मुख्य सुर्खियां
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी को दी जमानत, फैसले में पीडिता का नाम लिखकर न्यायिक जनादेश का उल्लंघन किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IPC 354 C, 376 और 506 के तहत रेप और धमकी देने के मामले के आरोपी को जमानत दे दी है। उस पर 2000 के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और 67 ए और के तहत भी आरोप हैं। ये आरोप निजता में खलल और निजी तस्वीरों को प्रकाशित करने पर लगाए गए।इसके अलावा, यौन अपराध मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करने के खिलाफ न्यायिक जनादेश का उल्लंघन करते हुए वर्तमान फैसले में पीडिता के नाम का 10 बार उल्लेख किया गया है। दरअसल 2003 में, भूपिंदर शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश [(2003) 8 एससीसी 551) में...
मानसिक विकलांगता से ग्रस्त व्यक्ति को अपने भाई को गुर्दा देने की इजाजत देने से बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंकार किया [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मानसिक रूप से अस्थिर एक व्यक्ति को अपना गुर्दा अपने भाई को देने की इजाजत नहीं दी।इस व्यक्ति के माता-पिता और दो बेटों ने हाई कोर्ट से अपील की थी कि एक बेटा जो कि मानसिक रूप से अस्थिर है, मानव अंग प्रत्यारोपण और ऊतक अधिनियम, 1994 की धारा 2(f) के तहत अपना अंग या ऊतक दान करना चाहता है। उन्होंने तर्क दिया कि अंग दान करने वाले को हल्के या मध्यम मानसिक मंदता से पीड़ित होने की स्थिति में यह फैसला किया जा सकता है कि क्या वह खुद के लिए निर्णय लेने की स्थिति में है या क्या वह यह जानता...
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय आदेश सिर्फ हम पास कर सकते हैं [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल में एक फैसले में कहा कि ओरिजिनल साइड रूल्स के नियम 90 के तहत नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय निर्णय सिर्फ यह कोर्ट ही दे सकता है और सीपीसी के आदेश VIII के तहत यह नहीं दिया जा सकता।न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने अपने 7 मार्च 2014 को दिए आदेश को वापस लेने में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और हाई कोर्ट के दो खंडपीठों के निर्णयों का अनुकरण किया है।मामले की पृष्ठभूमिमुद्दई मधु गुप्ता द्वारा दायर एक मामले में जब 7 मार्च 2014 को न्यायमूर्ति पटेल ने एकपक्षीय फैसला सुनाया तो मुद्दालह ने याचिका...
हमें अपनी धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाने जाने पर गर्व है और हमें इसे अपने देश के विकास और आगे बढ़ने के लिए बनाए रखना होगा: मद्रास हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
“ हमें अपनी धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाने जाने पर गर्व है और हमें इसे अपने देश के विकास और आगे बढ़ने के लिए बनाए रखना होगा, “ हाईकोर्ट ने कहा मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के कन्याकुमारी में एक निजी भूमि में क्रिसमस का जश्न मनाने की इजाजत दे दी है। इस जमीन पर पुलिस अधिकारियों ने कानून और व्यवस्था की समस्याओं का हवाला देते हुए क्रिसमस मनाने की मंजूरी नहीं दी थी।पेश मामले में एस जयप्रकाश ने हाईकोर्ट को बताया कि उनकी मां क्रिसमस मनाने के लिए अपनी निजी जमीन का इस्तेमाल करने के लिए एक ईसाई समाज को...
सोहराबुद्दीन ट्रायल : पत्रकारों ने मीडिया गैग आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी
सोहराबुद्दीन शेख, कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड मामले की सुनवाई की रिपोर्टिंग पर रोक के सीबीआई कोर्ट के जज के आदेश को नौ पत्रकारों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।29 नवंबर को सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड की सुनवाई कर रहे सीबीआई के विशेष जज सुनील कुमार शर्मा ने सख्त कदम उठाते हुए मीडिया को निर्देश दिए थे कि वो कोर्ट की कार्रवाई की रिपोर्टिंग ना करे। हालांकि अदालती कार्रवाई के दौरान मीडियाकर्मी कोर्ट में मौजूद रह सकते हैं लेकिन उसकी रिपोर्टिंग...
