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गुजरात खनिज नियम | जब्ती के 45 दिनों के भीतर उल्लंघन की एफआईआर दर्ज नहीं होने पर जब्त वाहन को छोड़ा जाएगा: हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना कि गुजरात खनिज (अवैध खनन, परिवहन और भंडारण की रोकथाम) नियम, 2017 के तहत निर्दिष्ट 45 दिनों की अवधि की समाप्ति पर जांचकर्ता के लिए लिखित शिकायत के साथ सत्र न्यायालय से संपर्क करना अनिवार्य है। साथ ही संपत्तियों को जब्त करना भी अनिवार्य है।इस तरह की कवायद के अभाव में, जब्त किए गए वाहन को बैंक गारंटी के लिए जोर दिए बिना, उस व्यक्ति के पक्ष में छोड़ना होगा, जिससे इसे जब्त किया गया था।यहां याचिकाकर्ता प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा कथित रूप से ओवरलोडेड बिल्डिंग लाइमस्टोन ले जाने...
वेजाइनल वाल्स में लालपन और सूजन 'पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' दिखाने के लिए पर्याप्त है, हालांकि पुरुष अंग लगाने का आरोप नहीं है: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट ने माना कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला द्वारा वेजाइनल वॉल्स में लालपन और सूजन, पेशाब करने में कठिनाई के साथ योनि में लिंग प्रवेश के पर्याप्त प्रमाण हैं, भले ही पुरुष अंग के 'पूर्ण सम्मिलन' का विशेष रूप से आरोप नहीं लगाया गया हो।चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की खंडपीठ ने युवा लड़की पर यौन उत्पीड़न करने के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रवेश के अपराध के लिए लिंग प्रवेश की थोड़ी सी भी डिग्री पर्याप्त होगा।कोर्ट ने...
एनडीपीएस मामले में नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी के दो साल बाद रासायनिक विश्लेषक ने एफएसएल रिपोर्ट में "गलती" स्वीकार करते हुए कहा कि कोई अवैध ड्रग्स बरामद नहीं हुआ
बॉम्बे हाई कोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) के तहत गलती से हिरासत में लिए गए नाइजीरियाई नागरिक को जमानत दे दी। इसके साथ ही होईकोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों को सर्वोच्च माना जाता है और कानून और व्यवस्था के प्रभारी उनसे जिम्मेदारी से कार्य करने की उम्मीद की जाती है, उनसे ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जाती। अधिकारियों की एक गलती की वजह से विदेशी नागरिक ने लगभग दो साल जेल में बिताए हैं।रासायनिक विश्लेषक ने इस साल की शुरुआत में आतंकवाद निरोधी दस्ते...
कस्टडी के लिए दायर याचिकाओं को स्थानांतरित करते समय बच्चे की सुविधा को वरीयता दी जाएगी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बच्चों की कस्टडी के लिए दायर याचिकाओं को स्थानांतरित करते समय बच्चे की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। खासकर जब पत्नी विदेश में हो और पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से पेशी हो रही हो।जस्टिस सी.एस. डायस ने दंपति के बीच सभी लंबित मामलों को उनके बच्चे के स्थायी निवास के पास की अदालत में स्थानांतरित कर दिया।कोर्ट ने कहा,"चूंकि ओपी नंबर 304/2019 और 357/2019 को अभिभावक और वार्ड अधिनियम, 1890 के तहत दायर किया गया है, अनुबंध बी में सहमत अंतरिम कस्टडी आदेशों के संबंध में...
केवल 5 से अधिक लोगों का एक जगह इकट्ठा होना गैरकानूनी सभा नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने श्रीलंकाई सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लॉ के छात्रों के खिलाफ मामला खारिज किया
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में श्रीलंका सरकार (SriLanka Government) के खिलाफ नारे लगाने के आरोपी 11 लॉ के छात्रों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया। छात्र "तमिल ईलम मुद्दों" को लेकर श्रीलंका सरकार का विरोध कर रहे थे।जस्टिस एन सतीश कुमार ने कहा कि छात्रों ने पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया और इस तरह की सभा को गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता।अदालत ने कहा,"किसी भी घटना में, केवल 5 से अधिक व्यक्तियों का एकत्र होना किसी भी अपराध की श्रेणी...
