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बिना किसी कारण के केवल सरकार बदलने पर अधिकारियों को नहीं हटा सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमवीए नियुक्तियों के हटाने का कारण पूछा
'बिना किसी कारण के केवल सरकार बदलने पर अधिकारियों को नहीं हटा सकते': बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमवीए नियुक्तियों के हटाने का कारण पूछा

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay high Court) ने बुधवार को टिप्पणी की कि भले ही विभिन्न सांविधिक बोर्डों, आयोगों और समितियों के सदस्यों की नियुक्ति और निष्कासन राजनीतिक इच्छा पर हो, कोई कारण दिया जाना चाहिए।पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस एसवी गंगापुरवाला ने कहा,"मैंने [अतीत में] एक विचार रखा है कि भले ही नियुक्ति और निष्कासन सरकार की इच्छा पर हो, कुछ कारण निर्दिष्ट होना चाहिए। हम इस बात पर ध्यान नहीं देंगे कि कारण पर्याप्त है या नहीं, लेकिन एक कारण होना चाहिए।"जस्टिस गंगापुरवाला और जस्टिस एमएस कार्णिक ने...

केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को दस्तावेजों का अंग्रेजी अनुवाद होने तक याचिका स्वीकार न करने का निर्देश दिया

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यवस्था दी कि रिट याचिका दायर करने वाले एडवोकेट को स्थानीय भाषा में दिए गए दस्तावेजों का अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत करना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को ऐसे अनुवाद के बिना याचिका स्वीकार करने से रोक दिया।जस्टिस अमित रावल स्थानीय भाषा में दस्तावेजों के साथ दायर याचिका सुनवाई कर रही थी। इस याचिका के साथ यह नोट लगाया कि अदालत द्वारा जब भी आवश्यकता होगी उक्त दस्तावेजों का अंग्रेजी अनुवाद पेश किया जाएगा।न्यायाधीश ने कहा कि हाईकोर्ट के नियमों में वकील को याचिका...

राज्य नीति की न्यायिक समीक्षा का दायर बहुत संकीर्ण: सिक्किम हाईकोर्ट ने मत्स्य पालन ब्लॉक ऑफिसर पद के लिए एससी/ एसटी/ ओबीसी उम्मीदवारों की आयु छूट को हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
राज्य नीति की न्यायिक समीक्षा का दायर "बहुत संकीर्ण": सिक्किम हाईकोर्ट ने मत्स्य पालन ब्लॉक ऑफिसर पद के लिए एससी/ एसटी/ ओबीसी उम्मीदवारों की आयु छूट को हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की

सिक्किम हाईकोर्ट ने हाल ही में सिक्किम राज्य अधीनस्थ मत्स्य सेवा (संशोधन) नियम, 2019 के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मत्स्य पालन नियम, 2008 द्वारा एसटी, एससी, एमबीसी और ओबीसी उम्मीदवारों को दी गई आयु में छूट को हटा दिया गया था।जस्टिस भास्कर राज प्रधान ने कहा कि यह सरकार पर है कि वह संविधान के अनुच्छेद 309 के प्रावधान के तहत नियम बनाते समय ऐसी आयु सीमा निर्धारित करे या यह निर्धारित करे कि किस हद तक कोई छूट दी जा सकती है।"यह मुद्दा कि क्या राज्य को आयु सीमा निर्धारित करने के लिए...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंगबाजी के लिए चीनी मांझा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के एनजीटी आदेश के कार्यान्वयन पर पुलिस से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंगबाजी के लिए 'चीनी मांझा' की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के एनजीटी आदेश के कार्यान्वयन पर पुलिस से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले चीनी सिंथेटिक मांझा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पारित आदेश के कार्यान्वयन पर दिल्ली पुलिस का जवाब मांगा।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ एडवोकेट संसेर पाल सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में पतंग उड़ाने के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।एनजीटी ने...