प्रयोजनों पर मनोरंजन कर के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया विभाजित फैसला [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को प्रयोजनों पर मनोरंजन कर लगाने के मामले में विभाजित फैसला दिया।कोर्ट इस मामले में 22 याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था जिसमें दिल्ली एंटरटेनमेंट एंड बेटिंग टैक्स एक्ट में संशोधन को चुनौती दी गई है। इस संशोधन के अनुसार धारा 6(1) के तहत किसी मनोरंजन स्थल पर प्रवेश पर कर लगाने का प्रावधान है। धारा 2(m) के तहत “प्रवेश पर भुगतान” की परिभाषा है “ऐसा कोई भी भुगतान जो कि “मनोरंजन से जुड़ा हुआ है और जो कि किसी व्यक्ति को चुकाना पड़ता है...”।यह संशोधन प्रायोजन की राशि को ‘प्रवेश के...
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 60 दिनों से न्यायिक हिरासत में कैद व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने को कहा है जो निर्धारित 60 से ज्यादा दिनों से न्यायिक हिरासत में बंद है।न्यामूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने कहा कि 60 से ज्यादा दिनों तक जेल में रखना आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 167(2) और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।मामले की पृष्ठभूमिजेल में बंद व्यक्ति रोहित के पिता राजकुमार भागचंद जैन ने याचिका दाखिल की है। रोहित को सीबीआई के आर्थिक मामले की शाखा ने एक मामले में 19 सितम्बर 2017 को हिरासत में...
कोई सार्वजनिक कार्य करने वाला आम चैरिटेबल ट्रस्ट सार्वजनिक संस्था की श्रेणी में आएगा या नहीं यह निर्णय दिल्ली हाई कोर्ट की वृहत पीठ करेगी [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाई कोर्ट के एकल पीठ ने शुक्रवार को दिल्ली रेंट कंट्रोल अधिनियम, 1958 की धारा 14(1)(e) और 22 के बीच संबंधों से जुड़े कई तरह के प्रश्नों पर निर्णय के लिए इसे एक वृहत पीठ को सौंप दिया है।अधिनियम की धारा 14(1)(e) के तहत अगर कोई मकान मालिक यह दिखाता है कि उसके पास कोई और उपयुक्त आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं है और जिस भवन को उसने किराए पर लगाया है वह उसे अपने प्रयोग के लिए चाहिए तो उस स्थिति में वह किराएदार को हटाने के लिए उचित अधिकारी को आवेदन कर सकता है। धारा 22 भी यह कहता है कि मकान मालिक अगर...
गुजारे के लिए मामले की कार्यवाही में आवेदन और लिखित बयान के साथ संपत्ति और आय संबंधित शपथ पत्र जरूरी नहीं : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 जनवरी 2015 और 29 मई 2017 को दिए अपने फैसले को सुधारते हुए अब कहा है कि गुजारा के लिए चल रहे मामलों की कार्यवाही में संपत्ति, आय और खर्च के ब्योरे के बारे में हलफनामा देना अब जरूरी नहीं होगा। पहले याचिका और लिखित बयान के साथ कोर्ट के सामने ये दस्तावेज भी जमा करने होते थे।14 जनवरी 2015 को कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए थे जो हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत गुजारे की याचिका को जल्दी निपटाने से संबंधित थे। कोर्ट ने उस समय कहा था कि मुकदमा शुरू होने के समय ही दोनों पक्षों...
