हाईकोर्ट

धारा 4 पॉक्सो एक्ट | केवल बच्चे के प्राइवेट पार्ट में लिंग को छूना पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट
धारा 4 पॉक्सो एक्ट | केवल बच्चे के प्राइवेट पार्ट में लिंग को छूना पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में अपनी 13 वर्षीय अनाथ भतीजी को घर के सारे काम करने के लिए मजबूर करने, उसे भोजन से वंचित करने, बाथरूम में सुलाने और कई बार उसका यौन शोषण करने के आरोप के मामले में दो लोगों को दी गई सजा कम कर दी।ट्रायल कोर्ट ने दोनों को आईपीसी की धारा 376(2)(एफ)(एन) के तहत बलात्कार और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्‍सुअल असॉल्ट के लिए दोषी ठहराया था। उन्हें 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई।औरंगाबाद पीठ के जस्टिस अभय वाघवासे ने कहा...

धोखाधड़ी करने वालों को दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांग श्रेणी के लिए 3-स्तरीय जांच का प्रस्ताव रखा
धोखाधड़ी करने वालों को दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांग श्रेणी के लिए 3-स्तरीय जांच का प्रस्ताव रखा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सार्वजनिक रोजगार चाहने वाले उम्मीदवारों को विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए त्रिस्तरीय जांच प्रणाली गठित करने का प्रस्ताव दिया है।जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल जज बेंच वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार दृष्टिबाधित व्यक्तियों की नियुक्ति में राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड (एमपी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।“…राज्य से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे किसी धोखेबाज को स्वयं को दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित या अस्थिबाधित या अन्य...

आईपीसी 498ए | केरल हाईकोर्ट ने आपराधिक मनःस्थिति की कमी के कारण पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति को बरी किया, क्रूरता के लिए दोषसिद्धि को बरकरार रखा
आईपीसी 498ए | केरल हाईकोर्ट ने आपराधिक मनःस्थिति की कमी के कारण पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति को बरी किया, क्रूरता के लिए दोषसिद्धि को बरकरार रखा

केरल हाईकोर्ट ने एक पति को बरी कर दिया है, जिस पर अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था और कहा कि आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सजा बरकरार रखने के लिए मनःस्थिति (Mens Rea) एक आवश्यक घटक थी। दूसरी ओर, क्रूरता के लिए उसकी सजा को बरकरार रखते हुए यह कहा गया कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत सजा बरकरार रखने के लिए क्रूरता का सबूत उस आचरण पर निर्भर करेगा जो एक महिला को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित कर सकता है। अपीलकर्ता जिसे सत्र न्यायालय ने आईपीसी की धारा 306...

सिविल सेवा अपीलीय ट्रिब्यूनल राजस्थान वित्तीय निगम के संविदा कर्मचारी के सेवा मामले से उत्पन्न अपील पर विचार नहीं कर सकता: हाइकोर्ट
सिविल सेवा अपीलीय ट्रिब्यूनल राजस्थान वित्तीय निगम के संविदा कर्मचारी के सेवा मामले से उत्पन्न अपील पर विचार नहीं कर सकता: हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा पारित आदेश रद्द कर दिया। उक्त आदेश में राजस्थान वित्तीय निगम के संविदा कर्मचारी द्वारा ट्रांसफर आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि उसके पास राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष आक्षेपित ट्रांसफर आदेश को चुनौती देने का वैकल्पिक उपाय है। एक्टिंग चीफ जस्टिस मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने पाया कि राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय ट्रिब्यूनल के पास राजस्थान वित्तीय निगम के किसी...

PMLA Act की धारा 6  | निर्णायक प्राधिकारी केवल न्यायिक या अर्ध-न्यायिक न्यायाधिकरण नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
PMLA Act की धारा 6 | निर्णायक प्राधिकारी केवल न्यायिक या अर्ध-न्यायिक न्यायाधिकरण नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाइकोर्ट ने हाल ही में माना कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA Act) की धारा 6 के तहत निर्णायक प्राधिकरण न तो न्यायिक है और न ही अर्ध-न्यायिक न्यायाधिकरण, केवल इसलिए कि प्राधिकरण द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं में कुछ "न्यायिक रंग" है।अदालत ने कहा,“हमें नहीं लगता कि निर्णायक प्राधिकरण न्यायिक या अर्ध न्यायिक न्यायाधिकरण है, जो पक्षकारों के अधिकारों का निर्णय करता है, या उसके पास न्यायालय की सुविधाएं हैं। इसके अभाव में, हमारा विचार है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत कि न्यायिक...

