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नए सबूतों के आधार पर NGO ने SC  में अस्थाना को CBI का विशेष निदेशक बनाए जाने पर दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े]
नए सबूतों के आधार पर NGO ने SC में अस्थाना को CBI का विशेष निदेशक बनाए जाने पर दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े]

NGO कॉमन कॉज ने गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की सीबीआई के विशेष निदेशक के रूप में नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। इससे पहले  जस्टिस  आरके अग्रवाल और जस्टिस ए एम सपरे की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया था।30 अगस्त को सीबीआई की दिल्ली यूनिट ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत तीन वरिष्ठ आयकर अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी  जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से  5,383 करोड़ रुपये की धोखाधडी के मामले में गुजरात की स्टर्लिंग बायोटेक और...

कॉलेजियम के प्रस्तावों को प्रकाशित करने पर जस्टिस कूरियन और जस्टिस लोकुर ने CJI को पत्र लिखा
कॉलेजियम के प्रस्तावों को प्रकाशित करने पर जस्टिस कूरियन और जस्टिस लोकुर ने CJI को पत्र लिखा

कॉलेजियम के प्रस्तावों को सावर्जनिक करने पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कूरियन जोसफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर चिंता जाहिर की है। ये निर्णय इसी साल अक्टूबर में "पारदर्शिता सुनिश्चित करने" के लिए लिया गया था और सीजीआई मिश्रा, जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस गोगोई, जस्टिस लोकुर और जस्टिस जोसफ  ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जोसफ ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा है  कि ये कदम भरोसे का  उल्लंघन है और यह जनादेश के विपरीत है। पत्र में कहा गया...

भ्रष्ट सरकारी लोगों के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून क्यों नहीं ? : मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडू सरकार से पूछे 15 सवाल [आर्डर पढ़े]
भ्रष्ट सरकारी लोगों के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून क्यों नहीं ? : मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडू सरकार से पूछे 15 सवाल [आर्डर पढ़े]

मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस एन किरुबाकरन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार अब लगता है कि दिनोंदिन चलने वाला और लोगों द्वारा सामान्य रूप में स्वीकार किए जाने के स्तर तक पहुंच चुका है। उन्होंने तमिलनाडू सरकार से 15 सवाल भी पूछे हैं।दरअसल हाईकोर्ट ने ये सवाल एक रिट याचिका पर विचार करते हुए पूछे हैं जिसमें  रजिस्ट्रार को कुछ दस्तावेज को रिलीज करने के निर्देश देने  की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान वकील ने  कोर्ट को बताया कि एक साल से अधिक समय तक दस्तावेजों को रिलीज नहीं किया जाता तो याचिकाकर्ता...

कानूनी पेशे को व्यवसाय नहीं मानें; दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन की अरुण जेटली से अपील - कानूनी पेशे को जीएसटी से अलग रखें
कानूनी पेशे को व्यवसाय नहीं मानें; दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन की अरुण जेटली से अपील - कानूनी पेशे को जीएसटी से अलग रखें

वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे पत्र में आल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ऑफ़ दिल्ली की संयोजन समिति ने कानूनी पेशे को जीएसटी से अलग रखने की मांग की है।जेटली को भेजे पत्र में कहा गया है कि कानूनी पेशे को “व्यवसाय” की श्रेणी में रखे जाने से इस नेक पेशे में लगे लोगों को गहरा धक्का लगा है।पत्र में कहा गया है कि “यह अधिनियम पीछे की ओर चल रहा है और यह कानूनी पेशे के अस्तित्व और चरित्र को नष्ट कर देगा।” इसमें आगे कहा गया है कि चिकित्सा पेशे को एक अलग अधिसूचना द्वारा जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है और कहा है...

SC ने कर्नाटक हाईकोर्ट के तंबाकू उत्पादों पर 85% चेतावनी को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से किया इंकार [आर्डर पढ़े]
SC ने कर्नाटक हाईकोर्ट के तंबाकू उत्पादों पर 85% चेतावनी को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से किया इंकार [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम  कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील  पर अंतरिम आदेश पारित करने से इंकार कर दिया जिसके तहत तंबाकू उत्पादों के दोनों तरफ 85 प्रतिशत सचित्र चेतावनी के अनिवार्य नियमों को रद्द कर दिया गया था।सर्दियों की छुट्टियों के दौरान मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की बेंच ने कहा क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले की प्रति अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है इसलिए बेंच कोई अंतरिम आदेश नहीं दे सकती।उमेश नारायण और अन्य याचिकाकर्ताओं के लिए पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर,...