कोर्ट में पेश लिखित बयान में संशोधन की अनुमति दी जाए या नहीं यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि प्रस्तावित केस सुनवाई के दौरान टिक पाएगा या नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बहस के संशोधन पर मिले आवेदन पर विचार के दौरान दृढ़ता से कही गई बात को जांचने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संशोधन की अनुमति दी जाए या नहीं यह इस बात निर्भर नहीं करता कि जिस केस को निर्धारित करने की बात की जा रही है वह अंततः सुनवाई के दौरान टिकेगा या नहीं।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मत व्यक्त किया। लिखित बयान के संशोधन की अनुमति देने के सुनवाई अदालत के फैसले...
सांसदों, विधायकों को कानूनी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं देने की मांग पर विचार के लिए बीसीआई ने गठित की तीन-सदस्यीय समिति
बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (बीसीआई) ने एक तीन-सदस्यीय समिति गठित की है जो कि भाजपा नेता और एडवोकेट उपाध्याय की इस मांग पर गौर करेगा कि सांसदों और विधायकों पर एडवोकेट के रूप में कानूनी प्रैक्टिस करने पर प्रतिबन्ध लगाया जाए।बीसीआई के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने लाइव लॉ को बताया कि बीसीआई की बैठक हुई जिसमें एक समिति के गठन का फैसला हुआ जो तीन दिन में इस बारे में अपनी रिपोर्ट देगा। इस समिति में आरजी वाह, बीसी ठाकुर और डीपी ढल शामिल हैं। उपाध्याय ने हाल ही में इस बारे में बीसीआई को एक पत्र लिखा था।शनिवार को...
डूसू चुनावों में दीवालों को गंदा करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की दिल्ली हाई कोर्ट की चेतावनी [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनावों में भाग लेने वाले उन उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जिनके नाम पूरे दिल्ली में विभिन्न सार्वजनिक भवनों और अन्य स्थानों पर लिखे गए हैं पर जो उन दीवालों को साफ़ करने के बारे में होने वाले विचार विमर्श में किसी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने सफाई कार्य की प्रगति पर भी गहरा असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि सिविक...
हिरासत में मौत : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, डीके बसु Vs पश्चिम बंगाल के बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदला [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते 1 99 5 में दलीप चक्रवर्ती की हिरासत में मौत के लिए दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ से जुड़े छह पुलिसकर्मियों की सजा को बरकरार रखा है।पुलिस अधिकारियों द्वारा दायर की गई अपील की सुनवाई में जस्टिस एस मुरलीधर औरजस्टिस आई.एस. मेहता की बेंच ने डी.के बसु बनाम राज्य पश्चिम बंगाल, (1 99 7) 1 एससीसी 416 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया जिसमें हिरासत में हिंसा के मामलों को रोकने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद इस तथ्य पर दुख प्रकट किया गया...
आपस में लड़ रहे एक परिवार को एक जुट करने की कोशिश कर रही है न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ की बेंच
फैमिली कोर्ट के उद्देश्यों में एक मुख्य उद्देश्य है “सुलह कराना और शादी एवं पारिवारिक मामलों से जुड़े विवादों को जल्द सुलझाना।” यद्यपि फैमिली कोर्ट के कई जज यह कार्य खुद ही करते हैं, पर न्यायमूर्ति जोसफ कुरियन जो कर रहे हैं उसका अनुकरण सबको करना चाहिए।न्यायमूर्ति कुरियन की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एक विशेष अनुमति याचिका पर जो फैसला दिया वो इस तरह से था : “सभी पक्ष इस कोर्ट में उपस्थित थे। यह जानकर कि मामले को खुद सुलझाने के लिए वे सब के सब तैयार हैं, हमने उनके साथ एक विशेष बैठक...
