ताज़ा खबरे
Presidential Reference | 'राज्यपाल को विधेयकों पर कार्रवाई करते समय कोई विवेकाधिकार नहीं': सिब्बल और सिंघवी के तर्क से असहमत
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि राष्ट्रपति के संदर्भ का विरोध करने वालों द्वारा दिए गए तर्क अनुच्छेद 200 को पढ़ने के उनके विभिन्न दृष्टिकोणों के संदर्भ में, स्वयं-विरोधाभासी हैं।जस्टिस विक्रम नाथ ने यह बात सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (पश्चिम बंगाल राज्य की ओर से) द्वारा दिए गए तर्क के संदर्भ में कही कि राज्यपाल केवल एक डाकघर नहीं हैं। अनुच्छेद 200 में निहित साक्ष्य हैं, जो दर्शाते हैं कि वह राष्ट्रपति के पुनर्विचार के लिए विधेयक भेजने में स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। इसके बाद...
ED समन के खिलाफ सीनियर एडवोकेट को राहत, हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार (1 सितंबर) को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन पर एडवोकेट अनिल गौड़ा को अंतरिम राहत दी। अदालत ने ED को निर्देश दिया कि जब तक अंतरिम राहत पर आदेश पारित नहीं हो जाते, तब तक एडवोकेट के खिलाफ कोई जबरन या जल्दबाजी में कार्रवाई न की जाए।जस्टिस सचिन शंकर मागदुम ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गई हैं और रिकॉर्ड में मौजूद आपत्तियों व दस्तावेजों का गहन अध्ययन आवश्यक है।अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मुख्य मुद्दा क्या ED वकीलों...
हरियाणा ADA भर्ती: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, कानून विषय हटाकर सामान्य ज्ञान आधारित सिलेबस पर सवाल
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ADA) भर्ती परीक्षा के सिलेबस में किए गए बदलाव को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) और अन्य प्राधिकारियों को नोटिस जारी किया।जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने लखन सिंह बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा एंड अन्य मामले में सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा।याचिकाकर्ता लॉ ग्रेजुएट हैं। उसने दलील दी कि ADA स्क्रीनिंग टेस्ट का सिलेबस अचानक कानून विषयों से हटाकर सामान्य ज्ञान आधारित कर दिया गया, जो कि मनमाना और...
दिल्ली दंगों की साजिश का मामला | मुकदमे में देरी के लिए दिल्ली पुलिस नहीं, आरोपी ज़िम्मेदार: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में विभिन्न समय पर मुकदमे में देरी के लिए आरोपी स्वयं ज़िम्मेदार हैं, न कि दिल्ली पुलिस या निचली अदालत।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा कि ज़मानत पर रिहा आरोपी आसिफ इकबाल तन्हा, देवांगना कलिता और नताशा नरवाल - "जेल में बंद आरोपियों की कीमत पर" आरोपों पर बहस में देरी कर रहे हैं।अदालत ने कहा,"निस्संदेह, त्वरित सुनवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न अंग और एक पहलू है। हालांकि,...
Arbitration | मामले से असंबद्ध सरकारी अधिकारी को पंचाट की सुपुर्दगी राज्य को वैध सेवा नहीं मानी जाएगी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब सरकार या उसका कोई विभाग मध्यस्थता में पक्षकार हो तो किसी ऐसे अधिकारी को पंचाट की सुपुर्दगी, जो कार्यवाही से जुड़ा या उससे अवगत नहीं है, पंचाट को चुनौती देने की समय सीमा शुरू करने के लिए वैध सेवा नहीं मानी जा सकती।भारत संघ बनाम टेक्को त्रिची इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स (2005) के अपने फैसले का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि पंचाट की प्रति "कार्यवाही के पक्षकार" को दी जानी चाहिए। यदि सरकार कार्यवाही का हिस्सा है तो पंचाट की प्रति ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए,...
Company Law | NCLT उत्पीड़न और कुप्रबंधन के मामलों में धोखाधड़ी के आरोपों और दस्तावेजों की वैधता की जांच कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (2 सितंबर) को कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) को उत्पीड़न और कुप्रबंधन के मामलों में धोखाधड़ी के आरोपों और दस्तावेजों की वैधता की जांच करने का अधिकार है।न्यायालय ने कहा कि जब "किसी कंपनी में बहुसंख्यक शेयर रखने वाले किसी सदस्य को कंपनी के किसी कार्य या उसके निदेशक मंडल द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से कंपनी में अल्पसंख्यक शेयरधारक के पद पर गिरा दिया जाता है तो उक्त कार्य को सामान्यतः उक्त सदस्य के विरुद्ध उत्पीड़न माना जाना चाहिए।"जस्टिस दीपांकर दत्ता और...
कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए 26 नए जजों की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 12 वकीलों और 14 न्यायिक अधिकारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की।जिन 26 व्यक्तियों की सिफारिश की गई, उनमें से तीन सीनियर वकील गरिमा प्रसाद, स्वरूपमा चतुर्वेदी और अबधेश कुमार चौधरी, सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं।गरिमा प्रसाद उत्तर प्रदेश की एडिशनल एडवोकेट जनरल भी हैं।अनुशंसित वकील हैं:विवेक सरन।अदनान अहमद। विवेक कुमार सिंह। गरिमा प्रसाद। सुधांशु चौहान। अबधेश कुमार चौधरी। स्वरूपमा चतुर्वेदी। जय कृष्ण उपाध्याय। सिद्धार्थ नंदन। ...
The Indian Contract Act के अंतर्गत Contract का पालन कौन करता है?
Contract का पालन कौन करेगा इसके संबंध में Contract Act की धारा 40 उल्लेखनीय है। इस धारा के अनुसार यदि किसी Contract की बाबत मामले की प्रकृति से ही यह बात स्पष्ट होती है कि किसी Contract के पक्षकारों का यह आशय था कि उसमें निहित किसी वचन का पालन स्वयं वचनदाता द्वारा किया जाना चाहिए तो ऐसी स्थिति में धारा 40 यह कहती है कि उक्त वचन का पालन वचनदाता को ही करना चाहिए जबकि अन्य स्थिति में वचनदाता के प्रतिनिधि भी उसका पालन कर सकेंगे।Contract का स्वयं वचनदाता द्वारा पालन किया जा सकता है या उसके अभिकर्ता...
The Indian Contract Act में किसी भी Contract का अमल में लाया जाना
इस एक्ट की धारा 37 के अनुसार किसी Contractके पक्षकारों को अपनी क्रमागत प्रतिज्ञाओं का पालन जब तक कि ऐसा पालन इस अधिनियम के या किसी अन्य विधि के अधीन माफी योग्य नहीं है या तो करना चाहिए या करने की पेशकश करनी चाहिए।इस अधिनियम की धारा 37 में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पालन की पेशकश को पालन के समतुल्य रखा गया है। इस नियम का कारण क्या है कि यदि कोई पक्षकार पालन की पेशकश करता है परंतु दूसरा पक्षकार उसे स्वीकार नहीं करता है या उसे पालन नहीं करने देता है तो पालन की पेशकश करने वाला पक्षकार Contractके...
उमर खालिद और अन्य के खिलाफ मुकदमा स्वाभाविक गति से आगे बढ़ेगा, जल्दबाजी में की गई सुनवाई से अधिकार प्रभावित होंगे: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली दंगों की व्यापक साजिश के मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य को जमानत देने से इनकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता है, क्योंकि "जल्दबाजी में की गई सुनवाई" अभियुक्तों और राज्य दोनों के लिए हानिकारक होगी।अभियुक्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपों के लिए पांच साल से अधिक समय से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद हैं।जस्टिस शैलेंद्र कौर और जस्टिस नवीन चावला की खंडपीठ ने कहा,"...मुकदमे की गति स्वाभाविक रूप से आगे...
जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 6 और धारा 7: बौद्धिक संपदा अधिकारों का नियमन
जैव विविधता अधिनियम, 2002 भारत में एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा है जो देश के जैव संसाधनों (Biological Resources) और पारंपरिक ज्ञान (Traditional Knowledge) तक पहुँच को नियंत्रित करता है।इसकी मुख्य धाराओं में से, धारा 6 और धारा 7 दो अलग-अलग लेकिन संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं: बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights or IPR) के लिए आवेदन और विभिन्न श्रेणियों के लोगों द्वारा जैव संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग (Commercial Use)। ये धाराएँ एक बहु-स्तरीय निगरानी...
क्या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर Prosecution Withdrawal उचित है?
सुप्रीम कोर्ट का हालिया फ़ैसला Shailendra Kumar Srivastava v. State of Uttar Pradesh & Anr. (2024 INSC 529) यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है कि क्या किसी आरोपी के राजनीतिक प्रभाव या जनछवि (Public Image) के आधार पर अभियोग वापसी (Withdrawal of Prosecution) की अनुमति दी जा सकती है।यह निर्णय न केवल CrPC (Code of Criminal Procedure, 1973) की धारा 321 की व्याख्या करता है बल्कि इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि किस तरह न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में देरी, राजनीतिक दबाव और अभियोजन विवेक...
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 36A - धारा 36D : भारत में संरक्षित क्षेत्रों के नए प्रकार: संरक्षण और सामुदायिक भंडार
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) भारत में संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा (legal framework) है। पारंपरिक राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और अभयारण्यों (Sanctuaries) से परे, अधिनियम में धारा 36A से 36D तक के खंडों को शामिल किया गया है, जो दो नए प्रकार के संरक्षित क्षेत्रों - संरक्षण भंडार (Conservation Reserves) और सामुदायिक भंडार (Community Reserves) की स्थापना करते हैं। ये प्रावधान स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देने और...
