हाईकोर्ट
चौंकाने वाली बात: राजस्थान हाईकोर्ट ने हेड कांस्टेबल को बहाल किया, जिसे सिर्फ इसलिए बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि वह भर्ती दौड़ में फर्जी उम्मीदवार का इस्तेमाल करने वाले उम्मीदवार का रिश्तेदार था
मामले के तथ्यों को "चौंकाने वाला" बताते हुए, राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक हेड कांस्टेबल की बर्खास्तगी को खारिज कर दिया, क्योंकि वह एक ऐसे व्यक्ति का चाचा था, जिसने कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के तहत एक दौड़ में भाग लेने के लिए एक धोखेबाज का इस्तेमाल किया था। जस्टिस दिनेश मेहता ने रिकॉर्डों का अवलोकन किया और कहा कि राज्य याचिकाकर्ता को बिना किसी सबूत के हटाने पर आमादा है, जिसे केवल अपराधी उम्मीदवार से संबंधित होने के कारण "बलि का बकरा" बनाया गया था।मामले के तथ्यों को "चौंकाने वाला" बताते...
दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो एयरलाइंस की याचिका स्वीकार की, मरम्मत किए गए और पुनः आयातित विमान भागों पर अतिरिक्त IGST लगाना असंवैधानिक माना
इंडिगो एयरलाइंस को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि विदेश में मरम्मत किए गए विमान के पुर्जों के पुनः आयात पर सीमा शुल्क अधिनियम, 1975 की धारा 3(7) के तहत एकीकृत माल और सेवा कर (आईजीएसटी) और उपकर का अतिरिक्त शुल्क असंवैधानिक है। जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि “लेनदेन को सेवा की आपूर्ति मानते हुए कर लगाने के बाद भी अतिरिक्त शुल्क स्पष्ट रूप से असंवैधानिक होगा और इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता है।”न्यायालय ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड...
आरोपों से बरी होने के बावजूद कर्मचारी का वेतन रोक के रखना अनुचित: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्णय दिया कि यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कार्यवाही लंबित रहने के दौरान किसी कर्मचारी को निलंबित किया गया था और बाद में उसे बरी कर दिया गया, तो कोई विभागीय कार्यवाही न होने की स्थिति में निलंबन अवधि के वेतन को केवल जीविका भत्ते (subsistence allowance) तक सीमित रखना ऐसे कर्मचारी को दंडित करने के समान होगा, जो स्वीकार्य नहीं है।कोर्ट ने कहा "ट्रिब्यूनल ने सही निष्कर्ष निकाला कि कोई विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की गई थी, और आपराधिक मामले...
हाईकोर्ट द्वारा FIR रद्द होने के बाद व्यक्ति का नाम रिकॉर्ड से हटा देना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह कहते हुए अपने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति का नाम हटा दे, जिसे एक एफआईआर में आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में वह रद्द कर दी गई।और कहा कि, "जब किसी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा उसके अपराध से बरी कर दिया जाता है, तो ऐसे आरोप के अवशेषों को उस व्यक्ति का पीछा नहीं करने देना चाहिए,"याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक सम्मानित व्यक्ति हैं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में इंटरव्यू पास करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला, क्योंकि ई-कोर्ट पोर्टल पर उनका नाम एक...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कलेक्टर को अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की जमीन हड़पने की जांच करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वहां कोई बंधुआ मजदूर न हो
बंधुआ मजदूर बताए गए एक व्यक्ति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को कुछ लोगों ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने संबंधित कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों से भूमि हड़पने के मामलों की जांच करें। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि "कुछ बड़े लोगों" ने पति, जो कि अनुसूचित जनजाति समुदाय का सदस्य है, के माध्यम से याचिका दायर की है, ताकि विषयगत संपत्ति जो उसकी...
पंजाब आईटी एजुकेशन सोसाइटी के तहत कंप्यूटर शिक्षक को सिविल सेवा नियमों द्वारा शासित होना आवश्यक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पंजाब सूचना एंड प्रौद्योगिकी शिक्षा सोसायटी (पीआईसीटीईएस) के तहत भर्ती किए गए कंप्यूटर शिक्षकों को पंजाब सिविल सेवा (पीसीएस) नियमों के तहत शासित होना आवश्यक है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने कहा, "चूंकि नियुक्ति पत्र पंजाब के राज्यपाल के नाम से जारी किए गए हैं, इसलिए सेवा नियमों, 2024 में उल्लिखित सेवा शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा किया जाता है, तो यह नियुक्ति पत्र की शर्तों का उल्लंघन होगा, जो पूरी तरह...
