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हाईकोर्ट ने अभियोजकों की रिक्तियों पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, उच्च वेतनमान देने के लिए उठाए गए कदमों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने अभियोजकों (Prosecutors) के रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ उन्हें उच्च वेतनमान देने के लिए उठाए गए कदमों पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ वर्ष 2009 में न्यायालय द्वारा शुरू किए गए एक स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई रही थी, जब पत्र याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में 5 से 12 साल तक जेल में रहने वाले विचाराधीन कैदियों के मुद्दे पर प्रकाश डाला गया है।हाल ही में सुनवाई के दौरान, एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट राजीव के...
POSH Act की धारा 18 के तहत अपील दायर करने में देरी को लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत माफ किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act/SHW Act) के तहत जांच रिपोर्ट के खिलाफ अपील दायर करने में पीड़िता की देरी को माफ किया जा सकता है, यदि इस तरह की देरी को सही तरह से समझाया गया है।जस्टिस सी हरि शंकर ने आगे कहा कि सीमा अधिनियम की धारा 5 (जो कुछ मामलों में निर्धारित अवधि के विस्तार का प्रावधान करती है) उन अपीलों के संबंध में लागू होगी जिन्हें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के धारा 18 के तहत प्राथमिकता दी जा सकती...
'जेल में सोने के लिए पर्याप्त जगह नहीं': मुंबई कोर्ट में ठाणे सेंट्रल जेल अधिकारियों ने चारपाई और गद्दे उपलब्ध कराने की कैदी की याचिका का विरोध किया
महाराष्ट्र के ठाणे सेंट्रल जेल की रिपोर्ट ने हाल ही में दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला है, जिसमें कई कैदियों ने आत्महत्या का प्रयास किया है। रिपोर्ट में यहां तक बताया गया कि जेल में कैदियों के सोने के लिए भी कोई जगह नहीं है।विशेष अदालत ने रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार विरोधी मामले में कैद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता रमेश कदम को राहत देने से इनकार कर दिया। कदम रीढ़ की हड्डी में दर्द का हवाला देकर चारपाई, गद्दा और तकिया मांग रहे थे।इसके जवाब में ठाणे सेंट्रल जेल के अधीक्षक ने अदालत...
दिल्ली दंगों के आरोपी खालिद सैफी ने जेल के अंदर बीमार पड़ने के बाद इलाज की मांग करते हुए कोर्ट का रुख किया
वर्तमान में 2020 के दिल्ली दंगों में एक बड़ी साजिश के मामले में न्यायिक हिरासत रह रहे यूनाइटेड अगेंस्ट हेट सदस्य खालिद सैफी ने जेल के अंदर बीमार पड़ने के बाद मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए तत्काल राहत की मांग करते हुए दिल्ली की एक अदालत का रुख किया है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष सैफी ने मेडिकल जांच और उपचार के लिए आवेदन दायर किया है। कोर्ट को बताया गया कि सैफी को तेज बुखार, शुगर और डायरिया है, इसलिए तुरंत उनकी मेडिकल रिपोर्ट मांगी जाए।तदनुसार, कोर्ट ने मामले को 27 जुलाई को सुनवाई के...
"औपनिवेशिक मानसिकता": मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस में आदेश प्रणाली के उन्मूलन के कार्यान्वयन का निर्देश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव को उच्च अधिकारियों के आवास पर वर्दीधारी फोर्स को हटाने के लिए तत्काल कदम उठाने और जनता के लाभ के लिए इन फोर्स का उपयोग करने का निर्देश दिया।न्यायालय ने उपरोक्त टिप्पणी सरकारी क्वार्टरों में नियमों के विरुद्ध अधिक समय तक रहने वाले वर्दी वाले फोर्स के स्टाफ के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।कोर्ट ने कहा,हर दिन हम इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल आदि के आचरण के बारे में बात कर रहे हैं। क्या आपने कभी उच्च...
"कुतुब परिसर के भीतर स्थित 'मुगल मस्जिद' एक संरक्षित स्मारक": नमाज रोकने का आरोप लगाते हुए दायर याचिका में केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) शहर के महरौली इलाके में कुतुब मीनार (Qutub Minar) के पूर्वी गेट से सटी एक मस्जिद (Mosque) में कथित रूप से नमाज़ अदा करने रोकने के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति की याचिका पर 12 सितंबर को सुनवाई करेगा।प्रश्न में मस्जिद, जिसे वक्फ बोर्ड द्वारा 'मुगल मस्जिद' कहा जाता है, कुतुब परिसर के भीतर स्थित है। हालांकि, यह कुतुब बाड़े के बाहर है और प्रसिद्ध 'मस्जिद कुव्वतुल इस्लाम' नहीं है।यह घटनाक्रम केंद्र की ओर से पेश वकील कीर्तिमान सिंह द्वारा निर्देश पर जस्टिस...
