मुख्य सुर्खियां

इलाहाबाद हाईकोर्ट
भ्रष्टाचार ही गरीबी, असमानता, निरक्षरता, सामाजिक अशांति जैसी सभी समस्याओं का मूल कारण; यह एक दीमक की तरह है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में समाज में भ्रष्टाचार के बढ़ते खतरे पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार हर सिस्टम में एक दीमक की तरह है। एक बार सिस्टम में प्रवेश करने के बाद यह और बड़ा होता जाता है। अदालत ने टिप्पणी की, "भ्रष्टाचार हर व्यवस्था में एक दीमक है। एक बार यह व्यवस्था में प्रवेश कर जाता है तो यह बढ़ता ही जाता है। आज यह बड़े पैमाने पर है और एक दिनचर्या बन गया है। भ्रष्टाचार गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, प्रदूषण, बाहरी खतरे, अविकसितता, असमानता,...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छुपाते हुए बार बार याचिका दायर करने वाली दहेज हत्या की आरोपी पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दहेज हत्या की एक आरोपी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा है कि उसने महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों को छुपाते हुए अदालत के समक्ष लगातार आवेदन दायर करके कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और कोर्ट को गुमराह किया है।जस्टिस संजय कुमार सिंह की खंडपीठ ने आगे जोर देकर कहा कि अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए उच्चतम स्तर की ईमानदारी, निष्पक्षता, मन की पवित्रता होनी चाहिए और ऐसा न करने पर वादी को जल्द से जल्द कोर्ट से बाहर जाने का रास्ता दिखा देना चाहिए।संक्षेप में...

शिक्षक की ओर से दायर रिकवरी सूट पर सुनवाई सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में : कर्नाटक हाईकोर्ट
शिक्षक की ओर से दायर रिकवरी सूट पर सुनवाई सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि ‌‌सिविल कोर्ट के पास वेतन बकाया का दावा कर रही एक शिक्षक के मुकदमे पर सुनवाई और फैसला लेने का अधिकार है, यदि श‌िक्षक को स्कूल बंद होने के कारण कार्यमुक्त कर दिया गया और स्कूल प्रबंधन ने उसके बकाया वेतन के दावों पर कोई आदेश पारित नहीं किया है।जस्टिस डॉ एचबी प्रभाकर शास्त्री और जस्टिस एस रछैया की खंडपीठ ने हाल ही में सिविल कोर्ट द्वारा पारित 9 नवंबर, 2020 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसने एक उर्दू शिक्षक की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उसे इस पर सुनवाई का...

मद्रास हाईकोर्ट
नाबा‌लिग ड्राइविंगः 'मासूमों की जान चली गई है, ऐसे मामलों पर अपनी सहमति नहीं दे सकते', मद्रास हाईकोर्ट ने नाबालिग के मोटर दुर्घटना के दावे को खारिज किया

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मोटर दुर्घटना के दावे पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें दावेदार, जो एक नाबालिग था, दुर्घटना में शामिल मोटरसाइकिल चला रहा था। फैसले में कड़े शब्दों में जस्टिस एस कन्नमल ने कहा कि दावेदार जो दुर्घटना के समय एक नाबालिग लड़का था, वह बीमा कंपनी से मुआवजे की मांग नहीं कर सकता, जब वह खुद गलत काम करने वाला हो।हालांकि पीठ ने दावेदार की इस दलील से सहमति जताई कि मोटर वाहन अधिनियम एक 'परोपकारी कानून' है, लेकिन उसने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि सभी मामलों...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
अदालतों को स्टांप शुल्क की कमी पर प्री-अप्वाइंटमेंट स्टेज में मध्यस्थता को रोकने की आवश्यकता नहीं है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सिंगल जज एके मेनन के माध्यम से विचार किया कि क्या ऑर्ब‌िट्रेशन को प्री-अप्वाइंटमेंट स्टेज और प्री-रिफरेंस स्टेज में आयोजित किया जाना चाहिए या क्या पार्टी को रिफरेंस के बाद प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए और अपनी चुनौतियों को आगे बढ़ाने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।आवेदक विवेक मेहता और अन्य ने 29 अगस्त, 2009 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत पैदा हुए विवादों के समाधान के लिए एकमात्र आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के लिए ऑर्बिट्रेशन एंड कंसाइलेशन एक्ट,...

