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इलाहाबाद हाईकोर्ट
"यौन प्रकृति के दुराचार के संबंध में कोई आरोप नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर का निलंबन रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ पारित निलंबन आदेश को रद्द कर दिया। डॉक्टर को इस आरोप में कोई भी चिकित्सा कार्य करने से रोक दिया गया था कि उसने एक मरीज की बेटी का यौन शोषण किया था।अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता (एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर) के खिलाफ यौन प्रकृति के किसी भी दुराचार के संबंध में कोई आरोप नहीं है ताकि उसे सजा दी जा सके।इसके साथ ही जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के प्रबंधन द्वारा पारित उनके निलंबन...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली-धारवाड़ के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी समारोह पर रोक लगाने से किया इनकार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली-धारवाड़ के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी समारोह पर रोक लगाने से किया इनकार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार रात को हुबली-धारवाड़ के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी अनुष्ठान करने के लिए कुछ हिंदू संगठनों को धारवाड़ नगर आयुक्त द्वारा दी गई अनुमति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस अशोक एस किनागी के चैंबर में रात 10 बजे से हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता अंजुमन-ए-इस्लाम को ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी के त्योहारों को रोकने के लिए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा कि विवादित संपत्ति का मालिकाना हक धारवाड़ नगर पालिका का है और याचिकाकर्ता केवल प्लाट का...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त वाहन की अंतरिम कस्टडी सीआरपीसी 451 और 457 के तहत दी जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट/विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्‍ट के पास सीआरपीसी की धारा 451 और 457 के प्रावधान के तहत वाहन/व्‍ह‌िकल (एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त) की अंतरिम कस्टडी के लिए आवेदन पर विचार करने की शक्ति है।जस्टिस साधना रानी (ठाकुर) ने कहा,"एनडीपीएस एक्ट की धारा 36-सी और 51 को देखन से यह समझ आता है कि सीआरपीसी के प्रावधान, जहां तक ​​विशेष कानून एनडीपीएस एक्ट के विरोध में नहीं हैं, एनडीपीएस एक्ट पर लागू होंगे और जैसा कि एनडीपीएस एक्ट वाहन की अंतरिम कस्टडी के लिए कोई प्रक्रिया...

कलकत्ता हाईकोर्ट
आईपीसी की धारा 375 के तहत दिए सात विवरणों के अनुसार 'सहमति' का अर्थ आक्रामक यौन कृत्य के लिए अधूरी एवं जबरन ली गयी सहमति है : कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 375 के तहत परिभाषित और आईपीसी की धारा 376 के तहत दंडनीय बलात्कार के अपराध का गठन करने के लिए सहमति (या इसकी अनुपस्थिति) की भूमिका पर विचार किया।इस बात पर जोर देते हुए कि "सहमति" (या इसकी अनुपस्थिति) की प्रबलता धारा 375 में बलात्कार के अपराध की परिभाषित विशेषता है, जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी की पीठ ने कहा कि धारा 375 के तहत निर्धारित सात परिस्थितियां स्वतंत्र इच्छा की एक सूचित अभिव्यक्ति के बजाय "मजबूरी में की गई" सहमति के रूप...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
अभियोजन पक्ष को उचित संदेह से परे मामला साबित करना चाहिए, भले ही आरोपी ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान में अपना अपराध स्वीकार कर लिया होः इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भले ही किसी अभियुक्त ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज अपने बयान में आरोप स्वीकार करते हुए खुद को दोषी मान लिया हो, तब भी अभियोजन पक्ष को अपना मामला संदेह से परे स्थापित करना होगा ताकि आरोपी के अपराध के बारे में अदालत का आदेश प्राप्त किया जा सके।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने कहा, ''... केवल सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान में (आरोपी द्वारा) आरोप स्वीकार करते हुए खुद को दोषी मान लेने से ही मामला समाप्त हो जाएगा और अभियोजन पक्ष के माध्यम से ठोस,...

आत्महत्या के लिए उकसाना: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को थप्पड़ मारने और उसे कहीं जाकर मर जाने के लिए कहने की आरोपी महिला को बरी किया
आत्महत्या के लिए उकसाना: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को थप्पड़ मारने और उसे कहीं जाकर मर जाने के लिए कहने की आरोपी महिला को बरी किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में निचली अदालत द्वारा अपने पति को थप्पड़ मारने और उसे कहीं भी मरने के लिए कहने के लिए दोषी ठहराई गई महिला को बरी कर दिया। आरोप था कि महिला ने अपने पति को आत्महत्या के लिए उकसाया था।अदालत ने माना कि कथित अपराध केवल मृतक के माता-पिता द्वारा देखा गया, जो क्रॉस एक्ज़ामिनेशन में वैवाहिक विवाद और आरोपी द्वारा उत्पीड़न के आरोपों की सामग्री की पुष्टि नहीं कर सके।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने आगे कहा कि पीडब्लू-1 और पीडब्लू-2 (मृतक के माता-पिता) दोनों अपीलकर्ता और...

