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किराया नियंत्रण अधिनियम का उद्देश्य मालिक को उनकी वास्तविक संपत्तियों से वंचित करना नहीं है: राजस्थान हाईकोर्ट
किराया नियंत्रण अधिनियम का उद्देश्य मालिक को उनकी वास्तविक संपत्तियों से वंचित करना नहीं है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने देखा है कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 1950 का मूल उद्देश्य बेईमान मालिकों से किरायेदारों के उत्पीड़न को बचाना है।अदालत ने कहा कि उक्त उद्देश्य मालिक को उनकी वास्तविक संपत्तियों से वंचित करना नहीं है।जस्टिस सुदेश बंसल ने देखा,"यह देखा जा सकता है कि किराया नियंत्रण कानून मकान मालिक और किरायेदार के बीच एक उचित संतुलन बनाने का हकदार था। एक तरफ जहां किरायेदार को आक्रामक रूप से डिजाइन किए गए लालची मकान मालिक के हाथों अपनी बेदखली के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा की आवश्यकता होती...

वर्चुअल कार्यवाही करने के लिए न्यायाधीशों की अनिच्छा तकनीकी प्रगति के साथ चलने में रुकावट: दिल्ली हाईकोर्ट
वर्चुअल कार्यवाही करने के लिए न्यायाधीशों की अनिच्छा तकनीकी प्रगति के साथ चलने में रुकावट: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि न्यायालयों को तकनीक के नवीनतम विकास के साथ तालमेल बैठाना है, कहा कि वर्चुअल कार्यवाही करने के लिए न्यायाधीशों की अनिच्छा तकनीकी प्रगति के अनुरूप नहीं है।यह कहते हुए कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती कार्यवाही के संचालन की प्रणाली को सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाईकोर्ट द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने इस प्रकार कहा:"इस प्रकार जिला न्यायालयों में न्यायाधीशों से भी यह सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है कि वीडियो...

कर्मचारियों को सर्विस करियर के अंत में जन्म तिथि बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए: उड़ीसा हाईकोर्ट
कर्मचारियों को सर्विस करियर के अंत में जन्म तिथि बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि जब कर्मचारी अपने सर्विस करियर के अंतिम दिनों में जन्मतिथि बदलने के लिए आवेदन करते हैं तो ऐसे आवेदनों पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही की खंडपीठ ने कहा,"अधिसूचना और उक्त दिशा-निर्देशों के अलावा, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट रूप से कहा है कि कर्मचारियों को सर्विस करियर के अंत में जन्म तिथि बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता के सर्विस करियर के अंतिम दिनों में परिवर्तन का आवेदन दायर किया गया...

कस्टडी के मामलों का फैसला देरी से करने में नाबालिग बच्चों का उत्पीड़न बढ़ सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
कस्टडी के मामलों का फैसला देरी से करने में नाबालिग बच्चों का उत्पीड़न बढ़ सकता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अभिभावक और वार्ड अधिनियम के तहत नाबालिग बच्चों की कस्टडी से संबंधित मामलों से निपटने के दौरान, न्यायालयों का यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि नाबालिग बच्चों की रक्षा की जाए और उनके हितों, दृष्टि और इच्छाओं को अधिकतम संभव सीमा तक संरक्षित किया जाए।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की बेंच ने कहा कि नाबालिग बच्चों की कस्टडी के मामलों को अदालतों द्वारा तेजी से निपटाया जाना चाहिए। अगर अदालत के फैसले में देरी होती है तो इससे नाबालिग बच्चों का लंबे...

कलकत्ता हाईकोर्ट
बहुत कम संभावना है कि गृहिणी पड़ोसियों से अपनी पीड़ा बताएगी: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के दोष में पति की सजा बरकरार रखी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 304 बी के तहत दहेज हत्या के अपराध के लिए पति की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने यह माना कि पड़ोसियों जैसे गवाहों के लिए यह बताना असंभव है कि क्या पीड़ित गृहिणी को वैवाहिक घर में प्रताड़ित किया गया था या नहीं।जस्टिस बिवास पटनायक और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से नोट किया कि मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे और लिगेचर मार्क के अलावा, जांच अधिकारियों ने सिर के पिछले हिस्से में सूजन और बायीं हथेली पर चोट के निशान पाए...