सांसदों और विधायकों को क़ानून की प्रैक्टिस करने से रोकें : बार काउंसिल के चेयरमैन को पत्र [पत्र पढ़े]
सांसदों और विधायकों को क़ानून की प्रैक्टिस करने से रोकें : बार काउंसिल के चेयरमैन को पत्र [पत्र पढ़े]

बार काउंसिल के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र को पत्र लिखकर भाजपा के नेता और एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय ने मांग की है कि सांसदों और विधायकों को एडवोकेट के रूप में क़ानून की प्रैक्टिस नहीं करने दें।इस पत्र का आधार सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला है जो उसने डॉ. हनिराज एल चुलानी बनाम बार काउंसिल ऑफ़ महाराष्ट्र और गोवा, 1996 एआईआर 1708 मामले में सुनाया था। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक व्यक्ति जो वकील होने की योग्यता रखता है उसे बार में प्रवेश नहीं मिलेगा अगर वह फुलटाइम या पार्ट-टाइम सेवा या रोजगार...

स्वदेशी आस्था के छात्रों के साथ स्कूलों में भेदभाव : मेघालय हाईकोर्ट ने मुख्याध्यापिकाओं को लगाई फटकार [निर्णय पढ़ें]
स्वदेशी आस्था के छात्रों के साथ स्कूलों में भेदभाव : मेघालय हाईकोर्ट ने मुख्याध्यापिकाओं को लगाई फटकार [निर्णय पढ़ें]

मेघालय हाईकोर्ट ने उन दो स्कूलों की मुख्याध्यापिकाओं को जोरदार फटकार लगाई है जिनके छात्रों ने स्वदेशी आस्था के  व्यक्ति के अंतिम संस्कार के खिलाफ नारेबाजी की थी। जस्टिस एस आर  सेन ने पहले के एक फैसले को दोहराया जिसमें मृतकों के अंतिम संस्कार को लेकर स्वदेशी आस्था (सेन खासी) के सदस्यों की समस्याओं को बताया गया था।वर्तमान मामला इसी तरह के  'अंतिम संस्कार' मुद्दे से ही संबंधित है। का बेबीमोला बुफ़ांग नामक महिला ने हाईकोर्ट में उनके पति के अंतिम संस्कार के दौरान विरोध के बारे में शिकायत की थी।...

सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे के स्थगन के लिए मुकदमेबाज पर लगाया 50 हजार रुपए का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे के स्थगन के लिए मुकदमेबाज पर लगाया 50 हजार रुपए का जुर्माना

बेंच ने कहा कि प्रतिवादी नंबर 3 को इस स्थगन का घाटा क्यूं भुगतना पड़े जो कि चेन्नई से अपने वकील के साथ यहाँ आया हैसुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे चेल्मेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की बेंच ने मुकदमे के स्थगन के लिए एक मुकदमेबाज पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है।जब बेंच के समक्ष विशेष अनुमति याचिका सुनवाई के लिए आई तो मीनाक्षी एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड के वकील ने मामले की सुनवाई में बहस करने वाले वकील की अनुपलब्धता के कारण सुनवाई स्थगित करने की मांग की।बेंच ने कहा, “हमारा मानना है...

अगर कार्य पेशेवर व्यवहार से अलग तो वकील के खिलाफ अनुशासानात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर कार्य पेशेवर व्यवहार से अलग तो वकील के खिलाफ अनुशासानात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा एक वकील के खिलाफ शुरू की गई अनुशासानात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिस कार्य का  पेशेवर व्यवहार से कोई लेना देना ना हो, उस मामले में अनुशासानात्मक कार्रवाई करना अनुचित और क्षेत्राधिकार से बाहर है। दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने छत्तीसगढ़ बार काउंसिल के आदेश को बरकरार रखा था जिसने वकील कौशल किशोर अवस्थी को मुव्वकिल द्वारा दायर की गई शिकायत के आधार पर व्यावसायिक कदाचार का दोषी ठहराया था। हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने...

कम उम्र की लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेलने वाली आरोपी महिला की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया [आर्डर पढ़े]
कम उम्र की लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेलने वाली आरोपी महिला की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिक व्यापार की आरोपी एक महिला को मिली जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने ऐसा राज्य के यह कहने के बाद किया कि यह महिला अनैतिक व्यापार में संलग्न है और इस पर कम उम्र की लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेलने के आरोप हैं।काली को अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी अपील पर गौर करते हुए उसे जमानत दे दी थी। सुनवाई अदालत ने उसे 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।गौरिया स्वयं सेवी संस्था नामक एक एनजीओ, जो कि उत्तरी...