व्यक्तियों की गरिमा और निजता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?  बॉम्बे हाइकोर्ट ने राज्य से पूछा
व्यक्तियों की गरिमा और निजता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? बॉम्बे हाइकोर्ट ने राज्य से पूछा

संगीत शिक्षक को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पाया कि प्रथम दृष्टया राज्य द्वारा प्रस्तुत कोई भी सर्कुलर ऐसी स्थिति से के बारे में कुछ नहीं कहता, जहां पुलिस लॉक-अप में हिरासत में लिए गए व्यक्ति से उसके कपड़े छीन लिए गए हो। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने अभियोजक को यह बताने के लिए समय दिया कि ऐसे व्यक्ति की निजता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।अदालत ने कहा,"हमने सर्कुलर और प्रावधानों का अध्ययन किया...

यासीन मलिक को जेल अस्पताल में मेडिकल ट्रीटमेंट उपलब्ध कराएं: दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल सुपरिटेंडेंट से कहा
यासीन मलिक को जेल अस्पताल में मेडिकल ट्रीटमेंट उपलब्ध कराएं: दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल सुपरिटेंडेंट से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तिहाड़ जेल सुपरिटेंडेंट को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आतंकी फंडिंग मामले में दोषी कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को जेल अस्पताल में उचित मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाए।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने यह आदेश यासीन मलिक द्वारा दायर याचिका पर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और जेल अधिकारियों को उसे एम्स या किसी अन्य अस्पताल में "आवश्यक मेडिकल ट्रीटमेंट" के लिए रेफर करने के लिए उचित निर्देश देने की मांग की गई, क्योंकि वह हृदय और गुर्दे से संबंधित बीमारी से पीड़ित...

PMLA जांच 365 दिनों से अधिक समय तक चलने पर कार्यवाही नहीं होती, ED द्वारा जब्त की गई संपत्ति वापस की जानी चाहिए: दिल्ली हाइकोर्ट
PMLA जांच 365 दिनों से अधिक समय तक चलने पर कार्यवाही नहीं होती, ED द्वारा जब्त की गई संपत्ति वापस की जानी चाहिए: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि जहां धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (Prevention of Money-Laundering Act, 2002) के तहत जांच 365 दिनों से अधिक चलती है और किसी अपराध से संबंधित कोई कार्यवाही नहीं होती है तो संपत्ति की जब्ती समाप्त हो जाएगी। इसलिए सम्पत्ति उस व्यक्ति को वापस कर दिया जाना चाहिए, जिससे जब्त किया गया।जस्टिस नवीन चावला ने फैसला सुनाया,“इस एक्ट के तहत किसी भी अपराध से संबंधित किसी अदालत के समक्ष या किसी अन्य देश के संबंधित कानून के तहत भारत के बाहर आपराधिक क्षेत्राधिकार की सक्षम अदालत के समक्ष...

Gyanvapi Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यास तहखाना के अंदर पूजा पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया
Gyanvapi Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'व्यास तहखाना' के अंदर 'पूजा' पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद समिति की उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार किया, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद (व्यास तहखाना के नाम से जाना जाता है) के दक्षिणी तहखाने में होने वाली पूजा पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को इलाके में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।तहखाना के अंदर पूजा 31 जनवरी को शुरू हुई, जिसके तुरंत बाद वाराणसी जिला जज ने आदेश पारित कर जिला मजिस्ट्रेट को उचित व्यवस्था करके क्षेत्र के अंदर पूजा की सुविधा प्रदान करने का...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने खिलाफ मनगढ़ंत न्यूज क्लिपिंग के आधार पर जज को पद से हटाने की मांग करने वाले वकील और मुवक्किल को अवमानना ​​नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने खिलाफ 'मनगढ़ंत' न्यूज क्लिपिंग के आधार पर जज को पद से हटाने की मांग करने वाले वकील और मुवक्किल को अवमानना ​​नोटिस जारी किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जज के खिलाफ निंदनीय आरोपों के साथ मनगढ़ंत न्यूज आर्टिकल का उपयोग करने और उन्हें मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने के लिए वकील ज़ोहेब मर्चेंट और मीनल चंदनानी और उनके मुवक्किल के खिलाफ स्वत: संज्ञान अवमानना ​​​​याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया।जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई और जस्टिस एन आर बोरकर की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के आरोप न केवल जज की गरिमा पर हमला करते हैं, बल्कि संस्था के अधिकार और कानून की महिमा पर हमला हैं।अदालत ने कहा,“इस तरह के जानबूझकर प्रेरित और अवमाननापूर्ण कार्य, जो...

यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून | अंतरधार्मिक विवाह तब तक मान्य नहीं होगा जब तक कि धारा 8 और 9 के तहत पूर्व और रूपांतरण के बाद की घोषणा औपचारिकता का अनुपालन न किया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून | अंतरधार्मिक विवाह तब तक मान्य नहीं होगा जब तक कि धारा 8 और 9 के तहत 'पूर्व' और 'रूपांतरण के बाद की घोषणा' औपचारिकता का अनुपालन न किया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि एक अंतर-धार्मिक विवाह को कोई पवित्रता नहीं दी जा सकती है, जो यूपी गैरकानूनी धर्म संपरिवर्तन अधिनियम 2021 की धारा 8 और 9 के अनुपालन के बिना किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि 2021 का अधिनियम लागू होने के बाद [27 नवंबर, 2020 के बाद] विवाह होता है, तो पार्टियों को अधिनियम की धारा 8 और 9 का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने कहा:"यदि धर्मांतरण विभिन्न धर्मों से संबंधित व्यक्तियों के विवाह के संबंध में किया जाता है, चाहे कोई भी...