एडवोकेट्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष पर न्यायिक कदाचार का आरोप लगाया, खुद के खिलाफ एक मामले का फैसला करने के लिए कार्रवाई की मांग
एडवोकेट्स एसोसिएशन ने महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष पर 'न्यायिक कदाचार' का आरोप लगाया, खुद के खिलाफ एक मामले का फैसला करने के लिए कार्रवाई की मांग

कंज्यूमर कोर्ट्स एडवोकेट्स एसोसिएशन महाराष्ट्र और गोवा ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (महाराष्ट्र) के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ संतोष काकड़े पर "न्यायिक कदाचार" का आरोप लगाया है। उन्होंने खुद के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के एक मामले को खारिज करने कर दिया था। पिछले महीने मामले को बहाल कर दिया गया था।।एसोसिएशन ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) और बॉम्बे हाईकोर्ट को पत्र लिखकर एसोसिएशन के प्रस्ताव के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।जनरल बॉडी मीटिंग की बैठक के मिनट्स...

मैं इसे आज़ादी का प्रमाण पत्र मानता हूं: जस्टिस अकील कुरैशी ने अपने न्यायिक आदेशों पर केंद्र की नकारात्मक धारणा पर कहा
'मैं इसे आज़ादी का प्रमाण पत्र मानता हूं': जस्टिस अकील कुरैशी ने अपने न्यायिक आदेशों पर केंद्र की "नकारात्मक धारणा" पर कहा

राजस्थान हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अकील कुरैशी ने शनिवार को अपने विदाई भाषण में कुछ महत्वपूर्ण बयान दिए। देश में सबसे वरिष्ठ मुख्य न्यायाधीश होने के बावजूद, जस्टिस कुरैशी को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त नहीं करने के विषय में कानूनी बिरादरी में बहुत चर्चाएं हो रही हैं। यह व्यापक धारणा है कि गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सत्तारूढ़ दल के खिलाफ जस्टिस अकील द्वारा कुछ आदेशों के पारित होने के कारण केंद्र सरकार उनके पक्ष में नहीं है।अपने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप पर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप पर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न का आरोप पर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए संबंधित डीसीपी के हस्ताक्षर के तहत पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी।जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने उचित जांच के बाद मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी।अदालत महिला की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (ए), 354 (डी), 506 और 509 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली एक याचिका पर विचार कर रही थी।एफआईआर में कहा गया कि शिकायतकर्ता एक सरकारी कार्यालय में कार्यरत है और...

भारत के 48 मुख्य न्यायाधीशों में से जब हम साहस की बात करते हैं तो हमें वह शख्स याद आता है जिसे सीजेआई नहीं बनाया गया : जस्टिस अकील कुरैशी
भारत के 48 मुख्य न्यायाधीशों में से जब हम साहस की बात करते हैं तो हमें वह शख्स याद आता है जिसे सीजेआई नहीं बनाया गया : जस्टिस अकील कुरैशी

राजस्थान हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अकील कुरैशी ने शनिवार को अपने विदाई भाषण में कुछ महत्वपूर्ण बातें करते हुए एडीएम जबलपुर मामले में अपनी असहमति के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश नहीं बनाए गए जस्टिस एचआर खन्ना का ज़िक्र किया। जस्टिस अकील कुरैशी ने कहा,"भारत के 48 मुख्य न्यायाधीशों में से जब हम साहस की बात करते हैं तो हम उस व्यक्ति को याद करते हैं जिसे सीजेआई नहीं बनाया गया।"जस्टिस कुरैशी ने एडीएम जबलपुर मामले में अपनी असहमति के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश नहीं बनाए गए जस्टिस एचआर...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायालय को गलत सूचना देने के लिए पुलिस अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायालय को गलत सूचना देने के लिए पुलिस अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पुलिस अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने यह जुर्माना एक मामले में जमानत आवेदकों के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में न्यायालय को गलत जानकारी देने के लिए एक स्टेशन हाउस अधिकारी पर लगाया।जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक आवेदन पर सुनवाई कर हही थी। इसे पहले अदालत द्वारा पारित अपने जमानत आदेश में संशोधन की मांग करने वाले आवेदकों द्वारा स्थानांतरित किया गया। जमानत आवेदन की अनुमति दी गई, इस तथ्य के सत्यापन के तहत कि आवेदक पहली...

