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क्या हर आपराधिक साजिश को PMLA के तहत अनुसूचित अपराध माना जा सकता है?
पावना डिब्बूर बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2023) में सुप्रीम कोर्ट ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) की व्याख्या करते हुए यह तय किया कि क्या केवल आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाया जा सकता है, जब मूल अपराध (Predicate Offence) PMLA की अनुसूची (Schedule) में शामिल न हो।यह फैसला स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति को केवल IPC की धारा 120-B (Criminal Conspiracy) के तहत अभियोजन (Prosecution) नहीं किया जा सकता, जब तक कि जिस अपराध...
Sales of Goods Act, 1930 की धारा 55-58: अनुबंध के उल्लंघन के लिए वाद
माल विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act), 1930 का अध्याय VI अनुबंध के उल्लंघन (Breach of Contract) के लिए उपलब्ध विभिन्न उपायों (Remedies) से संबंधित है। यह उन स्थितियों को स्पष्ट करता है जहाँ या तो विक्रेता (Seller) या खरीदार (Buyer) अपने अनुबंध संबंधी दायित्वों (Contractual Obligations) को पूरा करने में विफल रहता है, और पीड़ित पक्ष (Aggrieved Party) क्या कानूनी कार्रवाई कर सकता है।कीमत के लिए वाद (Suit for Price) धारा 55 उन परिस्थितियों को बताती है जिनमें एक विक्रेता खरीदार पर कीमत वसूलने के...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग में लंबित RTI अपीलों के समयबद्ध निपटारे की याचिका पर नोटिस जारी किया
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), नई दिल्ली के समक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI Act) के तहत दायर द्वितीय अपीलों के समयबद्ध निपटारे की मांग की गई, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित मामलों में।यह याचिका जुनैद जाविद 28 वर्षीय RTI और सोशल एक्टिविस्ट द्वारा दायर की गई, जो बारामुला के निवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ी दूसरी अपीलों को सूचीबद्ध करने और उन पर सुनवाई में व्यवस्थित देरी हो...
जेल अधिकारियों को सभी पैरोल याचिकाओं पर 4 महीने के भीतर फैसला करना होगा, देरी होने पर दोषी अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं: पीएंड एच हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जेल प्राधिकारियों द्वारा सभी पैरोल आवेदनों पर चार महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए और यदि इस निर्देश का उल्लंघन किया जाता है, तो दोषी संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। न्यायालय ने उन दोषियों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला जो अपने पैरोल आवेदनों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में भी उन्हें अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ रहा है। न्यायालय ने ऐसे अनुरोधों पर "शीघ्रता से"...
बंगाली फैमिली को बांग्लादेशी बताकर निर्वासित करने के मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल प्रवासी परिवार को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और बाद में उन्हें बांग्लादेश निर्वासित किए जाने के मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतोब्रतो कुमार मित्रा की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,"कल हमारे पास भी ऐसा ही एक मामला आया था, जिसमें हमने कहा था कि नियम जारी करने से पहले हम राज्य से जवाब मांग सकते हैं, इसलिए हम इस मामले में भी ऐसा ही करेंगे।"हालांकि, वकील ने बताया कि जिस मामले का अदालत ज़िक्र कर रही थी, वह ओडिशा में हिरासत में लिए...
शादी से निराश पति, आत्महत्या के लिए उकसाने का सबूत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने आत्महत्या के मामले में पत्नी को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में पत्नी और उसके परिवार के सदस्यों को सबूतों के अभाव में बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि ऐसा मामला हो सकता है, जहां पति अपनी शादी से नाखुश और निराश था लेकिन पत्नी और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई आरोप नहीं बनता, क्योंकि न तो सुसाइड नोट से और न ही मृतक के माता-पिता की गवाही से कोई आरोप बनता है।न्यायालय ने कहा,"केवल यही आरोप लगाया जा रहा है कि पत्नी मृतक को धमकी देती थी कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों...
हाईकोर्ट ने UP PCS(J) Exam प्रक्रिया में सुधार का सुझाव देने वाली जस्टिस माथुर आयोग की रिपोर्ट पर पक्षकारों से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जस्टिस गोविंद माथुर (हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस) की अध्यक्षता वाले सदस्यीय आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें उत्तर प्रदेश पीसीएस (जे) प्रतियोगी परीक्षाओं (UP PCS(J) Exam) के संचालन में तत्काल सुधार और प्रक्रियात्मक संशोधनों की सिफारिश की गई।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने दर्ज किया कि प्रारंभिक रिपोर्ट (भाग-I) 14 सेटों में प्रस्तुत की गई। इसके साथ संलग्न एक कवर लेटर में निर्दिष्ट किया गया कि...