दिल्ली दंगे: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट में कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर दायर जनहित याचिका का विरोध किया
दिल्ली दंगे: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट में कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर दायर जनहित याचिका का विरोध किया

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उस जनहित याचिका का विरोध किया, जिसमें सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित घृणास्पद भाषणों (Hate Speeches) पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। आरोप लगाया गया कि इन हैट स्पीच के कारण 2020 के दिल्ली दंगे हुए थे।कांग्रेस नेताओं ने एनजीओ लॉयर्स वॉयस द्वारा दायर जनहित याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अपना जवाब दाखिल किया, जिसमें मामले की जांच के लिए स्वतंत्र एसआईटी के गठन की भी मांग की गई। अदालत ने पहले संबंधित...

केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने सिविक चंद्रन मामले में 'उत्तेजक पोशाक' आदेश पारित करने वाले जज द्वारा दायर याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रमुख जिला और सत्र न्यायाधीश, कोझीकोड, एस कृष्णकुमार द्वारा दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिन्हें हाल ही में पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय, कोल्लम के पद पर स्थानांतरित किया गया था। उन्हें सिविक चंद्रन मामले में 'उत्तेजक पोशाक' टिप्पणी के लिए स्‍थानांतरित किया गया था। स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।जस्टिस अनु शिवरामन ने कहा कि स्थानांतरण प्रतिनियुक्ति नहीं है क्योंकि यह मुख्य जिला न्यायाधीश के कैडर के भीतर...

केरल हाईकोर्ट
धारा 27A केरल धान भूमि और आद्रभूमि संरक्षण अधिनियम से पहले निर्माण के लिए दिए गए बिल्डिंग परमिट के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट से इनकार नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में दो रिट याचिकाओं का निस्तारण करते हुए कहा कि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट इस आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता है कि जिस भूमि पर बिल्ड‌िंग का निर्माण किया गया है, वह केरल पैडीलैंड एंड वेटलेंट कंजर्वेशन एक्ट (30.12.2017) के संशोधित प्रावधानों के लागू होने से पहले जारी किए गए एक वैध बिल्डिंग परमिट के अनुसार निर्मित इमारत के संबंध में पैडीलैंड या वेटलैंड है।जस्टिस एन नागरेश ने कहा कि जब 30.12.2017 से पहले जारी वैध बिल्डिंग परमिट के अनुसार निर्मित बिल्डिंग के संबंध में एक...

जांच के बाद आवेदन दाखिल करने से आवेदक को एडवांस रूलिंग का आवेदन देने से रोका नहीं जाएगा: तेलंगाना हाईकोर्ट
जांच के बाद आवेदन दाखिल करने से आवेदक को एडवांस रूलिंग का आवेदन देने से रोका नहीं जाएगा: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट (Telangana High Court) ने माना कि जांच के बाद आवेदन दाखिल करने से आवेदक को एडवांस रूलिंग का आवेदन देने से रोका नहीं जाएगा।चीफ जस्टिस उज्ज्वल भुयाना और जस्टिस सी.वी. भास्कर रेड्डी की खंडपीठ ने कहा कि "कार्यवाही" शब्द को न तो अध्याय XVII में परिभाषित किया गया है और न ही परिभाषा खंड यानी सीजीएसटी अधिनियम की धारा 2 में। इसलिए जांच "कार्यवाही" शब्द के दायरे में नहीं आएगी।याचिकाकर्ता कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। यह ज्यादातर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ...

बताएं कि कैसे नवी मुंबई हवाई अड्डे के पास की इमारतों की ऊंचाई सीमा बढ़ाने का एएआई का निर्णय अवैध है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा
बताएं कि कैसे नवी मुंबई हवाई अड्डे के पास की इमारतों की ऊंचाई सीमा बढ़ाने का एएआई का निर्णय अवैध है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने सोमवार को याचिकाकर्ता से यह बताने को कहा कि कैसे एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) का आगामी नवी मुंबई एयरपोर्ट के पास इमारतों की अधिकतम अनुमेय ऊंचाई बढ़ाने का फैसला कानून का उल्लंघन है।अदालत ने कहा,"अगर उल्लंघन होता है तो हम उल्लंघन का समाधान करेंगे।"इसके साथ ही याचिकाकर्ता को वैधानिक उल्लंघनों की ओर इशारा करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया गया।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एम.एस. कार्निक एडवोकेट यशवंत शेनॉय द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई...

