मुख्य सुर्खियां
राष्ट्रपति ने जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्त किया
केंद्र सरकार ने सात मार्च से जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस (भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 के अनुसार) के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की।उत्तराखंड हाईकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस एम एम श्रीवास्तव राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अकील अब्दुलहामिद कुरैशी के सेवानिवृत्त होने के परिणामस्वरूप हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कर्तव्यों का पालन करेंगे। जस्टिस कुरैशी छह मार्च 2022 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।इस संबंध में जारी अधिसूचना में कहा...
कोर्ट के आदेश के अभाव में एकल माता-पिता के बच्चों को पासपोर्ट जारी करने से इनकार नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट ने अधिकारी से मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपए का भुगतान करने को कहा
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने हाल ही में कोट्टायम में एक सहायक पासपोर्ट अधिकारी को मुकदमे के खर्च के लिए अपने वेतन से 25,000 रुपए का भुगतान एकल माता-पिता की बेटी को पासपोर्ट फिर से जारी करने का निर्देश दिया है।अपने आदेश में, न्यायमूर्ति अमित रावल ने इसे सहायक पासपोर्ट अधिकारी द्वारा वैवाहिक कलह का सामना कर रहे एकल माता-पिता के बच्चे को पासपोर्ट फिर से जारी करने और उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाने और अदालत का आदेश प्राप्त करने का निर्देश देने पर आपत्ति जताने का एक उत्कृष्ट मामला बताया...
रूस-यूक्रेन संघर्ष: फंसे हुए भारतीय नागरिकों को लाने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैंः राजस्थान हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा
राजस्थान हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि उसकी एजेंसियां रूस के साथ संघर्ष के बीच यूक्रेन में फंसे छात्रों सहित भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठा रही हैं।अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी ने अदालत को अवगत कराया कि भारत सरकार ने ऑपरेशन "गंगा" शुरू किया है। इसके तहत वह विभिन्न देशों के माध्यम से यूक्रेन की राजधानी यानी कीव के लिए विभिन्न उड़ानें भेज रही है। एएसजी ने कहा कि अधिकारी सुझावों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।यह घटनाक्रम राजस्थान के बारां जिले के दो...
मेघालय सरकार ने राज्य में मामलों की जांच के लिए सीबीआई को दी गई 'सामान्य सहमति' वापस ली
मेघालय सरकार ने राज्य में मामलों की जांच के लिए सीबीआई [दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत] को दी गई 'सामान्य सहमति' को वापस ले लिया है। पीटीआई न्यूज एजेंसी के हवाले से यह खबर आई है।सीबीआई को अब केस-टू-केस आधार पर राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही मेघालय सीबीआई को जांच के लिए आम सहमति वापस लेने वाला नौवां राज्य बन गया है। इससे पहले मिजोरम और सात अन्य राज्यों, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और केरल ने अपनी 'सामान्य सहमति' वापस ले चुके हैं।यह ध्यान...
प्री-ट्रायल स्टेज में भी पोक्सो एक्ट की धारा 29 के तहत अनुमान लागू होता है: जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा है कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) की धारा 29 के तहत अनुमान की भूमिका प्री-ट्रायल स्टेज में भी होती है।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की समन्वय पीठ की ओर से बद्री नाथ बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, 2020 (6) जेकेजे (एचसी) 255 में प्री-ट्रायल स्टेज में जमानत पर विचार करते हुए अधिनियम की धारा 29 के तहत अनुमान की प्रयोज्यता पर दिए निर्णय से सहमति व्यक्त करते हुए ऐसी टिप्पणी की। उल्लेखनीय है कि पोक्सो...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 1994 के हमले मामले में एचसीबीए के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला की सजा की कार्यवाही पर जिला न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रधान जिला न्यायाधीश (मुख्यालय) से दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (एचसीबीए) के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला की सजा की कार्यवाही के संबंध में एक रिपोर्ट मांगी। इस हमले में वर्ष 1994 में वकीलों द्वारा पूर्व न्यायाधीश सुजाता कोहली के साथ मारपीट की गई थी।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ कोहली द्वारा खोसला के खिलाफ दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता सुजाता कोहली, जो पहले पेशे से वकील थीं फिर दिल्ली की न्यायपालिका में...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महिला से अपनी धार्मिक पहचान छिपाने और शादी का झांसा देकर रेप करने के आरोपी को जमानत दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में अपनी धार्मिक पहचान के बारे में झूठ बोलकर और शादी का झूठा बहाना बनाकर एक महिला के साथ बलात्कार करने के आरोपी तौसीफ खान को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि घटना के समय महिला जाहिर तौर पर बालिग थी और उसके बयानों से दोनों के बीच सहमति होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।जस्टिस प्रणय वर्मा अपीलकर्ता की ओर से पेश जमानत याचिका पर विचार कर रहे थे। उस पर धारा 366, 376(2) (एन), 506-बी आईपीसी सहपठित मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रीलिज़न एक्ट, 2021 की धारा 5...
