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Delhi Riots: हाईकोर्ट ने UAPA के तहत व्यापक षड्यंत्र मामले में तस्लीम अहमद को ज़मानत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को UAPA मामले में आरोपी तस्लीम अहमद की ज़मानत याचिका खारिज की, जिसमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में व्यापक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाया।तस्लीम अहमद को 19 जून, 2020 को गिरफ्तार किया गया था।जजों ने पहले दिल्ली पुलिस से पूछा कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को पांच साल हो चुके हैं, ऐसे में किसी आरोपी को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है।अहमद की ओर से एडवोकेट महमूद प्राचा और...
Breaking | दिल्ली दंगे: हाईकोर्ट ने उमर खालिद, शरजील इमाम और 7 अन्य को ज़मानत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की "बड़ी साज़िश" मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और सात अन्य आरोपियों की ज़मानत याचिकाएं खारिज कीं।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैलिंदर कौर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।अन्य आरोपियों में अतहर खान, खालिद सैफी, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद शामिल हैं।आरोपी का नाम: गिरफ्तारी की तारीखशरजील इमाम: 28 जनवरी, 2020 उमर खालिद: 13 सितंबर, 2020 अतहर खान: 29 जून, 2020 खालिद सैफी: 26 फरवरी, 2020 मोहम्मद सलीम खान 24 जून,...
स्थानीय पुलिस स्टेशन भी साइबर अपराधों की जांच कर सकते हैं, सीआईडी-सीबी के पास विशेष अधिकार क्षेत्र नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अपराध जांच विभाग, अपराध शाखा (साइबर अपराध) ('सीआईडी-सीबी') साइबर/आईटी से संबंधित अपराधों की जांच करने के लिए अधिकृत एकमात्र जांच निकाय नहीं है, बल्कि स्थानीय पुलिस स्टेशन भी ऐसे अपराधों की जांच कर सकते हैं, बशर्ते कि जांच अधिकारी (आईओ) 'इंस्पेक्टर' के पद से नीचे का न हो। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ('आईटी अधिनियम') की धारा 78, जिसके अनुसार निरीक्षक के पद से नीचे का कोई पुलिस अधिकारी अधिनियम के तहत किसी भी अपराध की जांच नहीं...
आरोपी का 'फरार' होना पर्याप्त नहीं कि बिना तात्कालिकता साबित किए समन के चरण में गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने दोहराया कि किसी अभियुक्त के विरुद्ध समन जारी होने के समय केवल इसलिए गैर-जमानती वारंट जारी नहीं किया जा सकता क्योंकि उसे तत्काल आवश्यकता दर्शाए बिना 'फरार' घोषित कर दिया गया है। सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई (2022) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए, जस्टिस एन. तुकारामजी ने अपने आदेश में आगे कहा कि आरोपी याचिकाकर्ताओं को बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत उपस्थिति का कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था और आदेश दिया,“रिकॉर्ड में न तो कोई सामग्री है और न ही...
मराठा आरक्षण आंदोलन: हाईकोर्ट की प्रदर्शनकारियों को चेतावनी- 3 बजे तक खाली करो आज़ाद मैदान, वरना होगी कार्यवाही
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (2 सितंबर) को मराठा नेता मनोज जरांगे को मुंबई के आज़ाद मैदान में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर "आमरण अनशन" जारी रखने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने शहर में एक लाख लोगों के पहुंचने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों पर भी सवाल उठाए।एक्टिंग चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ ने जरांगे और सभी प्रदर्शनकारियों को "आज दोपहर 3 बजे" से पहले धरना स्थल खाली करने को कहा, अन्यथा उन पर कठोर जुर्माना लगाने, अदालत की अवमानना की कार्यवाही...
पंजाब बाढ़: राहत के लिए दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट बोला- आदेश देंगे तो सरकार जवाब देने में उलझ जाएगी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराने संबंधी जनहित याचिका पर फिलहाल कोई आदेश पारित करने से इनकार किया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस यशवीर सिंह राठौर की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“जैसे ही हम कोई आदेश देंगे, सरकार की ऊर्जा मदद करने से हटकर जवाब दाखिल करने में लग जाएगी। अधिकारी राहत कार्य छोड़कर अदालत में फाइल तैयार करने बैठ जाएंगे।”खंडपीठ ने यह भी कहा कि याचिका में पर्याप्त तथ्यों का अभाव है। याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह बेहतर विवरण...
