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आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को पुलिस में नौकरी नहीं देने के जांच समिति के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को पुलिस में नौकरी नहीं देने के जांच समिति के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पुलिस में नौकरी चाहने वाले लोगों को कोर्ट से बरी किये जाने के बावजूद उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि की वजह से यह नौकरी नहीं देने को सही ठराया।न्यायमूर्ति आर बनुमथी और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने अपने फैसले में कहा, “यह निर्णय करते हुए कि कोई व्यक्ति जो आपराधिक मामलों में संलग्न रहा है भले ही वह कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया है, उसे पुलिस में किसी पद पर नियुक्त किया जा सकता है कि नहीं, उसका बरी होना इस मामले में बाइज्जत बरी होना है या गवाहों के पलट जाने के कारण उसको संदेह का लाभ...

फलों, सब्जियों में कीटनाशकों के प्रयोग पर नीतिगत रोक के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका [याचिका पढ़े]
फलों, सब्जियों में कीटनाशकों के प्रयोग पर नीतिगत रोक के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका [याचिका पढ़े]

मुंबई के एक एनजीओ सिटीजन सर्किल फॉर सोशल वेलफेयर एंड एजुकेशन ने एक जनहित याचिका दायर कर किसानों द्वारा जरूरत से अधिक कीटनाशकों का प्रयोग रोकने, फेरीवालों द्वारा फलों और सब्जियां पर रसायनों का छिड़काव रोकने और पोल्ट्री मालिकों को ग्रोथ हारमोंस और पिग फैट का प्रयोग नहीं करने का निर्देश देने की मांग की है।इस याचिका में बहुराष्ट्रीय फ़ास्ट फ़ूड ब्रांड जैसे मैकडोनाल्ड, सबवे द्वारा जेनेटिक-उपचार और एंटीबायोटिक वाले चिकेन की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।इस याचिकाकर्ता ने ज़ी न्यूज की एक...

देश के राष्ट्रपति जनहित याचिका का मुद्दा नहीं बन सकते : सुप्रीम कोर्ट
देश के राष्ट्रपति जनहित याचिका का मुद्दा नहीं बन सकते : सुप्रीम कोर्ट

देश के राष्ट्रपति एक जनहित याचिका के विषय नहीं हो सकते, ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने एक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के चयन के लिए भर्ती प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील की याचिका को  को वापस लेने के लिए गुहार को भी नामंजूर  कर दिया।बेंच ने कहा, "यह जनहित याचिका का मुद्दा नहीं हो सकता और गणराज्य के राष्ट्रपति जनहित याचिका के अधीन नहीं हो सकते। “दरअसल याचिकाकर्ता डॉ ईश्वर सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के 4...

इलाहाबाद हाई कोर्ट का उत्तर प्रदेश सरकार का निदेश, “जातिहीन” होने के आईपीएस अधिकारी की मांग पर दो माह में निर्णय करें [आर्डर पढ़े]
इलाहाबाद हाई कोर्ट का उत्तर प्रदेश सरकार का निदेश, “जातिहीन” होने के आईपीएस अधिकारी की मांग पर दो माह में निर्णय करें [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की ओर से दायर अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब देने को कहा है। अधिकारी ने मांग की है कि उसको सरकारी रिकॉर्ड में “जातिहीन” बताया जाए।न्यायमूर्ति सत्येन्द्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने कहा कि ठाकुर ने कई बार अधिकारियों के सामने इस बारे में अपनी बात रखी है कि वह जाति व्यवस्था को बांटनेवाला मानते हैं और इसलिए वह जातिहीन समाज के पक्ष में हैं।हालांकि हाई कोर्ट से उनकी अपील में मांग की गई है कि कोर्ट अथॉरिटीज को उनके...

“बैटल ऑफ़ बनारस” फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं देने पर सीबीएफसी को दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार; दुबारा जांच करने को कहा [निर्णय पढ़ें]
“बैटल ऑफ़ बनारस” फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं देने पर सीबीएफसी को दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार; दुबारा जांच करने को कहा [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के “ बैटल ऑफ़ बनारस ” फिल्म को आम दर्शकों को दिखाने के लिए प्रमाणपत्र नहीं देने के फैसले को निरस्त कर दिया। यह एक डाक्यूमेंट्री फिल्म है जिसमें 2014 के बनारस लोकसभा चुनाव के लिए हुए चुनाव प्रचार को दिखाया गया है। इस चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, एएपी के अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के अजय राय मुख्य रूप से चुनाव लड़ रहे थे।न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने फिल्म प्रमाणन अपीली ट्रिब्यूनल (एफसीएटी) को फिल्म “बैटल...

