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पुलिस हिरासत में स्वीकारोक्ति | साक्ष्य अधिनियम की धारा 26 में शामिल मजिस्ट्रेट का आशय कार्यकारी मजिस्ट्रेट नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
पुलिस हिरासत में स्वीकारोक्ति | साक्ष्य अधिनियम की धारा 26 में शामिल 'मजिस्ट्रेट' का आशय कार्यकारी मजिस्ट्रेट नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 26 में आया 'मजिस्ट्रेट' शब्द केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को संदर्भित करता है, न कि मजिस्ट्रेटों के किसी अन्य वर्ग को।जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा,"इसे कोई अन्य आशय देना सीआरपीसी की धारा 164 में निहित प्रावधानों को विफल कर देगा, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष वातावरण में अभियुक्तों की स्वीकारोक्तियों की रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपायों का प्रावधान करता है।"मामलापीठ एक...

सीपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो कोर्ट को लापता पक्षकार के लिए अभिभावक नियुक्त करने में सक्षम बनाता है: दिल्ली हाईकोर्ट
सीपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो कोर्ट को लापता पक्षकार के लिए अभिभावक नियुक्त करने में सक्षम बनाता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो अदालत को अपने सामने किसी ऐसे पक्षकार के लिए अभिभावक नियुक्त करने में सक्षम बनाता है, जो गायब है।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि संहिता के आदेश XXXII नियम 15 में केवल उन व्यक्तियों के हितों की रक्षा के लिए अभिभावकों की नियुक्ति की परिकल्पना की गई है, जो विकृत दिमाग के हैं या अदालत द्वारा जांच करने पर उनके मामले पर मुकदमा चलाने में असमर्थ पाए जाते हैं। पक्षकार के लापता होने की स्थिति में उक्त प्रावधान लागू...

भगवान सत्ताधारी पार्टी की जागीर नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने साईं बाबा शिरडी ट्रस्ट की प्रबंध कमेटी की नियुक्ति रद्द की
भगवान सत्ताधारी पार्टी की जागीर नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने साईं बाबा शिरडी ट्रस्ट की प्रबंध कमेटी की नियुक्ति रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने साईं बाबा शिरडी ट्रस्ट की प्रबंध समिति की नियुक्ति को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक ट्रस्ट के ट्रस्टियों को भक्तों की भलाई के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए, न कि "सत्तारूढ़ सरकार को अपने पार्टी कार्यकर्ताओं या राजनेताओं को समायोजित करने के लिए"।जस्टिस आरडी धानुका और जस्टिस एसजी मेहरे की खंडपीठ ने माना कि विधायक आशुतोष काले की अध्यक्षता वाली कमेटी को 2021 में पिछली महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की अगुवाई वाली सरकार द्वारा अवैध रूप से नियुक्त किया गया, विशेष श्री...

दिल्ली हाईकोर्ट
'सुनिश्चित करें कि स्मार्ट ऐप में उपस्थिति दर्ज करने में विफल रहने पर पैरामेडिकल स्टाफ का वेतन रोका न जाए': दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि उसके पैरामेडिकल टेक्निकल स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के कर्मचारियों का वेतन 28 अक्टूबर तक एमसीडी स्मार्ट ऐप में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाने के कारण रोका नहीं जाए।जस्टिस रेखा पल्ली ने एमसीडी द्वारा जारी 18 अगस्त, 2022 के एक संचार को चुनौती देने वाली वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें निर्देश दिया गया कि आरबीआईपीएमटी और एमवीआईडी अस्पतालों के सभी पैरा मेडिकल स्टाफ का...

रेलवे पुलिस बल के सिपाही स्वतंत्र गवाह नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के आरोपी को जमानत दी
रेलवे पुलिस बल के सिपाही स्वतंत्र गवाह नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के आरोपी को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के तहत गिरफ्तार आरोपी को जमानत दी, जिसने कहा कि उससे कथित रूप से बरामदगी, तलाशी और जब्ती करने वाले रेलवे पुलिस बल के कांस्टेबल को स्वतंत्र गवाह नहीं कहा जा सकता।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि हालांकि रेलवे स्टेशन पर तलाशी और जब्ती की गई, लेकिन कथित बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है, क्योंकि रेलवे पुलिस बल के कांस्टेबलों को स्वतंत्र गवाह नहीं कहा जा सकता।संक्षेप में मामलान्यायालय एनडीपीएस...

दिल्ली हाईकोर्ट
5-6 साल से बिना बिजली के रह रहे पाकिस्तानी हिंदू प्रवासियों' को एनओसी क्यों नहीं जारी किया गया? दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा कि शहर के आदर्श नगर इलाके में पिछले पांच से छह साल से बिना बिजली के रह रहे पाकिस्तानी हिंदू प्रवासियों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) क्यों नहीं जारी किया गया।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि उसे उम्मीद और भरोसा है कि केंद्र दो सप्ताह के भीतर उचित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए प्रवासियों की दुर्दशा को सहानुभूतिपूर्वक देखेगा।अदालत उन हिंदू प्रवासियों की ओर से दायर एक जनहित...