झारखंड हाई कोर्ट के वेबसाइट पर जमानत के परस्पर विरोधी आदेश अपलोड : सुप्रीम कोर्ट ने विवाद सुलझाया [आर्डर पढ़े]
झारखंड हाई कोर्ट के वेबसाइट पर जमानत के परस्पर विरोधी आदेश अपलोड : सुप्रीम कोर्ट ने विवाद सुलझाया [आर्डर पढ़े]

एक बहुत ही अजीब सा वाकया तब हुआ जब झारखंड हाई कोर्ट के वेबसाईट पर एक जमानत के बाए में विरोधाभासी आदेश अपलोड कर दी गए। एक रिपोर्ट में झारखंड की कांग्रेस नेता निर्मला देवी के पति की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी जबकि दूसरे में उन्हें जमानत दे दी गई थी।विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील विवेक तंखा जिसने कांग्रेस नेता की पैरवी की, ने कोर्ट का ध्यान इस विरोधाभासी आदेश की और दिलाया जिसे हाई कोर्ट के वेबसाइट पर शुरू में अपलोड किया गया था। पर बाद में इसे हटा दिया गया।आदेश के पहले हिस्से...

क़ानून के प्रतिष्ठित कॉलेजों और इसके सामान्य कॉलेजों के स्नातकों के  बीच भेदभाव दूर होना चाहिए : न्यायमूर्ति चंद्रचूड़
क़ानून के प्रतिष्ठित कॉलेजों और इसके सामान्य कॉलेजों के स्नातकों के बीच भेदभाव दूर होना चाहिए : न्यायमूर्ति चंद्रचूड़

यह दुर्भाग्य है कि कुछ लॉ फर्म्स क़ानून की डिग्री लने वाले प्रतिष्ठित संस्थानों और सामान्य संस्थानों के छात्रों के बीच भेदभाव करते हैं। वे प्रतिष्ठित संस्थानों से निकलने वाले छात्रों को ज्यादा वेतन देंते हैं जबकि कथित रूप से दूसरे और तीसरे दर्जे के संस्थानों से निकलने वाले छात्रों की अगर उसी पद पर नियुक्ति होती है तो उन्हें कम वेतन दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली में हार्वर्ड लॉ स्कूल सेंटर द्वारा कानूनी पेशे पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात...

काम के कारण तनाव की वजह से वकील बुरी आदत और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं : न्यायमूर्ति चंद्रचूड़
काम के कारण तनाव की वजह से वकील बुरी आदत और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं : न्यायमूर्ति चंद्रचूड़

जिस तरह से देश के प्रमुख विधि संस्थानों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं वह व्यवस्थागत गड़बड़ियों की और संकेत है |वकीलों का कार्य कई बार बहुत ही तनाव पैदा करने वाला होता है और इस वजह से वकीलों को बुरी आदत लगने की आशंका ज्यादा होती है। इनमें आम लोगों की तुलना में तनावग्रस्त होने की आशंका ज्यादा होती है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डीवाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली में क़ानून के पेशे पर हार्वर्ड लॉ स्कूल सेंटर की और से आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।सेंटर के इस कार्यक्रम में ‘द इंडियन लीगल प्रोफेशन इन द एज ऑफ़...

ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से उसका वकील बकाया ऋण के लिए डिमांड नोटिस जारी कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट
ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से उसका वकील बकाया ऋण के लिए डिमांड नोटिस जारी कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट

इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के दो महत्त्वपूर्ण मुद्दों के बारे में मैक्वारी बैंक लिमिटेड बनाम शिल्पी केबल टेक्नोलोजी लिमिटेड मामले की  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से उसका वकील बकाये ऋण के लिए डिमांड नोटिस जारी कर सकता है।कोर्ट ने यह भी कहा कि कोड की धारा 9(3)(c) के प्रावधान इंसोल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी है।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को स्थगित कर दिया जिसमें उसने धारा...