जल अधिनियम 1974 की धारा 32 से 33A : आपातकालीन उपाय, न्यायालय से संरक्षण की मांग और दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार
धारा 32 : प्रदूषण की स्थिति में आपातकालीन उपाय (Emergency Measures in Case of Pollution)धारा 32 राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने का विशेष अधिकार देती है। यदि बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि किसी धारा (Stream), कुएँ (Well) या भूमि (Land) में किसी जहरीले (Poisonous), हानिकारक (Noxious) या प्रदूषणकारी (Polluting) पदार्थ का निकास (Discharge) हो चुका है या दुर्घटना अथवा अप्रत्याशित घटना (Accident or Unforeseen Event) के कारण ऐसा पदार्थ उसमें प्रवेश कर...
सुप्रीम कोर्ट ने AIBE के लिए ₹3,500 शुल्क के खिलाफ याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (CBI) द्वारा लगाए गए ₹3,500 शुल्क और अन्य आकस्मिक शुल्कों को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज की।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने CBI के इस तर्क से सहमति जताई कि गौरव कुमार बनाम भारत संघ मामले में दिया गया निर्णय, जिसमें कहा गया था कि बार काउंसिल एनरोलमेंट के लिए वैधानिक रूप से निर्धारित ₹750 से अधिक शुल्क नहीं ले सकती, AIBE शुल्क पर लागू नहीं होता।सुनवाई के दौरान, जस्टिस पारदीवाला ने...
'दलबदल' के लिए BJP MLA मामले में Congress MLA की याचिका खारिज
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को कांग्रेस विधायक (Congress MLA) उमंग सिंघार की याचिका खारिज की, जिसमें विधानसभा स्पीकर की कथित निष्क्रियता को चुनौती दी गई। सिंघार ने BJPM MLA निर्मला सपरे (बीना) की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि वे कांग्रेस से चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हो गईं, जो कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता का आधार है।कोर्ट का निर्णयजस्टिस प्रणय वर्मा ने आदेश में कहा कि विधानसभा स्पीकर का कार्यालय भोपाल में है। संबंधित...
NI Act की धारा 138 में समझौते के बाद सजा बरक़रार नहीं रह सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक बार शिकायतकर्ता पूरी निपटान राशि की प्राप्ति को स्वीकार करते हुए एक समझौता विलेख पर हस्ताक्षर करता है, तो NI Act की धारा 138 के तहत दोषसिद्धि को कायम नहीं रखा जा सकता है।अदालत ने हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसने आरोपी द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें शिकायतकर्ता की पुनरीक्षण याचिका खारिज होने के बाद हुए समझौते के आधार पर उसकी सजा में बदलाव की मांग की गई थी। अपील की अनुमति देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "एक बार शिकायतकर्ता ने डिफ़ॉल्ट राशि के...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण धरने पर राज्य से कहा – लोगों को जबरन हटाया जा सकता था
मराठा आरक्षण आंदोलन के कारण लोगों को हुई असुविधा पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को भोजनावकाश के बाद के सत्र में टिप्पणी की कि राज्य सरकार प्रदर्शन स्थल को 'जबरदस्ती' खाली करा सकती थी। इससे पहले कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ ने राज्य सरकार से दोपहर 3 बजे यह बताने के लिए कहा था कि नागरिकों को कोई असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया है। जब मामला उठाया गया, तो राज्य के एडवोकेट जनरल डॉ...
तलाक की कार्यवाही स्थगित होने पर भी पति की गुज़ारा भत्ता देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक की कार्यवाही पर रोक लग जाने से पति की पत्नी को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 24 के तहत मिलने वाले गुज़ारा भत्ते की ज़िम्मेदारी समाप्त नहीं होती।जस्टिस मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने कहा कि पति की देनदारी तब तक बनी रहती है, जब तक कि गुज़ारा भत्ते का आदेश निरस्त या वापस नहीं ले लिया जाता। यह ज़िम्मेदारी अपील पुनर्विचार या पुनर्स्थापन कार्यवाही के दौरान भी जारी रहती है।मामलायाचिकाकर्ता अंकित सुमन ने 2018 में तलाक याचिका दायर की थी।...
बिलों पर मंजूरी में देरी की घटनाएँ तय समयसीमा थोपने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
राष्ट्रपति के संदर्भ की सुनवाई के 6 वें दिन, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि विधेयकों को सहमति देने में देरी के कुछ उदाहरण राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए क्रमशः संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 के अनुसार कार्य करने के लिए एक व्यापक समयरेखा निर्धारित करने को सही नहीं ठहरा सकते हैं।यदि देरी के व्यक्तिगत मामले हैं, तो पीड़ित पक्ष राहत पाने के लिए न्यायालय से संपर्क कर सकते हैं, और न्यायालय निर्देश दे सकता है कि निर्णय एक समय सीमा के भीतर लिया जाना चाहिए; हालांकि, इसका मतलब यह नहीं हो सकता है कि...




















