हाईकोर्ट
एडमिशन फॉर्म में जमा करने के बाद कोई बदलाव स्वीकार्य नहीं, प्रतियोगी परीक्षाएं शीघ्रता से पूरी होनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी एडमिशन फॉर्म में एक बार जमा करने के बाद कोई भी बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं के संदर्भ में। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि चयन प्रक्रिया का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करना आवश्यक है।कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उस एडमिशन पॉलिसी को चुनौती दी गई थी, जिसमें आवेदन फॉर्म जमा करने के बाद उसमें किसी भी प्रकार के बदलाव की अनुमति नहीं दी जाती।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने...
किसी घटना या भारत का उल्लेख किए बिना केवल पाकिस्तान का समर्थन करना BNS की धारा 152 के अंतर्गत नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसी घटना का उल्लेख किए बिना या भारत का नाम लिए बिना केवल पाकिस्तान का समर्थन करना, प्रथम दृष्टया, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध नहीं बनता है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को दंडित करती है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने यह टिप्पणी एक 18 वर्षीय लड़के [रियाज़] को ज़मानत देते हुए की। रियाज़ पर BNS की धारा 152 और धारा 196 के तहत कथित तौर पर एक इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट करने का आरोप है।इस स्टोरी...
[Companies Act] कर्जदार कंपनी समापन कार्यवाही में पहली बार अपनी देनदारी का विरोध नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसी कंपनी के समापन के खिलाफ अपील खारिज की, जिसने सरकारी उद्यम को देय राशि का भुगतान नहीं किया था और जिसकी कोई व्यावसायिक गतिविधि या संपत्ति नहीं चल रही थी। न्यायालय ने कंपनी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि लोन को लेकर "वास्तविक विवाद" था। साथ ही कहा कि कंपनी की आपत्तियां बाद में उठाई गईं और भुगतान करने में उसकी असमर्थता पूरी तरह से स्थापित थी।जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ मेसर्स बेसीन मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। लिमिटेड ने...
'सड़क बनाने के लिए मालिक की बात सुने बिना इमारत नहीं गिराई जा सकती': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 (MMC Act) की धारा 291 के तहत ग्रेटर मुंबई नगर निगम (MCGM) द्वारा नई सड़क लाइन (RL) की मंज़ूरी रद्द की। कोर्ट ने कहा है कि यह कदम बिना सोचे-समझे उठाया गया और ज़मीन मालिक के सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है।चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस संदीप वी. मार्ने की खंडपीठ राघवेंद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसकी संपत्ति से होकर सड़क बनाने की मंज़ूरी देने के फैसले को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता को ज़मीन...
अनुबंध-पालक क्रेडिट कार्ड और सूदखोर उपभोक्ता
हांगकांग शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन बनाम आवाज़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश को रद्द कर दिया। अपने आदेश में एनसीडीआरसी ने कहा कि "क्रेडिट कार्ड धारकों द्वारा नियत तिथि पर पूरा भुगतान न करने या न्यूनतम देय राशि का भुगतान न करने पर बैंकों द्वारा उनसे 30% प्रति वर्ष (या उससे अधिक) से अधिक ब्याज दर वसूलना एक अनुचित व्यापार व्यवहार है।" कोष्ठक मेरे हैं।न्यायालय ने एनसीडीआरसी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करने की तीखी आलोचना की, खासकर...
जेएंडके हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने और FIR के 8 महीने बाद 69 वर्षीय बुजुर्ग को गिरफ्तार करने के मामले में पुलिसकर्मी के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी संबंधी दिशानिर्देशों पर अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य, 2014 के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित निर्देशों का उल्लंघन करने पर एक पुलिस अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने मामूली अपराधों से जुड़े एक मामले में अनधिकृत गिरफ्तारी के लिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की, जिसमें एक 69 वर्षीय व्यक्ति को आरोपी बनाया गया था।अदालत ने पाया कि प्रतिवादी पुलिस अधिकारी ने अर्नेश कुमार मामले में व्याख्या की गई सीआरपीसी की धारा 41...
पुलिस स्थापना समिति की सिफारिश के बिना राज्य पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस तबादलों के लिए वैधानिक सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करते हुए, एक उप-मंडल पुलिस अधिकारी का तबादला रद्द कर दिया और कहा कि ऐसे तबादले पुलिस स्थापना समिति की सिफारिशों पर ही किए जाने चाहिए और राज्य सरकार इस अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार नहीं कर सकती। न्यायालय ने कहा कि तबादले हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, 2012 की धारा 12 और 56 के अनुसार होंगे और प्रकाश सिंह एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य, 2006 में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। ...
