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Hindu Marriage Act में Custom and usage, Full blood and half blood, Sapinda relationship शब्द के अर्थ
इस एक्ट की धारा 3 के अनुसार इस अधिनियम में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की परिभाषाएं दी गई है। इन परिभाषाओं से उन शब्दों के संबंध में कोई संशय नहीं रहता है तथा सभी स्थितियां स्पष्ट हो जाती है।Custom and usageहिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 3 के अनुसार रूढ़ि और प्रथा शब्द की परिभाषाएं दी गयी है। यदि किसी मामले में पारिवारिक रूढ़ि का सहारा लिया जाता है तो उसे सिद्ध भी किया जाएगा। रूढ़ि को सबूतों द्वारा सिद्ध किया जा सकता है। इसके विभिन्न तत्व होते हैं। जैसे रूढ़ि और प्रथा अवैधानिक एवं लोकनीति के विरुद्ध...
Hindu Marriage Act किन लोगों पर लागू होता है?
कोई भी अधिनियम केवल किसी देश के अधिवासी लोगों पर अधिनियमित होता है लेकिन इस एक्ट की धारा 1 के अनुसार हिंदू विवाह अधिनियम भारत राज्यों में अधिवासी समस्त हिंदुओं तथा भारत के बाहर रह रहे भारत के अधिवासी हिंदुओं के संबंध में भी लागू होता है।गौर गोपाल राय बनाम शिप्रा राय एआईआर 1978 कोलकाता 163 के मामले में यह कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्थाई रूप से दूसरे देश में रहने लगे तो उसे इस देश की विधि व्यक्तिगत संबंधों में लागू नहीं की जाएगी किंतु उस व्यक्ति के अधिवास के देश...
फ़ैमिली कोर्ट में काउंसलर नियुक्त करना अनिवार्य, न करने पर फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 9 का उल्लंघन होगा: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने माना है कि फ़ैमिली कोर्ट में परामर्शदाताओं की नियुक्ति न होने के परिणामस्वरूप मामलों को सुलह में नहीं भेजा जाना फ़ैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 की धारा 9 और उसके तहत बनाए गए नियमों का उल्लंघन है।जस्टिस बिबेक चौधरी ने कहा कि जहां फ़ैमिली कोर्ट (पटना हाईकोर्ट) नियम, 2000 का उल्लंघन हुआ है, वहां न्याय की प्रतिकूल प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती. "यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि फ़ैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 की धारा 9 और उपरोक्त नियमों का अनुपालन बाध्य है। यदि सरकार द्वारा नियुक्त और कुटुंब...
'SEBI की वार्षिक रिपोर्ट RTI की धारा 11 की प्रक्रिया के बिना सार्वजनिक नहीं की जा सकती': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि RTI Act, 2005 के तहत एनएसई और बीएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंजों सहित तीसरे पक्ष से संबंधित किसी भी जानकारी का खुलासा करने से पहले, संबंधित प्राधिकरण को अधिनियम की धारा 11 में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना चाहिए।जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने पारदर्शिता कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से उत्पन्न रिट याचिकाओं के एक बैच में यह फैसला सुनाया, जिसमें सेबी द्वारा जनहित निदेशकों की नियुक्ति और बीएसई, एनएसई और...
अगर बाइक टैक्सी चल सकती हैं तो उन्हें ऐप से जोड़ने की भी इजाजत मिलनी चाहिए: उबर ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा
उबर इंडिया, रैपिडो और ओला जैसे विभिन्न बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स द्वारा राज्य में बाइक टैक्सियों के चलने पर राज्य सरकार के प्रतिबंध को बरकरार रखने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील करते हुए उबर इंडिया ने आज कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि यदि मोटरसाइकिल कानूनी रूप से टैक्सी के रूप में काम कर सकती है, तो उनके एकत्रीकरण को अस्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं है।कंपनी ने कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस सीएम जोशी की खंडपीठ के समक्ष कहा कि एग्रीगेटर अंतिम मील...
SCAORA ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा अदालत द्वारा नोटिस जारी करने से पहले प्रतिवादियों को स्वचालित अलर्ट जारी करने पर जातई आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को पत्र लिखकर नए मामले दायर करने पर प्रतिवादियों को स्वचालित एसएमएस और ईमेल अलर्ट भेजने की हालिया प्रथा पर चिंता जताई।SCAORA के मानद सचिव निखिल जैन ने पत्र में रजिस्ट्री से अनुरोध किया कि प्रतिवादियों के संपर्क विवरण अनिवार्य रूप से प्रदान करने की आवश्यकता को समाप्त किया जाए और न्यायिक आदेश के बिना स्वचालित सूचनाएं भेजने पर रोक लगाई जाए।एसोसिएशन ने कहा कि वर्तमान प्रणाली के तहत अधिवक्ताओं को नए मामले दायर करते समय...