छह महीने के भीतर पुलिस विभाग में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्पष्ट नीति लागू करें: एमएटी ने महाराष्ट्र सरकार से कहा
छह महीने के भीतर पुलिस विभाग में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्पष्ट नीति लागू करें: एमएटी ने महाराष्ट्र सरकार से कहा

महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एमएटी) ने राज्य सरकार से छह महीने के भीतर राज्य पुलिस बल में "अन्य लिंग" जैसे ट्रांसजेंडरों के पद के लिए नीतिगत निर्णय लेने को कहा है।एमएटी अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) मृदुला भटकर और सदस्य मेधा गाडगिल की पीठ ने मामले को 3 नवंबर, 2022 के लिए स्थगित करते हुए राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग और सामाजिक न्याय और विशेष सहायक विभाग को राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ और अन्य, (2014) 5 एससीसी 438 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के संदर्भ...

कॉफ़ी विद करण टिप्पणी: राजस्थान पुलिस करण जौहर, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दर्ज करेगी
कॉफ़ी विद करण टिप्पणी: राजस्थान पुलिस करण जौहर, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या के खिलाफ "क्लोजर रिपोर्ट" दर्ज करेगी

राज्य सरकार ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट को सूचित किया कि पुलिस करण जौहर और क्रिकेटरों केएल राहुल और हार्दिक पांड्या के खिलाफ फिल्म निर्माता के टॉक शो कॉफी विद करण पर उनकी टिप्पणी को लेकर दर्ज आपराधिक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तैयार है।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी एफआईआर रद्द करने के लिए उनकी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जब लोक अभियोजक ने सूचित किया कि क्लोजर रिपोर्ट 11.3.2021 को पूरी हो गई है और इसे शीघ्र ही अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।बॉलीवुड टॉक शो के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
एससी/एसटी एक्ट के तहत पीड़ित को मुआवजा केवल आरोपी के दोषी ठहराए जाने पर दिया जाना चाहिए न कि एफआईआर दर्ज करने पर: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि एससी / एसटी अधिनियम के तहत पीड़ितों को मुआवजा केवल आरोपी की दोषसिद्धि पर दिया जाना चाहिए, न कि एफआईआर दर्ज करने और चार्जशीट दाखिल होने के पर।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने कहा,"यह कोर्ट रोज बड़ी संख्या में मामलों में इस प्रवृत्ति को नोटिस कर रहा है कि राज्य सरकार से मुआवजा प्राप्त करने के बाद, शिकायतकर्ता कार्यवाही को रद्द करने के लिए अभियुक्त के साथ समझौता करता है, और पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर कार्यवाही को रद्द करने के लिए सीआरपीसी...

केरल हाईकोर्ट
'क्रूरता' और 'आत्महत्या के लिए उकसाना' अलग-अलग अपराध; क्रूरता का दोषी होने का यह मतलब नहीं है कि वह स्वत: ही 'आत्महत्या के लिए उकसाने' का भी दोषी माना जाएगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि महज इसलिए कि एक आरोपी को आईपीसी की धारा 498ए (क्रूरता) के तहत दोषी पाया जाता है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसे आईपीसी की धारा 306 के तहत अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का भी दोषी ठहराया जाना चाहिए।जस्टिस ए. बधरुद्दीन ने जोर देकर कहा कि आईपीसी की धाराएं 498 ए (क्रूरता) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) स्वतंत्र हैं और अलग-अलग अपराध हैं।"सिर्फ इसलिए कि एक आरोपी को आईपीसी की धारा 498ए के तहत दंडित करने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है, इसका मतलब यह नहीं है कि...

दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनहित याचिका का इस्तेमाल नागरिकों को ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है: दिल्ली हाईकोर्ट ने एनजीओ पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए दस लाख रुपए का जुर्माना लगाया
"दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनहित याचिका का इस्तेमाल नागरिकों को ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है": दिल्ली हाईकोर्ट ने एनजीओ पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए दस लाख रुपए का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अनधिकृत निर्माण का आरोप लगाने वाली एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगता हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनहित याचिका का इस्तेमाल नागरिकों को ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने यह देखते हुए कि यह ब्लैकमेलिंग स्तर का मुकदमा है, एनजीओ को 30 दिनों की अवधि के भीतर सेना युद्ध विधवा...