हिटलर से इंदिरा गांधी की तुलना मामले में BJP नेता को राहत, गिरफ्तारी पर रोक बरकरार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) कर्नाटक के 'एक्स' (पूर्व ट्विटर) हैंडल के प्रभारी को दी गई गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा को आगे बढ़ा दिया। यह मामला उस विवादित पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तुलना एडॉल्फ हिटलर से की गई थी।जस्टिस सचिन शंकर मागडुम की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।याचिकाकर्ताओं ने उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की। यह FIR भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 353 और 192 के तहत दर्ज की गई। हालांकि, विवादित पोस्ट को...
मामले के निपटारे के बाद दायर आवेदन में निपटान शर्तों को संशोधित करने का DRT के पास कोई अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) को सहमति वसूली प्रमाण पत्र के आधार पर मामले के निपटारे के बाद दायर आवेदन के संबंध में एकमुश्त निपटान (ओटीएस)/निपटान के नियमों और शर्तों को फिर से लिखने/संशोधित करने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ डीआरटी के उस आदेश के विरुद्ध एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें प्रतिवादी द्वारा राशि चुकाने के लिए और समय मांगने हेतु दायर आवेदन को स्वीकार कर लिया गया था, जबकि SRFAESI अधिनियम के तहत मामले का निपटारा डीआरटी द्वारा...
नए ऑनलाइन गेमिंग कानून के तहत प्राधिकरण गठन और नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी : केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया
केंद्र सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि हाल ही में पारित ऑनलाइन गेमिंग (प्रोत्साहन एवं विनियमन) अधिनियम 2025 के तहत प्राधिकरण के गठन और आवश्यक नियम-कायदों के निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ के समक्ष यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 1(3) के अंतर्गत अधिसूचना जारी होने के बाद प्राधिकरण का गठन और नियमावली तैयार की जाएगी।मामला बघीरा कैरम (ओपीसी) प्रा. लि. की...
क्या कोई खुद को राइफल से सीने पर गोली मार सकता है? : सुप्रीम कोर्ट ने एमपी पुलिस से पूछा, संदिग्ध आत्महत्या मामले में जांच पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश पुलिस से सवाल किया कि क्या वास्तव में कोई व्यक्ति राइफल से अपने ही सीने पर गोली चला सकता है? अदालत ने कहा कि यह पहलू गहन जांच की मांग करता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया कि क्या जांच एजेंसी ने हत्या की संभावना सहित सभी पहलुओं की जांच की है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा,"हमारी समझ से यह जांचने की आवश्यकता है कि क्या कोई व्यक्ति राइफल का इस्तेमाल कर अपने सीने पर गोली चला सकता है।"मामला भोपाल...
'वास्तविक दोषी का बरी होना सिस्टम पर दाग़: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 सितंबर) को 'संदेह से परे' के सिद्धांत का ढीला-ढाला इस्तेमाल करके बरी करने के खिलाफ चेतावनी दी। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सबूतों में मामूली विरोधाभासों को बरी करने के लिए संदेह के स्तर तक नहीं बढ़ाया जा सकता।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अभियुक्तों को बरी करने के लिए 'संदेह से परे सबूत' के सिद्धांत का इस्तेमाल हर उस मामले में नहीं किया जाना चाहिए, जहां अभियोजन पक्ष के मामले में मामूली विसंगतियां, विरोधाभास और कमियां हों; अन्यथा इस सिद्धांत के गलत इस्तेमाल के...
विधेयक/नियमों का अंग्रेज़ी वर्ज़न ही मान्य, हिंदी अनुवाद नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी विधेयक आदेश या सेवा नियमावली के अंग्रेज़ी संस्करण को ही अधिकृत और प्रभावी माना जाएगा, न कि उसके हिंदी अनुवाद को।जस्टिस मनीष माथुर ने यह निर्णय यूपी औद्योगिक शिक्षण संस्थान (अनुदेशक) सेवा नियमावली, 2014 से जुड़े मामले की सुनवाई में दिया। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 348(3), सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और इलाहाबाद हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले (रामरती बनाम ग्राम समाज जेहवा) के अनुसार अंग्रेज़ी संस्करण को प्राथमिकता दी जाएगी।याचिकाकर्ता माया शुक्ला...
महाकालेश्वर मंदिर में 'VIP' प्रवेश को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका खारिज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में केवल वीआईपी व्यक्तियों को ही गर्भगृह में प्रवेश कर जल अर्पित करने की अनुमति दी जाती है और आम भक्तों को इस अधिकार से वंचित रखा जाता है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि न तो किसी अधिनियम या नियम में और न ही मंदिर प्रबंधन समिति के प्रोटोकॉल में 'वीआईपी' की परिभाषा दी गई। समिति की बैठक के कार्यवृत्त से स्पष्ट है कि गर्भगृह में प्रवेश पर कोई स्थायी निषेध...