राजस्व अधिकारियों की ओर से की गई प्रक्रियात्मक चूक हिमाचल प्रदेश नौवहन नियमों के तहत प्राप्त मूल अधिकारों को विफल नहीं कर सकती: HP हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि राजस्व प्राधिकारी द्वारा की गई प्रक्रियात्मक चूक किसी पक्षकार को प्राप्त मूल अधिकारों को नष्ट नहीं कर सकती। न्यायालय ने कहा कि अभिलेखों को अद्यतन करने में राजस्व प्राधिकारियों की प्रक्रियात्मक चूक के कारण, याचिकाकर्ता, जो एक पूर्व सैनिक है, को हिमाचल प्रदेश नौवहन भूमि नियम, 1968 के तहत उसे आवंटित वन भूमि पर उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने कहा,"वादी का मामला यह है कि राजस्व प्राधिकारियों द्वारा राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने में...
'प्रतिकूल कब्ज़ा वंशानुगत अधिकार': हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पति की मृत्यु के बाद पत्नी का दावा बरकरार रखा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पति की मृत्यु के बाद पत्नी के प्रतिकूल कब्जे के दावे को बरकरार रखते हुए कहा कि वह राजस्व रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने की हकदार है। जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने कहा, "राजस्व रिकॉर्डों में दर्ज प्रविष्टियां दर्शाती हैं कि अनाधिकृत कब्जा 1963 से ही राज्य के संज्ञान में था और राजस्व एजेंसी की जानकारी में होने के बावजूद बिना किसी रुकावट, हस्तक्षेप या आपत्ति के 30 वर्षों तक प्रतिकूल कब्जे की अवधि पूरी होने के बाद, गुरदास को अपने जीवनकाल में प्रतिकूल कब्जे के आधार पर...
लॉरेंस बिश्नोई का जेल से साक्षात्कार | P&H हाईकोर्ट ने पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति के खिलाफ दायर पुलिस अधिकारियों की याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जेल से लॉरेंस बिश्नोई के लिए गए इंटरव्यू मामले में उन पर पॉलीग्राफ परीक्षण की अनुमति संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। उल्लेखनीय है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का पंजाब के खरड़ स्थित सीआईए स्टाफ थाने में हिरासत के दरमियान एक साक्षात्कार लिया गया था, जिस पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। जिसके बाद जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।जस्टिस एनएस शेखावत ने कहा,"सभी याचिकाकर्ताओं को उनके वकील...
Death Penalty: कानूनी व्यवस्था और न्यायालय की प्रक्रिया
मृत्युदंड (Death Penalty) भारत में केवल "दुर्लभतम में दुर्लभ" (Rarest of Rare) मामलों में दिया जाता है। इस वीडियो में जानिए कि न्यायालय कैसे तय करता है कि किसी अपराध को "Rarest of Rare" माना जाए, मृत्युदंड से जुड़े कानूनी प्रावधान क्या हैं, और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले क्या कहते हैं। पूरी जानकारी के लिए वीडियो देखें!
हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ आपराधिक मानहानि ट्रायल पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी।जस्टिस एस. आर. कृष्ण कुमार की एकल पीठ ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया।मुख्यमंत्री की ओर से एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने अदालत को सूचित किया कि यह वही अपराध है, जिसमें इससे पहले 4 जुलाई को डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार के खिलाफ ट्रायल कोर्ट...
PM Modi और RSS पर कार्टून बनाने के आरोप में गिरफ्तार कार्टूनिस्ट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 14 जुलाई को कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्हें उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक कार्टून के संबंध में अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष याचिका का उल्लेख किया और कहा,"हाईकोर्ट का आदेश मेरी निंदा करता है। इसमें कहा गया कि अर्नेश कुमार पर धारा 41-ए लागू नहीं होगी और इमरान प्रतापगढ़ी...
'मुसलमानों के प्रति नफ़रत फैलाई, तनाव बढ़ाया': दिल्ली दंगों के मामले में व्यक्ति को मिली 3 साल की सज़ा
दिल्ली कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि उसने मुस्लिम समुदाय के प्रति नफ़रत फैलाई और पहले से ही सुलग रहे तनाव को और भड़काया।कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने 5 जून को इस मामले में दोषी ठहराए गए लोकेश कुमार सोलंकी को तीन साल की सज़ा सुनाई, लेकिन उसे रिहा करने का आदेश दिया, क्योंकि वह पहले ही तीन साल से ज़्यादा समय हिरासत में बिता चुका था।सोलंकी को गोकलपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज...