प्रशासनिक जज के दौरे के दौरान वकील पर निगरानी बनाए रखने का औचित्य स्पष्ट करें: आगरा के पुलिस आयुक्त से हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के पुलिस आयुक्त से हलफनामा दाखिल कर प्रशासनिक न्यायाधीश के जिला न्यायालय परिसर में दौरे के दौरान 70 वर्षीय वकील पर निगरानी बनाए रखने का औचित्य स्पष्ट करने को कहा।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस डोनाडी रमेश की पीठ ने अपने आदेश में कहा,"यह दुखद दिन होगा यदि जिला कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले किसी वकील को पुलिस अधिकारियों द्वारा आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण न्यायालय में उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाती है, क्योंकि प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायालय में आने वाले...
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत न्यूनतम निर्धारित अवधि से कम की सजा देने से इसका उद्देश्य विफल होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत न्यूनतम निर्धारित अवधि से कम की सजा देना अस्वीकार्य है।जस्टिस चंद्र धारी सिंह ने कहा कि अधिनियम के तहत अपराधों के लिए न्यूनतम सजा निर्धारित करने के पीछे विधायी मंशा को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।यह देखते हुए कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को वन्यजीव संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया, जो पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।न्यायालय ने कहा,"परिवीक्षा राहत के बहिष्कार सहित कड़े...
NDLS Stampede: दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेन में चढ़ने से रोके गए व्यक्तियों को पक्षकार बनाने से किया इनकार, अलग से उपाय अपनाने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को विभिन्न व्यक्तियों द्वारा दायर आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ को लेकर दायर लंबित जनहित याचिका में हस्तक्षेप की मांग की गई।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने पक्षकारों को कानून के तहत उपलब्ध उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।न्यायालय ने टिप्पणी की कि जनहित याचिका में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती और वे अपने व्यक्तिगत कारणों का समर्थन करते हुए अलग से याचिका दायर...
किसी भी पक्ष को ऐसे मध्यस्थ स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जो हितों का टकराव करता हो: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि किसी पक्ष को ऐसे मध्यस्थ को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जिसके हितों में टकराव हो, क्योंकि ऐसा करना निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। न्यायालय ने माना कि स्थायी पट्टा विलेख, साथ ही उपनियम, जो याचिकाकर्ता और विभाग के बीच विवादों का निपटारा करने के लिए सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को एकमात्र मध्यस्थ होने का प्रावधान करते हैं, कानून के विरुद्ध होंगे। चीफ जस्टिस ताशी रबस्तान ने कहा कि रजिस्ट्रार, जिन्हें पट्टा विलेख के तहत एकमात्र...
'कोई भी व्यक्ति' में सभी विरोधी कब्जे शामिल, निष्पादन न्यायालयों को आर्डर 21 रूल 97 सीपीसी के तहत बाधा दावों का न्यायनिर्णयन करने का अधिकार: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 21 नियम 97 के तहत निष्पादन न्यायालयों के व्यापक अधिकार क्षेत्र की पुष्टि की है। जस्टिस जावेद इकबाल वानी की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि नियम 97(1) में "कोई भी व्यक्ति" शब्द जानबूझकर व्यापक है, जिसमें सभी व्यक्ति शामिल हैं, जो कब्जे का विरोध करते हैं या बाधा डालते हैं, निष्पादन न्यायालयों को निष्पादन कार्यवाही के भीतर ही ऐसे विवादों का न्यायनिर्णयन करने का अधिकार देता है। संदर्भ के लिए, आदेश 21 नियम 97 CPC में प्रावधान...
दिल्ली हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट के लिए अलग वेबसाइट बनाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राउज एवेन्यू कोर्ट के लिए अलग वेबसाइट बनाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस सचिन दत्ता ने तीस हजारी न्यायालयों के जिला जज (मुख्यालय) विधि एवं न्याय मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र से जवाब मांगा।न्यायालय ने मामले को 14 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा,"प्रतिवादियों द्वारा नोटिस प्राप्त होने की तिथि से तीन सप्ताह की अवधि के भीतर जवाब दाखिल किया जाए।"वकील अभिनव गर्ग द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि राउज एवेन्यू कोर्ट की स्वतंत्र...
हाशिये पर पड़े समुदायों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण व्यवहार का जोखिम: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR में आरोपी की जाति के उल्लेख पर DGP से सवाल किया
FIR में आरोपी की जाति के उल्लेख के बारे में महत्वपूर्ण चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को FIR में जाति की जानकारी शामिल करने और पुलिस जांच के दौरान इसकी प्रासंगिकता को उचित ठहराते हुए व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने स्पष्टीकरण मांगा, क्योंकि उसने पाया कि संस्थागत पूर्वाग्रह, रूढ़िवादिता को मजबूत करने की क्षमता और हाशिये पर पड़े समुदायों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण व्यवहार के जोखिम को लेकर चिंता बढ़ रही...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई एयरपोर्ट परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण रद्द किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पनवेल जिले के वहल गांव में नवी मुंबई एयरपोर्ट परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के आदेश खारिज किया, जिसमें कहा गया कि कार्यवाही में प्रक्रियागत खामियां थीं।जस्टिस एम.एस.सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि राज्य के अधिकारियों ने धारा 17 के तहत अत्यावश्यकता प्रावधान का सहारा लेकर भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा 5ए की आवश्यकता को गलत तरीके से समाप्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि राज्य ने धारा 17 को लागू करने के लिए कोई अधिसूचना या निर्देश जारी नहीं किया।"यह एक ऐसा...