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश : सरकार तमाम सार्वजनिक बिल्डिंगों में नेत्रहीनों की पहुंच सुनिश्चित करे [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश : सरकार तमाम सार्वजनिक बिल्डिंगों में नेत्रहीनों की पहुंच सुनिश्चित करे [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने गुड़गांव के रहने वाले एक नेत्रहीन की याचिका को निपटाते हुए दिव्यांगों को सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुँच आसान बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं और इसके लिए एक समय सीमा तय कर दी है।मानवाधिकार संगठन के साथ काम करने वाले राजीव रतूड़ी ने अपनी याचिका में कहा कि भारत में 60-70 लाख दिव्यांग हैं, लगभग 50% लोग दृश्य विकलांगता से पीड़ित हैं और इन लोगों की मौलिक चिंता है कि वह सड़क,परिवहन और अपने गंतव्य तक सुरक्षित कैसे पहुंचें। अपने फैसले में न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण...

अपहरण व हत्या के आरोपी की फांसी के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]
अपहरण व हत्या के आरोपी की फांसी के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण व हत्या मामले में राजेश उर्फ राकेश और राजा यादव को सुनाई गई मौत की सजा पर रोक लगा दिया है।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने 15 वर्षीय लड़के के अपहरण और उसकी हत्या के मामले में निचली अदालत से दोनों को फांसी की सजा को बरक़रार रखा था।बेंच ने फांसी की सजा को बहाल रखते हुए कहा था कि जहां तक ​​अभियुक्त राजेश उर्फ राकेश और राजा यादव की सजा का सवाल है तो इन दोनों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।उच्च न्यायालय ने कहा था कि इन्हें मौत की सजा दिए जाने के अलावा और कोई विकल्प...

उच्चतम न्यायालय अवार्ड के लिए अर्जी पर सुनवाई नहीं कर सकता भले ही उसने मध्यथता प्रक्रिया का सारा अधिकार उसी के पास हो : SC [निर्णय पढ़ें]
उच्चतम न्यायालय अवार्ड के लिए अर्जी पर सुनवाई नहीं कर सकता भले ही उसने मध्यथता प्रक्रिया का सारा अधिकार उसी के पास हो : SC [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा है कि विधान के तहत कोर्ट के क्षेत्राधिकार को ना बदलने की इजाजत दी जा सकती है और ना ही लचीला बनाने की, वो भी इसलिए कि उच्चतम अदालत ने अलग तरीके से मामले में दखल दिया है।चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगवाई वाली पीठ ने मध्य प्रदेश राज्य बनाम साइतहैंड स्कैल्टन ( प्रा.) लिमिटेड औल गुरू नानक फाउंडेशन बनाम रतन सिंह एंड संस मामले के फैसले को पलट दिया जिसमें कहा गया कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी मामले में मध्यथ नियुक्त किया गया और आगे निर्देश जारी किए गए, तो परिभोग का...

राजस्थान हाई कोर्ट ने धर्म परिवर्तन और अंतर-धार्मिक विवाह के बारे में दिशानिर्देश जारी किए [निर्णय पढ़ें]
राजस्थान हाई कोर्ट ने धर्म परिवर्तन और अंतर-धार्मिक विवाह के बारे में दिशानिर्देश जारी किए [निर्णय पढ़ें]

राजस्थान हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कई तरह के दिशानिर्देश जारी किए जो कि धर्म परिवर्तन और अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़े हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर कोई शादी इन निर्देशों के खिलाफ किसी धर्म में परिवर्तित होने के बाद संपन्न हुआ तो इस तरह की शादी को पीड़ित पक्ष की शिकायत पर निष्फल ठहरा दिया जाएगा।न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार माथुर और गोपाल कृष्ण व्यास की खंडपीठ ने चिराग सिंघवी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। इस याचिका द्वारा सिंघवी ने अपनी बहन पायल...

राज्यसभा द्वारा नियुक्त पैनल का निष्कर्ष, न्यायमूर्ति गंगेले ने महिला न्यायाधीश का यौन उत्पीड़न नहीं किया [रिपोर्ट पढ़ें]
राज्यसभा द्वारा नियुक्त पैनल का निष्कर्ष, न्यायमूर्ति गंगेले ने महिला न्यायाधीश का यौन उत्पीड़न नहीं किया [रिपोर्ट पढ़ें]

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एसके गंगेले के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने के लिए राज्यसभा द्वारा गठित तीन सदस्यीय एक जांच समिति ने पाया है कि उनके  खिलाफ लगाए गए आरोप ‘साबित नहीं हुए’। पर समिति ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने शिकायत करने वाली महिला न्यायिक अधिकारी के मामले में अपने मानवीय पक्ष को नहीं दिखाया। इस समिति में न्यायमूर्ति आर बनुमती (सुप्रीम कोर्ट), न्यायमूर्ति मंजुला चेल्लुर (बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश) और वरिष्ठ वकील...