केनरा बैंक ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को 'धोखाधड़ी' घोषित करने वाला आदेश वापस लिया
उद्योगपति अनिल अंबानी को राहत देते हुए केनरा बैंक ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया कि उसने रिलायंस कम्युनिकेशंस से संबंधित उनके लोन अकाउंट को "धोखाधड़ी वाला खाता" घोषित करने वाला अपना आदेश 'वापस' ले लिया।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने इस बयान को स्वीकार कर लिया और अंबानी द्वारा उक्त आदेश की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया।10 जुलाई को पारित अपने आदेश में जजों ने दर्ज किया,"अपराह्न 2:00 बजे बारी से पहले उल्लेख किया गया। केनरा बैंक के...
[Recruitment Scam] कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'दागी उम्मीदवारों' को नए सिरे से आवेदन करने से रोकने का आदेश बरकरार रखा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एकल पीठ का आदेश बरकरार रखा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौकरी से निकाले गए दागी उम्मीदवारों को नई भर्ती प्रक्रिया के लिए दोबारा आवेदन करने से रोक दिया गया।जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस स्मिता दास डे की खंडपीठ ने पहले पूछा कि क्या राज्य का स्कूल सेवा आयोग उन उम्मीदवारों का पक्ष रख सकता है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दागी पाया। इस अवसर पर न्यायालय ने दागी उम्मीदवारों को नए सिरे से आवेदन करने की अनुमति देने की राज्य की अपील खारिज कर दिया।एकल पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट की एक खंडपीठ...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिना रजिस्ट्रेशन के संचालन न करने का वचन देने पर 4 मदरसों की सील खोलने का आदेश दिया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को 4 मदरसों की सील खोलने का निर्देश दिया, जिनमें से एक देहरादून और तीन हरिद्वार में स्थित हैं। ये मदरसे इस साल मार्च में राज्य सरकार द्वारा सील किए गए 135 से ज़्यादा मदरसों में शामिल हैं।सरकार की यह कार्रवाई इस आरोप पर आधारित थी कि ये मदरसे 'अवैध' रूप से कथित तौर पर बिना किसी संबद्धता और मदरसा बोर्ड के मानदंडों को पूरा किए, चल रहे थे।जस्टिस रवींद्र मैथानी की पीठ ने मदरसों की सील खोलने का आदेश इस शर्त पर पारित किया कि मदरसे राज्य सरकार से उचित मान्यता के बिना अपने...
रीति-रिवाजों, सहवास और बच्चे के जन्म द्वारा समर्थित विवाह को CrPC की धारा 125 के प्रयोजनों के लिए वैध विवाह माना जाना चाहिए: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि जब कोई विवाह रीति-रिवाजों, सहवास, सामाजिक स्वीकृति और बच्चों के जन्म द्वारा मान्य हो, तो उसे धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण की मांग के लिए कानूनी रूप से वैध माना जाना चाहिए। जस्टिस बिबेक चौधरी की पीठ ने कहा कि इस तरह के विवाह की अवहेलना न केवल कानूनी रूप से अस्वीकार्य होगी, बल्कि समाज में एक प्रतिगामी संदेश भी भेजेगी, जिससे महिलाओं की गरिमा और ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चों की सुरक्षा को ठेस पहुंचेगी।एकल न्यायाधीश ने आगे कहा कि एक महिला, जो पत्नी के रूप में रह रही...
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9-10: दांपत्य अधिकारों की बहाली और Judicial Separation
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) केवल विवाह के नियमों को ही परिभाषित नहीं करता, बल्कि यह उन स्थितियों से निपटने के लिए भी कानूनी प्रावधान (Legal Provisions) प्रदान करता है जब वैवाहिक संबंध (Marital Relationship) में तनाव आ जाता है।धारा 9 (Section 9) का उद्देश्य पति-पत्नी के बीच सहवास (Cohabitation) को बहाल करना है, जबकि धारा 10 (Section 10) तलाक (Divorce) के एक विकल्प के रूप में न्यायिक पृथक्करण (Judicial Separation) की अवधारणा (Concept) प्रस्तुत करती है, जिससे पति-पत्नी...
फर्टिलिटी सेंटर की धोखाधड़ी | व्यक्ति ने कहा-IVF के जरिए पैदा बच्चा उसका नहीं; गुजरात हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार (9 जुलाई) को पुलिस को एक फर्टिलिटी अस्पताल पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाने वाले एक व्यक्ति की शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया। व्यक्ति ने दावा किया था कि डीएनए परीक्षण से पता चला है कि वह आईवीएफ प्रक्रिया से उसके और उसकी पत्नी के बच्चे का जैविक पिता नहीं है। याचिका में फर्टिलिटी अस्पताल के खिलाफ "धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी" का आरोप लगाया गया है।पक्षों की सुनवाई के बाद, जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने अपने आदेश में कहा, "यह याचिका याचिकाकर्ता द्वारा...
Indian Partnership Act, 1932 की धारा 45-47: फर्म के विघटन के बाद की देनदारियां और अधिकार
विघटन के बाद भागीदारों के कार्यों के लिए देनदारी (Liability for Acts of Partners Done After Dissolution)भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (Indian Partnership Act, 1932) की धारा 45 (Section 45) इस बात को स्पष्ट करती है कि फर्म के विघटन (Dissolution of a Firm) के बाद भी भागीदारों की तीसरे पक्षों के प्रति देनदारी (Liability to Third Parties) कैसे बनी रहती है: 1. सार्वजनिक सूचना तक देनदारी का जारी रहना (Continued Liability Until Public Notice): किसी फर्म के विघटन के बावजूद, भागीदार तीसरे पक्षों के...