फोन टैपिंग केस: पुणे पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के खिलाफ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया
आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला ने पुणे पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, जिसमें 2015- 2019 के बीच राजनेताओं के फोन टैप करने का आरोप लगाया गया है, जब राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में था।शुक्ला वर्तमान में हैदराबाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) दक्षिण क्षेत्र के अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में तैनात हैं। वह मार्च 2016 और जुलाई 2018 के बीच पुणे शहर की पुलिस आयुक्त थीं, जब उन पर फोन टैपिंग करने का आरोप लगाया गया था।उनकी याचिका पर शुक्रवार को जस्टिस...
पश्चिमी क्षेत्र एनजीटी में न्यायिक सदस्य की अनुपस्थिति पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने एक जनहित याचिका पर सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में कम से कम एक न्यायिक सदस्य को नियुक्त करने की मांग की गई, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के विशेषज्ञ सदस्य के साथ काम कर सके।जस्टिस आर.एन.लद्दा और जस्टिस एम.एस.सोनाक की खंडपीठ ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर विचार करने का प्रस्ताव दिया।याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान में एनजीटी की पश्चिमी जोन बेंच के पास केवल एक विशेषज्ञ सदस्य बचा है। पश्चिमी क्षेत्र की बेंच को कोई न्यायिक सदस्य नहीं दिया गया। कहा गया कि जनवरी,...
वादी धारा 151 सहपठित आदेश XX नियम 6ए के तहत अर्जी दायर कर सकता है, जहां मुकदमा निर्णायक रूप से तय किया गया है, लेकिन कोई डिक्री नहीं दी गई थी: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट ने कहा है कि एक वादी धारा 151 के साथ पठित आदेश XX नियम 6ए के तहत आवेदन दायर कर सकता है, जहां उसके द्वारा दायर किए गए मुकदमे पर निर्णायक रूप से निर्णय तो लिया जाता है, लेकिन उस संबंध में कोई औपचारिक डिक्री नहीं दी गयी थी।न्यायमूर्ति एचएस थांगखिव की एकल पीठ ने कहा,"कोर्ट के सुविचारित मत के अनुसार ये प्रक्रियागत मामले हैं। चूंकि कोई डिक्री तैयार नहीं की गई थी, इसलिए याचिकाकर्ता को निचली अदालत के समक्ष सीपीसी के आदेश 20 नियम 6-ए के साथ पठित धारा 151 के तहत दिनांक 04.07.2016 के आदेश...
'16 साल के बच्चे माता-पिता में से किसी एक के साथ रहने का विकल्प चुनने में सक्षम': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मां को बच्चे की कस्टडी देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में अपीलकर्ता-मां को बच्चे की कस्टडी देने का आदेश पारित करने से इनकार किया। कोर्ट ने देखा कि बच्चों ने स्वयं अपने पिता के साथ रहने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की है।न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति सत्येंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा, "यह सच है कि दोनों नाबालिग हैं। हालांकि, 16 साल की उम्र ऐसी उम्र नहीं है, जहां एक बच्चा, माता-पिता में से किसी एक के साथ रहने का विकल्प दिया जाता है, उसके साथ रहने के अपने झुकाव के बारे में अपना मन नहीं बना पाता...
ओपन कोर्ट में महिला जज को अपशब्द कहने वाले वकील ने माफी मांगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 हजार रुपए के जुर्माने के साथ अवमानना मामले का निपटारा किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक वकील के खिलाफ एक अवमानना मामले का निपटारा किया, जिसने अदालत/न्यायिक अधिकारी के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी। दरअसल, वकील ने ओपन कोर्ट में एक महिला न्यायाधीश को अपशब्द कहा था।न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की खंडपीठ ने 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जिसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मऊ में जमा करना होगा।इसके अलावा, अवमानना करने वाले अधिवक्ता को उसके आचरण और व्यवहार के संबंध में दो साल की अवधि के लिए निगरानी में रखा...
सहायक सामग्री के बिना लिखित शिकायतों पर लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार का अपराध दर्ज करना विनाशकारी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज एक मामले में आरोप पत्र और उसके बाद की कार्यवाही को रद्द कर दिया।कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने आधी-अधूरी सामग्री के आधार पर मुकदमा चलाया और उसी आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति देना निरर्थकता होगी, जिसका नतीजा यह होगा कि दरअसल आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।जस्टिस शील नागू और जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की खंडपीठ सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर एक आवेदन पर विचार कर रही थी, जिसमें पीसी एक्ट की धारा 7 के तहत अपराध...