2G मामला खत्म होने के बाद दिल्ली HC ने आउटलुक के खिलाफ वीर सांघवी मानहानि केस को फिर से शुरु किया [निर्णय पढ़ें]
2G मामला खत्म होने के बाद दिल्ली HC ने आउटलुक के खिलाफ वीर सांघवी मानहानि केस को फिर से शुरु किया [निर्णय पढ़ें]

तीन साल के लंबे अर्से तक बंद रहने के बाद अब 2 जी टेप में बातचीत के मामले में पत्रकार वीर सांघवी द्वारा दाखिल द आउटलुक मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मानहानि का मामला फिर से शुरु हो गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अलग करते हुए मामले का निपटारा एक साल में पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं।जस्टिस संजीव सचदेवा ने 30 जून 2014 को दिए ट्रायल कोर्ट के केस की सुनवाई को टालने के आदेश को रद्द कर दिया जिसे आउटलुक के उस आवेदन पर दिया गया जिसमें कहा गया था कि इस मामले की सत्यता जांचने के...

राष्ट्रपति हो या प्रधानमंत्री, रिटायर होने पर सभी को सरकारी बँगला खाली कर देना चाहिए : अमिकस गोपाल सुब्रमण्यम
राष्ट्रपति हो या प्रधानमंत्री, रिटायर होने पर सभी को सरकारी बँगला खाली कर देना चाहिए : अमिकस गोपाल सुब्रमण्यम

किसी उच्च पद पर बैठा व्यक्ति फिर चाहे वह राष्ट्रपति हो या प्रधानमंत्री, रिटायर होने पर वह एक साधारण नागरिक भर रह जाता है और रिटायरमेंट के बाद के न्यूनतम प्रोटोकॉल, पेंशन और लाभ के अलावा और किसी भी तरह की सुविधा उसे नहीं दी जानी चाहिए। ऐसा अमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यहाँ तक कि पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक को सरकारी घर नहीं मिलना चाहिए।न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ को अपने लिखित प्रस्तुति में सुब्रमण्यम ने कहा, “एक बार जब कोई सरकारी सेवक...

उपभोक्ता फोरम ने रोगी की मौत हो जाने पर कोझिकोड के नेचर लाइफ हॉस्पिटल पर लगाया चार लाख का जुर्माना [आर्डर पढ़े]
उपभोक्ता फोरम ने रोगी की मौत हो जाने पर कोझिकोड के नेचर लाइफ हॉस्पिटल पर लगाया चार लाख का जुर्माना [आर्डर पढ़े]

कोझिकोड के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने प्राकृतिक चिकित्सक और वैक्सीन विरोधी कार्यकर्ता जैकब वडक्कनचेरी और जोशी एम वर्घीज पर एक रोगी की मृत्यु के बाद चार लाख का जुर्माना लगाया।रोगी विनयानंदन कोझिकोड का एक वकील था जिसको डायबिटीज, पेप्टिक अल्सर और गुर्दे में पत्थर होने की शिकायत थी। उसको कोच्ची के नेचर लाइफ हॉस्पिटल एंड रेमेडीज में भर्ती कराया गया जिसे वडक्कनचेरी और वर्घीज मिलकर चलाते हैं। इलाज के पांच दिन के अंदर विनयानंदन बेहोश हो गया और इसके बाद एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उसके परिवार के...

वयस्क क्या करना चाहती है यह उसकी मर्जी है, हम उसके सुपर अभिभावक की भूमिका में नहीं आ सकते : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
वयस्क क्या करना चाहती है यह उसकी मर्जी है, हम उसके सुपर अभिभावक की भूमिका में नहीं आ सकते : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक माँ ने अपनी बेटी और बेटे को कोर्ट में पेश करने का अनुरोध किया था। उसने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी और अवयस्क बेटे को उसके पिता ने गैरकानूनी ढंग से कुवैत में नजरबंद कर रखा है। कोर्ट ने कहा कि बेटी 18 साल की हो गई है और उसने इस दलील को मानने से अस्वीकार कर दिया कि बच्चों का बाप इनको गैरकानूनी ढंग से नजरबंद कर रखा है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खान्विलकर की पीठ ने...

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आठ साल की लड़की के साथ रेप और हत्या के मामले में मौत की सजा को सही ठहराया; कहा, सरकार रेप में मौत की सजा के लिए तीन महीने में उपयुक्त क़ानून बनाए [निर्णय पढ़ें]
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आठ साल की लड़की के साथ रेप और हत्या के मामले में मौत की सजा को सही ठहराया; कहा, सरकार रेप में मौत की सजा के लिए तीन महीने में उपयुक्त क़ानून बनाए [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिछले साल आठ साल की एक लड़की के साथ रेप और बाद में उसकी हत्या करने के आरोपी को मौत की सजा को सही बताया साथ ही उसने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर ऐसे क़ानून बनाने को कहा है जिसके तहत ऐसे लोगों को मौत की सजा दी जा सके जो 15 साल तक की लड़कियों का रेप करे हैं।न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और आलोक सिंह की पीठ ने करनदीप शर्मा को एक अवयस्क लड़की से रेप के आरोप में सत्र न्यायालय द्वारा अप्रैल 2017 में मौत की सजा देने के फैसले को सही ठहराया। इस लड़की की बाद में रेप की वजह से मौत हो गई...