मैरिट के आधार पर शिकायत के निर्णय से पहले उपभोक्ता आयोगों को देरी के लिए माफी आवेदन पर निर्णय लेना चाहिए: उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि उपभोक्ता फोरम को मैरिट के आधार पर निर्णय से पहले उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act), 2019 के तहत शिकायत दर्ज करने में देरी के लिए माफी आवेदन पर निर्णय लेना चाहिए।नोट किया कि अधिनियम की धारा 69 (2) स्पष्ट रूप से प्रदान करती है कि किसी भी शिकायत पर तब तक विचार नहीं किया जाएगा जब तक कि आयोग, जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर, देरी को माफ करने के अपने कारणों को दर्ज नहीं करता है।चिकित्सा उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए...
''गरीब निरक्षर महिला'',''सीनियर सिटीजन'', ''ग्रामीण पृष्ठभूमि'': सुप्रीम कोर्ट ने एनडीपीएस की दोषी महिला की सजा कम की
सुप्रीम कोर्ट ने एक वृद्ध और अनपढ़ महिला को दी गई सजा को कम कर दिया, जिसे अवैध 'गांजा' की व्यावसायिक मात्रा रखने का दोषी पाया गया था। बुधियारिन बाई के साथ उसके दो बच्चों पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट 1985 (एनडीपीएस एक्ट) की धारा 20 (बी) (ii) (सी) के तहत 05 क्विंटल और 21.5 किलोग्राम अवैध 'गांजा' (कैनबिस) अपने पास रखने का आरोप लगाया गया था। दो अन्य लोगों पर भी एनडीपीएस एक्ट की धारा 27ए के तहत आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अवैध पदार्थ पहुंचाया। निचली अदालत ने बुधियारिन...
अर्नेश कुमार गाइडलाइंस : एपी हाईकोर्ट ने पुलिस को गिरफ्तारी प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया, 41-ए सीआरपीसी नोटिस जारी करें
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अलग-अलग मामलों में अग्रिम जमानत के लिए दो आवेदनों का निपटारा किया, जबकि राज्य पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गिरफ्तारी करने से पहले अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी प्रक्रिया और दिशा निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। अर्नेश कुमार निर्णय पुलिस को उन सभी मामलों में सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत पेश होने का नोटिस जारी करने के लिए बाध्य करता है जहां किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।गिरफ्तारी को लेकर...
[रेंट कंट्रोल] क्रॉस एग्जामिनेशन अधिकार नहीं, विवेकाधिकार का प्रयोग न्यायिक कार्यवाही में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए करनी चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (Madras high Court) ने हाल ही में कहा कि राज्य में किराया नियंत्रण कार्यवाही में एक पक्ष की क्रॉस एग्जामिनेशन "अधिकार" नहीं है और इसे अनुमति देने या अस्वीकार करने का कोर्ट का विवेक न्यायिक कार्यवाही में निष्पक्षता पर आधारित होनी चाहिए।जस्टिस एन शेषसायी ने यह भी कहा कि अदालत को विवेकाधिकार दिया गया है, विधायी जोर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन पर है। इसलिए, भले ही रेंट कोर्ट अपनी कार्यवाही को विनियमित कर सकता है, उसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।अदालत...
[दहेज हत्या] आरोपी ससुराल वालों द्वारा प्रस्तुत मृत्युकालीन बयान पर प्रमाणीकरण के बिना विश्वास नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद पीठ ने कहा कि बचाव पक्ष के माध्यम से रिकॉर्ड में लाए गए एक मृत्युकालीन बयान (Dying Declaration) को स्वीकार करने से पहले अदालतों को इसकी बारीकी से जांच करनी चाहिए।जस्टिस भरत देशपांडे ने सत्र अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें मृतक के पति और उसके परिवार के सदस्यों को दहेज हत्या के मामले में मृतक पत्नी के मृत्युपूर्व बयान के आधार पर बरी कर दिया गया था।अदालत ने देखा,"विश्वसनीयता की परीक्षा पास करने के लिए मृत्यु से पहले की घोषणा को इस तथ्य को...
