हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गर्भपात की अनुमति देने से इनकार किया, क्योंकि अभियोक्ता की मां ने स्वीकार किया कि वह बलात्कार के आरोपी के खिलाफ मुकदमे में अपने बयान से पलट जाएगी
न्यायालय के वैधानिक अधिकार के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में गर्भपात की चिकित्सीय याचिका को खारिज कर दिया, जब पीड़िता की मां ने स्वीकार किया कि उनका आरोपी रिश्तेदार पर मुकदमा चलाने का कोई इरादा नहीं है। जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने यह भी कहा कि अभियोक्ता और उसकी याचिकाकर्ता-मां की वास्तविक मंशा याचिकाकर्ता के इस स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है कि वे मुकदमे में अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करेंगे... बाद में मां ने अपनी छोटी बेटी की ओर से...
लिखित बयान में की गई स्वीकृति को आदेश VI नियम 17 सीपीसी के तहत किए गए संशोधन आवेदन के माध्यम से वापस नहीं लिया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि लिखित बयानों में की गई स्वीकारोक्ति को संशोधन द्वारा वापस नहीं लिया जा सकता, भले ही टाइपोग्राफिकल त्रुटि हो या बहस करने वाले वकील में बदलाव हो।विपक्षी पक्ष ने लघु वाद न्यायालय में एक मामला दायर किया, जिसमें संशोधनकर्ताओं ने 05.02.2014 को एक लिखित बयान दायर किया था। इसके बाद, यह पाया गया कि टाइपोग्राफिकल त्रुटि के कारण, लिखित बयान के साथ संलग्न दस्तावेजों में 'लाइसेंस डीड' वाक्यांश के बजाय 'किराएदार' शब्द था।वकील में बदलाव के बाद, संशोधनकर्ता ने सीपीसी के आदेश VI...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमएसएमई अधिनियम की धारा 19 के तहत अनिवार्य पूर्व-जमा की कमी के लिए सुविधा परिषद अवॉर्ड के खिलाफ रिट याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 की धारा 18 के तहत क्षेत्रीय सूक्ष्म एवं लघु उद्यम, सुविधा परिषद (एमएसईएफसी), मेरठ जोन, मेरठ द्वारा पारित निर्णय को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं, तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अन्य ने एमएसएमई अधिनियम की धारा 19 के तहत अनिवार्य पूर्व-जमा करने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने कहा कि भले ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया हो, लेकिन यह न्यायालय...
S.145 Evidence Act| गवाह से तेजी से घटी घटनाओं के अनुक्रम को ठीक से याद करने की अपेक्षा नहीं की जाती, गवाही में छोटी-मोटी गलतियां विरोधाभास नहीं: केरल हाइकोर्ट
केरल हाइकोर्ट ने दोहराया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 162 अभियुक्त को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 145 द्वारा प्रदान किए गए तरीके से ही गवाह के बयान का उपयोग करके उसका खंडन करने का अधिकार देती है। धारा 145 का दूसरा भाग कहता है कि जब किसी बयान का उपयोग किसी गवाह का खंडन करने के लिए किया जाता है तो उसका ध्यान उन हिस्सों की ओर आकर्षित किया जाना चाहिए, जिनका उपयोग उसका खंडन करने के लिए किया जाता है।न्यायालय ने आगे कहा कि बयानों में छोटी-मोटी विसंगतियां विरोधाभास नहीं हैं। ऐसी विसंगतियां अवलोकन...
दोषी के खिलाफ केवल मामलों का पंजीकरण पैरोल से इनकार करने के लिए पर्याप्त नहीं, ठोस सामग्री भी होनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने कहा कि किसी दोषी के खिलाफ केवल विभिन्न मामलों का पंजीकरण पैरोल से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। राहत से इनकार करने के लिए ठोस सामग्री होनी चाहिए।जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस अमरजोत भट्टी ने कहा कि वर्तमान मामले में जिला मजिस्ट्रेट ने पैरोल खारिज की, क्योंकि सीनियर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार यदि याचिकाकर्ता को अस्थायी पैरोल पर रिहा किया जाता है तो वह मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त हो सकता है और पैरोल के दौरान फरार भी हो सकता है।न्यायालय ने...