'संवैधानिक न्यायालय अन्याय को रोकने के लिए राहत प्रदान कर सकते हैं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने CAPF चयन में उम्मीदवारी की अस्वीकृति को खारिज किया
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध रॉय की पीठ ने कहा है कि अनुच्छेद 226 के तहत संवैधानिक न्यायालय यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि कोई भी नागरिक अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों से वंचित न रहे, जिनका वह हकदार है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि नागरिकों के साथ कोई अन्याय न हो, न्यायालय को किसी विशेष मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आलोक में राहत देने का अधिकार है। वर्तमान मामले में, चिकित्सा आधार पर याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को खारिज करने के फैसले को खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने...
BREAKING | हाईकोर्ट ने 'उदयपुर फाइल्स' फिल्म की रिलीज़ पर लगाई रोक, केंद्र से फैसला लेने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने विवादास्पद फिल्म "उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर" की रिलीज़ पर रोक लगा दी। इस रोक के साथ ही इस्लामी धर्मगुरुओं के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य याचिकाकर्ताओं को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्म के लिए दिए गए प्रमाणन के खिलाफ केंद्र सरकार से संशोधन का अनुरोध करने की अनुमति मिल गई।बता दें, केंद्र सरकार जब तक याचिकाकर्ता की संशोधन याचिका पर अंतरिम राहत पर फैसला नहीं ले लेती, तब तक हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगा दी। यह फिल्म उदयपुर के दर्जी...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन फिल्म टिकटों पर सर्विस चार्ज लगाने से रोकने वाला आदेश किया रद्द
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार को 4 अप्रैल, 2013 और 18 मार्च, 2014 को जारी दो सरकारी आदेशों (GO) को रद्द कर दिया, जिनके तहत महाराष्ट्र सरकार ने सिनेमा मालिकों को ऑनलाइन टिकटों पर सेवा शुल्क या सुविधा शुल्क लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था।जस्टिस महेश सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि उक्त GO किसी भी पेशे को अपनाने के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।खंडपीठ ने आदेश में कहा,"हमारा मानना है कि विवादित GO ने थिएटर मालिकों और अन्य लोगों को अपने ग्राहकों से सुविधा शुल्क...
सद्भावना के आधार पर बेदखली के लिए लगातार याचिकाएं वर्जित नहीं, भले ही इसी आधार पर पहले दायर किया गया मुकदमा खारिज कर दिया गया हो: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि बेदखली के लिए दायर याचिका वर्जित नहीं मानी जा सकती, भले ही आवश्यकता के प्रश्न पर मकान मालिक के विरुद्ध पहले भी निर्णय हो चुका हो, इस आधार पर कि मकान मालिक को भविष्य में कभी भी सद्भावना और वास्तविक आवश्यकता नहीं होगी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ बेदखली के लगातार मुकदमे के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पहले भी एक बार मकान मालिक ने साड़ी की दुकान चलाने की आवश्यकता के आधार पर बेदखली का मुकदमा दायर किया, जिसे खारिज कर दिया गया। अब फिर से टूर...
नई आबकारी नीति के प्रावधान केवल नए आवेदनों पर लागू होंगे, पहले से मौजूद गोदामों पर नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने शराब लाइसेंस धारक द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में उसने आशंका जताई थी कि राजस्थान आबकारी एवं विधिक संयम नीति 2024-25 में संशोधन के कारण उसका लाइसेंस नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि याचिका समय से पहले ही दायर की जा चुकी है और नई नीति के तहत नवीनीकरण न मिलने की आशंका मात्र याचिका को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि यह सर्वमान्य है कि नई नीति भविष्य में भी लागू रहेगी और पुरानी नीति के तहत वैध तरीके...
ससुराल वालों को सौंपे गए सोने को वापस पाने के लिए विवाहित महिला को देना होगा सबूत? हाईकोर्ट ने किया फैसला
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालतें शादी के समय अपने ससुराल वालों को सौंपे गए सोने के आभूषणों का दावा करने वाली महिला से सख्त सबूत की मांग नहीं कर सकतीं।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने कहा,“ज़्यादातर भारतीय घरों में, दुल्हन द्वारा अपने ससुराल वालों को सोने के आभूषण सौंपना वैवाहिक घर की चारदीवारी के भीतर होता है। नवविवाहित महिला अपने पति या ससुराल वालों को आभूषण सौंपते समय रसीद या स्वतंत्र गवाहों की मांग करने की स्थिति में नहीं होगी। ऐसे लेन-देन की घरेलू और...
क्या BNS की धारा 111 में 'संगठित अपराध' शामिल होने के कारण गैंगस्टर एक्ट निरर्थक नहीं हो गया? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111, जो 'संगठित अपराध' के अपराध को परिभाषित और दंडित करती है, उसके लागू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के प्रावधान 'अनावश्यक' हो गए।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब भी मांगा।खंडपीठ ने टिप्पणी की,"इस न्यायालय का मानना है कि BNS की धारा 111 का प्रावधान, उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PIL याचिकाकर्ताओं को मिल रहीं धमकियों पर जताई चिंता, लिया स्वतः संज्ञान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिक्रमण की शिकायतें लेकर जनहित याचिका दायर करके अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले याचिकाकर्ताओं के सामने 'रोजमर्रा की बीमारी' का न्यायिक नोटिस लिया है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे याचिकाकर्ताओं को नियमित रूप से धमकाया जाता है, अक्सर शारीरिक हमले या धमकियों के माध्यम से, अतिक्रमणकारियों द्वारा स्वयं या कभी-कभी, सरकारी अधिकारियों द्वारा भी। जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने अतिक्रमण के आरोपों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया था...