DHJS Exam: हाईकोर्ट ने एक अंक से असफल उम्मीदवारों की आंसर शीट का पुनर्मूल्यांकन करने से इनकार किया
DHJS Exam: हाईकोर्ट ने एक अंक से असफल उम्मीदवारों की आंसर शीट का पुनर्मूल्यांकन करने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दुर्लभ और असाधारण मामलों में जहां यह स्थापित हो जाता है कि आंसर शीट के मूल्यांकन में स्पष्ट त्रुटि है, अदालत उचित राहत प्रदान करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकती है।जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां यह स्थापित हो जाता है कि निर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए उम्मीदवारों का अधिकार बाधित हो गया है, वहां अदालतों के लिए उक्त शक्ति का प्रयोग करना आवश्यक हो सकता है...

दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहीन बाग में विध्वंस अभियान के विरोध में दर्ज एफआईआर में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहीन बाग में विध्वंस अभियान के विरोध में दर्ज एफआईआर में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस साल मई में शहर के शाहीन बाग इलाके में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के अधिकारियों द्वारा किए गए विध्वंस अभियान पर दर्ज एफआईआर के संबंध में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। (एफआईआर 182/2022 पीएस शाहीन बाग)जस्टिस अनु मल्होत्रा ​​की एकल पीठ ने निचली अदालत की कार्यवाही पर 19 अक्टूबर तक रोक लगा दी।पेशे से वकील आरफा खानम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह घटनाक्रम सामने आया। उक्त एफआईआर में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की...

मद्रास हाईकोर्ट ने व्यक्ति को जमानत के लिए शर्त के रूप में शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ पर्चे बांटने को कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने व्यक्ति को जमानत के लिए शर्त के रूप में शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ पर्चे बांटने को कहा

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोपी एक व्यक्ति की जमानत के लिए एक अनूठी शर्त रखी। अदालत ने उसे शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए पर्चे बांटने को कहा। जस्टिस एडी जगदीश चंडीरा की खंडपीठ ने जमानत देते हुए याचिकाकर्ता दीपन को दो सप्ताह तक प्रतिदिन सुबह और शाम "शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ पर्चे बांटने करने का निर्देश दिया।याचिकाकर्ता प्रतिदिन सुबह 9 बजे और शाम 5.00 बजे प्रतिवादी पुलिस के समक्ष रिपोर्ट करेगा और वह एलबी रोड जंक्शन, चेन्नई में ""शराब पीकर...

सीआरपीसी की धारा 278 | बयान पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद गवाह को सबूत में सुधार की अनुमति नहीं दी जा सकती: उड़ीसा हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 278 | बयान पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद गवाह को सबूत में सुधार की अनुमति नहीं दी जा सकती: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा ने कि एक गवाह को अपने बयानों में संशोधन या सुधार की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जो कि उसके एग्जामिनेशन इन चीफ और क्रॉस एग्जामिनेशन के माध्यम से दर्ज किए जाते हैं। सबूत/बयान पढ़े जाने के बाद वह अपने हस्ताक्षर जमा पत्र पर करता है।इस तरह की राहत से इनकार के खिलाफ एक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस संगम कुमार साहू की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा,"इस खंड द्वारा निर्धारित रीडिंग ओवर का उद्देश्य गवाह को अपनी कहानी बदलने में सक्षम बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है...

अपंजीकृत लेकिन अनिवार्य रूप से पंजीकरण योग्य दस्तावेज में मध्यस्थता खंड लागू किया जा सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अपंजीकृत लेकिन अनिवार्य रूप से पंजीकरण योग्य दस्तावेज में मध्यस्थता खंड लागू किया जा सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मध्यस्थता समझौते के लिए रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। एसएमएस टी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम चांदमारी टी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, (2011) 14 SCC 66 में सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों पर भरोसा करते हुए चीफ जस्टिस विपिन सांघी की पीठ ने दोहराया,"यहां तक ​​​​कि अगर यह एक कॉन्ट्रेक्ट या इंस्ट्रयूमेंट में खंडों में से एक के रूप में पाया जाता है तो यह विवादों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने के लिए एक स्वतंत्र समझौता होगा, जो मेन...

दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील द्वारा प्रतिनिधित्व नहीं किए गए व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा खारिज की, मामला वापस ट्रायल कोर्ट में भेजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में उस व्यक्ति को हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा के आदेश को पलट दिया, जिसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष वकील द्वारा पेश नहीं किया गया था। मामले को पीड़ित पक्ष के कुछ गवाहों के क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेज दिया।जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ का विचार था कि उस व्यक्ति के साथ न्याय का गंभीर गर्भपात हुआ है, क्योंकि जब गवाहों की संख्या की जांच की गई तो उसका प्रतिनिधित्व वकील द्वारा नहीं किया गया। वहीं ट्रायल कोर्ट के...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
ग्रेफाइट इंडिया का बेंगलुरु प्लांट पर 'पूर्ण स्वामित्व', राज्य सरकार को जमीन वापस नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्य को मैसर्स ग्रेफाइट इंडिया लिमिटेड को आवंटित भूमि को वापस लेने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। कंपनी के कामकाज से होने वाले प्रदूषण के कारण इलाके के निवासियों द्वारा कई शिकायतों के बाद कंपनी को उक्त भूमि पर संचालन बंद करना पड़ा था।कार्यवाहक चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने अमृतेश एनपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने याचिका में राज्य सरकार को ग्रेफाइट इंडिया को आवंटित भूमि को...