कलकत्ता हाईकोर्ट
'मुकदमे में सफलता, प्रत्यावर्तन को रोकने के लिए आधार नहीं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ लंबित मुकदमे में बांग्लादेश की तस्करी पीड़िता को राहत दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में मानव तस्करी की पीड़िता की सहायता के लिए कहा कि एक सफल मुकदमे की संभावना का ह्रास पीड़ित को सुरक्षात्मक हिरासत से अपने देश में प्रत्यावर्तन को रोकने का आधार नहीं हो सकता है।जस्टिस जय सेनगुप्ता की पीठ फैसले के खिलाफ दायर एक अपील पर फैसला सुना रहे थे, जिसमें पीड़िता के अपने मूल देश में प्रत्यावर्तन के आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि इससे मामले में मुकदमे की संभावना को नुकसान होगा।वर्तमान मामले में, पीड़ित एक बांग्लादेशी नागरिक है, जिसे देह व्यापार में शोषण...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"छूट के लिए उनके मामले पर विचार करें": इलाहाबाद हाईकौर्ट ने 42 साल पुराने हत्या मामले में उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार से कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को 1980 के एक हत्या के मामले में दो आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को उनके मामले में छूट के लिए विचार करने का निर्देश दिया। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह और जस्टिस अताउ रहमान मसूदी की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वे छूट के लिए उनके मामले पर विचार करते समय उनकी अधिक उम्र और जेल में उनके आचरण को ध्यान में रखें।आरोपी के खिलाफ केसअभियोजन पक्ष के अनुसार रामदीन (मृत) उसका भाई केतर (घायल), आरोपी, शिकायतकर्ता और गवाह 'मंगता समुदाय' से...

P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man
पेंशन लाभ की गणना करते समय कर्मचारी द्वारा प्रदान की जाने वाली दैनिक वेतन सेवा पर विचार किया जाए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक रिट याचिका को अनुमति दी, जिसमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के एक कर्मचारी ने मांग की थी कि उसकी सेवाओं को नियमित करने तक उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली दैनिक वेतन सेवा को उसके पेंशन लाभों की गणना के लिए ध्यान में रखा जाना चाहिए।ज‌स्टिस हरसिमरन सिंह सेठी की खंडपीठ ने कहा कि पंजाब सिविल सेवा नियम, 1970 को प्रतिवादी-निगम द्वारा अपनाया गया है और उक्त नियमों के नियम 3.17 के अनुसार, एक कर्मचारी द्वारा उसके नियमितीकरण से पहले की गई दैनिक वेतन सेवाओं को...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट से रेप के आरोपी हाईकोर्ट वकील की जमानत याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट से रेप के आरोपी हाईकोर्ट वकील की जमानत याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने गुरुवार को एक हाईकोर्ट के वकील को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर लंबे समय तक एक लॉ स्टूडेंट का यौन और शारीरिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया है।एडवोकेट-आरोपी राजकरण पटेल के खिलाफ आरोपों को ध्यान में रखते हुए जस्टिस समित गोपाल की खंडपीठ ने इस प्रकार देखा,"अभियोक्ता आवेदक के कार्यालय में जूनियर थी। आरोप लॉ प्रैक्टिस करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ है और आरोपी एक महान पेशे में शामिल एक व्यक्ति है। एक वकील का कार्यालय कानून की अदालतों से कम सम्मानित...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
पुलिस सब-इंस्पेक्टर को जांच पड़ताल करने और चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (उप-निरीक्षक) को जांच करने और आरोप पत्र दाखिल करने का अधिकार है। पुलिस सब-इंस्पेक्टर द्वारा जांच के बाद दाखिल किए गए आरोप पत्र में कोई खामी नहीं है। जस्टिस के नटराजन की सिंगल जज बेंच ने कहा,"पुलिस सब-इंस्पेक्टर या इंस्पेक्टर दोनों थाने के प्रभारी हैं..., पुलिस सब-इंस्पेक्टर द्वारा उचित जांच के बाद दायर चार्जशीट में कोई दोष नहीं है। इसलिए इस आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती।"छह महीने से अधिक समय से जेल में...