NGT अपने न्यायिक कार्यों को एक्सपर्ट कमेटी को आउटसोर्स नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 सितंबर) को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपनी ज़िम्मेदारियां बाहरी समितियों को सौंपकर सिर्फ़ रबर स्टैंप की तरह काम कर रहा है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता कंपनी अनुपचारित अपशिष्टों का निर्वहन करके जल निकायों को प्रदूषित कर रही है। NGT ने CPCB, UPPCB और ज़िला मजिस्ट्रेट की संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करते हुए अपशिष्टों के अवैध निपटान, निर्वहन में...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में दायर याचिका का पता चलने पर जनहित याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया, क्योंकि यह पता चला कि याचिकाकर्ता धोखाधड़ी के एक मामले में भगोड़ा है।यह जनहित याचिका पंजाब सरकार द्वारा 144 टोयोटा हिलक्स वाहनों की खरीद की CBI जांच की मांग करते हुए दायर की गई, जिसमें सरकारी धन के गबन और संबंधित अधिकारी के निजी लाभ के लिए अवैध तरीकों से धन अर्जित करने का आरोप लगाया गया।सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी कि जनहित याचिका नियम, 2010 (नियम) के...
केंद्र सरकार को दावा करने की बजाय सैनिकों को सक्रिय रूप से पेंशन देनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को सैनिकों से दावा करने की अपेक्षा करने के बजाय युद्ध क्षति पेंशन प्रदान करने में सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।न्यायालय ने केंद्र सरकार के इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि दावा 48 वर्षों की देरी के बाद किया गया।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा,"चूंकि यह स्वीकृत तथ्य है कि प्रतिवादी नंबर 1 (सैनिक) को वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध में भाग लेते समय चोट लगी थी, जिसकी पुष्टि मेडिकल बोर्ड ने भी की है। उक्त...
दिव्यांगता पेंशन PCDA(P) मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों को रद्द नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक PCDA (पेंशन) को विधिवत गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा निर्धारित दिव्यांगता प्रतिशत को बदलने या कम करने का कोई अधिकार नहीं है। केवल उच्च/समीक्षा मेडिकल बोर्ड ही इसका पुनर्मूल्यांकन कर सकता है। दिव्यांगता पेंशन को पूर्णांकित करने का लाभ सामान्य रिटायरमेंट के उन मामलों में भी लागू होता है, जहां दिव्यांगता सैन्य सेवा के कारण हुई हो या उसके कारण बढ़ी हो।पृष्ठभूमि तथ्यप्रतिवादी 18.02.1976 को...
2012 IPL में श्रीसंत की चोट के लिए 'राजस्थान रॉयल्स' को 82 लाख रुपये का भुगतान करने के NCDRC के आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
2012 के IPL क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए 'राजस्थान रॉयल्स' के मालिक का बीमा करने वाली बीमा कंपनी ने NCDRC के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें उसे एस. श्रीसंत की उस समय लगी चोट के कारण फ्रैंचाइज़ी मालिक को 82 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया, जिसके कारण वह टूर्नामेंट में खेलने में असमर्थ हो गए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कल मामले की सुनवाई स्थगित कर दी ताकि अपीलकर्ता अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल कर सके, जिसमें प्रतिवादी द्वारा बीमा...
सेल एग्रीमेंट सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी से संपत्ति का स्वामित्व नहीं मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
सुप्रीम कोर्ट ने पुनः पुष्टि की कि रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के बिना अचल संपत्ति का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय रद्द कर दिया, जिसमें निचली अदालत के उस आदेश की पुष्टि की गई। इसमें वादी के पक्ष में हस्तांतरण को मान्य करने वाला कोई रजिस्टर्ड विक्रय पत्र निष्पादित न होने के बावजूद, वाद में कब्ज़ा, अनिवार्य निषेधाज्ञा और घोषणा का आदेश दिया गया।वादी-प्रतिवादी ने दावा किया कि उसने 1996 में अपने पिता से विक्रय...
NDPS Act: क्या नशे की मात्रा मिश्रण के कुल वज़न से तय होगी? सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने आज (1 सितंबर) हीरा सिंह बनाम भारत संघ में अपने 2020 के फैसले की शुद्धता को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका में नोटिस जारी किया, जिसने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 ("एनडीपीएस एक्ट") के तहत जारी केंद्र सरकार की अधिसूचना दिनांक 18.11.2009 को बरकरार रखा, जो कहता है कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत छोटे, मध्यवर्ती और वाणिज्यिक क्वाटीज जब्त किए गए मिश्रण के कुल वजन के संदर्भ में निर्धारित किए जाएंगे। मिश्रण के भीतर अपमानजनक दवा के मूल्य वजन के बजाय।2009 की अधिसूचना...




