बलात्कार और हत्या के मामले में अभियुक्त की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
बलात्कार और हत्या के मामले में अभियुक्त की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने आठ साल की एक लडकी के साथ बलात्कार और बाद में उसकी हत्या के मामले में मौत की सजा पाए अभियुक्त की फांसी की सजा पर रोक लगा दिया है।सुनवाई अदालत ने वीरेन्द्र को बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के आरोप में सजा सुनाई थी। यह लड़की उसकी रिश्तेदार भी थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया था।मौत की सजा को सही ठहराते हुए हाई कोर्ट ने कहा था, “...इस मामले में एक ऐसे सजा की जरूरत है जो दूसरों को इस तरह का अपराध नहीं करने का संदेश दे सके और इसलिए सुनवाई अदालत...

बंगाल के अनाथालय से बच्चों की तस्करी का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक मानवाधिकार अदालतों के गठन पर सभी राज्यों से राय माँगी [आर्डर पढ़े]
बंगाल के अनाथालय से बच्चों की तस्करी का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक मानवाधिकार अदालतों के गठन पर सभी राज्यों से राय माँगी [आर्डर पढ़े]

पश्चिम बंगाल के एक अनाथालय से बच्चों की तस्करी के मामले पर विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खान्विलकर की पीठ ने सभी राज्यों को इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया। पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 30 और 31 के तहत हर जिले में एक मानवाधिकार अदालत के गठन पर राज्यों की राय माँगी है ताकि मानवाधिकार के हनन के मामलों को शीघ्रता से निपटाया जा सके। इन अदालतों के लिए विशेष सरकारी वकीलों की नियुक्ति की बात भी पीठ ने की।यह विशेष...

मेडिकल कॉलेज घोटाले की SIT जांच की खारिज याचिका पर CJAR ने दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े]
मेडिकल कॉलेज घोटाले की SIT जांच की खारिज याचिका पर CJAR ने दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े]

कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबलिटी एंड रिफार्म्स ( CJAR) ने सुप्रीम कोर्ट में उच्च न्यायिक संस्थान में भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र जांच की याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।दरअसल केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले को लेकर FIR दर्ज की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उड़ीसा उच्च न्यायालय के एक पूर्व जज आईएम कूदुसी समेत कुछ लोगों ने एक मेडिकल कॉलेज को राहत पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों को घूस देने की साजिश रची थी। इसके बाद ये याचिका दाखिल की...

SC ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए नियमों को लागू करने के लिए याचिका पर राज्यों को नोटिस भेजा [याचिका पढ़े]
SC ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए नियमों को लागू करने के लिए याचिका पर राज्यों को नोटिस भेजा [याचिका पढ़े]

 सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न  (रोकथाम, निषेध) अधिनियम 2013 के प्रावधानों को बिना देरी किए लागू करने की मांग की गई है।याचिकाकर्ता इनीशिएटिव्स फॉर इनक्लूजन  फाउंडेशन के लिए पेश  वरिष्ठ वकील संजय  पारिख ने कहा कि यहां तक कि स्थानीय जिला अधिकारी और शिकायत समिति भी नियुक्त नहीं की जा रही हैं और पीडि़तों के पास शिकायत दर्ज करने का कोई मंच नहीं है, ऐसे मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को अपनी वास्तविक...

महिला सशक्तिकरण पर स्थाई समिति ने कहा, ज्यादा से ज्यादा महिला वकील महिला कैदियों की मदद के लिए डीएलएएस से जुड़ें
महिला सशक्तिकरण पर स्थाई समिति ने कहा, ज्यादा से ज्यादा महिला वकील महिला कैदियों की मदद के लिए डीएलएएस से जुड़ें

महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले पर बनी स्थाई समिति ने सुझाव दिया है कि अधिक से अधिक महिला वकीलों को महिला कैदियों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और इसके लिए उनको जिला विधिक सहायता सोसायटी (डीएलएएस) से अधिक संख्या में जुड़ना चाहिए।बिजोया चक्रवर्ती की अध्यक्षता में समिति ने “महिला कैदी और न्याय तक पहुँच” नामक रिपोर्ट में मॉडल प्रिजन मैन्युअल 2003 और 2016 के प्रभावों का आकलन किया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है, “मॉडल प्रिजन मैन्युअल 2003 इस उद्देश्य से बनाया गया था कि देश भर में जेलों के प्रशासन में इससे...