प्रोसिक्यूशन हैंडिकेप्ड: पटना हाईकोर्ट ने एसपीपी/एसपी को प्रभावी जमानत सुनवाई के लिए राज्य के वकीलों के साथ केस-डायरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
प्रोसिक्यूशन "हैंडिकेप्ड": पटना हाईकोर्ट ने एसपीपी/एसपी को प्रभावी जमानत सुनवाई के लिए राज्य के वकीलों के साथ केस-डायरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने सीनियर पुलिस सुप्रीटेंडेंट और पुलिस सुप्रीटेंडेंट को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जमानत की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अभियोजन मामले के प्रभावी प्रतिनिधित्व के लिए प्रत्येक मामले के लिए राज्य के वकील को केस-डायरी/चार्जशीट उपलब्ध कराई जाए।यह मुद्दा तब उठा जब जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान, एपीपी राज्य के मामले का प्रतिनिधित्व करने और अदालत की प्रभावी रूप से सहायता करने के लिए "पूरी तरह से असहाय" रहे, क्योंकि उनके पास केस-डायरी/चार्ज-शीट की कॉपी नहीं थी।जस्टिस जितेंद्र...

गुजरात हाईकोर्ट
जीवन के अधिकार के तहत मेडिकल प्रतिपूर्ति की गारंटी: गुजरात हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को राहत दी

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को सेवानिवृत्त प्राथमिक स्कूल शिक्षक (याचिकाकर्ता) द्वारा किए गए पेसमेकर प्रत्यारोपण के लिए मेडिकल खर्चों की प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने उक्त निर्देश यह देखते हुए दिया कि मेडिकल प्रतिपूर्ति जीवन के अधिकार के रूप में गारंटीकृत अधिकार है।जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता गुजरात सिविल सेवा (चिकित्सा उपचार) नियम, 2015 के तहत प्रतिपूर्ति का हकदार होगा।बेंच ने कहा,"याचिकाकर्ता के अनुदान सहायता प्राप्त...

[अनुच्छेद 309] प्रासंगिक वैधानिक नियमों के तहत उचित वेतन और भत्ते प्राप्त करने का अधिकार सरकारी कर्मचारी का निहित अधिकार: त्रिपुरा हाईकोर्ट
[अनुच्छेद 309] प्रासंगिक वैधानिक नियमों के तहत उचित वेतन और भत्ते प्राप्त करने का अधिकार सरकारी कर्मचारी का निहित अधिकार: त्रिपुरा हाईकोर्ट

त्रिपुरा हाईकोर्ट (Tripura High Court) ने कहा कि प्रासंगिक वैधानिक नियमों के तहत उचित वेतन और भत्ते प्राप्त करने का अधिकार एक सरकारी कर्मचारी का निहित अधिकार है।जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ ने टिप्पणी की,"यह आगे प्रस्तुत किया गया है कि आरओपी नियम, 2009 और उसके बाद के संशोधन, वैधानिक कानूनों के उदाहरण हैं, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद -309 के प्रावधान के तहत त्रिपुरा सरकार द्वारा अधिनियमित किए गए हैं, जिसमें आईपीसो ज्यूर एक निहित अधिकार है। इसलिए, केवल ज्ञापन की शैली और फैशन में एक पत्र जारी करने से...

दिल्ली हाईकोर्ट
किसी व्यक्ति को बिना किसी नोटिस के "बुलडोजर की कार्रवाई" द्वारा बेदखल नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कथित अतिक्रमणकारियों को 'रातोंरात' हटाने में डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) की कार्रवाई का अवलोकन करते हुए कहा है कि व्यक्तियों को बिना किसी नोटिस के "सुबह या देर शाम" उनके दरवाजे पर बुलडोजर से बेदखल नहीं किया जा सकता है। वे पूरी तरह से आश्रयहीन हैं।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने आगे कहा कि ऐसे व्यक्तियों को एक उचित अवधि दी जानी चाहिए और किसी भी विध्वंस गतिविधियों को शुरू करने से पहले उन्हें अस्थायी स्थान प्रदान किया जाना चाहिए।आगे कहा,"डीडीए को इस तरह के किसी भी...

