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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आठ साल की लड़की के साथ रेप और हत्या के मामले में मौत की सजा को सही ठहराया; कहा, सरकार रेप में मौत की सजा के लिए तीन महीने में उपयुक्त क़ानून बनाए [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
6 Jan 2018 5:12 AM GMT
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आठ साल की लड़की के साथ रेप और हत्या के मामले में मौत की सजा को सही ठहराया; कहा, सरकार रेप में मौत की सजा के लिए तीन महीने में उपयुक्त क़ानून बनाए [निर्णय पढ़ें]
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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिछले साल आठ साल की एक लड़की के साथ रेप और बाद में उसकी हत्या करने के आरोपी को मौत की सजा को सही बताया साथ ही उसने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर ऐसे क़ानून बनाने को कहा है जिसके तहत ऐसे लोगों को मौत की सजा दी जा सके जो 15 साल तक की लड़कियों का रेप करे हैं।

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और आलोक सिंह की पीठ ने करनदीप शर्मा को एक अवयस्क लड़की से रेप के आरोप में सत्र न्यायालय द्वारा अप्रैल 2017 में मौत की सजा देने के फैसले को सही ठहराया। इस लड़की की बाद में रेप की वजह से मौत हो गई थी।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील को रद्द करते हुए उसकी सजा को सही ठहराया और उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जाहिर की।

क्या है यह केस 

आठ साल की जिस लड़की के साथ रेप हुआ वह अपने परिवार के साथ 25-26 जून 2016 को जागरण देखने गई थी। लड़की की माँ ने तो अपने बेटे को घर भेज दिया पर वह लड़की अपने परिवार की कई लड़कियों के साथ समारोह में ही रही। 26 जून की सुबह लड़की के पिता ने पाया कि वह घर नहीं लौटी है और इसके बाद उन्होंने एफआईआर दर्ज कराया।  बाद में इस लड़की की लाश एक खेत में मिली। ऐसा लगा कि रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। कई लोगों ने इस लड़की को एक व्यक्ति (अभियुक्त) के साथ देखने की बात कही। इस व्यक्ति के डीएनए सैंपल की जांच के बाद इसकी शिनाख्त हुई और उस पर आईपीसी और पोक्सो के तहत रेप, अगवा करने और हत्या जैसी धाराओंके तहत मुकदमा चलाया गया।

लड़की की मेडिकल जांच से पता चला कि रेप के कारण दम घुटने से उसकी मौत हुई। रेप के कारण उसके मष्तिष्क, यकृत और उसका गुर्दा क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी मौत हो गई।

अभियुक्त ने लड़की के कम उम्र के होने का फ़ायदा उठाया और उसके साथ बलात्कार किया जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त ने जो किया वह “विरलों में विरल” मामला है। अभियुक्त विवाहित था। पीठ ने नाथू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अपना आधार बनाया जिसमें अभियुक्त को एक 14 साल की लड़की के साथ हुए अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई थी।

पीठ ने लक्ष्मण नाइक बनाम उड़ीसा राज्य मामले का भी उदाहरण दिया जिसमें सात साल की एक लड़की की उसकी अपने चाचा द्वारा रेप करने के बाद हत्या करने को विरलों में विरल मामला माना था और अभियुक्त को मौत की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने फैसला सुनाने के बाद कहा, “हम राज्य सरकार को सुझाव देते हैं कि वह 15 साल की लड़कियों के साथ बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा देने के लिए तीन माह के भीतर उपयुक्त क़ानून बनाए।”


 
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