दिल्ली भवन को लेकर किरायेदार नहीं कर सकते विरोध, जीवन की सुरक्षा किरायेदारी अधिकारों से अधिक महत्वपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जर्जर भवन में रह रहे किरायेदारों के जीवन को खतरे से बचाना उत्तर प्रदेश नगरीय परिसरों का किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत उनके किरायेदारी अधिकारों की तुलना में अधिक प्राथमिकता रखता है।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने कहा,“किरायेदार उस भवन के शीघ्र ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का विरोध नहीं कर सकते, विशेष रूप से तब जब संबंधित प्राधिकरणों ने स्थल का निरीक्षण कर यह पाया हो कि भवन को गिराना अनिवार्य है। वर्ष 1959 के अधिनियम के तहत...
ओल्ड मोंक ब्रांड के मालिकों द्वारा ट्रेडमार्क उल्लंघन मुकदमे में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ओल्ड मिस्ट कॉफी फ्लेवर्ड रम की बिक्री पर रोक लगाई
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ओल्ड मोंक और ओल्ड मोंक कॉफी ब्रांड का मालिक मोहन मीकिन लिमिटेड के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित करते हुए एस्टन रोमन ब्रेवरी एंड डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड को ओल्ड मिस्ट नाम से कॉफी फ्लेवर्ड रम बेचने से अगले आदेश तक रोक लगाR। कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादी का उत्पाद वादी के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क से काफी हद तक समान है।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने कहा,“प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी द्वारा वादी के ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया गया, क्योंकि प्रतिवादी का उत्पाद वादी...
भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले अपराध को लागू करने से पहले उचित सावधानी बरतनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 को लागू करने से पहले उचित सावधानी और एक समझदार व्यक्ति के मानकों का पालन किया जाना चाहिए, जो भारत की संप्रभुता एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कथित कृत्यों को आपराधिक बनाती है।न्यायालय ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर बोले गए शब्द या पोस्ट भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इन्हें संकीर्ण रूप से नहीं समझा जाना चाहिए, जब तक कि वे ऐसी प्रकृति के न हों, जो किसी देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करते हों या...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में अपराध स्थल जांच की SOP की समीक्षा हेतु स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण आदेश में उत्तर प्रदेश में अपराध स्थलों की जांच के लिए अपनाई जा रही मानक प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedure - SOP) की समीक्षा और सुधार हेतु एक अलग आपराधिक जनहित याचिका (Criminal PIL) दायर करने का निर्देश दिया।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बृजराज सिंह की खंडपीठ ने आदेश में कहा,"हम इस मत पर हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य में अपराध स्थल जांच के लिए जो मानक संचालन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, उसके संदर्भ में, ताकि अभियोजन की प्रक्रिया बार-बार विफल न हो, एक अलग...
एडमिशन फॉर्म में जमा करने के बाद कोई बदलाव स्वीकार्य नहीं, प्रतियोगी परीक्षाएं शीघ्रता से पूरी होनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी एडमिशन फॉर्म में एक बार जमा करने के बाद कोई भी बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि चयन प्रक्रिया का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करना आवश्यक है।कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उस एडमिशन पॉलिसी को चुनौती दी गई थी, जिसमें आवेदन फॉर्म जमा करने के बाद उसमें किसी भी प्रकार के बदलाव की अनुमति नहीं दी जाती।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने...
NEET अभ्यर्थी की OMR की होगी दोबारा जांच, गलती से बुकलेट कोड गलत लिखने पर हाईकोर्ट ने कहा, 'गलती करना मानवीय स्वभाव'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा [NEET (UG)]-2025 के अभ्यर्थी की ऑप्टिकल मार्क्स रिकॉग्निशन (OMR) शीट की दोबारा जांच के निर्देश दिए, जिसने प्रश्न पुस्तिका संख्या 'गलत' लिख दी थी और उसे 589 अंकों के बजाय 41 अंक मिले थे।याचिकाकर्ता को उसकी चयन स्थिति के संबंध में कोई अंतरिम राहत न देते हुए जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इस प्रकार टिप्पणी की:“याचिकाकर्ता ने यह आरोप नहीं लगाया कि उसने किसी या कई प्रश्नों के उत्तर देने में गलती की है।...


