कृष्ण जन्मभूमि विवाद : मथुरा कोर्ट में शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग वाले मुकदमे की लंबित कार्यवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगाई
कृष्ण जन्मभूमि विवाद : मथुरा कोर्ट में शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग वाले मुकदमे की लंबित कार्यवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भूमि पर कथित रूप से बनी शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग करने वाले श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और अन्य निजी पक्षों द्वारा दायर एक मुकदमे में मथुरा अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी है। जस्टिस सलिल कुमार राय की पीठ ने यह आदेश 19 मई, 2022 को जिला न्यायाधीश, मथुरा द्वारा पारित निर्णय और आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें जिला न्यायाधीश ने माना था कि कथित तौर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भूमि पर बनी शाही...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
हैबियस कार्पस याचिकाओं का इस्तेमाल पुलिस पर जांच में तेजी लाने का दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिएः इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस पर अपनी जांच में तेजी लाने का दबाव बनाने के लिए दायर की जाने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कार्पस) याचिकाएं की प्रथा की कड़ी निंदा की है। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की पीठ ने इस प्रकार कहाः ''बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को केवल पुलिस पर याचिका का घमंड (वैनिटी) पूरा करने के लिए पुलिस अधिकारियों पर चाबुक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।'' अदालत ने यह भी नोट किया कि ऐसे मामलों में जहां अपहरण, अवैध कारावास, या फिरौती के कथित कृत्य के संबंध में एफआईआर...

मद्रास हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्यवाही सिविल प्रकृति की, पीड़ित की सहमति से फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित की जा सकती है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने माना है कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत कार्यवाही, हालांकि एक मजिस्ट्रेट के समक्ष, दीवानी प्रकृति की होती है। कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम को अधिनियमित करने में विधायिका का इरादा आपराधिक प्रक्रिया को अपनाकर घरेलू दुर्व्यवहार के पीड़ितों के लिए नागरिक कानून उपचार सुनिश्चित करना था।अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि अधिनियम के तहत मजिस्ट्रेट को विशेष शक्तियां प्रदान करते समय विधायिका के स्पष्ट इरादे थे, इसलिए पीड़ित की सहमति के बिना घरेलू हिंसा की कार्यवाही...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी जे मंजूनाथ की जमानत याचिका खारिज की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी जे मंजूनाथ की जमानत याचिका खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को आईएएस अधिकारी जे मंजूनाथ की जमानत याचिका खारिज कर दी। मंजूनाथ को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रिश्वत के एक मामले में गिरफ्तार किया है।जस्टिस के. नटराजन की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी।मंजूनाथ बेंगलुरु के पूर्व उप शहरी आयुक्त थे, जिन्हें एसीबी ने मामले में एक सह-आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एचपी संदेश द्वारा की गई कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियों के बाद गिरफ्तार किया था।यह प्रस्तुत किया गया था कि याचिकाकर्ता निर्दोष है और उसे बाहरी कारणों...

दिल्ली हाईकोर्ट
स्पीडी ट्रायल से इनकार अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन, यह जमानत का आधार हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि स्पीडी ट्रायल संविधान के अनुच्छेद 21 का एक आंतरिक हिस्सा है और इसे अस्वीकार करना कुछ परिस्थितियों में जमानत का आधार हो सकता है।जस्टिस जसमीत सिंह की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि बिना किसी मुकदमे के जल्द सुनवाई होने की संभावना के बिना जमानत से इनकार करने से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी व्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन होगा।संक्षेप में मामले के तथ्य यह है कि सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के अंतिम निपटारे तक नियमित जमानत पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत एक आरोपी...