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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फेसबुक पर उल्फा की विचारधारा का कथित तौर पर प्रचार करने वाले UAPA आरोपी को जमानत देने से इनकार किया

Shahadat
6 Aug 2022 8:10 AM GMT
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फेसबुक पर उल्फा की विचारधारा का कथित तौर पर प्रचार करने वाले UAPA आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रतिबंधित संगठन (ULFA ) की विचारधारा का प्रचार करने के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक पोस्ट करने पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए )के तहत गिरफ्तार 24 वर्षीय युवक को जमानत देने से इनकार कर दिया।

जस्टिस कल्याण राय सुराणा की पीठ ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए कहा कि अब तक की गई जांच में याचिकाकर्ता को प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा का प्रचार करने वाले आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप लगाया गया है, जिसे याचिकाकर्ता ने अपने फेसबुक अकाउंट पर अपलोड किया था।

याचिकाकर्ता की कार्रवाई यूएपीए [एक आतंकवादी संगठन को दिए गए समर्थन से संबंधित अपराध] की धारा 39 के अर्थ के अंतर्गत आती है, अदालत ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 43 डी के प्रावधान का हवाला देते हुए उसे जमानत देने से इनकार कर दिया।

यूएपीए की धारा 43(डी)(5) के प्रावधान अदालत को किसी आरोपी को जमानत देने से रोकता है, अगर सीआरपीसी की धारा 173 के तहत दायर अंतिम रिपोर्ट के अवलोकन पर न्यायालय यह राय दे कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं।

संक्षेप में मामला

अदालत 24 वर्षीय अभिजीत गोगोई की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अभिजीत जिस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 (बी) / 121/121(ए) के साथ-साथ यूए(पी)ए अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उस पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित संगठन उल्फा के पक्ष में टिप्पणियां अपलोड करना जारी रखे हुए है।

हालांकि, उसके वकील ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता केवल 24 वर्षीय युवा लड़का है, जो सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करने के प्रभावों को नहीं जानता। चूंकि वह पहले ही 57 दिनों से हिरासत में है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

एपीपी ने उसकी जमानत की अर्जी का विरोध करते हुए केस डायरी पेश की। यह प्रस्तुत किया गया कि अब तक की गई जांच में याचिकाकर्ता को फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित संगठन के पक्ष में टिप्पणी शेयर करने का आरोप लगाया गया है। इस प्रकार याचिकाकर्ता उक्त प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा का प्रचार कर रहा था और उक्त संगठन के समर्थन में लिख रहा था।

नतीजतन, यह मानते हुए कि ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिसके आधार पर न्यायालय प्रथम दृष्टया यह पता लगा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अधिग्रहण असत्य है, अदालत ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया।

संबंधित समाचार में, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पिछले महीने एक कॉलेज की छात्रा (बोरशाहश्री बुरागोहेन/बोरशहरी बुरागोहेन) को जमानत दी थी, जिस पर कथित रूप से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) का समर्थन करने वाला फेसबुक पोस्ट लिखने का आरोप लगाया गया था।

जस्टिस अजीत बोरठाकुर की पीठ ने यह कहते हुए उसे जमानत दी थी कि चल रही जांच के लिए उसे और हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं हो सकती। वह 18 मई, 2022 से यानी 64 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में थी। उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 10(ए)(iv)/13(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

केस टाइटल - अभिजीत गोगोई बनाम असम राज्य [जमानत आवेदन/1605/2022]

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