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल को टीडीसैट अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल को टीडीसैट अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल की सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी।चीफ जस्टिस डीएन पटेल 12 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।संचार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचना के अनुसार:"जैसा कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति द्वारा अनुमोदित है कि केंद्र सरकार दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति डीएन पटेल को अध्यक्ष, दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण के पद पर 250000/-...

एक साल बाद भी गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जा सके: कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में छह के खिलाफ आरोप तय किए
"एक साल बाद भी गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जा सके": कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में छह के खिलाफ आरोप तय किए

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले के सिलसिले में शुक्रवार को छह लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। इसमें कहा गया कि गवाहों के बयानों को आरोप तय करने के चरण में खारिज नहीं किया जा सकता है, भले ही हिंसा की घटना के एक साल से अधिक समय के बाद दर्ज किया गया हो।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने बिलाल अंसारी, सुहैल उर्फ ​​भोलू, इमरान, गुलफाम, समीर सैफी और सलमान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 380, 436, 457 सपठित धारा 149 के तहत आरोप तय...

एनडीपीएस एक्ट- आरोपी के खिलाफ ठोस सामग्री न होने की स्थिति में केवल सह-अभियुक्त से संपर्क, पुष्टि योग्य सामग्री नहीं : गुजरात हाईकोर्ट
एनडीपीएस एक्ट- आरोपी के खिलाफ ठोस सामग्री न होने की स्थिति में केवल सह-अभियुक्त से संपर्क, पुष्टि योग्य सामग्री नहीं : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है, ''आरोपी के खिलाफ ठोस सामग्री न होने की स्थिति में केवल सह-अभियुक्त के साथ सम्पर्क को पुष्टि योग्य सामग्री नहीं माना जा सकता।'' न्यायमूर्ति उमेश ए. त्रिवेदी की पीठ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 की धारा 8 (सी), 22 (सी), और 29 के तहत अपराधों के लिए धारा 439 के तहत एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से तर्क दिया कि आवेदक के कॉल रिकॉर्ड को छोड़कर, जो यह दर्शाता है कि उसने अपराध के समय के आसपास फोन किया था, सह-आरोपी के साथ...

सीजे जस्टिस कुरैशी की सेवानिवृत्ति से पहले जोधपुर के अधिवक्ताओं ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया
सीजे जस्टिस कुरैशी की सेवानिवृत्ति से पहले जोधपुर के अधिवक्ताओं ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया

राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अकील कुरैशी 6 मार्च, 2022 को सेवानिवृत्त होंगे। इस अवसर पर जोधपुर के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार चार मार्च को आयोजित कार्यक्रम में तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ स्टैंडिंग ओवेशन कर जस्टिस कुरैशी का अभिनन्दन किया। जस्टिस कुरैशी को 12 अक्टूबर, 2021 को ही त्रिपुरा हाईकोर्ट से राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया था।7 मार्च 1960 को जन्मे जस्टिस कुरैशी वर्ष 1983 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। 7 मार्च, 2004 को गुजरात उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश...