कॉर्पोरेट मामले के मंत्रालय ने योग्य ठहराए गए तीन लाख से अधिक निदेशकों को दिया राहत; 31 मार्च तक बकाया वित्तीय स्टेटमेंट फाइल करने की इजाजत मिली [परिपत्र पढ़े]
समय पर वित्तीय स्टेटमेंट नहीं फाइल करने के कारण अयोग्य ठहराए गए तीन लाख से अधिक निदेशकों को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने एक मौक़ा और देने का फैसला किया है। कंपनी अधिनियम की धारा 164 (2) के अधीन कोंडोनेशन ऑफ़ डिले स्कीम, 2018 शुरू की गई है जिसके तहत मंत्रालय ने अपना वित्तीय स्टेटमेंट फाइल नहीं कर पाने वाली कंपनियों को ऐसा करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है।काले धन और गैरकानूनी फंड की आवाजाही से निपटने के लिए वर्ष 2013-2014 से 2015-16 के बीच अपना वार्षिक वित्तीय स्टेटमेंट समय पर नहीं फाइल कर...
नए सबूतों के आधार पर NGO ने SC में अस्थाना को CBI का विशेष निदेशक बनाए जाने पर दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े]
NGO कॉमन कॉज ने गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की सीबीआई के विशेष निदेशक के रूप में नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। इससे पहले जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस ए एम सपरे की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया था।30 अगस्त को सीबीआई की दिल्ली यूनिट ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत तीन वरिष्ठ आयकर अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से 5,383 करोड़ रुपये की धोखाधडी के मामले में गुजरात की स्टर्लिंग बायोटेक और...
कॉलेजियम के प्रस्तावों को प्रकाशित करने पर जस्टिस कूरियन और जस्टिस लोकुर ने CJI को पत्र लिखा
कॉलेजियम के प्रस्तावों को सावर्जनिक करने पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कूरियन जोसफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर चिंता जाहिर की है। ये निर्णय इसी साल अक्टूबर में "पारदर्शिता सुनिश्चित करने" के लिए लिया गया था और सीजीआई मिश्रा, जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस गोगोई, जस्टिस लोकुर और जस्टिस जोसफ ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जोसफ ने इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ये कदम भरोसे का उल्लंघन है और यह जनादेश के विपरीत है। पत्र में कहा गया...
भ्रष्ट सरकारी लोगों के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून क्यों नहीं ? : मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडू सरकार से पूछे 15 सवाल [आर्डर पढ़े]
मद्रास हाईकोर्ट में जस्टिस एन किरुबाकरन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार अब लगता है कि दिनोंदिन चलने वाला और लोगों द्वारा सामान्य रूप में स्वीकार किए जाने के स्तर तक पहुंच चुका है। उन्होंने तमिलनाडू सरकार से 15 सवाल भी पूछे हैं।दरअसल हाईकोर्ट ने ये सवाल एक रिट याचिका पर विचार करते हुए पूछे हैं जिसमें रजिस्ट्रार को कुछ दस्तावेज को रिलीज करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट को बताया कि एक साल से अधिक समय तक दस्तावेजों को रिलीज नहीं किया जाता तो याचिकाकर्ता...
कानूनी पेशे को व्यवसाय नहीं मानें; दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन की अरुण जेटली से अपील - कानूनी पेशे को जीएसटी से अलग रखें
वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे पत्र में आल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ऑफ़ दिल्ली की संयोजन समिति ने कानूनी पेशे को जीएसटी से अलग रखने की मांग की है।जेटली को भेजे पत्र में कहा गया है कि कानूनी पेशे को “व्यवसाय” की श्रेणी में रखे जाने से इस नेक पेशे में लगे लोगों को गहरा धक्का लगा है।पत्र में कहा गया है कि “यह अधिनियम पीछे की ओर चल रहा है और यह कानूनी पेशे के अस्तित्व और चरित्र को नष्ट कर देगा।” इसमें आगे कहा गया है कि चिकित्सा पेशे को एक अलग अधिसूचना द्वारा जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है और कहा है...