जांच अधिकारी से निष्पक्ष तरीके से जांच करने और शिकायत की वास्तविकता का पता लगाने की अपेक्षा की जाती है: मद्रास हाइकोर्ट
मद्रास हाइकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि जांच अधिकारी से निष्पक्ष तरीके से जांच करने और शिकायत की वास्तविकता का पता लगाने की अपेक्षा की जाती है।जस्टिस बी. पुगलेंधी ने टिप्पणी की कि सरकार का आदर्श वाक्य है कि सत्य की ही जीत होती है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी है।अदालत ने टिप्पणी की,"सरकार के प्रतीक में इसका आदर्श वाक्य है कि सत्य की ही जीत होती है। इसलिए यह प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह जांच अधिकारी सहित सरकार द्वारा अपेक्षित अपने कर्तव्य...
पत्नी द्वारा पति के खिलाफ केवल दहेज की मांग की शिकायत दर्ज कराना क्रूरता नहीं, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि यह झूठ है: मद्रास हाइकोर्ट
क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग करने वाले पति को राहत देने से इनकार करते हुए मद्रास हाइकोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा केवल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराना क्रूरता नहीं माना जाएगा, जब तक कि पति यह साबित न कर दे कि शिकायत झूठी दहेज मांग की शिकायत थी।इस प्रकार जस्टिस आर सुब्रमण्यन और जस्टिस आर शक्तिवेल ने कहा कि वे पत्नी के आचरण में कोई दोष नहीं पाते हैं, जो अपने पति के साथ रहने के इरादे से पुलिस में शिकायत दर्ज करा रही है।न्यायालय ने कहा,“इस न्यायालय का विचार है कि इस बात के सबूत के अभाव में कि...
भुगतान और वसूली का सिद्धांत | मालिक के यह साबित करने में विफल रहने पर कि उसने नियुक्ति से पहले अपराधी चालक की योग्यता सत्यापित की, तो बीमाकर्ता उत्तरदायी नहीं होगा: एमपी हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने दोहराया कि जब यह सामने आता है कि वाहन के मालिक ने उसे नियुक्त करने से पहले अपराधी चालक के कौशल को सत्यापित नहीं किया तो बीमा कंपनी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की एकल पीठ ने अपराधी वाहन के मालिक के बयान और अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों की जांच करने के बाद भुगतान और वसूली सिद्धांत के आधार पर रीवा में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए अवार्ड बरकरार रखा। न्यायाधिकरण ने पहले पाया कि अपराधी चालक के पास घटना के समय वैध और प्रभावी लाइसेंस नहीं...
अवकाश नकदीकरण विवेकाधीन इनाम नहीं बल्कि संविधान के तहत लागू होने योग्य कानूनी अधिकार: कर्नाटक हाईकोर्ट
एच चन्नैया बनाम मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला पंचायत और अन्य के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट की जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की एकल पीठ ने माना कि अवकाश नकदीकरण को विवेकाधीन इनाम नहीं बल्कि भारत के संविधान के तहत लागू होने योग्य कानूनी अधिकार माना जा सकता है।पृष्ठभूमि तथ्यएच चन्नैया (याचिकाकर्ता) ने 1979 से 2013 में अपनी सेवानिवृत्ति तक पंचायत विकास अधिकारी (प्रतिवादी) के कार्यालय में वाटरमैन के रूप में काम किया। याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति पर महालेखाकार कार्यालय ने याचिकाकर्ता के सेवा डेटा और उसकी देय...