न्याय के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यदि आवश्यक हो तो धारा 482 सीआरपीसी हाईकोर्ट को सीआरपीसी में विचार नहीं किए गए आवेदनों पर विचार करने का अधिकार देता हैः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
न्याय के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यदि आवश्यक हो तो धारा 482 सीआरपीसी हाईकोर्ट को सीआरपीसी में विचार नहीं किए गए आवेदनों पर विचार करने का अधिकार देता हैः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सीआरपीसी की धारा 482 हाईकोर्ट को असाधारण शक्तियां प्रदान करती है और न्याय की आवश्यकता के मामले में आपराधिक प्रक्रिया संहिता में विचार नहीं किए गए आवेदनों पर विचार करने का अधिकार देती है।कोर्ट ने कहा,"यह खंड इस न्यायालय को उन आवेदनों पर विचार करने की शक्ति देता है जिन पर दंड प्रक्रिया संहिता में विचार नहीं किया गया है, इस घटना में, यह महसूस किया जाता है कि न्याय के उद्देश्यों की आवश्यकता होगी कि न्यायालय असाधारण शक्तियों का प्रयोग कर सकता है जिनका...

शरजील इमाम ने दिल्ली कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के राजद्रोह आदेश के लाभ की मांग की
शरजील इमाम ने दिल्ली कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के राजद्रोह आदेश के लाभ की मांग की

शरजील इमाम ने दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में अपने खिलाफ एफआईआर में अंतरिम जमानत की मांग की है। उक्त एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह का अपराध शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में केंद्र सरकार को उक्त प्रावधान पर पुनर्विचार करने तक राजद्रोह कानून को स्थगित रखने के लिए कहा था।इमाम पर दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर 22/2020 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यूएपीए के तहत कथित अपराध को बाद में जोड़ा गया। एफआईआर नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दिल्ली के अलीगढ़ मुस्लिम...

आजम खान मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की जमानत की शर्त पर रोक लगाई, हाईकोर्ट ने जौहर विश्वविद्यालय की जमीन पर कब्जा करने का डीएम को दिया था निर्देश
आजम खान मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की जमानत की शर्त पर रोक लगाई, हाईकोर्ट ने जौहर विश्वविद्यालय की जमीन पर कब्जा करने का डीएम को दिया था निर्देश

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को जमानत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से दिए गए निर्देंशों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत आदेश में कहा था कि जिलाधिकारी को मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर को अपने कब्जे में लेना चाहिए। उल्लेखनीय है कि खान के नेतृत्व में ट्रस्ट विश्वविद्यालय का संचालन कर रहा है।जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अवकाश पीठ का विचार था कि, प्रथम दृष्टया, जमानत देने के लिए लगाई गई शर्तें असंगत हैं और आरोपियों की उपस्थिति...

राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम की धारा 148 के पहले प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया

एक्टिंग चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस समीर जैन की अध्यक्षता वाली राजस्थान हाईकोर्ट की पीठ ने आयकर अधिनियम की धारा 148 के पहले प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया है।याचिकाकर्ता/निर्धारिती ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148ए के खंड (बी) के तहत जारी नोटिस को चुनौती देते हुए यह रिट याचिका दायर की है।सबसे पहले, इस आधार पर कि प्रारंभिक जांच किए बिना, जो कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148ए के तहत आवेदन के लिए एक...