अदालत पासपोर्ट अधिकारी को किसी नागरिक को पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दे सकती है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक रीज़नल पासपोर्ट अधिकारी को अंगोला स्थित भारतीय नागरिक के खिलाफ दायर सभी आपराधिक मामलों को दर्ज करने के बाद, उसके वीजा के रिन्यूवल के लिए इस नागरिक को पुलिस मंजूरी प्रमाण पत्र (Police Clearance Certificate) जारी करने का निर्देश दिया।जस्टिस आर रघुनंदन राव की एकल पीठ ने कहा कि प्राधिकरण विदेश में रहने वाले नागरिकों को इस तरह के प्रमाण पत्र जारी करता रहा है और यह स्टैंड नहीं ले सकता है कि चूंकि यह एक "स्वैच्छिक सेवा" है, इसलिए ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने या जारी...
होमगार्ड ड्यूटी भत्ता: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य को गृह रक्षक मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गृह रक्षक, होम गार्ड्स वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य के मामले में असम सरकार को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार होमगार्ड ड्यूटी भत्ता का भुगतान करने का निर्देश दिया।सुप्रीम कोर्ट ने उक्त निर्णय में देश के विभिन्न राज्यों विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, बॉम्बे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में होमगार्डों की कार्य स्थितियों पर विचार किया था।इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आपातकाल के दौरान और अन्य उद्देश्यों के लिए होमगार्ड का इस्तेमाल किया गया...
बिजली कंपनी को ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए भूमि मालिक की सहमति की आवश्यकता नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना कि एक बिजली कंपनी को ओवरहेड हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए एक निजी भूमि मालिक की सहमति की आवश्यकता नहीं होती है और अधिक से अधिक ऐसी भूमि के मालिक किसी भी नुकसान के लिए मुआवजे का दावा कर सकते हैं।जस्टिस बीरेन वैष्णव की एकल पीठ ने गुजरात राज्य विद्युत पारेषण निगम लिमिटेड बनाम रतिलाल मगनजी ब्रह्मभट्ट में एक खंडपीठ के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें माना गया था,"विद्युत अधिनियम, 2003 सभी क्षेत्रों में औद्योगिक और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए देश भर में बड़ी संख्या...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अभिनेता रजनीकांत की पत्नी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला खारिज किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुपरस्टार रजनीकांत की पत्नी लता रजनीकांत को आंशिक राहत देते हुए चेन्नई की विज्ञापन कंपनी द्वारा दायर निजी शिकायत में उनके खिलाफ धोखाधड़ी, झूठे बयान देने और झूठे सबूतों का इस्तेमाल करने के आरोपों को खारिज कर दिया।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मजिस्ट्रेट के आदेश को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 196, 199 और 420 के तहत उनके खिलाफ दायर अंतिम रिपोर्ट का संज्ञान लेने की हद तक खारिज कर दिया। यह आरोप लगाया गया कि लता ने जाली दस्तावेज के आधार पर बेंगलुरु की दीवानी अदालत में...
क्या 'पीड़ित' जो मामले में शिकायतकर्ता भी है और जिसने सीआरपीसी की धारा 372 के तहत अपील की है, को सीआरपीसी की धारा 378 (4) के तहत अपील करने की अनुमति प्राप्त करने के लिए कहा जाना चाहिए?: इलाहाबाद हाईकोर्ट विचार करेगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) एक दिलचस्प सवाल पर विचार करने के लिए सहमत हुआ कि क्या एक 'पीड़ित', जो मामले में शिकायतकर्ता भी है और जिसने धारा 372 सीआरपीसी के तहत अपील की है, को सीआरपीसी की धारा 378 (4) के तहत बरी होने के आदेश में अपील करने के लिए विशेष अनुमति प्राप्त करने के लिए कहा जा सकता है।जस्टिस मो. फैज़ आलम खान ने निम्नलिखित दिलचस्प प्रश्न तैयार किए हैं और इस मामले को 11 अगस्त, 2022 को गहन विचार-विमर्श के लिए सूचीबद्ध किया है।कोर्ट ने कहा,"जब शिकायतकर्ता स्वयं पीड़ित है, तो क्या...