क्या हर आपराधिक साजिश को PMLA के तहत अनुसूचित अपराध माना जा सकता है?
पावना डिब्बूर बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2023) में सुप्रीम कोर्ट ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) की व्याख्या करते हुए यह तय किया कि क्या केवल आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाया जा सकता है, जब मूल अपराध (Predicate Offence) PMLA की अनुसूची (Schedule) में शामिल न हो।यह फैसला स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति को केवल IPC की धारा 120-B (Criminal Conspiracy) के तहत अभियोजन (Prosecution) नहीं किया जा सकता, जब तक कि जिस अपराध...
Sales of Goods Act, 1930 की धारा 55-58: अनुबंध के उल्लंघन के लिए वाद
माल विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act), 1930 का अध्याय VI अनुबंध के उल्लंघन (Breach of Contract) के लिए उपलब्ध विभिन्न उपायों (Remedies) से संबंधित है। यह उन स्थितियों को स्पष्ट करता है जहाँ या तो विक्रेता (Seller) या खरीदार (Buyer) अपने अनुबंध संबंधी दायित्वों (Contractual Obligations) को पूरा करने में विफल रहता है, और पीड़ित पक्ष (Aggrieved Party) क्या कानूनी कार्रवाई कर सकता है।कीमत के लिए वाद (Suit for Price) धारा 55 उन परिस्थितियों को बताती है जिनमें एक विक्रेता खरीदार पर कीमत वसूलने के...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग में लंबित RTI अपीलों के समयबद्ध निपटारे की याचिका पर नोटिस जारी किया
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), नई दिल्ली के समक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI Act) के तहत दायर द्वितीय अपीलों के समयबद्ध निपटारे की मांग की गई, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित मामलों में।यह याचिका जुनैद जाविद 28 वर्षीय RTI और सोशल एक्टिविस्ट द्वारा दायर की गई, जो बारामुला के निवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ी दूसरी अपीलों को सूचीबद्ध करने और उन पर सुनवाई में व्यवस्थित देरी हो...
जेल अधिकारियों को सभी पैरोल याचिकाओं पर 4 महीने के भीतर फैसला करना होगा, देरी होने पर दोषी अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं: पीएंड एच हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जेल प्राधिकारियों द्वारा सभी पैरोल आवेदनों पर चार महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए और यदि इस निर्देश का उल्लंघन किया जाता है, तो दोषी संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। न्यायालय ने उन दोषियों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला जो अपने पैरोल आवेदनों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में भी उन्हें अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ रहा है। न्यायालय ने ऐसे अनुरोधों पर "शीघ्रता से"...
बंगाली फैमिली को बांग्लादेशी बताकर निर्वासित करने के मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल प्रवासी परिवार को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और बाद में उन्हें बांग्लादेश निर्वासित किए जाने के मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतोब्रतो कुमार मित्रा की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,"कल हमारे पास भी ऐसा ही एक मामला आया था, जिसमें हमने कहा था कि नियम जारी करने से पहले हम राज्य से जवाब मांग सकते हैं, इसलिए हम इस मामले में भी ऐसा ही करेंगे।"हालांकि, वकील ने बताया कि जिस मामले का अदालत ज़िक्र कर रही थी, वह ओडिशा में हिरासत में लिए...
शादी से निराश पति, आत्महत्या के लिए उकसाने का सबूत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने आत्महत्या के मामले में पत्नी को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में पत्नी और उसके परिवार के सदस्यों को सबूतों के अभाव में बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि ऐसा मामला हो सकता है, जहां पति अपनी शादी से नाखुश और निराश था लेकिन पत्नी और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई आरोप नहीं बनता, क्योंकि न तो सुसाइड नोट से और न ही मृतक के माता-पिता की गवाही से कोई आरोप बनता है।न्यायालय ने कहा,"केवल यही आरोप लगाया जा रहा है कि पत्नी मृतक को धमकी देती थी कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों...
हाईकोर्ट ने UP PCS(J) Exam प्रक्रिया में सुधार का सुझाव देने वाली जस्टिस माथुर आयोग की रिपोर्ट पर पक्षकारों से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जस्टिस गोविंद माथुर (हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस) की अध्यक्षता वाले सदस्यीय आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें उत्तर प्रदेश पीसीएस (जे) प्रतियोगी परीक्षाओं (UP PCS(J) Exam) के संचालन में तत्काल सुधार और प्रक्रियात्मक संशोधनों की सिफारिश की गई।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने दर्ज किया कि प्रारंभिक रिपोर्ट (भाग-I) 14 सेटों में प्रस्तुत की गई। इसके साथ संलग्न एक कवर लेटर में निर्दिष्ट किया गया कि...








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