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दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'द ताज स्टोरी' को CBFC प्रमाणपत्र देने के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्म “द ताज स्टोरी” को दिए गए सर्टिफिकेट के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। यह फिल्म 31 अक्टूबर को रिलीज़ होने वाली है।वकील शकील अब्बास द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और यह साम्प्रदायिक प्रचार फैलाती है। उन्होंने बताया कि फिल्म का ट्रेलर 16 अक्टूबर को जारी हुआ था और उन्हें इसकी जानकारी 22 अक्टूबर को मिली। चीफ़ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला...
AIBE XX के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तक बढ़ाई गई
भारतीय बार काउंसिल (BCI) ने ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE XX) के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2025 कर दिया है।उम्मीदवार 1 नवंबर तक ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं, जो पंजीकरण फॉर्म में सुधार करने की अंतिम तिथि भी होगी। एडमिट कार्ड 15 नवंबर को जारी किए जाएंगे, और AIBE XX परीक्षा 30 नवंबर 2025 को आयोजित की जाएगी। अंतिम वर्ष के विधि छात्र और वे विधि स्नातक जिन्हें अभी तक अपनी डिग्री प्राप्त नहीं हुई है, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं। ऐसे उम्मीदवारों को पंजीकरण पोर्टल पर उपलब्ध घोषणापत्र...
आपराधिक मुकदमों में आरोप तय करने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, देशभर में दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आपराधिक मुकदमों में आरोप तय करने में हो रही अत्यधिक देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह देरी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 251(b) के तहत दिए गए स्पष्ट प्रावधान के बावजूद हो रही है, जिसके अनुसार जिन मामलों की सुनवाई केवल सत्र न्यायालय द्वारा की जानी है, उनमें पहली सुनवाई से 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाने चाहिए।न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोप तय करने में देरी आपराधिक कार्यवाहियों के ठहराव का प्रमुख कारण है। इसलिए, यह “संपूर्ण देश में एक समान...
फ्लाईओवर पर जातिसूचक गाली देना 'सार्वजनिक दृष्टि' के दायरे में आता, भले गवाह न हों: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है कि किसी महिला पर हमला करना और फ्लाईओवर पर उसके खिलाफ जातिगत टिप्पणी करना “सार्वजनिक दृष्टि” (public view) के अंतर्गत आता है, जिससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध बनता है।जस्टिस रविंदर दुडेजा ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की और कहा कि इस मामले में prima facie (प्रथम दृष्टया) अपराध के सभी आवश्यक तत्व पूरे होते हैं। अदालत ने कहा,“कथित घटना सड़क पर, एक फ्लाईओवर पर हुई थी, जिसे कोई भी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने अमेरिका स्थित गवाह की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दर्ज करने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने कारोबारी अभिषेक वर्मा से जुड़े ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (Official Secrets Act) मामले में अमेरिका स्थित एक गवाह की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज करने की अनुमति दे दी है।जस्टिस संजयव नरूला ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की यह आशंका कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गुप्त जानकारी लीक हो सकती है, इसे रोकथाम और सुरक्षा उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है — पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर नहीं। यह मामला CBI द्वारा 2012 में दर्ज किया गया था, जिसमें Official Secrets Act, 1923 की धारा 3 और IPC...
सुवेंदु अधिकारी को बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने 15 FIR रद्द कीं, नए मामले दर्ज करने पर लगी रोक हटाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने BJP नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ दर्ज 15 FIRs रद्द की।कोर्ट ने इसके साथ ही दिसंबर 2022 के उस अंतरिम आदेश को भी हटा दिया, जिसमें कोर्ट की अनुमति के बिना अधिकारी के खिलाफ नए मामले दर्ज करने पर रोक लगाई गई थी।यह फैसला पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से कुछ ही महीने पहले आया है।जस्टिस जय सेनगुप्ता ने 169 पन्नों के विस्तृत आदेश में ये निर्देश पारित किए। कोर्ट ने पाया कि इन FIR में या तो अधिकारी के खिलाफ कोई विशिष्ट...