क्या पैटर्निटी डिस्प्यूट के मामले में बच्चे के डीएनए टेस्ट का आदेश दिया जा सकता है? केरल हाईकोर्ट जांच करेगा
केरल हाईकोर्ट ने कानूनी मुद्दे की जांच करेगा कि क्या पितृत्व विवाद (paternity dispute) के मामले में किसी बच्चे के डीएनए टेस्ट के लिए आदेश पारित किया जा सकता है? कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि क्या इस तरह के निर्देश को पारित करने से बच्चे के निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा, जिसे केएस पुट्टास्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया गया है।भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 112 का प्रभाव, जो एक वैध विवाह के निर्वाह के दौरान पैदा हुए बच्चे की वैधता का एक...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के 24 जुलाई के जजमेंट में 'प्रतिकूल' टिप्पणी को हटाने की मांग वाली मंत्री पार्थ चटर्जी की याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने पश्चिम बंगाल के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) द्वारा 24 जुलाई के आदेश में हाईकोर्ट के कुछ 'प्रतिकूल' टिप्पणियों को हटाने की मांग करते हुए दायर आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पार्थ चटर्जी को कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल से भुवनेश्वर के एम्स में ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया था।गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के मंत्री को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की सिफारिशों पर सरकारी प्रायोजित और सहायता प्राप्त...
"मुकदमे के किसी निष्कर्ष के बिना 13 साल की कैद ने आरोपी के त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन किया": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को अंतरिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते एक हत्या के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि मुकदमे के निष्कर्ष के बिना 13 साल की कैद ने त्वरित सुनवाई के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया। जस्टिस अजय भनोट की पीठ हत्या के आरोपी (महेश चंद्र शुक्ला) की चौथी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आईपीसी की धारा 302, 307, 323, 504, 506 और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत एक आपराधिक मामले में जमानत पर रिहा करने की मांग की गई थी।आवेदक-अभियुक्त के वकील ने तर्क दिया कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है...
'कोई सबूत नहीं': गुजरात हाईकोर्ट ने 1995 में नकली नोट रखने के आरोपी को बरी करने का आदेश बरकरार रखा
गुजरात हाईकोर्ट ने नकली नोटों के आरोपी को बरी करने के आदेश को पलटने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह नोट किया कि प्रतिवादी-अभियुक्त के अपराध को इंगित करने के लिए 'कोई सबूत' रिकॉर्ड में नहीं आया था। जस्टिस एसएच वोरा और जस्टिस राजेंद्र सरीन की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सबूत उपलब्ध नहीं मिला और केवल ट्रांसफर वारंट के आधार पर आरोपी को मामले में आरोपी बनाया गया था।आरोपी को आईपीसी की धारा 489A (नकली नोट या बैंक नोट), 489B (असली, जाली या जाली नोट या बैंक नोट के रूप में इस्तेमाल करना)...
मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति की पेशकश एक रियायत है, अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया है कि मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति केवल रियायत है और अधिकार नहीं है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह की सिंगल जज बेंच ने कहा,"अनुकम्पा के आधार पर रोजगार देने के पीछे पूरा उद्देश्य परिवार को अचानक संकट से उबरने में सक्षम बनाना है। मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति उक्त नियम का अपवाद है। यह एक रियायत है और अधिकार नहीं है।"इस मामले में याचिकाकर्ता हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक कर्मचारी की पत्नी थी, जिसकी सड़क दुर्घटना...
मुस्लिम कानून के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी की अनुमति के खिलाफ जनहित याचिका: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम कानून के तहत शादी की अनुमेय उम्र पर सवाल उठाने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में यूनियन ऑफ इंडिया को "बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021" के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तत्काल उपाय करने का निर्देश देने की मांग की गई है।गौरतलब है कि दिसंबर 2021 में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में "बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021" पेश किया था, जो महिलाओं के लिए शादी की...
ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के विशिष्ट आरोपों के अभाव में धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने के लिए विधानमंडल को सिफारिश नहीं कर सकते : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि वह सरकार को धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकता, खासकर जब जबरन धर्मांतरण के उदाहरणों को इंगित करने वाली किसी भी सामग्री का अभाव हो।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार को ज़बरदस्ती धर्मांतरण पर रोक लगाने वाले कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जो याचिकाकर्ता के अनुसार दिल्ली में एक गंभीर समस्या बन...
खुले स्थान/दूसरों को दिखने वाले स्थान से आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी से साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के साक्ष्य का उल्लंघन होता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि जब किसी आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी ऐसी जगह से की जाती है, जो खुली हरे या दूसरों को दिखाई देती हो तो यह साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत साक्ष्य को खराब करता है।यह ध्यान दिया जा सकता है कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 की प्रयोज्यता के लिए आवश्यक शर्तें [आरोपी से प्राप्त जानकारी कितनी साबित हो सकती है] हैं:(1) अभियुक्त से प्राप्त जानकारी के परिणामस्वरूप तथ्य की खोज;(2) इस तरह के तथ्य की खोज को अपदस्थ किया जाना है;(3) सूचना देने पर आरोपी को पुलिस हिरासत में होना चाहिए...