राजस्व अधिकारियों को जाति नहीं, धर्म नहीं प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
राजस्व अधिकारियों को 'जाति नहीं, धर्म नहीं' प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक व्यक्ति अपने दस्तावेजों में अपनी जाति और धर्म का उल्लेख नहीं करने का विकल्प चुन सकता है, लेकिन राजस्व अधिकारियों को "नो कास्ट नो रिलिजन सर्टिफिकेट" जारी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के प्रमाण पत्र को जारी करना एक सामान्य घोषणा के रूप में माना जाएगा और सरकार द्वारा प्रदत्त किसी भी शक्ति के अभाव में राजस्व अधिकारी ऐसा नहीं कर सकते। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि तहसीलदार अपनी सनक और कल्पना पर प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकते हैं और इस तरह...

भरण-पोषण प्रावधानों को वेलफेयर कानून होने के कारण उचित संदेह से परे साबित करने की आवश्यकता नहीं: कलकत्ता हाइकोर्ट
भरण-पोषण प्रावधानों को वेलफेयर कानून होने के कारण उचित संदेह से परे साबित करने की आवश्यकता नहीं: कलकत्ता हाइकोर्ट

कलकत्ता हाइकोर्ट ने हाल ही में माना कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के प्रावधान वेलफेयर कानून हैं और उन्हें उनके आपराधिक कानून समकक्षों के रूप में उचित संदेह से परे साबित करने की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस अजॉय कुमार मुखर्जी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ भरण-पोषण का दावा रद्द करने से इनकार करते हुए कहा,"अपने वैवाहिक घर में रहने के दौरान पत्नी पक्ष का आचरण सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण देने से पहले विचार किया जाने वाला एकमात्र पैरामीटर नहीं हो सकता। प्रावधान वेलफेयर कानून होने के...

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आदेश अंतर्वर्ती नहीं, फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 19 के तहत अपील योग्य: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आदेश अंतर्वर्ती नहीं, फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 19 के तहत अपील योग्य: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 के तहत फैमिली कोर्ट द्वारा पारित पेंडेंट लाइट मेंटेनेंस के खिलाफ फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 19 (1) के तहत हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि पेंडेंट लाइट मेंटेनेंस का आदेश मुकदमा लंबित होने पर बच्चों, पत्नी और अन्य व्यक्ति को भरण-पोषण प्रदान करता है। संदर्भ के लिए फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 19(1) के अनुसार, फैमिली कोर्ट के प्रत्येक निर्णय या आदेश के खिलाफ, जो कि अंतवर्ती आदेश (Interlocutory Order)...

नाबालिगों द्वारा जीवित अंग या ऊतक दान करने के मुद्दे पर दिशानिर्देश तैयार करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा
नाबालिगों द्वारा जीवित अंग या ऊतक दान करने के मुद्दे पर दिशानिर्देश तैयार करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि नाबालिगों द्वारा जीव‌ित अंग या ऊतक दान करने के लिए किए गए आवेदनों पर विचार के मामलों में उचित प्र‌‌ाधिकरण या राज्य सरकार के संदर्भ के लिए दिशा निर्देश तैयार करे।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने आदेश दिया कि मानव अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण नियम, 2014 के नियम 5(3)(जी) के तहत दिशानिर्देश दो महीने के भीतर तैयार किए जाएं।नियम 5(3)(जी) में कहा गया है कि नाबालिगों द्वारा जीवित अंग या ऊतक दान की अनुमति नहीं दी जाएगी, सिवाय असाधारण चिकित्सा आधारों के,...

पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह, बुरे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: केरल हाईकोर्ट
पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह, बुरे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस अधिकारी लोगों के प्रति जवाबदेह हैं और उनके बुरे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत को राज्य पुलिस प्रमुख शेख दरवेश साहब ने भी सूचित किया, जो ऑनलाइन उपस्थित हुए थे कि पुलिस अधिकारियों द्वारा नागरिकों के प्रति उचित व्यवहार सुनिश्चित करने और इसके नागरिकों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों के उपयोग को रोकने के लिए एक अतिरिक्त परिपत्र (परिपत्र 2/2024/पीएचक्यू दिनांक 30.01.2024) जारी किया गया है।जस्टिस देवन रामचन्द्रन ने कहा,“मुझे यकीन है कि राज्य पुलिस प्रमुख...