पेंशन लाभ की गणना करते समय कर्मचारी द्वारा प्रदान की जाने वाली दैनिक वेतन सेवा पर विचार किया जाए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

  • P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man

    Punjab & Haryana High Court

    पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक रिट याचिका को अनुमति दी, जिसमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के एक कर्मचारी ने मांग की थी कि उसकी सेवाओं को नियमित करने तक उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली दैनिक वेतन सेवा को उसके पेंशन लाभों की गणना के लिए ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    ज‌स्टिस हरसिमरन सिंह सेठी की खंडपीठ ने कहा कि पंजाब सिविल सेवा नियम, 1970 को प्रतिवादी-निगम द्वारा अपनाया गया है और उक्त नियमों के नियम 3.17 के अनुसार, एक कर्मचारी द्वारा उसके नियमितीकरण से पहले की गई दैनिक वेतन सेवाओं को उसके पेंशन लाभों की गणना के लिए अर्हक सेवा के रूप में माना जाएगा।

    यह आगे नोट किया गया कि यद्यपि याचिकाकर्ता की सेवाएं वर्ष 1982 में समाप्त कर दी गई थीं, इसे एक श्रम न्यायालय ने खराब माना था और याचिकाकर्ता को पिछले वेतन के साथ सेवा में बहाल कर दिया था। इसलिए, वह अपने पेंशन लाभों की गणना के लिए अपनी दैनिक वेतन सेवा को अर्हक सेवा के रूप में गिनने के लाभ का हकदार है।

    अदालत ने कहा कि केसर चंद बनाम पंजाब राज्य, सचिव, PWD, B&R चंडीगढ़ के माध्यम से और अन्य में हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा तय कानून के अनुसार, एक कर्मचारी द्वारा प्रदान की जाने वाली दैनिक मजदूरी सेवा को पेंशन लाभ की गणना के लिए एक अर्हक सेवा के रूप में ध्यान में रखा जाना हैऔर प्रतिवादी-निगम द्वारा कानून के इस स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन करने के लिए कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं रखा गया है।

    न केवल सेवा को नियंत्रित करने वाले नियम के अनुसार, बल्कि सीडब्ल्यूपी 2864-1983 में इस न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा तय किए गए कानून के स्थापित सिद्धांत के अनुसार, एक कर्मचारी द्वारा प्रदान की जाने वाली दैनिक वेतन सेवा को उसकी पेंशन लाभ गणना के लिए अर्हक सेवा के रूप में माना जाना चाहिए।

    इसलिए, न्यायालय ने प्रतिवादी-निगम को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के पेंशन लाभ की गणना सितंबर 1979 से उसके द्वारा प्रदान की गई दैनिक वेतन सेवा को ध्यान में रखते हुए उसकी सेवाओं को नियमित करने की तारीख तक के रूप में बकाया का लाभ भी प्रदान करे।

    कोर्ट ने आगे बकाये पर ब्याज के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जो बकाया अब पुनर्गणना किया जाएगा उस पर याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्त होने की तारीख से वास्तविक भुगतान जारी होने तक 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी लगेगा।

    उक्‍त अवलोकन के आलोक में अदालत ने रिट याचिका को स्वीकार कर लिया।

    केस टाइटल: महावीर सिंह बनाम उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड और अन्य


    आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story