किसी विशेष समुदाय में पैदा हुए व्यक्ति को केवल उसकी मां/पत्नी दूसरे समुदाय से होने के कारण जाति प्रमाण पत्र से वंचित नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने मंगलवार को कहा कि किसी विशेष समुदाय में पैदा हुए व्यक्ति को केवल उसके निवास में बदलाव के कारण या उसकी मां और पत्नी दूसरे समुदाय से होने के कारण जाति प्रमाण पत्र से वंचित नहीं किया जा सकता है।जस्टिस वीजी अरुण ने कहा कि किसी व्यक्ति की सामुदायिक स्थिति का निर्धारण करने के लिए, उस जाति के बारे में जांच की जानी चाहिए जिसमें आवेदक का जन्म हुआ है और उसका पालन-पोषण कैसे हुआ और केवल यह तथ्य कि उसने निवास बदल लिया या दूसरी जाति के व्यक्ति से शादी कर ली, ये कारकों का...
"लोक अभियोजकों का राजनेताओं के साथ संबंध": हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को नैतिकता और मोरेलिटी पर रिफ्रेश कोर्स करने का आदेश दिया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक अभियोजकों की राजनेताओं के साथ घनिष्ठता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाल ही में पिछले 15 वर्षों में सेवा में शामिल सभी राज्य लोक अभियोजकों को नैतिकता पर रिफ्रेश कोर्स से गुजरने का निर्देश दिया।जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस चंद्र भूषण बरोवालिया की पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि अभियोजकों का काम किसी भी कार्यकारी या राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। पीठ ने कहा कि यदि अभियोजक अपने कार्यालय से समझौता करते हैं तो इसका विनाशकारी और हानिकारक होगा।कोर्ट ने आगे टिप्पणी...
एनआई अधिनियम के तहत छोटे अपराधों के लिए दोषी व्यक्ति के पैरोल आवेदन पर "उदारता" से विचार किया जाना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरू के केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए आरोपी द्वारा दायर पैरोल आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया है। आवेदक ने विवादित राशि का 50% सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस राशि की व्यवस्था करने के लिए पैरोल की मांग की है। दोषसिद्धि के विरुद्ध आरोपी की अपील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।जस्टिस एस जी पंडित की एकल पीठ ने बीएम मुनिराजू द्वारा दायर याचिका की अनुमति देते हुए जेल अधीक्षक...
मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति केवल रियायत है, अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दोहराया है कि मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति केवल रियायत है और अधिकार नहीं है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह की सिंगल जज बेंच ने कहा,"अनुकम्पा के आधार पर रोजगार देने के पीछे पूरा उद्देश्य परिवार को अचानक संकट से उबारने में सक्षम बनाना है। मृतक कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति उक्त नियम का अपवाद है। यह एक रियायत है और अधिकार नहीं है।"इस मामले में याचिकाकर्ता हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक कर्मचारी की पत्नी थी,...
अब जब स्कॉलरशिप वापस ले ली गई है तो आप स्व-वित्तपोषित कॉलेजों में बीपीएल छात्रों की सुरक्षा कैसे करेंगे? केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा
केरल हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के छात्र को स्व-वित्तपोषित कॉलेज में ट्यूशन फीस का भुगतान करने के लिए कैसे कहा जा सकता है, भले ही वह रियायती दर हो।जस्टिस देवन रामचंद्रन ने राज्य से यह भी जवाब देने के लिए कहा कि ऐसे छात्रों को अब कैसे संरक्षित किया जा सकता है, जबकि उनकी स्कॉलरशिप योजना पहले ही वापस ली जा चुकी है।न्यायालय बीपीएल श्रेणी के कुछ लोगों द्वारा एडवोकेट वी. सेतुनाथ के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई रहा था। इस...
महिला का शील भंग: दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी के दो स्कूलों में कंप्यूटर मुहैया कराने की शर्त पर आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi high Court) ने याचिकाकर्ता के घर में घरेलू नौकर के रूप में काम करने वाली एक महिला द्वारा दायर एफआईआर को पक्षों के बीच समझौते के बाद खारिज कर दिया है, जिस पर उसका शील भंग करने का आरोप है।हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा संचालित दो स्कूलों में प्रिंटर के साथ दो पूरी तरह कार्यात्मक कंप्यूटर प्रदान करने की शर्त लगाई।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा,"मेरा विचार है कि याचिकाकर्ता की ओर से किए गए कृत्यों और चूक के कारण पूरी पुलिस के उपयोगी समय का निवेश...


