“साली” शब्द अभद्र गाली है, लेकिन जानबूझकर अपमान नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 504 IPC की सजा रद्द की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ “साली” शब्द का इस्तेमाल, भले ही वह अभद्र गाली हो, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504 के तहत “जानबूझकर अपमान” नहीं माना जा सकता — जब तक कि वह व्यक्ति को शांति भंग करने के लिए उकसाए या ऐसी संभावना उत्पन्न करे।जस्टिस राकेश कंठला ने टिप्पणी की — “वर्तमान मामले में 'साली' शब्द का प्रयोग अभद्र गाली के रूप में किया गया है। लेकिन पीड़िता या सूचनाकर्ता ने यह नहीं कहा कि इस शब्द या इन गालियों ने उसे शांति भंग करने के लिए उकसाया।” कोर्ट ने कहा, “धारा 504 का...
ऊर्जा मंत्री को सस्पेंड करने का अधिकार नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में टिप्पणी की है कि हरियाणा के ऊर्जा मंत्री को जिले की शिकायत निवारण समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए भी उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVN) के किसी अधिकारी को निलंबित करने का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने कहा कि राज्य के मनमाने कदम से जनता का विश्वास कम होता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि UHBVN के कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई केवल निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा ही की जा...
अगर प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद हों तो हथियार की बरामदगी जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की सजा बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को दोहरे हत्याकांड मामले में चार दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए 2011 से लंबित आपराधिक अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि भले ही एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई हो और हथियार बरामद न हुए हों, लेकिन अभियोजन पक्ष का मामला प्रत्यक्षदर्शियों की सुसंगत गवाही और मेडिकल साक्ष्य पर आधारित है, जिससे साबित होता है कि आरोपियों ने जानबूझकर और इरादतन शिकायतकर्ता पक्ष पर घातक हथियारों से हमला किया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने Nankaunoo बनाम उत्तर प्रदेश...
JJ Act अन्य सभी कानूनों से ऊपर: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यह स्थापित किया कि कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे से जुड़े मामलों में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 (JJ Act) देश के अन्य सभी कानूनों पर अधिभावी प्रभाव रखता है।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का विश्लेषण करने के बाद कहा,"अधिनियम, 2015 कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे से संबंधित सभी मामलों में विशेष रूप से गिरफ्तारी, कस्टडी, अभियोजन या कारावास के मामलों में उस...
बैंकों को मानहानि के लिए आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि बैंकों को मानहानि के लिए आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनमें अपराध के गठन के लिए आवश्यक आपराधिक मनःस्थिति या दुर्भावना की कमी होती है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंकों द्वारा किसी कंपनी को धोखाधड़ी घोषित करने का कार्य जो उन्होंने अपने बैंकिंग गतिविधियों के निर्वहन और सद्भाव में किया, वह मानहानि नहीं माना जा सकता है।कोर्ट चार बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं के बैच पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल...
अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए वकील को मना करने पर दलीलें रोकना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि एक बार जब बेंच अपना मन बता दे और वकील से आगे की दलीलें न देने का अनुरोध करे तो उस निर्देश का सम्मान किया जाना चाहिए।कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि इसके बाद लगातार जोर देना किसी उद्देश्य को पूरा नहीं करता और यह अदालती कार्यवाही की गरिमा को प्रभावित करता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 28 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा,"एक बार जब कोर्ट अपना मन बता देता है और वकील से आगे की दलीलें देने से परहेज करने का अनुरोध करता है तो इसका...
अगर जूनियर जज केसों की सुनवाई छोड़ जिला जज परीक्षा पर ध्यान देंगे तो निचली न्यायपालिका संकट में पड़ जाएगी: सुप्रीम कोर्ट
उच्च न्यायिक सेवा में वरिष्ठता और पदोन्नति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में सुनवाई शुरूसुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मंगलवार को उच्च न्यायिक सेवा (Higher Judicial Service) में आपसी वरिष्ठता (inter-se seniority) और जिला जज पदों में पदोन्नति कोटा से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई शुरू की। यह मामला उन निचली अदालत के न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़ा है, जो सिविल जज (जूनियर डिवीजन) या न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में सेवा शुरू करते हैं और बाद में पदोन्नति के सीमित अवसरों के कारण कैरियर में...
