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बंगाल के अनाथालय से बच्चों की तस्करी का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक मानवाधिकार अदालतों के गठन पर सभी राज्यों से राय माँगी [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
5 Jan 2018 8:18 AM GMT
बंगाल के अनाथालय से बच्चों की तस्करी का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक मानवाधिकार अदालतों के गठन पर सभी राज्यों से राय माँगी [आर्डर पढ़े]
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पश्चिम बंगाल के एक अनाथालय से बच्चों की तस्करी के मामले पर विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खान्विलकर की पीठ ने सभी राज्यों को इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया। पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 30 और 31 के तहत हर जिले में एक मानवाधिकार अदालत के गठन पर राज्यों की राय माँगी है ताकि मानवाधिकार के हनन के मामलों को शीघ्रता से निपटाया जा सके। इन अदालतों के लिए विशेष सरकारी वकीलों की नियुक्ति की बात भी पीठ ने की।

यह विशेष अनुमति याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के 29 अगस्त 2017 के आदेश को लेकर दायर किया गया जो कि एक नवजात की तस्करी के सिलसिले में है। हाई कोर्ट ने इस मामले में 2005 के इस अधिनियम की धारा 13(2) की मदद ली जिसके तहत प्रावधान है कि अगर कोई मामला राज्य आयोग के अधीन लंबित है तो राष्ट्रीय आयोग इस बारे में कोई जाँच नहीं करेगा।

अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की पैरवी करते हुए कहा कि यद्यपि राज्य आयोगों के अधिकार भी काफी व्यापक हैं पर जांच का अधिकार सिर्फ राष्ट्रीय आयोग को ही है।

उन्होंने कहा, “इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि राज्य आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया। फिर, 2-3 साल के बच्चों की तस्करी का वर्तमान मामला काफी संगीन है और इसने अखिल भारतीय विस्तार ले लिया है। यह सीमा पार का मामला बन गया है और राज्य आयोग इस तरह के मामले को नहीं निपटा सकता। इसलिए अधिनियम की धारा 13(2) के एनसीपीसीआर की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। इसलिए एनसीपीसीआर को मामले की जांच करने दी जाए।”

पीठ ने कहा कि गैरकानूनी तस्करी का यह मामला राष्ट्रीय चिंता का विषय है और इसके बाद उसने विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार कर लिया। पीठ ने कहा कि समाज में बच्चों के अधिकार पवित्र हैं और देश का भविष्य इन बच्चों के भाग्य और इनके चरित्र पर निर्भर करता है और इसको संरक्षित करना राज्य का कर्तव्य है।

कोर्ट का कहना था कि इस मामले की व्यापकता को देखते हुए यह जरूरी है कि इसके हर पहलू पर विचार किया जाए जिसमें अनाथालय का प्रबंधन, गोद लेने की प्रक्रिया और तरीके और वहाँ बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं और उनके साथ होने वाले व्यवहार शामिल हैं।

इसके बाद कोर्ट ने सभी राज्यों को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और एएसजी को तीन दिनों के भीतर संशोधित मामला दायर करने का आदेश दिया।

अंत में कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आलोच्य मामले और इससे संबंधित अन्य कार्रवाई को स्थगित कर दिया और इस मामले पर 22 जनवरी को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।


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