने पर इन्हें बलात्कार जैसे अपराध के रूप में दर्ज कर दिया जाता है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा, 'मौजूदा समय में कई बार कार्यस्थल पर करीबी निकटता के परिणामस्वरूप सहमति से संबंध बनते हैं जो खटास आने पर अपराध के तौर पर रिपोर्ट किए जाते हैं, जिससे बलात्कार के अपराध और दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए यौन संबंध के बीच के अंतर के प्रति सचेत रहना उचित हो जाता है। न्यायालय ने कहा...
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक मेडिकल विज्ञापनों पर कार्रवाई में विफलता पर आंध्र प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों को तलब किया
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों से कहा है कि वे सात मार्च को वर्चुअल तरीके से पेश हों और बताएं कि उन् होंने भ्रामक चिकित् सा विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए न् यायालय द्वारा पूर्व में पारित निर्देशों का अनुपालन क् यों नहीं किया।इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत ने उनसे यह भी बताने के लिए कहा कि उन्होंने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के नियम 170 के प्रवर्तन के संबंध में अदालत के पहले के आदेशों के संदर्भ...
पति और सहकर्मी के बीच दोस्ती को अवैध संबंध नहीं माना जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पति और कार्यालय के सहकर्मी के बीच महज दोस्ती को अवैध यौन संबंध नहीं समझा जा सकता।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ ने कहा: पति और उसके कार्यालय के सहयोगी के बीच दोस्ती और पति की सर्जरी के समय ऐसे दोस्तों के बीच निकटता (जिसके दौरान वह प्रतिवादी/पत्नी के साथ घर पर लगातार संघर्ष कर रहा था और पत्नी के कहने पर एक लंबित आपराधिक मामले के गिलोटिन के तहत था) पत्नी द्वारा उनके बीच अवैध यौन संबंध माना जाना अस्वीकार्य है और, किसी भी स्वतंत्र गवाह...
POCSO Act के तहत अभियोजन के लिए सहमति से बने रिश्ते की प्रकृति अप्रासंगिक: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि POCSO ACT के तहत अभियोजन के लिए प्रथम दृष्टया, आरोपी और अभियोक्ता के बीच सहमति से संबंध बनाना अप्रासंगिक है।आरोपी की इस दलील को खारिज करते हुए कि उसके और अभियोक्ता के बीच संबंध सहमति से थे। जस्टिस संजीव नरूला ने कहा "सहमति से संबंध बनाने की यह दलील कानूनी रूप से महत्वहीन है। POCSO ACTके तहत, पीड़िता की उम्र निर्णायक कारक है, और यदि पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम है, तो कानून मानता है कि वह वैध सहमति देने में असमर्थ है। इसलिए POCSO ACTके तहत अभियोजन के उद्देश्य से...
'राज्यपाल दोबारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति के पास कैसे भेज सकते हैं?' : तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार द्वारा राज्यपाल डॉ. आर.एन. रवि के खिलाफ दायर रिट याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिन्होंने 12 विधेयकों पर अपनी सहमति नहीं दी थी। इनमें से सबसे पुराना विधेयक जनवरी 2020 से लंबित है। सरकार द्वारा विशेष सत्र में विधेयकों को फिर से पारित किए जाने के बाद राज्यपाल ने कुछ दोबारा पारित कानूनों को पुनर्विचार के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया।चार दिनों की सुनवाई में अनुच्छेद 200 की व्याख्या से संबंधित विभिन्न संवैधानिक मुद्दे और तथ्यात्मक प्रश्न सामने आए हैं।जस्टिस...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने Telegram स्कैमर्स के खिलाफ याचिका पर साइबर अपराध शिकायत सिस्टम पर रिपोर्ट मांगी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को साइबर अपराधों पर शिकायत प्रबंधन तंत्र के साथ-साथ अनसुलझी शिकायतों के भाग्य के बारे में एक व्यापक रिपोर्ट प्रदान करने का निर्देश दिया है, जहां कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु ने कहा, "राज्य के वकील 17.02.2025 को एडीजीपी साइबर क्राइम, पंजाब के कार्यालय का भी दौरा करेंगे और शिकायत (ओं) से निपटने के तंत्र के साथ-साथ अनसुलझे शिकायत (शिकायतों) के बारे में एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जहां कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। ...
क्या भारत के बाहर हुई हिरासत को धारा 428 सीआरपीसी के तहत सजा में समायोजित किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न (Legal Question) पर विचार किया। यह प्रश्न था कि क्या किसी आरोपी (Accused) को किसी विदेशी (Foreign) देश में बिताए गए हिरासत (Detention) के समय को भारतीय अदालत द्वारा दी गई सजा में समायोजित (Set-Off) करने का अधिकार मिल सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धारा 428 सीआरपीसी (CrPC) केवल भारत में बिताए गए हिरासत (Detention) के समय पर लागू होती है। किसी अन्य देश में किसी अन्य मामले में...
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत लाइसेंस को रद्द और निलंबित करने की शक्ति – धारा 34
राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के व्यापार को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम के तहत शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए लाइसेंस (Licence), परमिट (Permit) और पास (Pass) दिए जाते हैं।हालांकि, सरकार ये लाइसेंस जारी करती है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करती है कि इनका दुरुपयोग न हो। धारा 34 (Section 34) विशेष रूप से उन परिस्थितियों को निर्धारित करती है जिनमें लाइसेंस, परमिट या पास को रद्द (Cancel) या निलंबित...
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में नए प्रावधान और महत्वपूर्ण बदलाव
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) में कई नए प्रावधान (Provisions) जोड़े गए हैं और पहले से मौजूद कई कानूनी परिभाषाओं (Legal Definitions) और धाराओं में बदलाव किए गए हैं।इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य नए अपराधों को शामिल करना, कानून को अधिक स्पष्ट बनाना और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code - IPC) के कई प्रावधानों को हटाया गया, बदला गया या विस्तारित किया गया है। इस लेख में हम बीएनएस में शामिल कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों (Modifications) और...




