"सिर्फ़ 'गलत आदेश' पारित होने के कारण जज के ख़िलाफ़ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती", गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी को बहाल किया
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (9 जुलाई) को कथित कदाचार, भ्रष्ट आचरण और कर्तव्यहीनता के लिए सेवा से बर्खास्त एक न्यायिक अधिकारी को बहाल कर दिया। इस मामले में, अधिकारी ने कथित तौर पर एक पक्ष को ज़ब्त किए गए तेल टैंकरों को उनके मालिकों को सौंपने के लिए मजबूर किया था, जिन पर हाई-स्पीड डीज़ल चोरी का मामला दर्ज किया गया था।न्यायालय ने इसे अनुचित और गैरकानूनी करार दिया। न्यायालय ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जब तक कदाचार के स्पष्ट आरोप न हों, न्यायिक अधिकारी द्वारा "केवल इस आधार पर" कि कोई गलत आदेश पारित...
NEET-UG परीक्षा के दरमियान बिजली कटौतीः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने NTA की अपील पर आदेश सुरक्षित रखा, कहा- 'छात्रों के प्रति सहानुभूति, लेकिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं'
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर और उज्जैन केंद्रों पर बिजली गुल होने से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए NEET-UG 2025 परीक्षा की दोबारा परीक्षा आयोजित करने के सिंगल जज के निर्देश के खिलाफ NTA की अपील पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने पहले इस निर्देश पर रोक लगा दी थी। दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद, जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,"छात्रों को हुई परेशानी पर कोई विवाद नहीं है; हम ऐसी स्थिति में छात्रों के तनाव के मुद्दे को भी समझते...
यूट्यूबर मोहक मंगल की दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, ANI की ओर से दायर कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग
यूट्यूबर मोहक मंगल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, और एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) की ओर से अपने खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में दायर कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने गुरुवार को मामले की संक्षिप्त सुनवाई। उन्होंने सवाल किया कि क्या स्थानांतरण याचिका पर वह सुनवाई कर सकते हैं, क्योंकि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम के अनुसार, मामले की सुनवाई एक खंडपीठ द्वारा की जानी है।ANI की ओर से पेश हुए एडवोकेट सिद्धांत...
प्रतिष्ठा के लिए जांच नहीं बदली जा सकती: J&K हाईकोर्ट ने चोरी मामले में CBI जांच की याचिका खारिज की
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ मांग करने या किसी की प्रतिष्ठा और अहंकार को संतुष्ट करने के लिए जांच को दूसरी एजेंसी को नहीं सौंपा जा सकता। कोर्ट ने श्रीनगर में घर में चोरी के एक मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।जस्टिस वसीम सादिक नरगल की पीठ ने जोर देकर कहा कि हालांकि सीबीआई जैसी एक जांच एजेंसी से दूसरी जांच एजेंसी को स्थानांतरित करने की शक्ति केवल संवैधानिक अदालतों द्वारा ही की जा सकती है, लेकिन इस तरह के जांच संबंधी स्थानांतरण दुर्लभ और असाधारण मामलों में...
बाइक टैक्सी चलाना व्यापार का मौलिक अधिकार, राज्य परमिट रद्द नहीं कर सकता: OLA ने कर्नाटक हाईकोर्ट से कहा
उबर इंडिया, रैपिडो और ओला जैसे विभिन्न बाइक टैक्सी कंपनी द्वारा अपील में, जिसने राज्य में बाइक टैक्सियों के चलने पर राज्य सरकार के प्रतिबंध को बरकरार रखा था, एएनआई टेक्नोलॉजीज (ola) ने कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया है कि राज्य द्वारा इस तरह का कदम संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (g) के तहत एग्रीगेटर्स के व्यापार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।एग्रीगेटर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अरुण कुमार ने प्रस्तुत किया कि जबकि सिंगल जज ने पाया कि यह सही है कि एक मोटर बाइक पंजीकृत की जा सकती है और कैरिज परमिट की...



![[Companies Act] कर्जदार कंपनी समापन कार्यवाही में पहली बार अपनी देनदारी का विरोध नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट [Companies Act] कर्जदार कंपनी समापन कार्यवाही में पहली बार अपनी देनदारी का विरोध नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/07/02/500x300_607469-750x450566535-justices-mahesh-sonak-and-jitendra-jain-bombay-hc.jpg)
