2013 संशोधन से पहले के मामलों में बलात्कार दोषसिद्धि के लिए पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से कम साबित करना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि 2013 के आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम लागू होने से पहले दर्ज हुए बलात्कार के मामलों में, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना आवश्यक है कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से कम थी, तभी आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक व्यक्ति को बरी किया, जिसे वर्ष 2005 में 11 वर्षीय बच्ची के बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि अपराध 2005 में हुआ था, जब भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत सहमति की आयु 16...
उम्र निर्धारण की जांच के दौरान भी नाबालिग को जेल में नहीं रखा जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act), 2015 के तहत कोई भी आरोपी जो यह दावा करता है कि अपराध के समय वह नाबालिग था, उसे उम्र निर्धारण की जांच के दौरान भी जेल या पुलिस लॉकअप में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस संदीप जैन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि — “कानून के साथ संघर्ष में बालक (child in conflict with law) को 21 वर्ष की आयु तक जेल में नहीं रखा जा सकता, जब तक कि वह गंभीर अपराध में दोषी न हो और बोर्ड व बाल न्यायालय यह न तय करें कि उसका ट्रायल वयस्क के रूप में...
सिविल सर्विस ट्रिब्यूनल में वकीलों-पक्षकारों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा मिलेगी: राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल में वकीलों और वादकारियों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और हर कार्य दिवस पर कम से कम एक पीठ कार्यरत रहेगी।याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि ट्रिब्यूनल में पीठें उपलब्ध नहीं रहतीं, सुनवाई रद्द हो जाती है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद वीसी सुविधा नहीं है। कर्मचारी विभाग की सचिव ने जस्टिस अशोक कुमार जैन को बताया कि— • 27 अक्टूबर 2025 से हर पीठ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू होगी, ...
NALSA के निःशुल्क कानूनी सहायता कार्यक्रम के तहत दोषी की सहमति के बिना याचिका दायर करना प्रक्रिया का दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के एक दोषी द्वारा 2,298 दिनों की देरी से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की। न्यायालय ने कहा कि याचिका केवल कानूनी सहायता कार्यक्रम के तहत दोषी की सहमति के बिना दायर की गई और ऐसा करना प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ कमलजीत कौर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें 2018 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था। यह याचिका हाईकोर्ट के फैसले के लगभग सात साल बाद कानूनी सहायता के माध्यम से दायर की...
MBBS Stipend | सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों को स्टाइपेंड डिटेल्स का खुलासा करने के निर्देश का पालन न करने पर NMC को फटकार लगाई, कहा- 'नींद से जागो'
मेडिकल स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड न दिए जाने से संबंधित कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (NMC) की जुलाई में जारी अपने ही निर्देश का पालन न करने पर कड़ी आलोचना की, जिसमें सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को सात दिनों के भीतर स्टाइपेंड डिटेल अनिवार्य रूप से प्रकट करने का निर्देश दिया गया।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने NMC को दो सप्ताह के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि उम्मीद है कि NMC "नींद" से जागेगा और अपने ही...
अंतरिम आवेदन दाखिल करने से पहले उन्हें प्रतिपक्षी पक्ष को अवश्य तामील किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को याद दिलाया
एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों को रिकॉर्ड में दर्ज करने से पहले प्रतिपक्षी पक्ष को न दिए जाने की प्रथा और ऐसे मामलों में न्यायालय रजिस्ट्री द्वारा उनकी जांच न किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। यह टिप्पणी एक चल रहे मामले में दायर अंतरिम आवेदन के संबंध में आई, जिसे रजिस्ट्री ने दूसरे पक्ष को पूर्व सूचना दिए बिना स्वीकार कर लिया था।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT)...
परेश रावल की 'द ताज स्टोरी' फ़िल्म पर संकट: हाईकोर्ट में CBFC सर्टिफिकेशन को चुनौती
ताजमहल के इतिहास पर आधारित आगामी फिल्म 'द ताज स्टोरी' की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 31 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही इस फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा दिए गए प्रमाणन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई।वकील शकील अब्बास द्वारा दायर इस याचिका में फिल्म पर ऐतिहासिक तथ्यों को गढ़ने और सांप्रदायिक दुष्प्रचार फैलाने का गंभीर आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस फिल्म में देश के विभिन्न समुदायों के बीच सांप्रदायिक अशांति फैलाने की क्षमता...



