गुजरात हाईकोर्ट
कोर्ट जांच अधिकारी के खिलाफ बिना जांच के आईपीसी की धारा 218 के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 218 और 219 के तहत बिना या सबूत के अनुपस्थिति में लोक सेवक के अपराध की जांच शुरू किए बिना उसके खिलाफ एफआईआर नहीं की जा सकती। आईपीसी की धारा 218 और धारा 219 लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को सजा से बचाने और भ्रष्ट तरीके से रिपोर्ट तैयार करके गलत रिकॉर्ड बनाने से संबंधित है और कोर्ट ने कहा कि लोकसेवक के खिलाफ धारा 218 के तहत अपराध दर्ज करने से पहले जांच करना आवश्यक है।इस घटना में इन प्रावधानों को गलत तरीके से लागू किया गया कि वे लोक...

प्रश्नों के निर्धारण में कोई अस्पष्टता की अनुमति नहीं, एक स्पष्ट उत्तर होना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट ने परीक्षार्थियों को अंतरिम राहत दी
प्रश्नों के निर्धारण में कोई अस्पष्टता की अनुमति नहीं, एक स्पष्ट उत्तर होना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट ने परीक्षार्थियों को अंतरिम राहत दी

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि एक समयबद्ध परीक्षा में प्रश्नों/एकाधिक सही उत्तरों में अस्पष्टता की स्थिति में कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है और राहत प्रदान कर सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्वीकार किया कि उत्तर कुंजी की शुद्धता से जुड़े मामलों में न्यायालयों को संयम बरतना चाहिए।जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने कहा,"ये याचिकाकर्ता स्पष्ट रूप से प्रथम दृष्टया प्रश्नों के निर्माण के शिकार प्रतीत होते हैं जो अस्पष्ट या भ्रमित करने वाले प्रतीत होते हैं। कानपुर विश्वविद्यालय के मामले में...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
लुक आउट सर्कुलर जारी करने से पहले सब्जेक्ट को कोई नोटिस जारी नहीं किया जाना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि लुक आउट सर्कुलर जारी करने से पहले उसके सब्जेक्ट में कोई नोटिस जारी नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"एलओसी के सब्जेक्ट के खिलाफ यात्रा के अधिकार में कटौती की जा रही है, इसलिए किसी भी समय उसे विदेश यात्रा से रोकने से पहले नहीं वह कम से कम एलओसी की प्रति के हकदार होगा, बल्कि केवल उस समय जब उसे विदेश में यात्रा करने से रोका गया हो।"कोर्ट ने कहा,"एलओसी को तभी पता चलेगा कि मौलिक अधिकार में शामिल रही यात्रा करने की उसकी...

दिल्ली हाईकोर्ट
केवल इसलिए अग्रिम जमानत देना अनिवार्य नहीं, क्योंकि कार्यवाही के प्रारंभिक चरण में अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा दिए गए अंतरिम लाभ से उन आरोपों को कम नहीं किया जा सकता है, जिन पर योग्यता के आधार पर विचार करने की आवश्यकता है।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने कहा कि अदालत को आरोपों की प्रकृति, सहायक साक्ष्य, गवाहों के साथ छेड़छाड़ की उचित आशंका या शिकायतकर्ताओं को धमकी की आशंका और आरोप के समर्थन में प्रथम दृष्टया संतुष्टि पर विचार करने की आवश्यकता है।कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406, 420 और 120बी के तहत दर्ज मामले में भारती साहनी को अग्रिम जमानत देने से...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"संबंध गवाहों की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला कारक नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1981 के एक मामले में आईपीसी की धारा 304 (II) की सजा को बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने आईपीसी की धारा 304 के तहत एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा, जिसे वर्ष 1981 में गैर इरादतन हत्या के लिए आईपीसी की धारा 304 (II) के तहत तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।इस बात पर जोर देते हुए कि संबंध गवाहों की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है, जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने कहा कि केवल यह बयान कि मृतक के रिश्तेदार होने के कारण वे आरोपी को गलत तरीके से फंसा सकते हैं, सबूतों को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता है।अदालत ने आगे...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के भाई को धोखाधड़ी मामले में दी जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के भाई दीपक दुबे को धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत दे दी। दुबे पर आरोप है कि वह अपराध करने की नीयत से किसी और के नाम से रजिस्टर्ड सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। जस्टिस सिद्धार्थ की पीठ ने अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए पक्षों की ओर से दिए गए तर्क, अभियुक्त की मिलीभगत के बारे में रिकॉर्ड पर साक्ष्य और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के जनादेश को देखते हुए ज़मानत याचिका को मंजूरी दी।न्यायालय के समक्ष दुबे के वकील ने तर्क दिया कि उसे...