पत्नी ने संतान प्राप्ति के अधिकार से वंचित होने का किया दावा, हाईकोर्ट ने दोषी को पैरोल पर रिहा किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर याचिका स्वीकार की। उक्त याचिका में उसने अपने पति के लिए पैरोल की मांग की थी, जो आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस याचिका में आरोप लगाया गया कि उसे संतान प्राप्ति के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।जस्टिस एस आर कृष्ण कुमार की एकल पीठ ने महिला की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की और दोषी को 30 दिनों की अवधि के लिए सामान्य पैरोल दी, जो 05.06.2024 से 04.07.2024 तक लागू रहेगी।पति को वर्ष 2016 में दर्ज अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 201 के साथ...
जज द्वारा संक्षिप्त अवमानना कार्यवाही शुरू न करना न्यायालय को स्वतःसंज्ञान कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि यदि कोई जज न्यायालय की अवमानना अधिनियम की धारा 14 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवमानना कार्यवाही शुरू नहीं करता है तो यह हाईकोर्ट को अधिनियम की धारा 15 के तहत स्वप्रेरणा अवमानना कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोकता।जस्टिस अनिल के. नरेन्द्रन और जस्टिस जी. गिरीश की खंडपीठ ने एडवोकेट यशवंत शेनॉय द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही के खिलाफ दी गई चुनौती पर निर्णय लेते हुए यह टिप्पणी की।धारा 14 हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की उपस्थिति या सुनवाई में की गई...
बेटे द्वारा भरण-पोषण की शर्त का उल्लेख नहीं करने पर सीनियर सिटीजन पिता द्वारा बेटे के पक्ष में निष्पादित गिफ्ट डीड रद्द नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि सीनियर सिटीजन द्वारा अपने बेटे के पक्ष में निष्पादित गिफ्ट डीड, जो बाद में उसे बेच देता है, उसको सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल के सहायक आयुक्त द्वारा रद्द नहीं किया जा सकता, यदि गिफ्ट डीड में पिता (दाता) के भरण-पोषण की कोई शर्त का उल्लेख नहीं किया गया।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने विवेक जैन द्वारा दायर याचिका स्वीकार कर ली, जिन्होंने सीएस हर्ष से संपत्ति खरीदी थी। उन्हें वर्ष 2019 में उनके पिता श्रीनिवास ने संपत्ति गिफ्ट में दी थी।श्रीनिवास ने शुरू में वर्ष...
बलात्कार और छेड़छाड़ के झूठे मामलों में किसी व्यक्ति को फंसाने की लगातार धमकियां आत्महत्या के लिए उकसाने के समान: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए अपने आदेश में कहा कि बलात्कार और छेड़छाड़ के झूठे मामले में मृतक/पीड़ित को फंसाने की आरोपी द्वारा लगातार धमकी देना आत्महत्या के लिए उकसाने के समान हो सकता है।धारा 482 सीआरपीसी के तहत आरोपी द्वारा प्रस्तुत आवेदन स्वीकार करने से इनकार करते हुए जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने कहा कि मृतक पर झूठे मामले थोपकर उसे जेल भेजने की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।पीठ ने पाया कि ये धमकियां कोई एक बार की घटना नहीं थीं। ये प्रथम दृष्टया मृतक के...
सरकारी कर्मचारी की मृत्यु परिवार के लिए अनुकंपा नियुक्ति की गारंटी नहीं, वित्तीय कठिनाई साबित होनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सेवा में रहते हुए किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को स्वतः ही अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि परिवार की वित्तीय स्थिति की जांच की जानी चाहिए। नौकरी केवल तभी दी जानी चाहिए, जब परिवार इसके बिना संकट का सामना नहीं कर सकता, बशर्ते कोई प्रासंगिक योजना या नियम हो।जस्टिस राजेश सेखरी ने जम्मू-कश्मीर राज्य हथकरघा विकास निगम में अनुकंपा नियुक्ति की मांग करने वाले दो व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका...