जब अनुपस्थिति को सक्षम प्राधिकारी ने नियमित कर दिया हो तो अनुपस्थिति के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं चल सकती : मद्रास हाईकोर्ट
एक बर्खास्त पुलिस अधिकारी के बचाव में आते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक बार सक्षम प्राधिकारी ने चिकित्सा अवकाश की अवधि को नियमित कर दिया है, तो कदाचार के लिए कोई और अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं चलेगी।वर्तमान मामले में, हालांकि याचिकाकर्ता को तीन साल से अधिक समय से सेवा से अनुपस्थित बताया गया था, अदालत ने माना कि उसकी अनुपस्थिति को नियमित करने से उसे माफ कर दिया गया था।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम की पीठ ने कहा कि हालांकि आम तौर पर अधिकारियों द्वारा इतनी लंबी अनुपस्थिति को माफ नहीं किया...
दोषसिद्धि और सजा के फैसले के समय लागू नीति के तहत कैदियों को समय पूर्व रिहाई का लाभ दिया जा सकता है : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि कैदियों की समयपूर्व रिहाई, संबंधित दावे के संबंध में राज्य सरकार की लागू नीति, दोषसिद्धि और सजा के फैसले के समय लागू होने वाली नीति होगी।यह प्राचीन कानून है कि प्रासंगिक दावे पर नीति, उस समय की लागू नीति होगी, जब दोषसिद्धि का फैसला, और इसके परिणामस्वरूप कैदी पर आजीवन कारावास की सजा दी जाती है।अदालत आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी की याचिका पर आईपीसी की धारा 302, 120-बी और शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 25/27 के तहत दर्ज प्राथमिकी से संबंधित...
"आरोपी शॉर्ट टैम्पर्ड हो सकता है": सुप्रीम कोर्ट ने सहकर्मी की हत्या के आरोपी की दोषसिद्धि को संशोधित किया, शाहरुख का सुरक्षा गार्ड था आरोपी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते दिए एक फैसले में दोषी की धारा 302 आईपीसी के तहत दोषसिद्धी को धारा 304 भाग एक आईपीसी के तहत संशोधित करते हुए दोषी के शॉर्ट टैम्पर्ड होने की संभावना को ध्यान में रखा।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, "इस पर विवाद नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति किसी विशेष स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया करता है, यह किसी विशेष व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर करता है। एक गर्म स्वभाव वाला व्यक्ति शांत स्वभाव वाले व्यक्ति की तुलना में अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकता...
आईएनएस विक्रांत धोखाधड़ी मामले में किरीट सोमैया और उनके बेटे को मिली अग्रिम जमानत, अभियोजन पक्ष ने कहा- 'कोई सबूत नहीं'
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने बुधवार को भाजपा नेता किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) और उनके बेटे नील को युद्धपोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को बचाने के लिए एकत्र किए गए फंड की हेराफेरी मामले में अग्रिम जमानत दी।मुंबई पुलिस की ओर से सीनियर एडवोकेट शिरीष गुप्ते द्वारा प्रस्तुत किया कि लगभग 57 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बाद जस्टिस भारती डांगरे ने उन्हें राहत देते हुए एक पूर्व अंतरिम आदेश दिया।कोर्ट ने कहा,"जब सरकार ने आईएनएस को बंद करने का...
[वैधानिक जमानत] जमानत अदालत के पास सीआरपीसी धारा 167(2) के तहत मामले की मेरिट में जाने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि एक बेल कोर्ट धारा 167 (2) सीआरपीसी के तहत एक आवेदन पर विचार करते हुए मामले के गुण-दोष में में नहीं जा सकती है।अदालत डिफॉल्ट जमानत के एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह विचार करना पड़ा कि क्या आरोप पत्र या चालान दाखिल करने की वैधानिक अवधि समाप्त हो गई है, क्या आरोप पत्र या चालान दायर किया गया था और क्या आरोपी जमानत के लिए तैयार था और प्रस्तुत किया था।जस्टिस मुरली शंकर ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश की भी...









![[दहेज हत्या] आरोपी ससुराल वालों द्वारा प्रस्तुत मृत्युकालीन बयान पर प्रमाणीकरण के बिना विश्वास नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट [दहेज हत्या] आरोपी ससुराल वालों द्वारा प्रस्तुत मृत्युकालीन बयान पर प्रमाणीकरण के बिना विश्वास नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/08/10/500x300_429881-dying-declaration.jpg)