गुजरात हाईकोर्ट
जब तक मनमानी का स्पष्ट मामला नहीं बनता, अदालतें संविदात्मक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आम तौर पर, अदालतें संविदात्मक मामलों में हस्तक्षेप करने से घृणा करती हैं, जब तक कि मनमानी या दुर्भावना या पूर्वाग्रह या तर्कहीनता का स्पष्ट मामला नहीं बनता है।चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की पीठ ने कहा कि वाणिज्यिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से तबाही मच सकती है और इसलिए, न्यायालयों को ऐसे मामलों में अपनी सीमाओं का एहसास होना चाहिए।"हालांकि, साथ ही यह कानून का प्रस्ताव भी है कि संवैधानिक न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक होने के नाते,...

आयोजक जिम्मेदार: केरल हाईकोर्ट ने पुलिस को बच्चे द्वारा भड़काऊ नारे लगाने पर रैली आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया
'आयोजक जिम्मेदार': केरल हाईकोर्ट ने पुलिस को बच्चे द्वारा भड़काऊ नारे लगाने पर रैली आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर रैली के दौरान समाज की शांति भंग करने वाली कोई विवादास्पद टिप्पणी/नारे लगाए जाते हैं तो रैली के आयोजक भी उतने ही जिम्मेदार होते हैं।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने पुलिस को रैली के आयोजकों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने पिछले शनिवार को अलाप्पुझा जिले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा आयोजित 'जन महा सम्मेलन' में सार्वजनिक सम्मेलनों, मार्च, सामूहिक अभ्यास और मोटरसाइकिल रैलियों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर उक्त टिप्पणी की। ...

गुजरात हाईकोर्ट
एमएसएमईडी अधिनियम की धारा नौ के अनुसार 75% से अधिक राशि का प्री-डिपोसिट किश्तों में जमा किया जा सकता है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पक्षकार को माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (एमएसएमईडी) एक्ट, 2006 के तहत अपील की अनुमति दी। उक्त पक्षकार अधिनियम की धारा 19 के तहत पूर्व-डिपोज़िट बनाने के लिए अर्थात् 75% राशि का किस्तों में करने की मांग कर रहा था।याचिकाकर्ता अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के आदेश से पीड़ित था। उक्त न्यायाधीश ने अवॉर्ड अमाउंट के 75% को जमा करने के लिए समय के विस्तार के उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था।जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस समीर देव की पीठ ने कहा कि इस मामले...

सिंगल मैन और शादीशुदा महिला के लिए अधिनियम भेदभावपूर्ण: दिल्ली हाईकोर्ट में असिस्टेंट प्रोड्यूसर टेक्नोलॉजी एक्ट और सरोगेसी एक्ट के खिलाफ याचिका दायर
"सिंगल मैन और शादीशुदा महिला के लिए अधिनियम भेदभावपूर्ण": दिल्ली हाईकोर्ट में असिस्टेंट प्रोड्यूसर टेक्नोलॉजी एक्ट और सरोगेसी एक्ट के खिलाफ याचिका दायर

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि उक्त प्रावधान सरोगेसी के माध्यम से अपने परिवार का विस्तार करने के इच्छुक सिंगल मैन और विवाहित महिला, जिसके पास पहले से ही बच्चा है, के साथ भेदभाव करते हैं।एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस सचिन दत्ता की डिवीजन बेंच इस मामले शुक्रवार को सुनवाई करेगी।एडवोकेट आदित्य समदर के माध्यम से दायर की गई याचिका में तर्क...

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के 6 जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के 6 जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने निम्नलिखित हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश की है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह (आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से पटना हाईकोर्ट);जस्टिस चित्त रंजन दास (वर्तमान में उड़ीसा हाईकोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट);जस्टिस सुभासिस तालापात्रा (त्रिपुरा हाईकोर्ट से उड़ीसा हाईकोर्ट);जस्टिस लानुसुंगकुम जमीर (मणिपुर हाईकोर्ट से गुवाहाटी हाईकोर्ट);जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट से बॉम्बे हाईकोर्ट);जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से...