पटना हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कर्मचारी के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक जांच को समाप्त किए बिना उसके 100% पेंशन लाभ को रोकने के बिहार सचिवालय के आदेश को रद्द किया, 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया

पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने हाल ही में बिहार सचिवालय के कार्यालय द्वारा पारित एक आदेश को उलट दिया, जिसमें एक कर्मचारी के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक जांच को समाप्त किए बिना उसके 100% पेंशन लाभ को रोक दिया गया था।जस्टिस पी.बी. बजंथरी ने सचिवालय के अधिकारियों को बिहार पेंशन नियमों का पालन करने में "चूक" के लिए याचिकाकर्ता को 1 लाख रुपये जुर्माना का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।याचिकाकर्ता राज्य के योजना एवं विकास विभाग में उप सचिव के पद पर तैनात था। सेवा में रहने के दौरान उनके खिलाफ...

केरल हाईकोर्ट
नोटिस जारी किए बिना पारित एकतरफा आदेश निष्पादन के लिए सीपीसी की धारा 36 के दायरे में नहीं लाया जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि विपरीत पक्ष को नोटिस जारी किए बिना पारित आदेश को सीपीसी की धारा 36 के दायरे में नहीं लाया जा सकता है और इसे अदालत के माध्यम से तब तक निष्पादित नहीं किया जा सकता है जब तक कि विपरीत पक्ष को नोटिस के बाद के आदेश में विलय नहीं किया जाता।जस्टिस पी. सोमराजन ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां विपरीत पक्ष को नोटिस जारी किए बिना एकपक्षीय आदेश (Ex-Parte Orders) पारित किया गया, जिसमें आदेश XXXIX सीपीसी के नियम 3 से जुड़े प्रावधान के तहत पारित आदेश शामिल है, विरोधी पक्ष पर कोई...

बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने जनहित याचिका पर हो रही सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इस याचिका में हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाने की प्रार्थना की गई है।मुंबई यूनिवर्सिटी में कानून की प्रोफेसर डॉ. शर्मिला घुगे द्वारा दायर जनहित याचिका में यह भी प्रार्थना की गई कि 94 नियमित जजों की स्वीकृत शक्ति को पूरा करने की प्रक्रिया पूरी होने तक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जजों को एडहॉक जज के रूप में नियुक्त किया जाए।याचिका में कहा गया,वर्तमान जनहित याचिका में याचिकाकर्ता...

सरफेसी अधिनियम की धारा 14 | जिला मजिस्ट्रेट संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट को अधिकार सौंप सकते हैं: कलकत्ता हाईकोर्ट
सरफेसी अधिनियम की धारा 14 | जिला मजिस्ट्रेट संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट को अधिकार सौंप सकते हैं: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह माना कि वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और सुरक्षा ब्याज अधिनियम, 2002 ('सरफेसी अधिनियम') की धारा 14 के तहत सुरक्षित संपत्तियों का कब्जा लेते समय उठाया गया कदम मुख्य कदम है। इसलिए, मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट को कब्जा लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता नहीं है। उक्त शक्ति कार्यकारी मजिस्ट्रेट को भी सौंपी जा सकती है, जो उस पर कब्जा कर सकता है।चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने...

पटना हाईकोर्ट
धारा 142 एनआई एक्ट| चेक ड्रॉअर को वैधानिक नोटिस मिलने के एक महीने के भीतर शिकायत दर्ज नहीं होने पर मजिस्ट्रेट संज्ञान नहीं ले सकते: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध का संज्ञान लेने से मजिस्ट्रेट को मना किया गया है, यदि शिकायत उस तारीख के एक महीने के भीतर दर्ज नहीं की गई है, जिस दिन कार्रवाई का कारण पैदा हुआ है।जस्टिस प्रभात कुमार सिंह ने कहा,"एनआई एक्ट की धारा 142 के प्रोविसो के क्लॉज (सी) के अनुसार, ऐसी शिकायत चेक के ड्रॉअर को को नोटिस मिलने के एक महीने के भीतर दर्ज की जानी चाहिए, और उसके बाद 15 दिन बीत जाने के बाद ... यह तय कानून है कि मजिस्ट्रेट को अपराध का संज्ञान लेने से मना किया गया...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को 'आघात और सामाजिक दुखों से मुक्त' करने के लिए 23 सप्ताह की प्रेग्नेंसी के टर्मिनेशन की अनुमति दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक 12 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की तरफ से दायर उस रिट याचिका को अनुमति दे दी है,जिसमें उसने अपनी 23 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करवाने की अनुमति मांगी थी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जस्टिस अट्टाउ रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने मेडिकल विशेषज्ञों को न्याय के हित में गर्भावस्था को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। गौरतलब है कि जब मामला 8 सितंबर 2022 को सुनवाई के लिए आया था, तब कोर्ट ने पीड़िता की जांच करने और...