पति की इच्छा के खिलाफ नौकरी करना क्रूरता नहीं है : इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि पत्नी का पति या उसके परिवार की इच्छा के खिलाफ नौकरी करना क्रूरता नहीं है और यह तलाक का आधार नहीं हो सकता है।फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी की क्रूरता और साथ छोड़े जाने के कारण तलाक की अनुमति दे दी थी क्योंकि पत्नी ने पति की इच्छा के खिलाफ नौकरी कर रही थी।न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन और न्यायमूर्ती शेओ कुमार सिंह ने लार्ड डेनिंग की “क़ानून की उपयुक्त प्रक्रिया” का हवाला देते हुए कहा, “एक महिला एक पुरुष की तरह बहुत गहनता से महसूस करती है बहुत ही स्पष्ट रूप से सोचती है। वह...


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![बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय आदेश सिर्फ हम पास कर सकते हैं [निर्णय पढ़ें] बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय आदेश सिर्फ हम पास कर सकते हैं [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/09/Bombay-Hc-8.jpg)
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![प्रयोजनों पर मनोरंजन कर के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया विभाजित फैसला [निर्णय पढ़ें] प्रयोजनों पर मनोरंजन कर के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया विभाजित फैसला [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/08/Delhi-HC.jpg)
![बॉम्बे हाई कोर्ट ने 60 दिनों से न्यायिक हिरासत में कैद व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें] बॉम्बे हाई कोर्ट ने 60 दिनों से न्यायिक हिरासत में कैद व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/08/Bombay-Hc-6.jpg)
![कोई सार्वजनिक कार्य करने वाला आम चैरिटेबल ट्रस्ट सार्वजनिक संस्था की श्रेणी में आएगा या नहीं यह निर्णय दिल्ली हाई कोर्ट की वृहत पीठ करेगी [निर्णय पढ़ें] कोई सार्वजनिक कार्य करने वाला आम चैरिटेबल ट्रस्ट सार्वजनिक संस्था की श्रेणी में आएगा या नहीं यह निर्णय दिल्ली हाई कोर्ट की वृहत पीठ करेगी [निर्णय पढ़ें]](/images/placeholder.jpg)


![डूसू चुनावों में दीवालों को गंदा करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की दिल्ली हाई कोर्ट की चेतावनी [आर्डर पढ़े] डूसू चुनावों में दीवालों को गंदा करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की दिल्ली हाई कोर्ट की चेतावनी [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/12/IMG-20170910-WA0043.jpg)
![हिरासत में मौत : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, डीके बसु Vs पश्चिम बंगाल के बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदला [निर्णय पढ़ें] हिरासत में मौत : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, डीके बसु Vs पश्चिम बंगाल के बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदला [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/12/Justice-S-Muralidhar-IS-Mehta.jpg)

![कॉर्पोरेट मामले के मंत्रालय ने योग्य ठहराए गए तीन लाख से अधिक निदेशकों को दिया राहत; 31 मार्च तक बकाया वित्तीय स्टेटमेंट फाइल करने की इजाजत मिली [परिपत्र पढ़े] कॉर्पोरेट मामले के मंत्रालय ने योग्य ठहराए गए तीन लाख से अधिक निदेशकों को दिया राहत; 31 मार्च तक बकाया वित्तीय स्टेटमेंट फाइल करने की इजाजत मिली [परिपत्र पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/12/Finance-Ministry.jpg)
![नए सबूतों के आधार पर NGO ने SC में अस्थाना को CBI का विशेष निदेशक बनाए जाने पर दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े] नए सबूतों के आधार पर NGO ने SC में अस्थाना को CBI का विशेष निदेशक बनाए जाने पर दाखिल की पुनर्विचार याचिका [याचिका पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/12/Rakesh-Asthana-Prasant-Bhushan.jpg)

![भ्रष्ट सरकारी लोगों के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून क्यों नहीं ? : मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडू सरकार से पूछे 15 सवाल [आर्डर पढ़े] भ्रष्ट सरकारी लोगों के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून क्यों नहीं ? : मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडू सरकार से पूछे 15 सवाल [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/09/Jails.jpg)