गुजरात हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चों को जहर देने के मामले में पिता की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी; झूठी गवाही के लिए पत्नी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने चाय, बिस्कुट और पानी में जहर देकर अपने दो नाबालिग बच्चों की हत्या करने के दोषी व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस विमल के. व्यास की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता ने बिना किसी उद्देश्य, कारण या उकसावे के जघन्य अपराध किया गया।खंडपीठ ने कहा,"इस प्रकार, साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन पर हम इस दृढ़ राय के हैं कि अपीलकर्ता ने बिना किसी उद्देश्य, कारण या किसी भी प्रकार के उकसावे के अपने नाबालिग बच्चों की हत्या करने का जघन्य अपराध किया। बच्चों को...
अभियोजन पक्ष के गवाहों की पर्याप्त जांच के बावजूद एफआईआर रद्द करने की याचिका सुनवाई योग्य बनी हुई है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण गवाहों की जांच हो चुकी है तो धारा 482 सीआरपीसी के तहत रद्द करने की याचिका अभी भी हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य होगी।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"यह पूर्ण सिद्धांत के रूप में नहीं कहा जा सकता कि एक बार पर्याप्त/महत्वपूर्ण अभियोजन पक्ष के गवाहों की जांच हो जाने के बाद हाईकोर्ट सीआरपीसी, 1973 की धारा 482 के तहत एफआईआर (और उससे उत्पन्न होने वाली कार्यवाही) रद्द करने की याचिका पर विचार करने की अपनी शक्तियों को खो देता...
झारखंड हाईकोर्ट ने JUVNL की अपील खारिज की, M/s Rites के साथ विवाद में एकमात्र मध्यस्थ नियुक्ति को बरकरार रखा
झारखंड हाईकोर्ट ने मैसर्स राइट्स के साथ अपने विवाद में एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त करने के रिट न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेयूवीएनएल) द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है।कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से विशुद्ध रूप से तकनीकी आधार पर याचिकाओं या बचाव को अस्वीकार करना उच्च न्यायालय का कर्तव्य है। कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ ने कहा, " एक व्यापक प्रस्ताव को छोड़कर कि उच्च न्यायालय को...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत और 26 अन्य मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को अपनी मंगेतर से शादी करने के लिए अंतरिम जमानत दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए और 10 साल के कठोर कारावास की सजा पाए एक व्यक्ति को अंतरिम जमानत दी, ताकि वह शादी कर सके।जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस कीर्ति सिंह ने कहा, "आवेदक 04 साल की वास्तविक सजा काट चुका है। उसकी शादी 12.06.2024 को होनी है और यह न्याय के हित में होगा, अगर आवेदक को उसकी शादी करने में सक्षम बनाने के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है।" 24 वर्षीय जोगिंदर सिंह को 2017 में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए दोषी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पंजाब स्थित 'डोनिटो' को पिज्जा और बर्गर बेचते समय डोमिनोज ट्रेडमार्क का उपयोग करने से रोका
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में पंजाब स्थित एक फूड चैन "डोनिटोज" को पिज्जा और बर्गर बेचने के लिए डोमिनोज के ट्रेडमार्क का उपयोग करने से रोक दिया है।जस्टिस अनीश दयाल ने डोमिनोज पिज्जा समूह की कंपनियों के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित किया और डोनिटो को निर्देश दिया कि वह पिज्जा और बर्गर के संबंध में उसके डिवाइस मार्क के सभी संदर्भों को अपने डोमेन डब्ल्यू डॉट डोनिटो डॉट इन से हटा दे। कोर्ट ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब आदि जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को डोनिटो के उत्पादों की...
नर्सिंग होम में अग्नि सुरक्षा मानदंडों के कार्यान्वयन के लिए याचिका पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लें: दिल्ली सरकार से हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम द्वारा लागू किए जा सकने वाले अग्नि सुरक्षा और स्प्रिंकलर पर बुनियादी मानदंडों को तैयार करने के लिए चार सप्ताह के भीतर एक प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को युगांश मित्तल द्वारा दायर जनहित याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में मानने और कानून के अनुसार तर्कसंगत आदेश के माध्यम से उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।पीठ में शामिल जस्टिस...




