गुवाहाटी हाईकोर्ट
मृतक की ऐसी संपत्ति पर उसके बच्चे कोई दावा नहीं कर सकते, जो संपत्ति मृतक को उसके जीवनकाल में विरासत में नहीं मिली थीः गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने माना है कि मृतक की ऐसी संपत्ति पर उसके बच्चे कोई दावा नहीं कर सकते, जो संपत्ति मृतक को उसके जीवनकाल में विरासत में नहीं मिली थी। संपत्ति पर रहने का मतलब यह नहीं है कि संपत्ति उन लोगों को हस्तांतरित हो गई जो उस संपत्ति पर रह रहे हैं।जस्टिस नेल्सन सेलो ने देखा,"श्री के वनलालमानसावमा को अपने जीवनकाल में भूमि और संपत्ति का उत्तराधिकार नहीं मिला ... यदि ऐसा है, तो याचिकाकर्ताओं के पास दिवंगत की बेटी होने के आधार पर उक्त संपत्ति के लिए दावा करने का कोई आधार नहीं हो सकता है।" ...

मद्रास हाईकोर्ट
समय आ गया है कि लोक अभियोजकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें ताकि उन्हें प्रक्रियात्मक कानून से अवगत कराया जा सकेः मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने यह देखते हुए कि क्रॉस एक्जामिनेशन के दरमियान सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज बयान के निष्कर्ष को ठोस सबूत नहीं माना जा सकता है, ट्रायल कोर्ट की ओर से तीन हत्याओं के आरोपियों को दी गई उम्रकैद की सजा के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने दोहराया कि आपराधिक मुकदमे में गवाहों द्वारा शपथ पर दिए गए सबूत ठोस सबूत हैं।कोर्ट ने कहा,"... इसलिए, गवाह से जिरह के बहाने लोक अभियोजक द्वारा 161 (3) सीआरपीसी में निहित बयान को दोहराना कभी भी ठोस सबूत नहीं हो सकता है। यह ध्यान रखना...

[हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम] बेटियां उनके माता-पिता द्वारा विरासत में मिली संपत्ति में समान हिस्सेदारी की हकदार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोहराया
[हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम] बेटियां उनके माता-पिता द्वारा विरासत में मिली संपत्ति में समान हिस्सेदारी की हकदार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोहराया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि 2005 में संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, बेटियां भी अपने माता-पिता द्वारा विरासत में मिली संपत्ति में समान हिस्सेदारी पाने की हकदार हैं।न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा और अन्य के मामले का उल्लेख किया, जहां यह माना गया था कि, "1956 से पहले एक सहदायिक की मृत्यु पर हस्तांतरण केवल उत्तरजीविता द्वारा होता था। 1956 के बाद, महिलाएं भी असंशोधित धारा 6 के परंतुक में उल्लिखित अत्यावश्यकता में विरासत में मिल सकती हैं। अब...

एग्जाम की तैयारी करो: सुप्रीम कोर्ट ने केएसएलयू की तीन वर्षीय एलएलबी एग्जाम रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की
'एग्जाम की तैयारी करो': सुप्रीम कोर्ट ने केएसएलयू की तीन वर्षीय एलएलबी एग्जाम रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय (केएसएलयू) को तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम के लिए परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने कहा,"याचिका खारिज की जाती है। कोई राहत नहीं। वे कानून के छात्र हैं और भविष्य में वकील और न्यायाधीश बनना चाहते हैं?"जस्टिस एसजी पंडित और जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की कर्नाटक हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 14 दिसंबर, 2021 को एकल...

फोन टैपिंग मामला- आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ 25 मार्च तक कोई कठोर कार्रवाई न की जाए: बॉम्बे हाईकोर्ट
फोन टैपिंग मामला- 'आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ 25 मार्च तक कोई कठोर कार्रवाई न की जाए': बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने शुक्रवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला को अंतरिम राहत दी।कोर्ट ने पुणे पुलिस को निर्देश दिया कि 2015- 2019 के बीच कथित तौर पर राजनेताओं के फोन टैप करने के मामले में दर्ज प्राथमिकी में अगले आदेश तक उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई न करें। जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनआर बोरकर की खंडपीठ ने शुक्ला को सीआरपीसी की धारा 226 के साथ पठित धारा 482 के तहत दायर याचिका में राहत दी, जिसमें बुंद गार्डन पुलिस स्टेशन पुणे में भारतीय टेलीग्राफ एक्ट की धारा 26 के तहत दर्ज...