भारत में मृत्यु पूर्व बयानों का कानून: कानून में क्या ये गलत है?
मृत्यु पूर्व बयान, ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार, मृत्यु पूर्व बयान, मृत्यु के समय किसी व्यक्ति द्वारा अपनी मृत्यु के कारण के बारे में मौखिक या लिखित कथन होता है। भारत को छोड़कर, कई सामान्य कानून देशों में मृत्यु पूर्व कथनों ने अपनी प्रासंगिकता और स्वीकार्यता खो दी है। भारत में मृत्यु पूर्व कथनों से संबंधित कानून पहले भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32(1) में पाया जा सकता था, जिसमें लिखा है, "जब यह मृत्यु के कारण से संबंधित हो - जब कोई व्यक्ति अपनी मृत्यु के कारण के बारे में या उस लेन-देन...
मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य होने के नाते विवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के उस आदेश के खिलाफ चुनौती खारिज की, जिसमें राज्य को प्रतिवादी को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया, जो मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी है जिसका पति भी कार्यरत था और कमाता था।जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की खंडपीठ ने हीना शेख बनाम राजस्थान राज्य (हीना शेख मामला) में न्यायालय की फुल बेंच के निर्णय पर कैट की निर्भरता की पुष्टि की जिसमें यह निर्णय लिया गया कि मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है।मृतक...
अवैध निर्माण से पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील यमुना बाढ़ के मैदानों को खतरा: दिल्ली हाईकोर्ट ने तोड़फोड़ के खिलाफ धोबी घाट झुग्गी निवासियों की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में यमुना बाढ़ के मैदान पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील हैं और इस क्षेत्र में कोई भी अवैध अतिक्रमण या निर्माण इसके लिए बड़ा खतरा है।जस्टिस धर्मेश शर्मा ने कहा,"बाढ़ के मैदान का क्षेत्र निर्दिष्ट निषिद्ध गतिविधि क्षेत्र है और नदी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण तत्व है। इस क्षेत्र पर अतिक्रमण से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है, जिसके परिणामस्वरूप जलमार्गों का मोड़ होता है और आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ आती है।"न्यायालय ने कहा,"वास्तव में कई...
सेवा से बर्खास्तगी से पंजाब सिविल सेवा नियमों के तहत पेंशन संबंधी लाभ पर रोक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने एक बर्खास्त पंजाब पुलिस अधिकारी के लिए पेंशन लाभ की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने पुष्टि की कि सेवा से बर्खास्तगी पंजाब सिविल सेवा नियम के नियम 2.5 के तहत पेंशन अधिकारों को रद्द करती है। कोर्ट ने माना कि पेंशन केवल उन लोगों को उपलब्ध है, जिन्हें सेवानिवृत्त होने की अनुमति है और बर्खास्तगी के बावजूद पेंशन देने से अनुशासनात्मक कार्यवाही निरर्थक हो जाएगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जबकि बर्खास्त कर्मचारी असाधारण...
हाईकोर्ट अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका में 50% से अधिक न्यायिक रिक्तियों को शीघ्रता से भरने की मांग की गई
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें हाईकोर्ट में सभी मौजूदा 81 न्यायिक रिक्तियों (स्वीकृत 160 जजों की संख्या का 50% से अधिक) को समयबद्ध तरीके से समय पर और शीघ्रता से भरने के लिए निर्देश देने की मांग की गई।यह कहते हुए कि हाईकोर्ट अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जनहित याचिका में इस न्यायालय में न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए अनिवार्य और सख्ती से पालन किए जाने वाले बाध्यकारी दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने की भी मांग की...
राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्मी डेंटल कोर में कमीशन के लिए अधिकारियों के चयन की नीति के खिलाफ दायर याचिका खारिज की, कहा- याचिकाकर्ता सभी प्रयासों में असफल रहा
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने हाल ही में आर्मी डेंटल कोर में स्थायी कमीशन के लिए अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया पर 1996 की नीति के खिलाफ दायर एक अभ्यर्थी की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने निर्णय यह देखते हुए कि अभ्यर्थी ने न केवल इस प्रक्रिया में भाग लिया था, बल्कि तीन बार असफल भी रहा। इस प्रकार न्यायालय ने कहा कि अभ्यर्थी को स्वीकृति के सिद्धांत द्वारा प्रतिबंधित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थी यह साबित नहीं कर सका कि प्रतिवादी की कथित कार्रवाई चयन प्रक्रिया के दरमियान खेल के...




