हत्या के लिए अपहरण: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आपसी समझौते पर आईपीसी की धारा 364 के तहत दर एफआईआर रद्द की
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 364 के तहत दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। उक्त एफआईआर "हत्या के लिए अपहरण" से संबंधित है।जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की सिंगल जज बेंच ने एफआईआर को खारिज करते हुए कहा,"हालांकि, यह न्यायालय सामान्य रूप से आईपीसी की धारा 364 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने में संकोच करेगा। यह देखा गया कि पक्षों के बीच कोई विवाद नहीं है और वे शांति और सद्भाव से रह रहे हैं।"एफआईआर प्रतिवादी नंबर तीन द्वारा दर्ज की गई थी। एफआईआर के अनुसार 14.11.2021 को प्रतिवादी नंबर...
यूपी पुलिस को सही साइट मैप तैयार करने के लिए निर्देशित करें, जांच के दौरान स्मार्ट फोन से अपराध स्थल की तस्वीर लें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी से कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस महानिदेशक, यूपी को निर्देश दिया कि जांच अधिकारियों को सही तरीके से साइट प्लान/मैप तैयार करने और स्मार्ट फोन से मौके की तस्वीरें लेने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करें।जस्टिस राजीव सिंह की खंडपीठ ने सामूहिक बलात्कार के एक आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि मामले में जांच अधिकारी ने बहुत ही सरसरी तौर पर साइट योजना तैयार की।पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह जांच के दौरान आयामों के...
स्पेशल कोर्ट ने महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक की ईडी रिमांड 7 मार्च तक बढ़ाई
मुंबई की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक की प्रवर्तन निदेशालय (ED) रिमांड 7 मार्च तक के लिए बढ़ाई।प्रवर्तन निदेशालय ने मलिक को भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के परिवार के सदस्यों के साथ कथित संपत्ति सौदों के आरोप में 23 फरवरी को गिरफ्तार किया था। उस दिन कोर्ट ने मलिक को 3 मार्च तक ईडी की हिरासत में भेज दिया था। कोर्ट ने आज ईडी रिमांड 7 मार्च तक बढ़ा दी।अदालत ने कहा, "यह देखते हुए कि आरोपी को 25 से 28 फरवरी तक अस्पताल में भर्ती कराया गया...
'राजा' जैसे शीर्षक न्यायालयों, सार्वजनिक कार्यालयों आदि में इस्तेमाल नहीं किए जा सकते क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 14, 18 और 363A के तहत निषिद्ध हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने माना है कि संवैधानिक न्यायालयों, अन्य सभी न्यायालयों, न्यायाधिकरणों, राज्य के सार्वजनिक कार्यालयों आदि में 'राजा', 'नवाब' और 'राजकुमार' जैसे अभिवादन और उपाधियों का उपयोग संविधान के अनुच्छेद 14, 18 और 363A के संदर्भ में प्रतिबंधित है।अदालत ने आदेश दिया कि उक्त प्रतिबंध सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ सार्वजनिक दस्तावेजों और सार्वजनिक कार्यालयों में भी लागू होगा।जस्टिस समीर जैन ने कहा,'उपरोक्त के आलोक में, यह न्यायालय मानता है कि संवैधानिक न्यायालयों, अन्य सभी...
दिल्ली में एक व्यक्ति घर में कितनी मात्रा में शराब रख सकता है? दिल्ली हाईकोर्ट ने बताया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 25 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति 9 लीटर भारतीय शराब और विदेशी शराब, यानी व्हिस्की, वोदका, जिन और रम, और 18 लीटर बीयर, वाइन और एल्कोपॉप रख सकता है।न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली निवासी के खिलाफ उसके घर में अवैध शराब भंडारण के लिए दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की।जानिए पूरा मामलायाचिकाकर्ता के घर से शराब की 132 बोतलें बरामद की गईं। इसमें 51.8 लीटर व्हिस्की, रम, वोदका, जिन और 55.4 लीटर वाइन, बीयर, एल्कोपॉप शामिल थे। इसके साथ ही...
क्या पति पर धारा 377 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, जब धारा 375 आईपीसी वैवाहिक यौन संबंध से छूट देती है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत एक पति पर पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध के अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, जब धारा 375 का अपवाद 2 वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध से छूट देता है। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को याचिकाओं के एक बैच से अलग कर दिया है, जिनमें वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण की मांग की गई थी। जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरिशंकर की खंडपीठ ने कई दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद संहिता की धारा...
गुजरात हाईकोर्ट जीएसटी डिपार्टेमेंट के वैधानिक समय अवधि से परे एससीएन जारी करने में देरी पर जब्त नकदी और माल जारी करने का निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने माल और सेवा कर (जीएसटी डिपार्टेमेंट) के वैधानिक समय अवधि से परे कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी कर जब्त नकदी और माल जारी करने का निर्देश दियाजस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस हेमंत एम. प्रच्छक की खंडपीठ ने कहा,"यह अमान्य है कि समय सीमा का पालन क्यों नहीं किया जाता है। कारण बताओ नोटिस जारी करने में वैधानिक समय अवधि से अधिक देरी हुई है। इसलिए, हस्तक्षेप इस न्यायालय के अंत में कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रतिवादियों के अधिकारों को खुला रखते हुए आवश्यक...




















